सुधार क्यों? क्रीमिया युद्ध का सबक़
अलेक्ज़ेंडर द्वितीय 1855 में, क्रीमिया युद्ध के बीच, ज़ार बने। हार (1856) ने दिखाया कि रूस के पास रेल, आधुनिक हथियार और अच्छी सेना नहीं हैं, और दास-प्रथा अर्थव्यवस्था को रोक रही है: दासों के पास ज़्यादा मेहनत करने या कारख़ानों में जाने की कोई वजह नहीं थी। पढ़े-लिखे लोग (पश्चिमपंथी और स्लावपंथी पाठ देखो) भी बहुत पहले से बदलाव माँग रहे थे। ज़ार ने कहा कि दास-प्रथा का अंत ऊपर से करना बेहतर है, बजाय इसके कि वह नीचे से टूटे। 1861-1874 के उनके सुधारों को महान सुधार कहते हैं।
दास-प्रथा का अंत (1861)
क्या हुआ। 19 फ़रवरी (आधुनिक कैलेंडर में 3 मार्च) 1861 को अलेक्ज़ेंडर द्वितीय ने घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। निजी जागीरों के लगभग 2.2 करोड़ दास आज़ाद इंसान बने: वे अपनी मर्ज़ी से विवाह, संपत्ति रखना, अदालत जाना और व्यवसाय करना कर सकते थे। बाद के सुधारों ने राज्य के किसानों और अन्य समूहों को भी आज़ाद किया।
ज़मीन और धन। ज़मींदारों ने कुछ ज़मीन रखी। किसानों को एक "टुकड़ा" (आवंटन) मिला। उसके लिए राज्य ने ज़मींदार को क़ीमत का लगभग 80 प्रतिशत दिया, और किसानों ने राज्य को ब्याज के साथ मोचन भुगतान के रूप में 49 साल में चुकाया। तब तक वे "अस्थायी रूप से बाध्य" किसान के रूप में लगान और श्रम देते रहे। काली मिट्टी के कई इलाक़ों में किसानों की पहले इस्तेमाल की गई कुछ ज़मीन कट गई ("कटौतियाँ")।
मीर। ज़मीन गाँव के मीर को मिली और कर की ज़िम्मेदारी साझा थी। किसान उसकी इजाज़त के बिना गाँव नहीं छोड़ सकता था।
नतीजे। यह विशाल क़दम था: मुक्त श्रम-बाज़ार बना, कारख़ाने और रेल बढ़े। पर किसान ग़रीब थे, ज़मीन कम थी और भुगतान भारी, इसलिए बहुत लोग नाख़ुश थे। भुगतान 1907 में ही बंद हुए।
ज़ेमस्त्वो और शहर सुधार (1864, 1870)
ज़ेमस्त्वो (1864)। दास-प्रथा ख़त्म होने पर सरदार अब गाँवों का काम नहीं चलाते थे, इसलिए किसी नए की ज़रूरत थी। ज़िला और प्रांत स्तर पर चुनी हुई सभाएँ बनीं। मतदाता तीन वर्गों (ज़मींदार, शहरी, किसान) में बँटे थे और ज़मींदारों का वज़न सबसे ज़्यादा था। ज़ेमस्त्वो ने सड़कें और पुल बनाए, प्राथमिक स्कूल चलाए, गाँवों में डॉक्टर और अस्पताल खोले और अकाल में मदद दी। वे राष्ट्रीय राजनीति में भाग नहीं ले सकते थे, और गवर्नर उन पर नज़र रखता था। फिर भी, उन्होंने रूसियों को स्वशासन की पहली ट्रेनिंग दी।
शहर सुधार (1870)। शहरों को चुनी हुई शहर दूमा (परिषद), कार्यकारी मंडल और महापौर मिले। वोट चुकाए कर पर निर्भर था, इसलिए धनी नागरिकों का वज़न ज़्यादा था। शहर परिषदें सड़क, पानी, स्कूल, बाज़ार और स्वास्थ्य देखती थीं।
