मानव स्वभाव क्या है?
मानव स्वभाव यानी वे बुनियादी बातें जो सब इंसानों में इसलिए हैं क्योंकि वे इंसान हैं, इसलिए नहीं कि वे कहाँ या कैसे पले। उदाहरण: हम भाषा में सोचते हैं, भावनाएँ महसूस करते हैं, समूह में रहते हैं, चुनाव कर सकते हैं, और जानते हैं कि एक दिन मरेंगे।
बहस ज़्यादातर हमारे नैतिक स्वभाव पर है: क्या हमारा झुकाव अच्छाई की ओर है, बुराई की ओर, या किसी की ओर नहीं? जवाब मायने रखता है, क्योंकि इसी से स्कूल, कानून, सज़ा और सरकार की बनावट तय होती है। अगर लोग अच्छे हैं, तो उन्हें बुरे असर से बचाना चाहिए। अगर स्वार्थी हैं, तो सख़्त नियम चाहिए। अगर कोरे हैं, तो माहौल ही सब कुछ है।
इससे जुड़ी बहस है प्रकृति बनाम पालन-पोषण: हम कितने अपने जीन से बने हैं और कितने परवरिश और संस्कृति से। आज का विज्ञान कहता है दोनों मायने रखते हैं और एक-दूसरे पर असर डालते हैं।
मानव स्वभाव के विचार: अच्छा, बुरा या तटस्थ
मानव स्वभाव अच्छा है
- मेन्सियस (मेंगज़ी, चीन, लगभग 372–289 ईसा पूर्व): हर किसी में चार 'अंकुर' (शुरुआत) हैं: करुणा, गलत काम पर लज्जा, दूसरों का सम्मान और सही-गलत की समझ। उनका उदाहरण: किसी छोटे बच्चे को अचानक कुएँ में गिरते देखकर हर कोई बिना इनाम सोचे घबराहट और दया महसूस करता है। अंकुरों को पौधों की तरह सींचना पड़ता है; बुरे हालात उन्हें रोक सकते हैं।
- रूसो (फ़्रांस, 1712–1778): प्राकृतिक अवस्था में इंसान शांत और दयालु है। निजी संपत्ति, होड़ और असमान समाज उसे घमंडी और लालची बनाते हैं।
मानव स्वभाव बुरा (स्वार्थी) है
- शुन्ज़ी (चीन, लगभग 310–235 ईसा पूर्व): लोग लाभ के प्रेम और ईर्ष्या के साथ पैदा होते हैं, इसलिए सिर्फ़ स्वभाव पर चलें तो झगड़ा होगा। भलाई सचेत मेहनत का नतीजा है: रीति, गुरु और पढ़ाई हमें सीधा करते हैं, जैसे दाब टेढ़ी लकड़ी को सीधा करता है।
- हॉब्स (इंग्लैंड, 1588–1679): सरकार के बिना हर कोई सुरक्षा और चीज़ों के लिए होड़ करेगा, और जीवन 'घिनौना, पाशविक और छोटा' होगा। इसलिए लोग एक मज़बूत शासक की बात मानने पर सहमत होते हैं (सामाजिक अनुबंध)।
- कुछ धार्मिक परंपराएँ भी पतित या पापी स्वभाव की बात करती हैं, जिसे कृपा या अनुशासन चाहिए।
मानव स्वभाव तटस्थ या मिला-जुला है
- गाओज़ी (चीन): स्वभाव पानी जैसा है, जो पूरब या पश्चिम उधर बहता है जिधर नाली खोलो।
- लॉक (इंग्लैंड, 1632–1704): जन्म के समय मन टैबुला रासा, यानी कोरी पट्टी है। विचार और चरित्र अनुभव से आते हैं।
- मिले-जुले विचार: कई परंपराएँ हममें दोनों झुकाव देखती हैं। भारतीय दर्शन में सांख्य और भगवद्गीता हर व्यक्ति में तीन गुणों का मेल बताते हैं: सत्त्व (स्पष्टता, अच्छाई), रजस् (आवेग, सक्रियता) और तमस् (जड़ता, आलस्य)। कांट ने कहा इंसान में अच्छाई का झुकाव भी है और खुद को पहले रखने का भी। आज का मनोविज्ञान पाता है कि बच्चों में शुरू से सहानुभूति और स्वार्थ दोनों के संकेत होते हैं।
ध्यान दो: मेन्सियस और शुन्ज़ी स्वभाव पर असहमत हैं, पर दोनों का निष्कर्ष है कि शिक्षा और आत्म-विकास ज़रूरी हैं।
मानवीय अपूर्णता
स्वभाव के बारे में हम कुछ भी सोचें, यह तय है कि इंसान अपूर्ण है:
- हम सीमित हैं: शरीर बीमार और बूढ़ा होता है, और हम मरते हैं।
- हमारा ज्ञान सीमित है और फ़ैसले अक्सर पक्षपाती होते हैं।
