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17वीं सदी में रूस की संस्कृति

1600 के दशक में रूसी संस्कृति की जड़ें चर्च में रहीं पर वह ज़्यादा सांसारिक हुई। गिरजों को तंबू-छत और चटक सजावट मिली; साइमन उशाकोव जैसे इकन-चित्रकारों ने असली चेहरे और छाया-रोशनी दिखाई, और पहले चित्र-पोर्ट्रेट आए। छपाई फैली: पहली वर्णमाला-पुस्तक 1634 में आई। नया लेखन आया, जैसे आर्कप्रीस्ट अवाकुम की जीवनी, हास्य-व्यंग्य, शिमोन पोलोत्स्की की कविता और दरबारी रंगमंच (1672)। स्कूल बढ़े और 1687 में स्लाविक-यूनानी-लैटिन अकादमी खुली।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. पाँच चबूतरे दिखाते हैं कि 1600 के दशक में रूसी संस्कृति कैसे बदली। पुरानी चर्च-परंपरा नए, ज़्यादा सांसारिक विचारों से मिलती है।
  2. वास्तुकला: गिरजों पर ऊँची तंबू-छत, चटक गुंबद और रंगीन सजावट आती है।
  3. चित्रकला: इकन में असली चेहरे, रोशनी और छाया आती है, और पहले पोर्ट्रेट दिखते हैं।
  4. पुस्तकें: पहली छपी वर्णमाला-पुस्तक (1634) और नया लेखन, जीवनी से लेकर हास्य-कथा और कविता तक।
  5. शिक्षा: स्कूल बढ़ते हैं, और 1687 में मॉस्को में पहला उच्च विद्यालय, स्लाविक-यूनानी-लैटिन अकादमी, खुलता है।
  6. खुद करो: बटन दबाकर एक वस्तु आगे लाओ और उसकी कहानी पढ़ो।

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🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

तंबू-छत क्या होती है?

गिरजे पर तंबू की तरह उठती ऊँची नुकीली छत। चरण 1 में सुनहरे गुंबदों के पास हरा शंकु देखो।

क्या इकन सिर्फ़ सपाट पुराने चित्र थे?

1600 के दशक में नहीं। उशाकोव ने रोशनी-छाया और असली चेहरे जोड़े। चरण 2 में चित्रित चेहरा फ़्रेम से उभरता है।

क्या आम बच्चे स्कूल जाते थे?

कुछ जाते थे, पादरियों या निजी शिक्षकों के पास, और वर्णमाला-पुस्तक मदद करती थी। चरण 3 की किताबों का ढेर छपी शिक्षा का प्रतीक है।

अकादमी में क्या पढ़ाया जाता था?

व्याकरण, यूनानी, लैटिन, भाषण-कला और दर्शन। चरण 4 में खंभों वाली स्कूल-इमारत देखो।

क्या संस्कृति तेज़ी से बदली?

धीरे-धीरे। चर्च-परंपराएँ मज़बूत रहीं और नई चीज़ें उनके साथ बढ़ीं। चरण 0 में पाँचों क्षेत्र साथ-साथ दिखते हैं।

परंपरा और बदलाव के बीच की संस्कृति

1600 के दशक की रूसी संस्कृति अब भी रूढ़िवादी (ऑर्थोडॉक्स) चर्च पर टिकी थी। पर व्यापार बढ़ा, नगर बढ़े और यूक्रेन, पोलैंड और पश्चिमी यूरोप से संपर्क बढ़ा। इसलिए कला और लेखन रोज़मर्रा के जीवन, मनुष्य और सुंदरता की बात करने लगे। इतिहासकार इसे पुराने मॉस्को-जगत और पीटर प्रथम के नए युग के बीच बदलाव का समय कहते हैं।

चर्च में एक तीखा विवाद भी हुआ: 1653 से पैट्रिआर्क निकॉन के सुधारों ने चर्च की पुस्तकें और रीतियाँ बदलीं। जिन्होंने नहीं माना, वे पुराने आस्थावान (ओल्ड बिलीवर्स) अलग हो गए। आर्कप्रीस्ट अवाकुम, जिसे 1682 में जला दिया गया, उनका प्रसिद्ध नेता और लेखक बना।

वास्तुकला

कारीगरों ने तंबू-छत (शातयोर) वाले गिरजे बनाए: ऊँची नुकीली छतें जो तंबू की तरह उठती हैं। बाद में गिरजों पर कई चटक प्याज़-गुंबद, रंगीन टाइलों की पंक्तियाँ और सफ़ेद पत्थर की नक़्क़ाशी आई। इसे अक्सर सजावटी शैली कहते हैं।

