अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री और राजनीति विज्ञानी कैसे काम करते हैं
सामाजिक विज्ञान साथ रहने वाले लोगों का अध्ययन है। हर विषय उसी दुनिया के बारे में अपना सवाल पूछता है:
- अर्थशास्त्र: लोग सीमित संसाधन (पैसा, समय, श्रम) कैसे इस्तेमाल करते हैं। औज़ार: क़ीमतें, आँकड़े, मॉडल।
- समाजशास्त्र: परिवार, समूह, वर्ग और रीति-रिवाज हमें कैसे बनाते हैं। औज़ार: सर्वे, साक्षात्कार, अवलोकन।
- राजनीति विज्ञान: सत्ता किसके पास है और फ़ैसले कैसे होते हैं। औज़ार: चुनाव के आँकड़े, क़ानून, भाषण, जनमत सर्वे।
- इतिहास, भूगोल, मानवशास्त्र और मनोविज्ञान समय, जगह, संस्कृति और मन जोड़ते हैं।
सबका रास्ता एक: सवाल → परिकल्पना → सबूत → विश्लेषण → निष्कर्ष। आज के ज्ञान समाज में जानकारी हर जगह है, इसलिए उसे जाँचना सबसे ज़रूरी कौशल है।
स्रोत और पाठ का विश्लेषण
स्रोत वह सब कुछ है जो सबूत देता है।
- प्राथमिक: उसी समय, उसमें शामिल लोगों द्वारा बना – चिट्ठी, डायरी, फ़ोटो, क़ानून, जनगणना की तालिकाएँ, साक्षात्कार।
- द्वितीयक: बाद में, प्राथमिक स्रोत पढ़कर बना – पाठ्यपुस्तक, लेख, डॉक्यूमेंट्री।
पाठ या चित्र का विश्लेषण: 5 सवाल
- किसने बनाया? 2. कब और कहाँ? 3. क्यों (मकसद, किसके लिए)? 4. क्या कहता या दिखाता है? 5. क्या छोड़ दिया?
चित्र में फ़्रेम, रोशनी, बीच में क्या है और कैप्शन भी देखो। हमेशा कम से कम एक और स्रोत से मिलाओ।
आँकड़े इकट्ठा करना: मात्रात्मक और गुणात्मक
- मात्रात्मक (quantitative) विधियाँ संख्याएँ देती हैं: प्रश्नावली, जनमत सर्वे, आँकड़े। 'कितने' और 'कितनी बार' के लिए अच्छी।
- गुणात्मक (qualitative) विधियाँ शब्द और अर्थ देती हैं: साक्षात्कार, समूह चर्चा, अवलोकन, केस स्टडी। 'क्यों' और 'कैसे' के लिए अच्छी।
नमूना (sample) वह छोटा समूह है जिससे तुम पूछते हो; समष्टि (population) वे सब लोग हैं जिनके बारे में जानना है। बड़ा और यादृच्छिक (random) नमूना सच के ज़्यादा करीब नतीजा देता है। सवाल निष्पक्ष हों ('क्या तुम नहीं मानते कि…?' जैसे नहीं)।
नैतिकता: अनुमति लो (सूचित सहमति), नाम गुप्त रखो, किसी को नुकसान न हो। स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के अध्ययन में यह बहुत ज़रूरी है।
नक्शे, ग्राफ़ और भौगोलिक सूचना तकनीकें
- बार ग्राफ़: श्रेणियों की तुलना। रेखा ग्राफ़: समय के साथ बदलाव। पाई चार्ट: पूरे के हिस्से। जनसंख्या पिरामिड: उम्र और लिंग।
- विषयगत नक्शे एक विषय (वर्षा, जनसंख्या घनत्व) रंगों या चिह्नों से दिखाते हैं; शीर्षक, संकेत-सूची (legend) और पैमाना हमेशा पढ़ो।
- GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) नक्शे पर डिजिटल परतें रखता है; GPS सटीक जगह बताता है; सुदूर संवेदन उपग्रह चित्रों का इस्तेमाल करता है।
पक्षपात और सहसंबंध
पक्षपात (bias) = एकतरफ़ा नज़रिया। सहसंबंध (correlation) = दो चीज़ें साथ बदलती हैं; कारण (causation) = एक सच में दूसरी को पैदा करती है। आइसक्रीम की बिक्री और धूप से जलना साथ बढ़ते हैं क्योंकि तीसरा कारण है: गर्मी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शोध का रास्ता: सवाल → परिकल्पना → सबूत → विश्लेषण → निष्कर्ष
- प्राथमिक स्रोत = उसी समय बना; द्वितीयक स्रोत = बाद में बना
- मात्रात्मक = संख्याएँ (कितने); गुणात्मक = शब्द (क्यों, कैसे)
- प्रतिशत = (गिनती ÷ कुल) × 100
- स्रोत जाँच: किसने? कब? कहाँ? क्यों? क्या छूटा?
- सहसंबंध ≠ कारण; तीसरा कारण खोजो
हल किए गए उदाहरण
1. एक सर्वे में 40 में से 12 छात्र पैदल स्कूल जाते हैं। यह कितना प्रतिशत है?
12 ÷ 40 = 0.3; 0.3 × 100 = 30%।
2. 1950 की बाढ़ पर उसी समय छपी अख़बार की खबर प्राथमिक है या द्वितीयक? और 2020 में उस बाढ़ पर लिखी किताब?
1950 की खबर उसी समय बनी, इसलिए प्राथमिक। 2020 की किताब बाद में दूसरे स्रोतों से लिखी गई, इसलिए द्वितीयक।
3. जिन शहरों में ज़्यादा अस्पताल हैं वहाँ ज़्यादा मौतें दर्ज होती हैं। क्या अस्पताल मौत का कारण हैं?
नहीं। दोनों तीसरे कारण से बढ़ते हैं: बड़ी आबादी और बीमार लोग अस्पताल जाते हैं। यह सहसंबंध है, कारण नहीं।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि प्राथमिक स्रोत हमेशा सच होते हैं। उनमें भी पक्षपात हो सकता है; किसने और क्यों बनाया, देखो।
- सिर्फ़ दोस्तों से पूछकर उसे सर्वे कहना। छोटा, गैर-यादृच्छिक नमूना गलत तस्वीर देता है।
- बिना संकेत-सूची और पैमाने के नक्शा पढ़ना।
- सिर्फ़ साथ बढ़ने से कहना 'A, B का कारण है'।