- हमारी इच्छाशक्ति कभी-कभी कमज़ोर होती है: सही पता होता है फिर भी नहीं करते।
- हम गलतियाँ करते हैं और दूसरों को चोट पहुँचाते हैं, कभी अनजाने में भी।
अपूर्णता सिर्फ़ बुरी ख़बर नहीं है। क्योंकि हम अधूरे हैं, इसलिए हम बदल और बढ़ सकते हैं। कन्फ़्यूशियस ने जीवन भर सीखने का रास्ता बताया; अरस्तू ने कहा सद्गुण अभ्यास से बनते हैं, किसी हुनर की तरह; कई धर्म क्षमा और नई शुरुआत देते हैं। अपूर्णता मानने से विनम्रता और करुणा भी आती है: अगर मैं गलती करता हूँ, तो दूसरों की गलतियों पर भी धैर्य रखूँ।
कुछ दार्शनिकों (जैसे पुनर्जागरण के पिको देला मिरांडोला और बाद के अस्तित्ववादी) ने कहा कि यही खुलापन इंसान को ख़ास बनाता है: जानवर एक तय स्वभाव पर चलते हैं, पर इंसान को खुद को गढ़ना पड़ता है।
मानव स्वभाव और जीवन का अर्थ
अगर हम अपूर्ण हैं और जीवन छोटा है, तो जीवन जीने लायक किस बात से बनता है? कुछ मुख्य जवाब:
- सद्गुण से फलना-फूलना: अरस्तू ने जीवन का लक्ष्य यूडेमोनिया (अच्छा जीना, फलना-फूलना) बताया, जो अच्छे चरित्र और विवेक के विकास से मिलता है। कन्फ़्यूशियस ने परिवार और समाज में मानवता (रेन) वाला व्यक्ति बनने की बात कही।
- प्रेम और रिश्ते: दूसरों की परवाह, दोस्ती और परिवार जीवन को गहराई देते हैं।
- धार्मिक अर्थ: बहुत लोग ईश्वर से रिश्ते में या दुख से मुक्ति में अर्थ पाते हैं (जैसे भारतीय परंपराओं में मोक्ष या निर्वाण)।
- बनाया हुआ अर्थ: सार्त्र जैसे अस्तित्ववादियों ने कहा 'अस्तित्व सार से पहले आता है': हम किसी तय उद्देश्य के साथ पैदा नहीं होते; अपने चुनावों से उसे बनाते हैं और उनकी ज़िम्मेदारी लेते हैं। कामू ने कहा जीवन बेतुका लग सकता है, फिर भी हम उसे पूरा जी सकते हैं। नाज़ी यातना शिविरों से बचे विक्टर फ्रैंकल ने कहा हम काम, प्रेम और न टल सकने वाले दुख के प्रति अपने रवैये से अर्थ पा सकते हैं।
ये जवाब मानव स्वभाव से जुड़ते हैं: अगर हम जन्म से अच्छे हैं, तो अर्थ अपनी अच्छाई बढ़ाने में है; अगर स्वार्थी हैं, तो खुद पर जीत पाने में; अगर कोरे हैं, तो अर्थ वह है जो हम लिखते हैं।
करके देखो: स्वभाव डायरी
तीन दिन तक लिखो: एक पल जब तुमने बिना सोचे दया दिखाई, एक पल जब तुम स्वार्थी रहे, और एक गलती से क्या सीखा। आख़िर में तय करो: तुम्हारी डायरी पर कौन-सा विचार सबसे ज़्यादा फ़िट बैठता है? परिवार के किसी सदस्य से भी यही करवाओ और तुलना करो। 3D के मुक्त खेल में ज़्यादा स्वार्थ और कम देखभाल रखो, फिर देखभाल बढ़ाओ, और देखो हर विचारक क्या सलाह देता।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जन्म से अच्छा: मेन्सियस (चार अंकुर), रूसो (समाज बिगाड़ता है)
- जन्म से स्वार्थी: शुन्ज़ी (भलाई मेहनत और रीति से), हॉब्स (सबकी सबसे लड़ाई → सामाजिक अनुबंध)
- तटस्थ / कोरा: गाओज़ी (पानी), लॉक (टैबुला रासा)
- मिला-जुला: तीन गुण (सत्त्व, रजस्, तमस्); कांट; आधुनिक मनोविज्ञान
- अपूर्णता → विनम्रता, करुणा और बढ़ने का मौका
- जीवन का अर्थ: फलना-फूलना (अरस्तू), मानवता (कन्फ़्यूशियस), आस्था, प्रेम, बनाया हुआ अर्थ (सार्त्र, कामू, फ्रैंकल)
हल किए गए उदाहरण
1. एक नया छात्र खोया बटुआ पाकर बिना कहे लौटा देता है। मेन्सियस और शुन्ज़ी इसे कैसे समझाएँगे?
