संकट-काल के बाद रूस की स्थिति
संकट-काल (1613 में समाप्त) के बाद रूस कमज़ोर था और ज़मीन खो चुका था। नए रोमानोव शासकों के लक्ष्य थे: पश्चिम में खोई ज़मीन वापस पाना, बाल्टिक और काला सागर तक पहुँचना, और दक्षिण को क्रीमिया के हमलों से बचाना। तीन पड़ोसी सबसे अहम थे: उत्तर-पश्चिम में स्वीडन, पश्चिम में पोलैंड–लिथुआनिया और दक्षिण में ऑटोमन साम्राज्य और उसका अधीन क्रीमियाई ख़ानत।
उत्तर-पश्चिम: स्वीडन और बाल्टिक
- स्टोलबोवो की संधि (1617): रूस को नोवगोरोद लौटा, पर स्वीडन ने फ़िनलैंड की खाड़ी का तट रखा। रूस ने बाल्टिक तट खो दिया।
- 1656–58 का युद्ध: पोलैंड से लड़ते हुए रूस ने स्वीडन पर हमला किया और कुछ क़िले लिए। 1658 में युद्धविराम हुआ और कार्दिस की शांति (1661) में रूस ने जीत लौटा दी। बाल्टिक तट नहीं मिला; वह अगली सदी में मिला।
पश्चिम: पोलैंड–लिथुआनिया और यूक्रेन
- देउलिनो का युद्धविराम (1618): स्मोलेंस्क और कुछ और नगर पोलैंड–लिथुआनिया के पास रहे।
- स्मोलेंस्क युद्ध (1632–34): रूस ने स्मोलेंस्क वापस लेना चाहा और विफल रहा। पोल्यानोव्का की शांति (1634) में पोलिश राजा ने रूसी गद्दी का दावा छोड़ा, पर स्मोलेंस्क रखा।
- 1654, पेरेयास्लाव: कज़ाक नेता बोहदान ख़मेलनित्स्की ने, पोलैंड से लड़ते हुए, ज़ार से संरक्षण माँगा। 1653 के ज़ेम्स्की सोबोर ने वाम-तट यूक्रेन को ज़ार के अधीन लेना माना। इससे तेरह वर्षीय युद्ध (1654–67) शुरू हुआ।
- अंद्रुसोवो का युद्धविराम (1667): स्मोलेंस्क और वाम-तट यूक्रेन रूस को मिले। दाएँ तट का कीव दो साल के लिए दिया गया, पर रूस में ही रहा।
- चिरस्थायी शांति (1686): पोलैंड ने ये लाभ हमेशा के लिए माने, कीव समेत। रूस पोलैंड और अन्य राज्यों के साथ ऑटोमन के विरुद्ध पवित्र लीग में जुड़ा।
दक्षिण: अज़ोव, ऑटोमन और क्रीमिया
- अज़ोव (1637–42): डोन कज़ाकों ने ऑटोमन क़िला अज़ोव जीता और कई साल रखा। मॉस्को बड़े युद्ध के लिए तैयार नहीं था और 1642 में उसे लौटा दिया।
- 1676–81 का युद्ध: ऑटोमन ने यूक्रेन में (चिगिरिन) हमला किया। बख़चिसराय का युद्धविराम (1681) ने वाम-तट और कीव पर रूस का शासन बनाए रखा।
- क्रीमिया अभियान (1687 और 1689): राजकुमार वासिली गोलित्सिन के नेतृत्व में ये सूखे, गर्म मैदान में विफल हुए। रूस ने पीटर प्रथम के समय फिर कोशिश की, ज़्यादा सफलता के साथ।
परीक्षा के लिए क्या याद रखें
साल, दोनों पक्ष और नतीजा याद करो: स्टोलबोवो 1617 (हानि, बाल्टिक तट नहीं), देउलिनो 1618 और पोल्यानोव्का 1634 (हानि), पेरेयास्लाव 1654 और अंद्रुसोवो 1667 (लाभ), चिरस्थायी शांति 1686 (लाभ), अज़ोव 1637–42 (लौटाया), बख़चिसराय 1681 (युद्धविराम)। कुल नतीजा: रूस पश्चिम में लौटा और वाम-तट यूक्रेन रखा, पर बाल्टिक या काला सागर तक अब भी पहुँच नहीं थी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्टोलबोवो 1617: रूस ने बाल्टिक तट स्वीडन को खोया
- देउलिनो 1618, पोल्यानोव्का 1634: स्मोलेंस्क पोलैंड–लिथुआनिया के पास
- 1654 पेरेयास्लाव → तेरह वर्षीय युद्ध → अंद्रुसोवो 1667 (स्मोलेंस्क, वाम-तट यूक्रेन)
- चिरस्थायी शांति 1686: कीव रूस के पास; ऑटोमन के विरुद्ध पवित्र लीग
- अज़ोव 1637–42 (कज़ाक, लौटाया); बख़चिसराय 1681; क्रीमिया अभियान 1687 और 1689 (विफल)
हल किए गए उदाहरण
1. रूस और पोलैंड का तेरह वर्षीय युद्ध कितने साल चला, और यह नाम क्यों है?
1654 से 1667 तक: 1667 − 1654 = 13 साल। इसीलिए इसे तेरह वर्षीय युद्ध कहते हैं।
2. 1632–34 का स्मोलेंस्क युद्ध क्यों विफल हुआ?
रूस की सेना घिर गई और मज़बूत स्मोलेंस्क क़िले को नहीं ले सकी। रूस को पोल्यानोव्का (1634) में शांति करनी पड़ी और स्मोलेंस्क पोलैंड के पास रहा।
3. क्या स्वीडन से 1656–58 का युद्ध सफल था? समझाओ।
नहीं। रूस ने कुछ क़िले लिए, पर कार्दिस की शांति (1661) में लौटा दिए। रूस को बाल्टिक तट नहीं मिला।
4. घटनाओं को लाभ, हानि या कोई बदलाव में बाँटो: स्टोलबोवो 1617, अंद्रुसोवो 1667, अज़ोव 1637–42।
स्टोलबोवो = हानि; अंद्रुसोवो = लाभ; अज़ोव = कोई बदलाव नहीं (क़िला 1642 में लौटा दिया)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि रूस 1600 के दशक में बाल्टिक पहुँचा। वह पीटर प्रथम के समय अगली सदी में हुआ।
- स्टोलबोवो (स्वीडन, 1617) और देउलिनो (पोलैंड, 1618) को मिलाना।
- कहना कि रूस ने 1632–34 का स्मोलेंस्क युद्ध जीता। वह विफल रहा; स्मोलेंस्क 1667 में ही लौटा।
- भूलना कि अज़ोव कज़ाकों ने जीता था, ज़ार की सेना ने नहीं, और वह लौटा दिया गया।