समझौते से पहले: मध्यकालीन विचार
मध्यकालीन यूरोप में ज़्यादातर लेखक राजनीतिक ताक़त को ईश्वर और परंपरा से जोड़ते थे। राजा के दैवी अधिकार का मतलब था कि राजा को ईश्वर ने चुना है और वह सिर्फ़ ईश्वर के प्रति जवाबदेह है। ऑगस्टीन और थॉमस एक्विनास जैसे चर्च के विचारकों ने कहा कि शासक ईश्वरीय और प्राकृतिक नियम माने, और समाज एक व्यवस्थित शरीर है जिसमें हर किसी की जगह तय है।
पवित्र राजत्व के ऐसे विचार दुनिया के कई हिस्सों में थे। 1600–1700 के दशकों में बड़ा बदलाव आया: विचारक कहने लगे कि ताक़त लोगों से आती है।
सामाजिक समझौता क्या है?
समझौता (अनुबंध) यानी आपसी सहमति। सामाजिक समझौता एक कल्पित सहमति है, जिसमें लोग साथ सुरक्षित रहने के लिए नियम और सरकार स्वीकार करते हैं।
यह एक विचार-प्रयोग है, असली घटना नहीं। क्रम: (1) प्राकृतिक अवस्था की कल्पना (बिना सरकार का जीवन); (2) वहाँ क्या मुश्किलें होंगी; (3) समझदार लोग क्या समझौता करेंगे; (4) इससे तय करो कि वैध (उचित) सरकार कौन-सी है।
थॉमस हॉब्स (1588–1679): पहले सुरक्षा
हॉब्स ने इंग्लैंड का गृहयुद्ध देखा था, इसलिए उन्हें अराजकता से डर था। अपनी किताब लेवायथन (1651) में उन्होंने कहा कि प्राकृतिक अवस्था में लोग बराबर, स्वार्थी और डरे हुए होते हैं। जीवन "सबका सबसे युद्ध" होगा, छोटा और दुखी।
बचने के लिए लोग अपनी लगभग पूरी आज़ादी एक संप्रभु (शासक या सभा) को दे देते हैं, जिसकी ताक़त लगभग असीमित है। लोग सिर्फ़ अपनी जान बचाने का अधिकार रखते हैं। आज़ादी से ज़्यादा ज़रूरी व्यवस्था है।
जॉन लॉक (1632–1704): अधिकार और सीमित सरकार
लॉक ने टू ट्रीटाइज़ेस ऑफ़ गवर्नमेंट (1689) में प्राकृतिक अवस्था को ज़्यादा शांत माना। लोगों के पास पहले से प्राकृतिक अधिकार हैं: जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति। मुश्किल यह है कि झगड़े सुलझाने वाला कोई निष्पक्ष न्यायाधीश नहीं।
इसलिए लोग सहमति से सरकार बनाते हैं, सिर्फ़ इन अधिकारों की रक्षा के लिए। उसकी ताक़त सीमित है, अक्सर कानून बनाने और लागू करने वालों में बँटी। सरकार ताक़त का दुरुपयोग करे तो लोगों को विरोध करने और उसे बदलने का अधिकार है। इन विचारों ने अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा और आधुनिक अधिकारों की सोच को प्रभावित किया।
ज्याँ-जाक रूसो (1712–1778): सामान्य इच्छा
रूसो की द सोशल कॉन्ट्रैक्ट (1762) इस विचार से शुरू होती है कि मनुष्य आज़ाद पैदा होता है, पर हर जगह ज़ंजीरों में है। उनके अनुसार प्राकृतिक अवस्था में मनुष्य सरल और दयालु था; निजी संपत्ति और असमानता ने उसे बिगाड़ा।
उनका हल: हर व्यक्ति खुद को पूरे समुदाय को सौंप दे। पूरी जनता संप्रभु है (लोकप्रिय संप्रभुता)। कानून सामान्य इच्छा से बने: जो सबके भले में है, न कि निजी इच्छाओं का जोड़। ऐसे कानून मानना असली आज़ादी है, क्योंकि तुम अपने बनाए नियम मानते हो। इन विचारों ने फ़्रांसीसी क्रांति और प्रत्यक्ष लोकतंत्र को प्रेरित किया।
तीनों की तुलना और आलोचना
- मानव स्वभाव: हॉब्स, स्वार्थी और डरा हुआ; लॉक, विवेकशील; रूसो, अच्छा पर समाज से बिगड़ा।
