France Première ST2S (health and social sciences) — 1re specialties
अध्याय: 4
1. Physics-chemistry for health
Chemical and electrical safety at home · Road safety · Sound waves and hearing · Light and vision · Fluids and blood pressure · Chemistry of biological molecules · Energy needs and diet · Role of biomolecules · Responsible use of natural resources
- घरेलू विद्युत परिपथ – घर में 220 V, 50 Hz की प्रत्यावर्ती धारा (AC) विद्युन्मय और उदासीन तार से आती है; सभी साधित्र पार्श्व (समांतर) क्रम में 5 A और 15 A के अलग परिपथों पर जुड़े होते हैं, और विद्युन्मय तार में लगा फ्यूज या MCB तथा भूसंपर्क तार घर को सुरक्षित रखते हैं।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
- मानव नेत्र: संरचना, समंजन क्षमता और दृष्टि दोष – हमारी आँख एक जीवित कैमरा है। कॉर्निया और नेत्र लेंस प्रकाश को मोड़कर दृष्टिपटल (रेटिना) पर वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब बनाते हैं। पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की मोटाई बदलती हैं ताकि दूर और पास दोनों चीज़ें साफ़ दिखें – यही समंजन है। नेत्र गोलक बहुत लंबा या छोटा हो, या लेंस सख़्त हो जाए, तो प्रतिबिंब रेटिना से चूक जाता है; सही चश्मा उसे वापस रेटिना पर ले आता है।
- दाब: हर वर्ग मीटर पर बल – दाब प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है: P = F ÷ A। इसका SI मात्रक पास्कल है (1 Pa = 1 N/m²)। वही बल छोटे क्षेत्रफल पर ज़्यादा दाब देता है, इसीलिए पिन, चाकू और कील नुकीले होते हैं, और ट्रैक्टर व ऊँट के पैर या टायर चौड़े होते हैं। द्रव हर दिशा में दाब डालते हैं और गहराई के साथ उनका दाब बढ़ता है (P = ρgh)। गैस के कण दीवारों से टकराते रहते हैं, इसलिए गैस दाब डालती है; गैस को दबाने या गर्म करने पर दाब बढ़ता है। हवा हम पर लगभग 101 kPa का दाब डालती है। रक्तचाप धमनियों की दीवारों पर रक्त का दाब है।
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- जल की गुणवत्ता: सुरक्षित पेयजल, प्रदूषण और मिट्टी – सुरक्षित पेयजल में हानिकारक कीटाणु नहीं होते, वह साफ़ होता है, उसमें बुरा स्वाद या गंध नहीं होती, pH लगभग 6.5 से 8.5 होता है और घुले रसायन (नाइट्रेट, आर्सेनिक, सीसा, लवण) तय सीमा से नीचे रहते हैं। पानी को खेत (उर्वरक, कीटनाशक), कारख़ाने (धातुएँ, रसायन) और शहर (मल-जल) प्रदूषित करते हैं। मिट्टी मदद करती है: उसकी मृत्तिका और ह्यूमस धनायन पकड़ते हैं और कण व कीटाणु छानते हैं, पर नाइट्रेट निकल जाता है और मिट्टी भर भी जाती है।
2. Human biology and pathophysiology
Organisation of the human body · Locomotor system and movement · Digestive system and nutrition · Cardiovascular system · Respiratory system
- मानव शरीर के अंग तंत्र – हमारा शरीर स्तरों में बना है: कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग, अंग मिलकर अंग तंत्र और सारे तंत्र मिलकर पूरा जीव यानी हम। हर तंत्र का एक मुख्य काम है: कंकाल (ढाँचा), पेशी (गति), परिसंचरण (ढुलाई), श्वसन (गैसों का लेन-देन), पाचन (भोजन), उत्सर्जन (कचरा), तंत्रिका और अंतःस्रावी (नियंत्रण), प्रतिरक्षा (बचाव), त्वचा तंत्र और जनन तंत्र। कोई तंत्र अकेले काम नहीं करता: व्यायाम में पेशियाँ, दिल, फेफड़े और नसें साथ बदलकर शरीर के अंदर का हाल स्थिर रखते हैं (समस्थिति)।
- कंकाल तंत्र – कंकाल शरीर का ढाँचा है; बड़े व्यक्ति में 206 हड्डियाँ होती हैं। इसके पाँच मुख्य कार्य हैं: सहारा और आकार, सुरक्षा, गति (मांसपेशियों के साथ), लाल अस्थि-मज्जा में रक्त कोशिकाएँ बनाना और कैल्शियम जैसे खनिज जमा करना। हड्डियाँ जोड़ों (संधि) पर मिलती हैं: कब्ज़ा जोड़ (कोहनी, घुटना) एक दिशा में मुड़ता है, कंदुक-खल्लिका जोड़ (कंधा, कूल्हा) हर दिशा में घूमता है। स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से, कंडरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, उपास्थि सिरों पर गद्दी है। मांसपेशियाँ सिर्फ़ खींचती हैं, इसलिए जोड़ी में काम करती हैं, जैसे बाइसेप्स और ट्राइसेप्स।