अमीर व्यापारियों और कुलीनों के लिए पत्थर के घर ज़्यादा बने, और साइबेरिया के नए नगरों में लकड़ी के क़िले और गिरजे बने।

चित्रकला

चित्रकला मुख्यतः इकन यानी पवित्र चित्र थी। ज़्यादातर चित्रकार कार्यशालाओं में काम करते, और सर्वश्रेष्ठ क्रेमलिन में ज़ार के शस्त्रागार-भवन में। साइमन उशाकोव (1626–86) सबसे प्रसिद्ध है। उसने चेहरे असली जैसी छाया और रोशनी के साथ बनाए और गहराई दिखाई, जो नया था। उसका प्रसिद्ध इकन हाथों से न बना उद्धारक (1658) है।

इसी समय असली व्यक्तियों के पहले चित्र (पोर्ट्रेट), जिन्हें पार्सुना कहते हैं, आए। वे शैली में अब भी सपाट थे, पर वे असली लोगों को दिखाते हैं, सिर्फ़ संतों को नहीं।

छपाई और साहित्य

मॉस्को प्रिंट यार्ड चर्च की पुस्तकें छापता था। 1634 में वासिली बुर्त्सेव ने पहली रूसी वर्णमाला-पुस्तक, अज़्बुकोव्निक (प्राइमर), छापी। व्याकरण और क़ानून की पुस्तकें, 1649 के क़ानून-संग्रह समेत, भी छपीं। ज़्यादा किताबों से बच्चों को पढ़ना सीखना आसान हुआ।

शिक्षा

ज़्यादातर बच्चे पादरियों या निजी शिक्षकों से पढ़ना, लिखना और गिनना सीखते, वर्णमाला-पुस्तक, घंटों की पुस्तक और भजन-संग्रह से। 1640–50 के दशकों में कुलीन फ़्योदोर रतिशचेव ने कीव के विद्वानों को मॉस्को में पढ़ाने बुलाया। 1687 में स्लाविक-यूनानी-लैटिन अकादमी ज़ाइकोनोस्पास्की मठ में खुली, रूस का पहला उच्च विद्यालय, जिसमें व्याकरण, यूनानी, लैटिन, भाषण-कला और दर्शन पढ़ाए जाते थे। उसके शिक्षक यूनानी लिखुद भाई थे।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. पहली वर्णमाला-पुस्तक (1634) और अकादमी के खुलने (1687) के बीच कितने साल बीते?

1687 − 1634 = 53 साल।

2. उशाकोव के इकन पुराने इकनों से किस बात में नए थे?

उसने चेहरे और शरीर असली जैसी रोशनी-छाया के साथ बनाए और गहराई दिखाई। पुराने इकन ज़्यादा सपाट और प्रतीकात्मक थे।

3. 17वीं सदी की एक ऐसी रूसी रचना का नाम बताओ जो असली व्यक्ति का जीवन बताती है।

आर्कप्रीस्ट अवाकुम की जीवनी, जो उसने खुद लिखी।

4. 1600 के दशक में चर्च में फूट क्यों पड़ी?

पैट्रिआर्क निकॉन ने 1653 से चर्च की पुस्तकें और रीतियाँ बदलीं। कुछ लोगों, पुराने आस्थावानों, ने बदलाव नहीं माना और अलग हो गए।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. इकन 'हाथों से न बना उद्धारक' (1658) किसने बनाया?
2. पहली रूसी वर्णमाला-पुस्तक कब छपी?
3. तंबू-छत वाले गिरजे में होती है:
4. स्लाविक-यूनानी-लैटिन अकादमी कब खुली?
5. अवाकुम की जीवनी है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

17वीं सदी की रूसी संस्कृति में नया क्या था?

गिरजों में ज़्यादा सजावट, असली चेहरों वाले इकन और पोर्ट्रेट, छपी पुस्तकें, लेखन में जीवनी और व्यंग्य, दरबारी रंगमंच और पहला उच्च विद्यालय।

साइमन उशाकोव कौन था?

1600 के दशक का सबसे प्रसिद्ध इकन-चित्रकार। वह ज़ार के शस्त्रागार-भवन में काम करता था और इकन में रोशनी, छाया और असली चेहरे दिखाता था।

स्लाविक-यूनानी-लैटिन अकादमी क्या थी?

रूस का पहला उच्च विद्यालय, जो 1687 में मॉस्को में खुला। उसमें यूनानी, लैटिन, व्याकरण, भाषण-कला और दर्शन पढ़ाए जाते थे।

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