Spain 4º ESO Personal and Career Guidance
अध्याय: 3
1. The human being and self-knowledge
Perspectives on the human being · Psychology, brain and adolescence · Anthropology and culture · Sociology and adolescence
- सामाजिक विज्ञान की विधियाँ: हम लोगों और समाज को कैसे पढ़ते हैं – सामाजिक वैज्ञानिक लोगों और समाज को वैसे ही पढ़ते हैं जैसे वैज्ञानिक प्रकृति को: साफ़ सवाल पूछो, सबूत इकट्ठा करो (स्रोत, सर्वे, साक्षात्कार, अवलोकन, आँकड़े, नक्शे), उनका विश्लेषण करो, पक्षपात जाँचो और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान अलग सवाल पूछते हैं, पर औज़ार एक जैसे हैं।
- मनोविज्ञान की प्रकृति: मन और व्यवहार का विज्ञान – मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो मानसिक प्रक्रियाओं (सोचना, याद करना), अनुभवों (अंदर की भावनाएँ) और व्यवहार (हम क्या करते हैं) का अध्ययन करता है। मानसिक प्रक्रियाएँ दिखती नहीं, इसलिए उन्हें व्यवहार से समझा जाता है। व्यवहार प्रकट (बाहर से दिखे) या अप्रकट (अंदर छिपा, जैसे तेज़ धड़कन) हो सकता है। मनोविज्ञान अपनी विधियों और सिद्धांतों वाला एक विषय है। प्रयोग करने और मस्तिष्क-शरीर पढ़ने के कारण यह प्राकृतिक विज्ञान है, और परिवार, समूह व संस्कृति में लोगों को पढ़ने के कारण सामाजिक विज्ञान भी। मन और मस्तिष्क जुड़े हैं, पर एक नहीं। "मनोवैज्ञानिक मन पढ़ लेते हैं" जैसी कई लोकप्रिय धारणाएँ सही नहीं हैं।
- मानवशास्त्र और संस्कृति – मानवशास्त्र (anthropology) इंसान का पूरा अध्ययन है: हमारा शरीर, हमारा अतीत, हमारी भाषाएँ और जीने का ढंग। संस्कृति किसी समूह का सीखा हुआ और साझा जीवन-ढंग है: लोग क्या बनाते, करते, बोलते और मानते हैं। संस्कृति सीखी जाती है, साझा होती है, प्रतीकों से भरी होती है, आपस में जुड़ी होती है और बदलती रहती है। मानवशास्त्री लोगों के साथ रहकर (सहभागी अवलोकन) इसे समझते हैं, और हर संस्कृति को उसकी अपनी नज़र से देखने की कोशिश करते हैं (सांस्कृतिक सापेक्षवाद), अपनी संस्कृति के पैमाने से नहीं (नृजातीय-केंद्रवाद)।
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
2. Personal and career guidance for adult life
Learning and the human being · Building competence and achievement · Relationships with others · Academic and career guidance
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
3. Personal and career project and job search
Personal and career plan · Active job search
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।