- मानव पाचन तंत्र और विषमपोषी पोषण – विषमपोषी जीव दूसरे जीवों से बना-बनाया भोजन लेते हैं। मनुष्य प्राणिसम (holozoic) पोषण करता है: पूरा भोजन खाकर एक लंबी नली, आहार नाल, में उसे तोड़ता है। दाँत, लार, आमाशय का अम्ल, एंज़ाइम, पित्त और अग्न्याशयी रस बड़े अणुओं को छोटा करते हैं, जिन्हें क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम रक्त में सोख लेते हैं।
- शरीर द्रव तथा परिसंचरण – रक्त और लसीका शरीर के परिवहन द्रव हैं। रक्त = प्लाज़्मा (लगभग 55%) + संगठित पदार्थ: RBC, WBC और प्लेटलेट्स। रक्त समूह (ABO, Rh) RBC पर लगे प्रतिजनों से तय होते हैं। फाइब्रिनोजन से फाइब्रिन धागे बनकर थक्का बनाते हैं। मानव हृदय में चार कक्ष हैं और रक्त दो परिपथों में जाता है: फेफड़ों तक और शरीर तक (दोहरा परिसंचरण)। SA पर्व हर धड़कन शुरू करता है; एक धड़कन लगभग 0.8 s का हृद चक्र है, जिसे ECG में P, QRS, T तरंगों में देखा जाता है। हृद निकास = प्रवाह आयतन × हृदय दर ≈ 5 L/मिनट।
- श्वसन और गैसों का विनिमय – साँस लेने से हवा फेफड़ों में आती-जाती है। हवा का रास्ता: नाक → श्वासनली → श्वसनी → श्वसनिकाएँ → कूपिकाएँ। जब डायाफ्राम और बाहरी पसली-पेशियाँ सिकुड़ती हैं तो छाती बड़ी होती है, अंदर का दाब घटता है और हवा अंदर आती है। कूपिकाओं में O2 रक्त में जाती है और CO2 बाहर आती है, हमेशा ज़्यादा आंशिक दाब से कम की ओर। रक्त O2 ज़्यादातर हीमोग्लोबिन पर और CO2 ज़्यादातर बाइकार्बोनेट बनाकर ले जाता है। मस्तिष्क का एक केंद्र साँस की लय तय करता है। ज्वारीय आयतन, जैव क्षमता जैसे आयतन जोड़कर निकाले जाते हैं।
3. Health and social sciences: thematic strand
Health, well-being and social cohesion · Social protection · Social and health interventions
- जन स्वास्थ्य – जन स्वास्थ्य पूरे समुदाय को स्वस्थ रखने का काम है: रोग रोकना, स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देना और सबको इलाज पहुँचाना। संक्रामक रोग हवा, पानी, भोजन, स्पर्श और कीड़ों से फैलते हैं; स्वच्छता, साफ़ पानी, शौचालय और टीकाकरण यह कड़ी तोड़ते हैं। जब काफ़ी लोग प्रतिरक्षित हों, सामूहिक प्रतिरक्षा बाकी लोगों को बचाती है। स्वास्थ्य तंत्र स्तरों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) में काम करता है और निगरानी के आँकड़ों से महामारी को जल्दी पहचानता है।
- कल्याणकारी राज्य और सामाजिक सुरक्षा – कल्याणकारी राज्य वह राज्य है जो लोगों को जीवन के बड़े जोखिमों से बचाता है: बीमारी, नौकरी छूटना, बुढ़ापा, विकलांगता और ग़रीबी। इसके लिए एक सुरक्षा-जाल होता है जिसके तीन हिस्से हैं। सामाजिक बीमा वेतन से लिए गए अंशदान से चलता है। सामाजिक सहायता करों से ज़रूरतमंदों को मिलती है। स्कूल और अस्पताल जैसी सार्वजनिक सेवाएँ सबके लिए खुली हैं। देश इन्हें अलग-अलग ढंग से मिलाते हैं: उदार (कम कर, थोड़ी मदद), रूढ़िवादी (मदद नौकरी से जुड़ी) और सामाजिक-लोकतांत्रिक (ऊँचा कर, सबके लिए मदद)। आज बढ़ती उम्र, बढ़ता ख़र्च, वैश्वीकरण और अनौपचारिक काम इसकी चुनौतियाँ हैं।
4. Health and social sciences: methods strand
Methods for the health and social sector
- सामाजिक विज्ञान की विधियाँ: हम लोगों और समाज को कैसे पढ़ते हैं – सामाजिक वैज्ञानिक लोगों और समाज को वैसे ही पढ़ते हैं जैसे वैज्ञानिक प्रकृति को: साफ़ सवाल पूछो, सबूत इकट्ठा करो (स्रोत, सर्वे, साक्षात्कार, अवलोकन, आँकड़े, नक्शे), उनका विश्लेषण करो, पक्षपात जाँचो और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान अलग सवाल पूछते हैं, पर औज़ार एक जैसे हैं।