Romania Clasa a XII-a Philosophy
अध्याय: 6
1. The human being
Human nature and meaning of life
- मानव स्वभाव: हम जन्म से अच्छे हैं, स्वार्थी हैं या कोरे? – मानव स्वभाव यानी वे गुण जो सब इंसानों में जन्म से होते हैं। विचारकों ने तीन मुख्य जवाब दिए। जन्म से अच्छा: मेन्सियस (चीन) ने दया, लज्जा, सम्मान और सही-गलत की समझ के चार जन्मजात 'अंकुर' बताए जो देखभाल से बढ़ते हैं; रूसो (फ़्रांस) ने कहा इंसान स्वभाव से अच्छा है पर असमान समाज उसे बिगाड़ता है। जन्म से स्वार्थी: शुन्ज़ी (चीन) ने कहा स्वभाव स्वार्थी है और भलाई सोच-समझकर की गई मेहनत, नियम और पढ़ाई से आती है; हॉब्स (इंग्लैंड) ने कहा सरकार के बिना सबकी सबसे लड़ाई होगी। जन्म से कोरा: लॉक (इंग्लैंड) ने मन को कोरी पट्टी (टैबुला रासा) कहा जिस पर अनुभव लिखता है; गाओज़ी ने स्वभाव को पानी जैसा बताया जो किसी भी ओर बह सकता है। आज के कई विचार मिले-जुले हैं: हममें दया और स्वार्थ दोनों हैं और माहौल बहुत मायने रखता है। सब मानते हैं कि इंसान अपूर्ण और अधूरा है, इसलिए सीख और बढ़ सकता है। इसी से जीवन के अर्थ का सवाल आता है: सद्गुण और फलना-फूलना (अरस्तू, कन्फ़्यूशियस), प्रेम और सेवा, आस्था, या खुद बनाया अर्थ (फ्रैंकल, सार्त्र, कामू)।
2. Morality
Moral philosophy
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
3. Politics
Political philosophy
- राजनीतिक दर्शन: राज्य, शक्ति और न्याय – राजनीतिक दर्शन साथ रहने के बड़े सवाल पूछता है: राज्य क्यों चाहिए? कौन-सी शक्ति सही (वैध) है? न्याय क्या है? लोगों को कितनी स्वतंत्रता और समानता मिले? सामाजिक अनुबंध के विचारक (हॉब्स, लॉक, रूसो) राज्य को एक समझौता मानते हैं। प्लेटो और अरस्तू ने आदर्श राज्य और सरकार के रूप बताए; सिसरो ने गणराज्य को क़ानून के तहत जनता की साझी संपत्ति कहा। रॉल्स, मिल और कई परंपराओं के विचारक (कन्फ़्यूशियस, कौटिल्य, उबुंटू) स्वतंत्रता, समानता, संपत्ति और समुदाय को तौलने में मदद करते हैं।
4. Knowledge
Theory of knowledge
- ज्ञानमीमांसा: ज्ञान क्या है? – ज्ञानमीमांसा दर्शन की वह शाखा है जो पूछती है कि ज्ञान क्या है, हमें कैसे मिलता है और हम कितने पक्के हो सकते हैं। एक पुराना उत्तर: ज्ञान वह विश्वास है जो सच हो और जिसके अच्छे कारण हों (औचित्यपूर्ण सत्य विश्वास)। पर संयोग वाले उदाहरण (गेटियर) दिखाते हैं कि इतना शायद काफ़ी नहीं। ज्ञान तर्क (बुद्धिवाद) और इंद्रियों के अनुभव (अनुभववाद) से आता है; कांट ने कहा दोनों चाहिए। सत्य के सिद्धांत: संवाद (तथ्यों से मेल), संगति (दूसरे विश्वासों से मेल) और व्यावहारिक (काम करे)। संदेहवाद याद दिलाता है कि इंद्रियाँ और तर्क धोखा दे सकते हैं, इसलिए हम जाँचते हैं।
5. Existence (programme B, social sciences)
Ontology
- तत्वमीमांसा: असल में वास्तविक क्या है? – तत्वमीमांसा (metaphysics) दर्शन का वह हिस्सा है जो पूछता है कि दुनिया सबसे गहरे स्तर पर कैसी है। सत्तामीमांसा (ontology) पूछती है कि क्या-क्या अस्तित्व में है: मूर्त चीज़ें, संख्या जैसी अमूर्त चीज़ें, या दोनों। तत्वमीमांसा द्रव्य और गुण, परिवर्तन और पहचान (थीसियस का जहाज़), मन और शरीर (द्वैतवाद, भौतिकवाद, प्रत्ययवाद), काल और कार्य-कारण, और स्वतंत्र इच्छा बनाम नियतिवाद पर सोचती है। ब्रह्मांड, प्रकृति और जीवन के बड़े सवाल भी इसी में आते हैं। पारमेनाइडीज़, हेराक्लिटस, प्लेटो, अरस्तू, देकार्त, ह्यूम, कांट और भारत के न्याय व अद्वैत वेदांत ने अलग-अलग उत्तर दिए।
6. Philosophy
Philosophy and life
- दर्शनशास्त्र क्या है? सवाल, शाखाएँ और तर्क – दर्शन (फ़िलॉसफ़ी) का अर्थ है "ज्ञान से प्रेम"। यह बड़े सवाल पूछता है (असली क्या है, हम कैसे जानते हैं, सही क्या है, सुंदर क्या है) और उनके जवाब साफ़ कारणों से देता है। इसकी शाखाएँ हैं तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, नीतिशास्त्र, तर्कशास्त्र, सौंदर्यशास्त्र आदि, और यह हमारा विश्व-दृष्टिकोण बनाता है।