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कैथरीन द्वितीय की घरेलू नीति (1762-1796)

कैथरीन द्वितीय निरंकुश शासक थीं जो प्रबोधन के लेखकों की प्रशंसक थीं। उन्होंने नकाज़ (1767) लिखा और विधायी आयोग बुलाया, जो बैठा पर कोई नया क़ानून नहीं बना। पुगाचोव विद्रोह के बाद उन्होंने स्थानीय शासन को प्रांतों और ज़िलों में बाँटा (1775)। 1785 में दो चार्टरों ने सामंतों और शहरवासियों को साफ़ अधिकार दिए। सबसे ज़्यादा लाभ सामंतों को मिला, जबकि भूदासों को कुछ नहीं मिला और अक्सर नुक़सान हुआ।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कैथरीन द्वितीय के पास पूरी ताक़त है, पर वे प्रबोधन की किताबें पढ़ती हैं। इस मेल को प्रबुद्ध निरंकुशता कहते हैं।
  2. 1767: विधायी आयोग बैठता है। सामंत, शहरवासी, राज्य के किसान और कज़ाक प्रतिनिधि भेजते हैं। भूदासों की कोई सीट नहीं। 1768 में यह बिना नए क़ानून-संहिता के बंद हो जाता है।
  3. 1775: रूस छोटे प्रांतों और ज़िलों में बँटता है। हर एक के अपने गवर्नर और अदालतें हैं। राज्य हर कोने तक पहुँचता है।
  4. 1785: सामंतों का चार्टर। सामंत सेवा और करों से मुक्त हैं, और अपनी ज़मीन और भूदास रखते हैं।
  5. 1785: शहरों का चार्टर। व्यापारी श्रेणियाँ (गिल्ड) बनाते हैं और नगर-परिषद चुनते हैं।
  6. खुद करो: हर उपाय दबाओ और देखो किसे लाभ हुआ, किसे नहीं।

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🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

यहाँ "प्रबोधन" का क्या अर्थ है?

1700 के दशकों का यूरोपीय आंदोलन जो कहता था कि समाज को तर्क, विज्ञान और न्यायपूर्ण क़ानूनों से चलना चाहिए और क्रूरता व पुराना अंधविश्वास ख़त्म हों।

पूरी शक्ति रखते हुए भी कैथरीन ने आयोग क्यों बुलाया?

वे जानना चाहती थीं कि समूहों को क्या चाहिए, दिखाना चाहती थीं कि वे प्रबुद्ध शासक हैं, और समर्थन जीतना चाहती थीं। अंतिम शक्ति उन्हीं के पास रही।

भूदासों को क्यों छोड़ा गया?

उन्हें ज़मींदारों की संपत्ति माना जाता था और उनकी कोई क़ानूनी आवाज़ नहीं थी। जिन सामंतों की कैथरीन को ज़रूरत थी, वे भूदासता बनाए रखना चाहते थे।

प्रांत और ज़िले में क्या अंतर है?

प्रांत गवर्नर के अधीन बड़ी इकाई है; उसमें कई ज़िले होते हैं, जो स्थानीय अधिकारियों और अदालतों वाली छोटी इकाइयाँ हैं।

1785 के चार्टरों को "सौदा" क्यों कहते हैं?

सामंतों को अधिकार और सुरक्षा मिली, और बदले में उन्होंने उनके शासन का समर्थन किया और देश चलाने में मदद की।

क्या शहर शक्तिशाली बन गए?

शहरों को अधिकार और परिषदें मिलीं, पर अंतिम बात गवर्नर और राज्य की रही। उनका लाभ सामंतों से कम था।

प्रबुद्ध निरंकुशता और नकाज़

कैथरीन द्वितीय जन्म से जर्मन राजकुमारी थीं और पति पीटर तृतीय के विरुद्ध तख़्तापलट के बाद 1762 में गद्दी पर आईं। उन्होंने फ़्रांसीसी विचारक मॉन्टेस्क्यू और इतालवी बेकारिया को पढ़ा और वॉल्तेयर को पत्र लिखे। प्रबोधन एक आंदोलन था जो कहता था कि शासन को तर्क से चलना चाहिए, क़ानून न्यायपूर्ण हों और क्रूरता ख़त्म हो।

प्रबुद्ध निरंकुशता का अर्थ है कि शासक सारी शक्ति रखता है पर कहता है कि वह उसे सुधार और सबकी भलाई के लिए इस्तेमाल करेगा। 1767 में कैथरीन ने नकाज़ ("निर्देश") लिखा, जो क़ानून बनाने वालों के लिए मार्गदर्शिका थी। उसमें कहा गया कि क़ानून सबकी भलाई के लिए हों, यातना ग़लत है और सज़ा न्यायपूर्ण हो। पर यह भी कहा गया कि रूस के आकार को एक मज़बूत शासक चाहिए, इसलिए निरंकुशता बनी रही।

विधायी आयोग (1767 से 1768)

1767 में कैथरीन ने मास्को में नई क़ानून-संहिता लिखने के लिए विधायी आयोग बुलाया। पाँच सौ से अधिक प्रतिनिधि आए: सामंत, शहरवासी, राज्य के किसान, कज़ाक और ग़ैर-रूसी जातियाँ, और कुछ सरकारी दफ़्तरों से। भूदासों ने कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा।

