परंपरा और बदलाव के बीच की संस्कृति
1600 के दशक की रूसी संस्कृति अब भी रूढ़िवादी (ऑर्थोडॉक्स) चर्च पर टिकी थी। पर व्यापार बढ़ा, नगर बढ़े और यूक्रेन, पोलैंड और पश्चिमी यूरोप से संपर्क बढ़ा। इसलिए कला और लेखन रोज़मर्रा के जीवन, मनुष्य और सुंदरता की बात करने लगे। इतिहासकार इसे पुराने मॉस्को-जगत और पीटर प्रथम के नए युग के बीच बदलाव का समय कहते हैं।
चर्च में एक तीखा विवाद भी हुआ: 1653 से पैट्रिआर्क निकॉन के सुधारों ने चर्च की पुस्तकें और रीतियाँ बदलीं। जिन्होंने नहीं माना, वे पुराने आस्थावान (ओल्ड बिलीवर्स) अलग हो गए। आर्कप्रीस्ट अवाकुम, जिसे 1682 में जला दिया गया, उनका प्रसिद्ध नेता और लेखक बना।
वास्तुकला
कारीगरों ने तंबू-छत (शातयोर) वाले गिरजे बनाए: ऊँची नुकीली छतें जो तंबू की तरह उठती हैं। बाद में गिरजों पर कई चटक प्याज़-गुंबद, रंगीन टाइलों की पंक्तियाँ और सफ़ेद पत्थर की नक़्क़ाशी आई। इसे अक्सर सजावटी शैली कहते हैं।
- मॉस्को का पुतिंकी गिरजा (1649–52), सजावट वाला तंबू-छत गिरजा।
- यारोस्लावल के गिरजे, गहरे रंग और चित्रित दीवारों के साथ।
- मॉस्को के क्रेमलिन में तेरेम महल (1635–36) बना। कोलोमेन्स्कोये में ज़ार का लकड़ी का महल नक़्क़ाशी की उत्कृष्ट कृति था।
अमीर व्यापारियों और कुलीनों के लिए पत्थर के घर ज़्यादा बने, और साइबेरिया के नए नगरों में लकड़ी के क़िले और गिरजे बने।
चित्रकला
चित्रकला मुख्यतः इकन यानी पवित्र चित्र थी। ज़्यादातर चित्रकार कार्यशालाओं में काम करते, और सर्वश्रेष्ठ क्रेमलिन में ज़ार के शस्त्रागार-भवन में। साइमन उशाकोव (1626–86) सबसे प्रसिद्ध है। उसने चेहरे असली जैसी छाया और रोशनी के साथ बनाए और गहराई दिखाई, जो नया था। उसका प्रसिद्ध इकन हाथों से न बना उद्धारक (1658) है।
इसी समय असली व्यक्तियों के पहले चित्र (पोर्ट्रेट), जिन्हें पार्सुना कहते हैं, आए। वे शैली में अब भी सपाट थे, पर वे असली लोगों को दिखाते हैं, सिर्फ़ संतों को नहीं।
छपाई और साहित्य
मॉस्को प्रिंट यार्ड चर्च की पुस्तकें छापता था। 1634 में वासिली बुर्त्सेव ने पहली रूसी वर्णमाला-पुस्तक, अज़्बुकोव्निक (प्राइमर), छापी। व्याकरण और क़ानून की पुस्तकें, 1649 के क़ानून-संग्रह समेत, भी छपीं। ज़्यादा किताबों से बच्चों को पढ़ना सीखना आसान हुआ।
- आर्कप्रीस्ट अवाकुम की जीवनी: रूसी भाषा की पहली जीवनियों में से एक, जीवंत बोलचाल की भाषा में।
- हास्य-व्यंग्य कथाएँ, जैसे अन्यायी न्यायाधीश शेम्याका की, बुरे न्यायाधीशों, लालची पादरियों और अमीरों का मज़ाक़ उड़ाती हैं।
- शिमोन पोलोत्स्की (बेलारूस के विद्वान) ने दरबार के लिए कविता लिखी और ज़ार के बच्चों को पढ़ाया।
- दरबारी रंगमंच 1672 में खुला, ज़ार अलेक्सेई के लिए नाटकों के साथ।
शिक्षा
ज़्यादातर बच्चे पादरियों या निजी शिक्षकों से पढ़ना, लिखना और गिनना सीखते, वर्णमाला-पुस्तक, घंटों की पुस्तक और भजन-संग्रह से। 1640–50 के दशकों में कुलीन फ़्योदोर रतिशचेव ने कीव के विद्वानों को मॉस्को में पढ़ाने बुलाया। 1687 में स्लाविक-यूनानी-लैटिन अकादमी ज़ाइकोनोस्पास्की मठ में खुली, रूस का पहला उच्च विद्यालय, जिसमें व्याकरण, यूनानी, लैटिन, भाषण-कला और दर्शन पढ़ाए जाते थे। उसके शिक्षक यूनानी लिखुद भाई थे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वास्तुकला: तंबू-छत और सजावटी शैली (पुतिंकी गिरजा 1649–52)
- चित्रकला: साइमन उशाकोव, शस्त्रागार-भवन, पहले पोर्ट्रेट (पार्सुना)
- छपाई: बुर्त्सेव की पहली वर्णमाला-पुस्तक 1634; मॉस्को प्रिंट यार्ड
- साहित्य: अवाकुम की जीवनी, व्यंग्य, शिमोन पोलोत्स्की, दरबारी रंगमंच 1672
- शिक्षा: स्लाविक-यूनानी-लैटिन अकादमी 1687, मॉस्को का पहला उच्च विद्यालय
हल किए गए उदाहरण
1. पहली वर्णमाला-पुस्तक (1634) और अकादमी के खुलने (1687) के बीच कितने साल बीते?
1687 − 1634 = 53 साल।
2. उशाकोव के इकन पुराने इकनों से किस बात में नए थे?
उसने चेहरे और शरीर असली जैसी रोशनी-छाया के साथ बनाए और गहराई दिखाई। पुराने इकन ज़्यादा सपाट और प्रतीकात्मक थे।
3. 17वीं सदी की एक ऐसी रूसी रचना का नाम बताओ जो असली व्यक्ति का जीवन बताती है।
आर्कप्रीस्ट अवाकुम की जीवनी, जो उसने खुद लिखी।
4. 1600 के दशक में चर्च में फूट क्यों पड़ी?
पैट्रिआर्क निकॉन ने 1653 से चर्च की पुस्तकें और रीतियाँ बदलीं। कुछ लोगों, पुराने आस्थावानों, ने बदलाव नहीं माना और अलग हो गए।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि पहली वर्णमाला-पुस्तक 1800 के दशक में छपी। वह 1634 में छपी।
- तंबू-छत और प्याज़-गुंबद को मिलाना। तंबू-छत ऊँची नुकीली छत है; प्याज़-गुंबद गोल होता है और ऊपर से नुकीला।
- कहना कि अकादमी पीटर प्रथम ने बनाई। वह 1687 में खुली, उसके अकेले शासन से पहले।
- सोचना कि पोर्ट्रेट आम थे। वे पहले चित्र थे, और कम।