- ताक़त किसके पास: हॉब्स, असीमित संप्रभु; लॉक, सहमति से बनी सीमित सरकार; रूसो, पूरी जनता।
- विद्रोह का अधिकार: हॉब्स, लगभग नहीं; लॉक, हाँ, अगर अधिकार छीने जाएँ; रूसो, जनता हमेशा संप्रभु।
आलोचना: किसी ने सच में ऐसा समझौता नहीं किया; शुरुआती सिद्धांतों में महिलाएँ, ग़ुलाम और बिना संपत्ति वाले लोग शामिल नहीं थे; सामान्य इच्छा के नाम पर अल्पसंख्यकों को दबाया जा सकता है। बाद में कांट और जॉन रॉल्स ने इस विचार को न्याय के सिद्धांतों में बदला।
करके देखो: अपनी कक्षा का समझौता लिखो
दोस्तों के साथ कल्पना करो कि एक हफ़्ते तक कक्षा में न शिक्षक है, न नियम (प्राकृतिक अवस्था)। तीन मुश्किलें लिखो। फिर पाँच नियमों का समझौता लिखो। तय करो: इसे लागू कौन करेगा? क्या कक्षा उसे हटा सकती है? तुम्हारा समझौता किस विचारक के सबसे पास है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दैवी अधिकार: ताक़त ईश्वर से राजा को
- प्राकृतिक अवस्था: बिना सरकार के जीवन की कल्पना
- सामाजिक समझौता: वह सहमति जिससे वैध सरकार बनती है
- हॉब्स: डर → असीमित संप्रभु → सुरक्षा (लेवायथन, 1651)
- लॉक: प्राकृतिक अधिकार (जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति) → सहमति से सीमित सरकार → विरोध का अधिकार (1689)
- रूसो: लोकप्रिय संप्रभुता → सामान्य इच्छा → अपने बनाए कानून से आज़ादी (1762)
- वैधता: ताक़त का उचित आधार
हल किए गए उदाहरण
1. एक शहर में न पुलिस है, न अदालत। चोरियाँ बढ़ती हैं और लोग हथियार रखने लगते हैं। किस विचारक की तस्वीर फ़िट बैठती है, और वह क्या सुझाएगा?
हॉब्स। वह कहेंगे कि शहर 'सबके सबसे युद्ध' की ओर जा रहा है, लोगों को ताक़त एक मज़बूत सत्ता को देनी चाहिए जो व्यवस्था बनाए रखे।
2. सरकार बिना कानून और बिना मुआवज़े के लोगों की ज़मीन छीनने लगती है। लॉक क्या कहेंगे?
सरकार सिर्फ़ जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा के लिए है। बिना सहमति संपत्ति छीनकर उसने समझौता तोड़ा, इसलिए लोगों को विरोध करने और उसे बदलने का अधिकार है।
3. एक गाँव की सभा में सब वयस्क बोलते हैं और सबकी भलाई के लिए हर नियम पर वोट करते हैं। यह किसके विचार के करीब है?
रूसो: जनता संप्रभु है और कानून सामान्य इच्छा को दिखाता है।
4. सामाजिक समझौता दैवी अधिकार से कैसे अलग है?
दैवी अधिकार कहता है ताक़त ऊपर ईश्वर से राजा को आती है, इसलिए आज्ञा मानो। सामाजिक समझौता कहता है ताक़त नीचे लोगों की सहमति से आती है, इसलिए शासक को लोगों का भरोसा कमाना और बनाए रखना पड़ता है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि लोगों ने सच में कोई काग़ज़ साइन किया। यह सरकारों को परखने का विचार-प्रयोग है।
- तीनों को मिला देना: हॉब्स = सुरक्षा के लिए मज़बूत शासक; लॉक = अधिकार और सीमित सरकार; रूसो = सामान्य इच्छा।
- सामान्य इच्छा को बस बहुमत की इच्छा समझना। रूसो का मतलब था जो सच में सबके भले में हो।
- कहना कि हॉब्स तानाशाही पसंद करते थे। वे असीमित ताक़त इसलिए चाहते थे क्योंकि गृहयुद्ध से ज़्यादा डरते थे।