न्यायिक सुधार (1864)
पुरानी अदालतें गुप्त, धीमी और रिश्वत से भरी थीं। नई व्यवस्था (20 नवंबर 1864) आधुनिक यूरोपीय विचारों पर बनी:
- सब वर्गों की क़ानून के सामने बराबरी (कुछ अपवाद छोड़कर, जैसे पादरियों, सेना और किसानों के छोटे मामलों की अलग अदालतें)।
- स्वतंत्र जज, जिन्हें आसानी से हटाया नहीं जा सकता था।
- खुली, मौखिक सुनवाई, ताकि जनता और प्रेस आ सकें।
- बचाव के लिए वकील (स्वतंत्र वकील-संघ) और आरोप के लिए सरकारी वकील।
- गंभीर आपराधिक मामलों में 12 नागरिकों की जूरी: वही दोषी या निर्दोष तय करती है।
- छोटे मामलों के लिए चुने हुए शांति-न्यायाधीश।
इसे अक्सर सबसे सफल सुधार कहा जाता है। राज्य के विरुद्ध मामले बाद में जूरी अदालतों से हटा लिए गए।
सैन्य सुधार (1874)
युद्ध मंत्री दिमित्री मिल्यूतिन ने क्रीमिया के सबक़ के बाद सेना को नया बनाया। पहले केवल किसान और शहरी लोग 25 साल के लिए भर्ती होते थे। 1874 के क़ानून ने सभी पुरुषों (सरदारों समेत) को 20 साल की उम्र से बाध्य किया, चयन पर्ची से। सेना में सेवा घटकर लगभग 6 साल रह गई (साथ में रिज़र्व का समय), और पढ़े-लिखों के लिए और कम। क्रूर सज़ाएँ सीमित हुईं, सैनिकों को पढ़ना सिखाया गया, और सैन्य स्कूल, नई राइफ़लें तथा रेल-योजना जोड़ी गई। इससे नागरिकों की आधुनिक सेना बनी।
शिक्षा और प्रेस
- विश्वविद्यालय (1863): नए चार्टर ने विश्वविद्यालयों को ऐसी परिषदें दीं जो रेक्टर चुनती हैं और ख़ुद को चलाती हैं।
- स्कूल (1864): सब वर्गों के लिए प्राथमिक स्कूल खुले, जिन्हें चर्च और ज़ेमस्त्वो चलाते थे। जिम्नेज़ियम दो तरह के थे: शास्त्रीय (लैटिन और यूनानी) और "वास्तविक" (विज्ञान और आधुनिक विषय)।
- स्त्री-शिक्षा: 1870 के दशक में महिलाओं के लिए उच्च पाठ्यक्रम खुले।
- प्रेस (1865): नरम सेंसर नियम, इसलिए किताबें और पत्रिकाएँ ज़्यादा स्वतंत्र हुईं।
नतीजे और सीमाएँ
- रूस आधुनिक समाज की ओर बढ़ा: आज़ाद लोग, स्थानीय स्वशासन, बराबर अदालतें, नागरिकों की सेना, ज़्यादा स्कूल।
- अर्थव्यवस्था बढ़ी: रेल, कारख़ाने, बैंक।
- पर ज़ार की पूरी सत्ता बनी रही: राष्ट्रीय संसद नहीं थी। किसानों की ग़रीबी और ज़मीन की भूख बनी रही।
- कुछ उग्रपंथियों को सुधार बहुत छोटे लगे। 1 मार्च 1881 को क्रांतिकारियों ने ज़ार की हत्या कर दी और उनके बेटे अलेक्ज़ेंडर तृतीय "प्रति-सुधारों" की ओर मुड़े।
करके देखो: सुधारों का रिपोर्ट कार्ड
- 3D में: आख़िरी चरण में हर सुधार चुनो। जो स्तंभ ऊँचा हो, उसके लिए "आगे" या "अधूरा" लिखो।
- अभिनय: कक्षा में "अदालत" लगाओ: एक विद्यार्थी पर नियम तोड़ने का आरोप है। 12 (या कम) की जूरी, वकील और जज चुनो। गुप्त सुनवाई से तुलना करो: क्या बेहतर है?
