वास्तुकला: तंबूनुमा छतें, सेंट बेसिल और क़िले
1500 के दशक के रूसी निर्माताओं ने अपनी शैली बनाई। 1532 में मॉस्को के पास कोलोमेन्स्कोये में आरोहण गिरजा पत्थर से ऊँची तंबूनुमा छत (ऊँचे ब्लॉक पर ऊँचा शंकु) के साथ बना। यह पत्थर के पहले तंबूनुमा गिरजों में था। यह आकार लकड़ी और पत्थर दोनों में पूरे रूस में फैला।
1552 में इवान चतुर्थ के कज़ान लेने के बाद रेड स्क्वायर पर मध्यस्थता का गिरजा बना (1555 से 1561)। परंपरा से वास्तुकारों के नाम बार्मा और पोस्तनिक बताए जाते हैं। इसमें एक बीच की मीनार और उसके चारों ओर आठ चैपल हैं, हर एक का अपना रंगीन गुंबद। आज लोग इसे सेंट बेसिल का गिरजा कहते हैं। यह रूस की सबसे जानी-मानी इमारतों में है।
रक्षा ने भी बड़ी इमारतें बनवाईं। मॉस्को के किताय-गोरोद और श्वेत नगर के चारों ओर पत्थर की दीवारें बनीं (श्वेत नगर की 1580 और 1590 के दशक में कारीगर फ़्योदोर कोन के नेतृत्व में) और 1595 से स्मोलेंस्क में बड़ा क़िला। कारीगर आंद्रेई चोखोव ने 1586 में ज़ार-तोप ढाली।
पुस्तक-मुद्रण
1550 के दशक से पहले रूस में हर किताब हाथ से नक़ल की जाती थी, अक्सर भिक्षुओं द्वारा, और एक किताब में महीने लग सकते थे। 1550 के दशक में मॉस्को में कुछ बिना नाम की किताबें छपीं। 1564 में डीकन इवान फ़्योदोरोव और प्योत्र मस्तिस्लावेत्स ने राज्य के मुद्रण-भवन में अपोस्तोल (गिरजे के पाठों की किताब) छापी। यह छपी तिथि और छापने वालों के नामों वाली पहली रूसी किताब है। बाद में फ़्योदोरोव ने पश्चिमी इलाक़ों में काम किया और और किताबें छापीं, जिनमें 1574 में ल्वीव में अपोस्तोल भी है।
छपाई ने किताबों को सस्ता और एक जैसा बनाया, इसलिए गिरजे और विद्यालय एक-सा पाठ पा सकते थे। इससे वर्तनी स्थिर करने और धीरे-धीरे शिक्षा फैलाने में भी मदद मिली।
लेखन, विचार और रोज़मर्रा का जीवन
इतिवृत्त राज्य की कहानी साल-दर-साल दर्ज करते थे और स्तेपेन्नाया क्निगा जैसी बड़ी रचनाओं ने शासकों का इतिहास बताया। मेट्रोपॉलिटन मकारी ने महान मेनायोन-वाचन जमा किया, जो साल के हर दिन के लिए गिरजे के पाठों का विशाल संग्रह है। 1551 की गिरजा-परिषद, स्तोग्लाव, ने आइकन-चित्रकारों समेत गिरजे के जीवन के नियम तय किए। डोमोस्त्रोई घर चलाने की लोकप्रिय मार्गदर्शिका थी, हिसाब रखने से लेकर मेहमान-नवाज़ी तक, परिवार के जीवन के सख़्त नियमों के साथ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1532: कोलोमेन्स्कोये का आरोहण गिरजा (तंबूनुमा छत)
- 1555 से 1561: मध्यस्थता का गिरजा (सेंट बेसिल): 1 + 8 = 9 चैपल
- 1564: पहली तिथि वाली छपी किताब, अपोस्तोल (फ़्योदोरोव और मस्तिस्लावेत्स)
- 1586: ज़ार-तोप, आंद्रेई चोखोव द्वारा ढाली
हल किए गए उदाहरण
1. सेंट बेसिल गिरजे में कितने चैपल हैं?
एक बीच की मीनार और आठ चारों ओर: 1 + 8 = 9 चैपल।
2. ज़ार ने 1555 में रेड स्क्वायर पर गिरजा क्यों बनवाया?
1552 में कज़ान पर विजय का स्मरण करने के लिए, जो राज्य की बड़ी जीत थी।
3. हाथ से नक़ल की तुलना में छपाई ने किताबों को कैसे बदला?
छापाख़ाना जल्दी कई एक-सी प्रतियाँ बनाता है, इसलिए किताबें सस्ती हुईं और अधिक लोगों को वही पाठ मिल सका। हाथ की नक़ल एक बार में एक धीमी प्रति देती थी।
आम गलतियाँ
- अपोस्तोल को दुनिया की पहली छपी किताब कहना। यह रूस की पहली तिथि वाली छपी किताब थी।
- यह सोचना कि सेंट बेसिल में केवल एक गुंबद है। इसमें नौ मीनारें हैं: एक बीच की और आठ चारों ओर।
- तारीख़ें मिलाना। कोलोमेन्स्कोये गिरजा: 1532। सेंट बेसिल: 1555 से 1561। अपोस्तोल: 1564।
- तंबूनुमा छत को गुंबद कहना। तंबूनुमा छत ब्लॉक के ऊपर का ऊँचा शंकु या पिरामिड है।