राजनीतिक दर्शन क्या है?
राजनीतिक दर्शन ध्यान से सोचता है कि लोगों को साथ कैसे रहना चाहिए। यह सिर्फ़ यह नहीं बताता कि सरकारें क्या करती हैं; पूछता है कि उन्हें क्या करना चाहिए।
मुख्य विचार: राज्य (वह संगठन जो किसी क्षेत्र में क़ानून बनाता और लागू करता है), शक्ति, सत्ता, वैधता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, अधिकार, संपत्ति और समुदाय।
राजनीतिक असहमतियाँ अक्सर तथ्यों की नहीं, मूल्यों की होती हैं। दार्शनिक तर्क और उदाहरणों से बातों को परखते हैं ताकि हम शांति से असहमत हो सकें।
राज्य क्यों? सामाजिक अनुबंध
सोचिए एक प्राकृतिक अवस्था जहाँ सरकार नहीं। चीज़ें कम हैं और लोग शक्ति व सुरक्षा चाहते हैं, इसलिए झगड़े होते हैं।
- थॉमस हॉब्स (1651): सबकी सबसे लड़ाई होगी। शांति के लिए लोग लगभग सारी शक्ति एक शक्तिशाली संप्रभु ("लेवायथन") को दे देते हैं।
- जॉन लॉक (1689): लोगों के प्राकृतिक अधिकार हैं: जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति। इनकी रक्षा के लिए सीमित सरकार बनती है। वह शक्ति का दुरुपयोग करे तो लोग उसे बदल सकते हैं।
- ज्याँ-ज़ाक रूसो (1762): नागरिक मिलकर सामान्य इच्छा बनाते हैं। क़ानून तब वैध है जब स्वतंत्र और बराबर नागरिक उसे ख़ुद को दें।
दूसरे विचार: मार्क्स ने राज्य को शासक वर्ग का औज़ार माना; अराजकतावादी सोचते हैं कि राज्य के बिना रहा जा सकता है; कौटिल्य (अर्थशास्त्र) ने बताया कि राज्य का कर्तव्य है क़ानून और बुद्धिमान शासन से प्रजा की रक्षा और व्यवस्था।
शक्ति, सत्ता और वैधता
शक्ति = दूसरों से कुछ करवाने की क्षमता। सत्ता (प्राधिकार) = वह शक्ति जिसे लोग सही मानें। वैधता = यही सही होना।
मैक्स वेबर ने वैध सत्ता के तीन स्रोत बताए:
- पारंपरिक: "हमेशा से ऐसा है" (राजा या बुज़ुर्ग)।
- करिश्माई: लोग प्रेरक नेता के पीछे चलते हैं।
- क़ानूनी-तार्किक: संविधान के तहत नियम और चुनाव।
वैधानिकता बनाम वैधता: वैधानिक (legal) = लागू क़ानून में अनुमति। वैध (legitimate) = नैतिक रूप से सही। कोई क़ानून वैधानिक होकर भी अन्यायपूर्ण हो सकता है (जैसे पुराने क़ानून जो कुछ समूहों को वोट नहीं देते थे)। गांधीजी के नमक सत्याग्रह जैसी सविनय अवज्ञा ने क़ानून तोड़कर दिखाया कि उस क़ानून में ही वैधता नहीं थी।
आदर्श राज्य: प्लेटो, अरस्तू और सिसरो
प्लेटो (रिपब्लिक)
आदर्श नगर में तीन वर्ग: दार्शनिक-शासक (विवेक), रक्षक (साहस) और उत्पादक (किसान, व्यापारी)। न्याय = सामंजस्य: हर वर्ग अपना काम करे। प्लेटो को अज्ञानी बहुमत के शासन पर भरोसा नहीं था।
अरस्तू (पॉलिटिक्स)
मनुष्य "राजनीतिक प्राणी" है: समुदाय में ही फलता-फूलता है। उन्होंने संविधानों को बाँटा: कौन शासन करे (एक, कुछ, अनेक) और किसके लिए (सबका भला या स्वार्थ): राजतंत्र / निरंकुशता, कुलीनतंत्र / धनिकतंत्र, संयत लोकतंत्र (polity) / भीड़तंत्र। उन्हें बड़े मध्य वर्ग वाला मिश्रित संयत लोकतंत्र पसंद था।
सिसरो
रोमन विचारक ने गणराज्य को res publica, यानी "जनता की चीज़" कहा: क़ानून पर सहमति और साझे हित से जुड़े लोग। उन्होंने मिश्रित संविधान (कौंसल, सीनेट, सभाएँ) और मानवीय क़ानून से ऊपर प्राकृतिक क़ानून की बात की।
आदर्श समाज (यूटोपिया), मोर की यूटोपिया से कन्फ़्यूशियस की "महान सद्भाव" तक, हमें अपने समाज की आलोचना में मदद करते हैं, पर ज़बरदस्ती थोपे जाएँ तो ख़तरनाक हो सकते हैं।
न्याय: किसे क्या मिले?
