Germany Jahrgangsstufe 11 Ethics
अध्याय: 3
1. Philosophical views of the human being
Philosophical views of human nature
- दार्शनिक मानवशास्त्र: इंसान क्या है? – दार्शनिक मानवशास्त्र पूछता है कि इंसान क्या है। इंसान पूछने वाला भी है और जिसे जाँचा जाता है वह भी (कर्ता और विषय)। विचारक हमारी तुलना पशुओं से करते हैं: कुछ को गहरा फ़र्क दिखता है (विवेक, भाषा, खुली दुनिया), कुछ को सिर्फ़ मात्रा का। मुख्य नज़रिये इंसान को विवेकशील प्राणी, शरीर और मन का मेल (द्वैतवाद) या एक ही जीवित सत्ता (एकत्ववाद), सामाजिक और सांस्कृतिक प्राणी, और अस्तित्ववादियों के अनुसार स्वतंत्र, अधूरा प्राणी मानते हैं जो अपने चुनावों से खुद को बनाता है। विज्ञान और तकनीक (विकासवाद, दिमाग पर शोध, AI) यह सवाल बार-बार खोलते हैं।
2. Political ethics
Political ethics and the state
- सामाजिक समझौता सिद्धांत: लोग सरकार की बात क्यों मानते हैं? – सामाजिक समझौता सिद्धांत कहता है कि सरकार की ताक़त लोगों के आपसी समझौते से आती है, ईश्वर या बल से नहीं। विचारक एक 'प्राकृतिक अवस्था' की कल्पना करते हैं जिसमें कोई सरकार नहीं, फिर पूछते हैं कि लोग किस बात पर सहमत होंगे। हॉब्स: सुरक्षा के लिए लगभग सारी ताक़त एक शक्तिशाली शासक को। लॉक: सीमित सरकार जो जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति की रक्षा करे, वरना लोग उसे बदल सकते हैं। रूसो: पूरी जनता संप्रभु है और 'सामान्य इच्छा' से कानून बने।
3. Medical ethics
Medical ethics
- जैवनैतिकता: जीवविज्ञान और चिकित्सा में सही क्या है – जैवनैतिकता पूछती है कि जीवविज्ञान और चिकित्सा जो करने देते हैं, क्या हमें वह करना चाहिए। इसके चार सिद्धांत हैं: स्वायत्तता (पसंद का सम्मान), हितकारिता (भला करो), अहानिकारिता (नुक़सान न करो) और न्याय (बराबरी)। मानव गरिमा का अर्थ है कि इंसान कभी सिर्फ़ साधन नहीं, इसलिए सूचित सहमति ज़रूरी है। चिकित्सीय क्लोनिंग सख़्त नियमों से कहीं-कहीं मान्य है; इंसान की प्रजनन क्लोनिंग ज़्यादातर देशों में प्रतिबंधित है। जीवन की शुरुआत और अंत के सवाल फ़ायदों बनाम जोखिमों और मूल्यों पर तौले जाते हैं।