अर्थव्यवस्था: गाँव, भूदास और शुरुआती उद्योग
खेती। लगभग दस में से नौ लोग गाँवों में रहते थे। ज़मीन ज़मींदारों की थी और भूदास उसे जोतते थे। भूदास दो तरह से चुकाता था: बारशचिना (ज़मींदार के खेतों में मुफ़्त मज़दूरी के दिन) या ओब्रोक (धन या सामान का किराया, जो अक्सर व्यापार या शहर के काम से कमाया जाता था)। ज़मींदार भूदासों को ज़मीन समेत बेच सकते और सज़ा दे सकते थे।
उद्योग। उराल लोहे और तांबे का केंद्र बना। देमिदोव जैसे अमीर मालिकों ने बड़े कारख़ाने चलाए, जिनमें सौंपे गए किसान काम करते थे जो छोड़ नहीं सकते थे। राजधानी के पास कपड़े, काँच और चमड़े की कुछ कार्यशालाएँ भी बढ़ीं।
व्यापार और पैसा। 1753 में एलिज़ाबेथ के समय भीतरी चुंगी ख़त्म हुई, इसलिए हर क्षेत्र की सीमा पर माल पर महसूल नहीं देना पड़ता था। 1754 में सामंतों और व्यापारियों को क़र्ज़ देने वाले बैंक शुरू हुए। वोल्गा पर मकारयेव जैसे बड़े मेले व्यापार के व्यस्त स्थान थे। वृद्धि असली थी पर अधूरी आज़ादी वाले श्रम पर टिकी थी।
विज्ञान अकादमी और मॉस्को विश्वविद्यालय
विज्ञान अकादमी 1725 में सेंट पीटर्सबर्ग में खुली। शुरू में ज़्यादातर विद्वान विदेश से आए, जैसे गणितज्ञ यूलर। उन्होंने पढ़ाया और रूसियों को भी तैयार किया। अकादमी के पास पुस्तकालय, वेधशाला, कार्यशालाएँ और छापाख़ाना था।
मॉस्को विश्वविद्यालय 1755 में एलिज़ाबेथ के समय लोमोनोसोव और दरबारी इवान शुवालोव की मदद से बना। यह रूस का पहला विश्वविद्यालय था, जिससे एक जिमनेज़ियम (स्कूल) जुड़ा था। इसमें क़ानून, चिकित्सा और दर्शन पढ़ाए जाते और अफ़सर, डॉक्टर और शिक्षक तैयार होते थे।
संस्कृति भी बढ़ी: वास्तुकार रास्त्रेल्ली ने भव्य बारोक महल (विंटर पैलेस, स्मोल्नी) बनाए, और 1756 में रूस का पहला स्थायी सार्वजनिक रंगमंच खुला। यह सब मुख्यतः सामंतों और शहरवासियों तक पहुँचा।
मिख़ाइल लोमोनोसोव (1711 से 1765)
लोमोनोसोव सुदूर उत्तर के एक मछुआरा परिवार में जन्मे। 19 साल की उम्र में वे मछली के क़ाफ़िले के साथ अपने गाँव से मास्को पढ़ने गए। उन्होंने लैटिन सीखी, फिर जर्मनी में पढ़ाई की और सेंट पीटर्सबर्ग में अकादमी के प्रोफ़ेसर बने।
विज्ञान। उन्होंने रसायन के प्रयोग किए और कहा कि रासायनिक परिवर्तन में पदार्थ की कुल मात्रा नहीं बदलती: द्रव्य-संरक्षण का नियम। 1761 में उन्होंने शुक्र ग्रह को सूर्य के सामने से गुज़रते देख उसके चारों ओर वायुमंडल पहचाना।
भाषा और कला। उन्होंने रूसी व्याकरण (1755) लिखा, पद्य में प्रशस्तियाँ रचीं और रंगीन काँच के मोज़ेक बनाए। विज्ञान, कविता और शिक्षा तीनों जानने के कारण उन्हें बहुमुखी विद्वान कहते हैं। 1765 में उनकी मृत्यु हुई, और बाद में विश्वविद्यालय ने उनका नाम लिया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बारशचिना: भूदास ज़मींदार के खेतों में बिना मज़दूरी काम के दिनों से चुकाता है।
- ओब्रोक: भूदास धन या सामान के किराये से चुकाता है।
- 1753: भीतरी चुंगी ख़त्म।
- 1755: मॉस्को विश्वविद्यालय की स्थापना (रूस का पहला विश्वविद्यालय)।
- 1725: सेंट पीटर्सबर्ग में विज्ञान अकादमी खुली।
- द्रव्य-संरक्षण: परिवर्तन से पहले का कुल द्रव्यमान = बाद का (बंद तंत्र में)।
हल किए गए उदाहरण
1. बारशचिना और ओब्रोक में क्या अंतर है?
बारशचिना में सप्ताह के कुछ दिन ज़मींदार की ज़मीन पर काम करना होता है। ओब्रोक धन या सामान का भुगतान है। ओब्रोक में भूदास शहर में काम या व्यापार करके किराया कमा सकता था।
2. 1753 में भीतरी चुंगी ख़त्म करने से व्यापार को कैसे मदद मिली?
इससे पहले भीतरी सीमाओं पर माल महसूल देता था, जिससे वह महँगा और धीमा होता था। उसके बिना व्यापारी अनाज, लोहा या कपड़ा क्षेत्रों के बीच सस्ते में ले जा सकते थे।
3. धातु वाला बंद फ़्लास्क गर्म करने से पहले 120 g का है। बंद रहते गर्म करने के बाद उसका द्रव्यमान क्या होगा?
लगभग 120 g। धातु अंदर की हवा से मिलकर रूप बदलती है, पर बंद फ़्लास्क का कुल द्रव्यमान वही रहता है, यही लोमोनोसोव का नियम है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ज़्यादातर लोग शहरों में रहते थे। लगभग दस में से नौ गाँववासी थे।
- यह कहना कि मॉस्को विश्वविद्यालय 1725 में खुला। वह विज्ञान अकादमी है; विश्वविद्यालय 1755 का है।
- भूदासों को आज़ाद मज़दूर मानना। उन्हें ज़मीन समेत बेचा जा सकता था और वे छोड़ नहीं सकते थे।
- लिखना कि लोमोनोसोव सामंत थे। वे मछुआरा परिवार से थे और पढ़ाई से ऊपर उठे।