मेन्सियस: यह सही-गलत के जन्मजात अंकुर को दिखाता है जिसे सींचा गया है। शुन्ज़ी: यह दिखाता है कि शिक्षा, घर के नियम और अभ्यास ने छात्र के स्वाभाविक स्वार्थ को अच्छी आदतों में ढाल दिया है।
2. एक देश तय कर रहा है: भारी सज़ा वाले बहुत सख़्त कानून, या कुछ कानून और साथ में मज़बूत स्कूल व सामुदायिक सहायता। कौन-से विचार किस चुनाव से मेल खाते हैं?
सख़्त कानून हॉब्स (और कुछ हद तक शुन्ज़ी) से मेल खाते हैं: लोग स्वार्थी हैं, कड़ा नियंत्रण चाहिए। स्कूल और सामुदायिक सहायता मेन्सियस और रूसो (स्वाभाविक अच्छाई बचाओ और बढ़ाओ) और लॉक (अच्छे अनुभव अच्छे लोग बनाते हैं) से मेल खाते हैं।
3. समझाओ कि मेन्सियस और शुन्ज़ी स्वभाव पर असहमत होकर भी शिक्षा पर कैसे सहमत हैं।
मेन्सियस के अनुसार अच्छाई जन्मजात है और शिक्षा उसे बढ़ाती है, जैसे अंकुर को पानी। शुन्ज़ी के अनुसार अच्छाई जन्मजात नहीं और शिक्षा उसे बनाती है, जैसे दाब लकड़ी सीधी करता है। दोनों का निष्कर्ष: अच्छा बनने के लिए गुरु, अभ्यास और आत्म-विकास चाहिए।
4. फ्रैंकल ने कहा दुख में भी अर्थ मिल सकता है। यह मानवीय अपूर्णता से कैसे जुड़ता है?
इंसान सीमित और नाज़ुक है, इसलिए दुख हमेशा टल नहीं सकता। फ्रैंकल के अनुसार फिर भी हम उसके प्रति अपना रवैया चुनते हैं। किसी कमी या नुकसान को साहस, दूसरों की परवाह या अपने विकास में बदलना जीवन को अर्थ देता है।
आम गलतियाँ
- कहना कि शुन्ज़ी के अनुसार इंसान कभी अच्छा नहीं बन सकता। उनके अनुसार अच्छाई जन्म से नहीं, मेहनत और सीख से आती है।
- हॉब्स और रूसो को उलझा देना। हॉब्स: प्राकृतिक जीवन सबकी सबसे लड़ाई; रूसो: प्राकृतिक इंसान अच्छा, समाज बिगाड़ता है।
- सोचना कि 'कोरी पट्टी' का मतलब जन्म के समय कोई भावना या सहज प्रवृत्ति नहीं। लॉक की बात विचारों और ज्ञान के बारे में थी, जो अनुभव से आते हैं।
- जीवन के अर्थ को रटने वाला एक सही जवाब मानना। परीक्षा में विचारों की तुलना और कारण देना अपेक्षित है।