ज्ञानोदय के विचार और शिक्षा
ज्ञानोदय सोचने का एक यूरोपीय तरीक़ा था: तर्क का उपयोग करो, प्रकृति को जानो और क़ानून तथा स्कूल सुधारो। कैथरीन द्वितीय यूरोपीय विचारकों को पत्र लिखती थीं और प्रबुद्ध शासन की बात करती थीं। पर कुछ लेखकों ने इन्हीं विचारों से रूस की आलोचना की। निकोलाई नोविकोव ने व्यंग्य पत्रिकाएँ और बहुत सी किताबें छापीं, और 1792 में उन्हें गिरफ़्तार किया गया। अलेक्सांद्र रादिश्चेव ने सेंट पीटर्सबर्ग से मॉस्को की यात्रा (1790) लिखी, जिसमें भूदास प्रथा की आलोचना थी, और उन्हें दूर भेज दिया गया।
शिक्षा
विज्ञान अकादमी 1724 में बनी और 1725 में काम शुरू हुआ। मॉस्को विश्वविद्यालय 1755 में खुला (लोमोनोसोव और इवान शुवालोव ने मदद की)। कला अकादमी 1757 में खुली। कुलीन लड़कियों के लिए स्मोल्नी संस्थान 1764 में खुला। 1786 में एक क़ानून से शहरों में जन-विद्यालय बने। फिर भी ज़्यादातर भूदासों के लिए स्कूल नहीं था।
विज्ञान
मिखाइल लोमोनोसोव (1711 से 1765) उत्तर के एक मछुआरा परिवार से थे और पढ़ने के लिए पैदल मॉस्को गए। उन्होंने रसायन, भौतिकी और खगोल विज्ञान में काम किया और कविताएँ तथा रूसी व्याकरण भी लिखा। 1761 में शुक्र को सूरज के सामने से गुज़रते देखकर उन्होंने ग्रह के चारों ओर चमक देखी और समझाया कि शुक्र का वायुमंडल है। विज्ञान अकादमी ने 1760 और 1770 के दशकों में साइबेरिया और दूसरे इलाक़ों का अध्ययन करने के लिए बड़े अभियान भी भेजे। स्व-शिक्षित यांत्रिक इवान कुलिबिन ने घड़ियाँ बनाईं और एक-मेहराब वाले पुल का डिज़ाइन बनाया।
वास्तुकला, चित्रकला और मूर्तिकला
वास्तुकला
दो शैलियाँ। बारोक भरी-पूरी, घुमावदार और सुनहरी है: फ़्रांचेस्को रास्त्रेल्ली ने शीत महल (1754 से 1762) और कैथरीन महल बनाए। बाद में शास्त्रीय शैली आई: सीधी रेखाएँ, स्तंभ और तिकोनी छत, जैसी वासिली बाझेनोव, मात्वे काज़ाकोव और जाकोमो क्वारेंगी की इमारतों में।
चित्रकला और मूर्तिकला
कला अकादमी ने कलाकारों को प्रशिक्षित किया। फ़्योदोर रोकोतोव, दमित्री लेवित्स्की और व्लादिमीर बोरोविकोव्स्की ने सुंदर चित्र बनाए। 1782 में फ़्रांसीसी मूर्तिकार एतियेन फ़ाल्कोने ने पीटर प्रथम का स्मारक, कांस्य घुड़सवार, सेंट पीटर्सबर्ग में एक विशाल चट्टान पर पूरा किया।
रंगमंच और लेखन
1750 के दशक से पहले नाटक ज़्यादातर दरबार और स्कूलों में होते थे। 1756 में सेंट पीटर्सबर्ग में पहला सार्वजनिक रूसी रंगमंच खुला, जिसमें अभिनेता फ़्योदोर वोल्कोव और लेखक अलेक्सांद्र सुमारोकोव निदेशक थे। मॉस्को में पेत्रोव्स्की रंगमंच 1780 में खुला। शेरेमेतेव परिवार जैसे धनी कुलीन भूदास रंगमंच रखते थे जिनके अभिनेता, गायक और संगीतकार भूदास थे। देनिस फ़ोन्विज़िन के हास्य-नाटक द माइनर (1782) ने बुरी शिक्षा और उद्दंड ज़मींदारों पर हँसाया। गाव्रिला देरज़ाविन जैसे कवियों ने गुणगान-कविताएँ लिखीं और निकोलाई करमज़िन ने गद्य की नई, कोमल शैली दी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1755: मॉस्को विश्वविद्यालय; 1757: कला अकादमी; 1764: स्मोल्नी संस्थान; 1786: जन-विद्यालय
- 1761: लोमोनोसोव ने शुक्र का वायुमंडल देखा
- 1754 से 1762: शीत महल (बारोक); बाद में शास्त्रीय शैली
- 1756: पहला सार्वजनिक रंगमंच; 1782: द माइनर और कांस्य घुड़सवार
हल किए गए उदाहरण
1. लोमोनोसोव ने 1761 में क्या देखा और क्या निष्कर्ष निकाला?
शुक्र को सूरज के सामने से गुज़रते हुए उन्होंने उसके चारों ओर चमक देखी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शुक्र का वायुमंडल है।
2. बारोक और शास्त्रीय शैली में अंतर कैसे पहचानें?
बारोक भरी-पूरी, घुमावदार और सुनहरी है। शास्त्रीय शैली शांत है, सीधी रेखाओं, स्तंभों और तिकोनी छत के साथ।
3. भूदास रंगमंच अजीब क्यों था?
अभिनेता, गायक और संगीतकार ज़मींदार के भूदास थे, यानी कलाकारों के पास प्रतिभा थी पर आज़ादी नहीं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि लोमोनोसोव केवल कविता लिखते थे। वे प्रमुख वैज्ञानिक भी थे और व्याकरण भी लिखा।
- बारोक और शास्त्रीय शैली मिला देना। बारोक घुमावदार और सुनहरी है; शास्त्रीय में सीधे स्तंभ हैं।
- वर्ष मिला देना: मॉस्को विश्वविद्यालय 1755, कला अकादमी 1757, स्मोल्नी 1764, जन-विद्यालय 1786।
- मानना कि सब लोग स्कूल जा सकते थे। ज़्यादातर भूदासों के लिए स्कूल नहीं था।