न्याय यानी हर व्यक्ति को उसका उचित हिस्सा देना। बाँटने के तीन मुख्य सिद्धांत:
- समानता: सबको बराबर।
- योग्यता / पात्रता: मेहनत और योगदान का इनाम।
- ज़रूरत: जिसे ज़्यादा ज़रूरत, उसे ज़्यादा।
जॉन रॉल्स (1971) ने कहा नियम अज्ञान के पर्दे के पीछे से चुनो, बिना जाने कि तुम अमीर होगे या ग़रीब, स्वस्थ या बीमार। उनके अनुसार हम चुनेंगे: (1) सबके लिए बराबर बुनियादी स्वतंत्रताएँ; (2) अवसर की उचित समानता; (3) असमानता तभी जब वह सबसे कमज़ोर का भला करे (भिन्नता सिद्धांत)।
स्वामित्व: लॉक ने कहा जिसमें हम अपना श्रम मिलाते हैं, वह हमारा है; रॉबर्ट नॉज़िक ने कहा हर उचित लेन-देन न्यायपूर्ण है, इसलिए राज्य को पुनर्वितरण नहीं करना चाहिए। दूसरे कहते हैं कुछ चीज़ें (पानी, ज्ञान, ज़मीन) साझी होनी चाहिए।
स्वतंत्रता, समानता, अधिकार और समुदाय
नकारात्मक स्वतंत्रता: दख़ल से मुक्ति। सकारात्मक स्वतंत्रता: अपना जीवन सच में गढ़ने की क्षमता (शिक्षा, स्वास्थ्य चाहिए)। जे.एस. मिल का हानि सिद्धांत: राज्य आपकी स्वतंत्रता तभी सीमित करे जब दूसरों को हानि रोकनी हो।
गणतंत्रवाद: स्वतंत्रता यानी किसी की मनमानी शक्ति के अधीन न होना (अ-प्रभुत्व), और नागरिक सार्वजनिक जीवन में भाग लें।
अधिकार हर व्यक्ति के मज़बूत दावे हैं, जैसे बोलने की आज़ादी या निष्पक्ष सुनवाई।
व्यक्ति और समुदाय: उदारवादी स्वतंत्र व्यक्ति से शुरू करते हैं; समुदायवादी कहते हैं हमें परिवार, संस्कृति और समुदाय गढ़ते हैं। कन्फ़्यूशियस ने रिश्तों के कर्तव्य और सद्गुण से शासन पर ज़ोर दिया; अफ़्रीकी विचार उबुंटू कहता है "मैं हूँ क्योंकि हम हैं"। विविध समाज में साथ रहने के लिए सहिष्णुता और संवाद चाहिए।
करके देखें
दोस्तों या परिवार के साथ एक टीवी या फ़ोन बाँटने के नियम बनाओ। पहले बिना जाने कि पहली बारी किसकी होगी, नियमों पर वोट करो (छोटा अज्ञान का पर्दा)। फिर चर्चा करो: हर व्यक्ति ने कौन-सी आज़ादी छोड़ी? नियम टूटे तो फ़ैसला कौन करेगा? क्या नियम सबसे छोटे के साथ न्यायपूर्ण है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राज्य: वह संगठन जो किसी जनता और क्षेत्र पर क़ानून बनाता और लागू करता है
- शक्ति: दूसरों से करवाने की क्षमता; सत्ता: सही मानी गई शक्ति; वैधता: यही सही होना