- गणित: अगर टुकड़े की क़ीमत 490 रूबल थी और राज्य ने 80 प्रतिशत दिए, तो किसानों पर कितना बचा? 49 साल में बाँटें तो साल का कितना (बिना ब्याज)? (उत्तर: 98 रूबल, साल का 2 रूबल।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुक्ति घोषणापत्र: 19 फ़रवरी (3 मार्च) 1861; मोचन भुगतान 49 साल में
- ज़ेमस्त्वो क़ानून: 1864 (ज़िला और प्रांत परिषदें)
- शहर सुधार: 1870 (शहर दूमा, महापौर)
- न्यायिक सुधार: 1864 (बराबरी, खुली सुनवाई, वकील, 12 की जूरी)
- सैन्य सुधार: 1874 (सब वर्ग, पर्ची से, 25 की जगह लगभग 6 साल)
- विश्वविद्यालय चार्टर 1863; प्राथमिक स्कूल 1864
हल किए गए उदाहरण
1. 1861 के सुधार ने किसानों को क्या दिया और क्या नहीं दिया?
चरण 1: उसने व्यक्तिगत आज़ादी दी: विवाह, संपत्ति, अदालत, व्यवसाय। चरण 2: उसने मुफ़्त ज़मीन नहीं दी: किसानों ने 49 साल मोचन भुगतान से राज्य को चुकाया। चरण 3: मीर भी उन्हें बाँधे रहा, इसलिए बहुत लोग ग़रीब और नाख़ुश रहे।
2. ज़ेमस्त्वो क्यों बने और उन्होंने क्या किया?
चरण 1: दास-प्रथा ख़त्म होने पर सरदार गाँव का जीवन नहीं चलाते थे, इसलिए नई स्थानीय संस्था चाहिए थी। चरण 2: चुनी हुई ज़िला और प्रांत परिषदों ने सड़कें बनाईं, प्राथमिक स्कूल और अस्पताल चलाए और अकाल में मदद की। चरण 3: उन्होंने रूसियों को स्वशासन का अभ्यास दिया, पर राष्ट्रीय राजनीति में उनकी कोई आवाज़ नहीं थी।
3. 1864 के न्यायिक सुधार की चार विशेषताएँ बताओ।
चरण 1: क़ानून के सामने बराबरी और स्वतंत्र जज। चरण 2: खुली सुनवाई और वकील। चरण 3: गंभीर मामलों के लिए 12 की जूरी, और छोटे मामलों के लिए चुने हुए शांति-न्यायाधीश।
4. 1874 के सैन्य सुधार ने भर्ती कैसे बदली?
चरण 1: पहले केवल निचले वर्ग 25 साल सेवा करते थे। चरण 2: 1874 के क़ानून ने 20 साल से ऊपर के सभी पुरुषों को पर्ची से बाध्य किया। चरण 3: सेवा लगभग 6 साल रह गई, पढ़े-लिखों के लिए और कम।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि 1861 में किसानों को ज़मीन मुफ़्त मिली। उन्होंने 49 साल में उसकी क़ीमत चुकाई।
- यह सोचना कि सुधारों ने रूस को लोकतंत्र बना दिया। ज़ार की पूरी सत्ता रही और संसद नहीं थी।
- ज़ेमस्त्वो (1864, ग्रामीण) और शहर सुधार (1870) को मिला देना।
- यह कहना कि सैन्य सुधार में 25 साल की सेवा रही। उसने उसे लगभग 6 साल कर दिया।