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सामाजिक विज्ञान की विधियाँ: हम लोगों और समाज को कैसे पढ़ते हैं

सामाजिक वैज्ञानिक लोगों और समाज को वैसे ही पढ़ते हैं जैसे वैज्ञानिक प्रकृति को: साफ़ सवाल पूछो, सबूत इकट्ठा करो (स्रोत, सर्वे, साक्षात्कार, अवलोकन, आँकड़े, नक्शे), उनका विश्लेषण करो, पक्षपात जाँचो और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान अलग सवाल पूछते हैं, पर औज़ार एक जैसे हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. हर शोध एक साफ़ सवाल से शुरू होता है। अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री और राजनीति विज्ञानी उसे अपने-अपने ढंग से देखते हैं।
  2. सबूत आते हैं प्राथमिक स्रोतों से, जो उसी समय बने, और द्वितीयक स्रोतों से, जो बाद में लिखे गए।
  3. सर्वे में बहुत से लोगों से एक ही सवाल पूछा जाता है। जवाब गिनकर बार ग्राफ़ बनता है।
  4. नक्शे और GIS ऊँचाई, सड़कें और आबादी जैसी परतें एक के ऊपर एक रखकर पैटर्न दिखाते हैं।
  5. हर स्रोत में पक्षपात जाँचो। दो चीज़ें साथ बढ़ें तो ज़रूरी नहीं कि एक दूसरी का कारण हो।
  6. अब तुम: पूछे गए लोगों की संख्या बदलो और देखो नतीजा सच के कितना करीब आता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अलग-अलग सामाजिक वैज्ञानिक एक ही चीज़ क्यों पढ़ते हैं?

हर कोई अलग सवाल पूछता है: पैसा, समूह या सत्ता। मिलकर पूरी तस्वीर बनती है।

क्या फ़ोटो हमेशा सच्चा प्राथमिक स्रोत है?

वह उसी समय बनी, पर फ़ोटोग्राफ़र ने चुना कि क्या दिखाना है। किसने, क्यों और फ़्रेम के बाहर क्या था, पूछो।

बस कुछ लोगों से क्यों न पूछें?

कुछ जवाब संयोग से सच से बहुत दूर हो सकते हैं। फ़्री प्ले में 5 और 100 लोगों से पूछकर देखो।

GIS साधारण नक्शे से ज़्यादा क्या देता है?

परतें जिन्हें चालू, बंद और मिलाया जा सकता है, जिससे छिपे पैटर्न दिखते हैं।

कैसे जानूँ कि A, B का कारण है?

तीसरा कारण खोजो, समय का क्रम देखो (कारण पहले) और निष्पक्ष परीक्षण करो। सिर्फ़ साथ बढ़ना काफ़ी नहीं।

अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री और राजनीति विज्ञानी कैसे काम करते हैं

सामाजिक विज्ञान साथ रहने वाले लोगों का अध्ययन है। हर विषय उसी दुनिया के बारे में अपना सवाल पूछता है:

सबका रास्ता एक: सवाल → परिकल्पना → सबूत → विश्लेषण → निष्कर्ष। आज के ज्ञान समाज में जानकारी हर जगह है, इसलिए उसे जाँचना सबसे ज़रूरी कौशल है।

स्रोत और पाठ का विश्लेषण

स्रोत वह सब कुछ है जो सबूत देता है।

पाठ या चित्र का विश्लेषण: 5 सवाल

  1. किसने बनाया? 2. कब और कहाँ? 3. क्यों (मकसद, किसके लिए)? 4. क्या कहता या दिखाता है? 5. क्या छोड़ दिया?

चित्र में फ़्रेम, रोशनी, बीच में क्या है और कैप्शन भी देखो। हमेशा कम से कम एक और स्रोत से मिलाओ।

आँकड़े इकट्ठा करना: मात्रात्मक और गुणात्मक

नमूना (sample) वह छोटा समूह है जिससे तुम पूछते हो; समष्टि (population) वे सब लोग हैं जिनके बारे में जानना है। बड़ा और यादृच्छिक (random) नमूना सच के ज़्यादा करीब नतीजा देता है। सवाल निष्पक्ष हों ('क्या तुम नहीं मानते कि…?' जैसे नहीं)।

नैतिकता: अनुमति लो (सूचित सहमति), नाम गुप्त रखो, किसी को नुकसान न हो। स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के अध्ययन में यह बहुत ज़रूरी है।

नक्शे, ग्राफ़ और भौगोलिक सूचना तकनीकें

पक्षपात और सहसंबंध

पक्षपात (bias) = एकतरफ़ा नज़रिया। सहसंबंध (correlation) = दो चीज़ें साथ बदलती हैं; कारण (causation) = एक सच में दूसरी को पैदा करती है। आइसक्रीम की बिक्री और धूप से जलना साथ बढ़ते हैं क्योंकि तीसरा कारण है: गर्मी।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक सर्वे में 40 में से 12 छात्र पैदल स्कूल जाते हैं। यह कितना प्रतिशत है?

12 ÷ 40 = 0.3; 0.3 × 100 = 30%।

2. 1950 की बाढ़ पर उसी समय छपी अख़बार की खबर प्राथमिक है या द्वितीयक? और 2020 में उस बाढ़ पर लिखी किताब?

1950 की खबर उसी समय बनी, इसलिए प्राथमिक। 2020 की किताब बाद में दूसरे स्रोतों से लिखी गई, इसलिए द्वितीयक।

3. जिन शहरों में ज़्यादा अस्पताल हैं वहाँ ज़्यादा मौतें दर्ज होती हैं। क्या अस्पताल मौत का कारण हैं?

नहीं। दोनों तीसरे कारण से बढ़ते हैं: बड़ी आबादी और बीमार लोग अस्पताल जाते हैं। यह सहसंबंध है, कारण नहीं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. इनमें प्राथमिक स्रोत कौन-सा है?
2. 'क्यों' वाले सवाल पूछने वाला साक्षात्कार मुख्य रूप से है:
3. समय के साथ बदलाव कौन-सा ग्राफ़ सबसे अच्छा दिखाता है?
4. GIS का पूरा नाम है:
5. गर्मी में आइसक्रीम की बिक्री और डूबने की घटनाएँ दोनों बढ़ती हैं। यह दिखाता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामाजिक विज्ञान शोध की मुख्य विधियाँ कौन-सी हैं?

सर्वे और प्रश्नावली, साक्षात्कार, अवलोकन, केस स्टडी, स्रोतों और आँकड़ों का विश्लेषण, और नक्शे या GIS।

प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत में क्या अंतर है?

प्राथमिक स्रोत उसी समय के होते हैं; द्वितीयक स्रोत बाद में उनके आधार पर लिखे जाते हैं।

गुणात्मक और मात्रात्मक आँकड़ों में क्या अंतर है?

मात्रात्मक आँकड़े संख्याएँ हैं जो 'कितने' बताती हैं; गुणात्मक आँकड़े शब्द या चित्र हैं जो 'क्यों' और 'कैसे' बताते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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स्पेन3º ESOChallenges of today's world
स्पेन4º ESOThe human being and self-knowledge
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