- सामाजिक अनुबंध: लोग कुछ स्वतंत्रता राज्य को देते हैं, बदले में सुरक्षा और अधिकार
- अरस्तू: शासक (एक / कुछ / अनेक) × उद्देश्य (सबका भला / स्वार्थ) = 6 रूप
- न्याय के सिद्धांत: समानता, योग्यता, ज़रूरत; रॉल्स: अज्ञान का पर्दा, भिन्नता सिद्धांत
- नकारात्मक स्वतंत्रता (किससे मुक्ति) बनाम सकारात्मक स्वतंत्रता (क्या करने की क्षमता); हानि सिद्धांत
हल किए गए उदाहरण
1. नया नियम कहता है बाइक चालक हेलमेट पहनें। मिल के हानि सिद्धांत से चर्चा करो।
मिल सिर्फ़ दूसरों की हानि रोकने के लिए रोक मानते हैं। हेलमेट मुख्यतः चालक को बचाता है, तो कट्टर मिल-समर्थक इसे पितृसत्तावाद (paternalism) कह सकता है। समर्थक कहते हैं चोटों का बोझ परिवार और सरकारी अस्पतालों पर भी पड़ता है, यानी दूसरों को भी हानि।
2. शासक शक्ति का दुरुपयोग करे तो हॉब्स और लॉक क्या कहते हैं?
हॉब्स: फिर भी मानो, क्योंकि कोई भी सरकार सबकी सबसे लड़ाई से बेहतर है। लॉक: शासक ने अनुबंध तोड़ा, इसलिए लोग विरोध कर सरकार बदल सकते हैं।
3. एक सैन्य गुट सत्ता छीनकर अपनी परिषद से क़ानून बनाता है। क्या ये क़ानून वैधानिक हैं? वैध?
संकरे अर्थ में वैधानिक हो सकते हैं क्योंकि नए शासक उन्हें लागू करते हैं, पर वैध नहीं, क्योंकि जनता की सहमति नहीं और संविधान तोड़ा गया।
4. "कुछ अमीर परिवारों का अपने फ़ायदे के लिए शासन" अरस्तू की योजना में कहाँ आएगा?
कुछ शासक + स्वार्थी उद्देश्य = धनिकतंत्र (कुलीनतंत्र का बिगड़ा रूप)।
5. अज्ञान के पर्दे के पीछे से आप मुफ़्त सरकारी स्कूल क्यों चुन सकते हैं?
हो सकता है आप ग़रीब परिवार में जन्मो। मुफ़्त स्कूल सबको उचित अवसर देते हैं, इसलिए अपनी स्थिति न जानने वाला समझदार व्यक्ति इन्हें चुनेगा (अवसर की उचित समानता)।
आम गलतियाँ
- सामाजिक अनुबंध को सच में हस्ताक्षर किया दस्तावेज़ समझना। यह एक विचार-प्रयोग है जो बताता है कि राज्य सही क्यों हो सकता है।
- 'शक्ति' और 'सत्ता' को एक मानना। सत्ता वह शक्ति है जिसे लोग वैध मानें।
- मानना कि वैधानिक हमेशा न्यायपूर्ण है। इतिहास में कई अन्यायपूर्ण क़ानून वैधानिक थे।
- अरस्तू के 'लोकतंत्र' को आज का लोकतंत्र समझना। उनके लिए इसका अर्थ था ग़रीब बहुमत का अपने हित में शासन।