प्रतिनिधि अपने इलाक़ों से लिखित माँगें ("निर्देश") लाए, और आयोग ने उन पर बहस की। सामंतों ने ज़्यादा अधिकार और भूदासता की रक्षा माँगी; शहरवासियों ने व्यापार के अधिकार; किसानों ने राहत। आयोग संहिता पर सहमत नहीं हो सका। दिसंबर 1768 में कैथरीन ने ओटोमन साम्राज्य से युद्ध शुरू होने को कारण बताकर उसे बंद कर दिया।

कोई नई संहिता नहीं बनी, पर कैथरीन ने जाना कि अलग-अलग समूह क्या चाहते हैं, और बाद के सुधारों में इसका उपयोग किया।

प्रांतीय सुधार (1775)

पुगाचोव विद्रोह (1773 से 1775) ने दिखाया कि स्थानीय शासन कमज़ोर है। 1775 में कैथरीन ने रूस को छोटे प्रांतों (गुबेर्निया) में बाँटा, हर एक में कर-सूची के लगभग 3 से 4 लाख पुरुष, और हर प्रांत को कम आबादी वाले ज़िलों में। 1796 तक लगभग पचास प्रांत थे। हर प्रांत में शासक द्वारा भेजा गया गवर्नर, कोषागार, पुलिस और सामंतों, शहरवासियों और राज्य के किसानों के लिए अलग-अलग अदालतें थीं।

सामंत कुछ स्थानीय अधिकारी चुनते थे, इसलिए उन्हें अपने ज़िलों के संचालन में हिस्सा मिला। नतीजा: राज्य के अफ़सर लोगों के नज़दीक बैठे, सामंतों को भूमिका मिली और व्यवस्था रखना आसान हुआ।

1785 के चार्टर

सामंतों के चार्टर ने सामंतों को मिले अधिकारों की पुष्टि की और बढ़ाया: अनिवार्य राज्य-सेवा से मुक्ति (1762 से), करों और शारीरिक दंड से मुक्ति, ज़मीन और भूदास रखने का अधिकार, अपने बराबर वालों की अदालतें और हर प्रांत में सभाएँ जो एक नेता ("मार्शल") चुनती थीं। इससे सामंत एक साफ़, सुरक्षित वर्ग बने।

शहरों के चार्टर ने शहरवासियों को भी अधिकार दिए। नागरिक श्रेणियों में बाँटे गए; व्यापारी धन के अनुसार गिल्डों में शामिल हुए; शहर की चुनी हुई परिषद (दूमा) और महापौर थे। अमीर व्यापारियों को शारीरिक दंड से सुरक्षा और व्यापार चलाने का अधिकार मिला।

किसानों के लिए कोई चार्टर नहीं था। 1767 में कैथरीन ने भूदासों के ज़मींदारों के विरुद्ध शिकायत करने पर भी रोक लगा दी, और 1785 के चार्टर ने ज़मींदार के अधिकार बनाए रखे। इसलिए सुधारों से ऊपर और बीच वालों को लाभ हुआ, नीचे वालों को नहीं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. कैथरीन के शासन को "प्रबुद्ध निरंकुशता" क्यों कहते हैं?

उनके पास पूरी शक्ति (निरंकुशता) थी पर उन्होंने प्रबोधन के विचारकों को पढ़ा और नकाज़, न्यायपूर्ण क़ानूनों की योजनाओं और स्थानीय सुधारों में उनके विचार लिए। शक्ति उन्हीं के पास रही, इसलिए यह ऊपर से सुधार था।

2. विधायी आयोग संहिता क्यों नहीं बना पाया?

वर्ग अलग-अलग चीज़ें चाहते थे, जैसे सामंत भूदासता की रक्षा और शहरवासी व्यापार के अधिकार। सहमति नहीं बनी, और 1768 में ओटोमन युद्ध ने कैथरीन को उसे बंद करने का कारण दिया।

3. 1785 के चार्टरों से सबसे ज़्यादा लाभ किसे हुआ और किसे कुछ नहीं?

सबसे ज़्यादा सामंतों को: सेवा, कर और शारीरिक दंड से मुक्ति, और ज़मीन व भूदासों पर नियंत्रण। शहरवासियों को कुछ अधिकार मिले। भूदासों को कुछ नहीं मिला और ज़मींदारों की ताक़त उन पर बनी रही।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. नकाज़ (1767) क्या था?
2. विधायी आयोग में किसका कोई प्रतिनिधि नहीं था?
3. प्रांतीय सुधार कब हुआ?
4. सामंतों के चार्टर ने कौन-सा अधिकार दिया?
5. शहरों के चार्टर ने व्यापारियों को किसमें संगठित किया?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैथरीन द्वितीय के समय प्रबुद्ध निरंकुशता क्या थी?

कैथरीन ने पूर्ण शक्ति रखी पर प्रबोधन के लेखकों के विचार, जैसे नकाज़ में, न्यायपूर्ण क़ानूनों और स्थानीय सुधारों की योजना के लिए लिए।

कैथरीन द्वितीय के मुख्य घरेलू सुधार क्या थे?

नकाज़ और विधायी आयोग (1767), प्रांतीय सुधार (1775), और सामंतों व शहरों के चार्टर (1785)।

कैथरीन के सुधारों से किसे लाभ हुआ?

ज़्यादातर सामंतों को, फिर शहरवासियों को। भूदासों को कुछ नहीं मिला और उनके ज़मींदारों की ताक़त बनी रही।

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