South 고등학교 2학년 Ethics and Thought
अध्याय: 4
1. Eastern ethical thought
Confucius, Mencius, Xunzi, Neo-Confucianism · Laozi and Zhuangzi · Buddhist ethics
- कन्फ़्यूशियसवाद – कन्फ़्यूशियसवाद जीने का एक तरीका है, जो चीन के शिक्षक कन्फ़्यूशियस (लगभग 551–479 ई.पू.) ने सिखाया। इसके केंद्र में हैं रेन (दूसरों के प्रति दया) और ली (आदरपूर्ण व्यवहार)। इन्हें पाँच रिश्तों में निभाकर इंसान अच्छा बनता है: शासक-प्रजा, माता-पिता और संतान, पति-पत्नी, बड़े-छोटे और मित्र। मेंशियस ने कहा कि मानव स्वभाव जन्म से अच्छा है, अंकुर की तरह; ज़ुन्ज़ी ने कहा कि उसे शिक्षा और नियमों से ढालना पड़ता है। नव-कन्फ़्यूशियसवाद (लगभग 11वीं-12वीं सदी) ने इन विचारों को ब्रह्मांड की व्याख्या और आत्म-सुधार से जोड़ा।
- ताओवाद (दाओवाद) – ताओवाद प्राचीन चीन की सोच है कि हमें दाओ, यानी प्रकृति की 'राह' के साथ तालमेल में जीना चाहिए। लाओज़ी (ताओ ते चिंग) ने कोमलता, सरलता और वू वेई, यानी बिना ज़ोर लगाए कर्म, सिखाया। ज़ुआंगज़ी ने कहानियों से दिखाया कि बड़ा-छोटा, अच्छा-बुरा जैसे विचार हमारे नज़रिए पर निर्भर हैं, इसलिए हमें स्वतंत्र और लचीला होना चाहिए। यिन और यांग बताते हैं कि विपरीत चीज़ें एक-दूसरे को संतुलित करती हैं। आज वू वेई का अर्थ है प्रकृति और अपनी सीमाओं के साथ काम करना, उनसे लड़ना नहीं।
2. Korean ethical thought
Wonhyo, Uicheon, Jinul · Toegye and Yulgok · Nammyeong, Hagok, Dasan
जल्द आ रहा है
3. Western ethical thought
Socrates, Plato, Aristotle · Epicureans and Stoics · Christian ethics of love · Deontology and consequentialism · Existentialism, pragmatism, moral origins
- सद्गुण नीतिशास्त्र: अच्छा इंसान कैसे बनें – सद्गुण नीतिशास्त्र पूछता है "मुझे कैसा इंसान बनना चाहिए?", सिर्फ़ "कौन-सा नियम मानूँ?" नहीं। हर कर्म में इरादा, साधन, कर्म और परिणाम होते हैं। सुकरात ने सिखाया कि सद्गुण ज्ञान है। प्लेटो ने आत्मा के तीन हिस्सों (बुद्धि, उत्साह, इच्छा) को चार मूल सद्गुणों से जोड़ा: प्रज्ञा, साहस, संयम और न्याय। अरस्तू ने कहा कि हर लक्ष्य अंत में यूडेमोनिया (अच्छा जीवन) की ओर जाता है, और हर नैतिक सद्गुण दो दोषों के बीच का स्वर्णिम मध्य है, जो आदत से बनता है और व्यावहारिक बुद्धि से पहचाना जाता है।
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
4. Social thought
Views of the state · Freedom, rights and republicanism · Alternatives to representative democracy · Capitalism and its critics
- राजनीतिक दर्शन: राज्य, शक्ति और न्याय – राजनीतिक दर्शन साथ रहने के बड़े सवाल पूछता है: राज्य क्यों चाहिए? कौन-सी शक्ति सही (वैध) है? न्याय क्या है? लोगों को कितनी स्वतंत्रता और समानता मिले? सामाजिक अनुबंध के विचारक (हॉब्स, लॉक, रूसो) राज्य को एक समझौता मानते हैं। प्लेटो और अरस्तू ने आदर्श राज्य और सरकार के रूप बताए; सिसरो ने गणराज्य को क़ानून के तहत जनता की साझी संपत्ति कहा। रॉल्स, मिल और कई परंपराओं के विचारक (कन्फ़्यूशियस, कौटिल्य, उबुंटू) स्वतंत्रता, समानता, संपत्ति और समुदाय को तौलने में मदद करते हैं।
- लोकतंत्र: सिद्धांत, चुनाव और सत्ता पर रोक – लोकतंत्र में आख़िरी ताक़त जनता के पास होती है। इसके मुख्य सिद्धांत हैं: राजनीतिक समानता, बहुमत का शासन पर अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित, विधि का शासन, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, और सत्ता पर सीमाएँ। लोग सीधे (जनमत संग्रह) या चुने हुए प्रतिनिधियों के ज़रिए फ़ैसला करते हैं। चुनाव का नियम (FPTP या आनुपातिक प्रणाली) तय करता है कि सीटें किसे मिलेंगी। संविधान सत्ता को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में बाँटता है ताकि हर अंग दूसरे पर नज़र रखे। चुनावों के बीच भी नागरिक मीडिया, दबाव समूह, अदालत, याचिका और शांतिपूर्ण विरोध से नीति पर असर डालते हैं।
- आर्थिक प्रणालियाँ: क्या, कैसे और किसके लिए, कौन तय करता है? – हर समाज के पास साधन सीमित हैं, इसलिए उसे तय करना पड़ता है कि क्या बनाए, कैसे बनाए और किसके लिए। पारंपरिक अर्थव्यवस्था में रीति-रिवाज, बाज़ार अर्थव्यवस्था में कीमतें और निजी फ़ैसले, और आदेश (नियोजित) अर्थव्यवस्था में सरकार की योजना यह तय करती है। पूँजीवाद निजी संपत्ति और बाज़ार पर टिका है; समाजवाद साझा या सरकारी स्वामित्व और योजना पर। असली देश मिश्रित हैं: ज़्यादातर चीज़ें बाज़ार बनाता है, और सरकार जन-सेवाएँ, नियम और सहायता देती है।