सिकंदर प्रथम और बदलाव की चाह
सिकंदर प्रथम ने 1801 से 1825 तक रूस पर राज किया। उसके पिता पावेल प्रथम की हत्या कुछ सरदारों ने की थी, और सिकंदर 23 साल की उम्र में गद्दी पर बैठा। उसे एक स्विस शिक्षक ने पढ़ाया था, जो क़ानून और आज़ादी के विचारों को मानता था।
उसने देखा कि पुराना राज्य धीमा है। कई अफ़सर रिश्वत लेते थे। ज़्यादातर लोग किसान थे, जो दास (serf) थे, यानी ज़मीन और मालिक से बँधे हुए। वह कुछ सुधारना चाहता था, पर अकेला शासक भी बना रहना चाहता था। यही उसके शुरुआती सालों की पहेली है: ऊपर से बदलाव, पर शक्ति बाँटे बिना।
अनौपचारिक समिति (1801-1803)
अनौपचारिक समिति ज़ार के जवान दोस्तों का छोटा निजी समूह थी: पावेल स्त्रोगानोव, विक्तोर कोचूबे, निकोलाई नोवोसिल्त्सेव और पोलैंड के सरदार आदम चार्तोरिस्की। "अनौपचारिक" का मतलब है कि क़ानून में इसकी कोई जगह नहीं थी। यह न कोई मंत्रालय थी, न परिषद।
वे दासता, संविधान और बेहतर शासन की बात करते थे। उनके ज़्यादातर बड़े विचार बातों तक रहे, क्योंकि बहुत से सरदार इनके ख़िलाफ़ थे। पर इसी समूह ने आगे के व्यावहारिक बदलाव शुरू किए।
1802: बोर्डों की जगह मंत्रालय
पीटर महान के समय सरकार का काम बोर्डों (कॉलेजियम) से चलता था। वहाँ समूह मिलकर फ़ैसला करता था, और ग़लती पर साफ़ पता नहीं चलता था कि ज़िम्मेदार कौन है। 1802 में सिकंदर ने आठ मंत्रालय बनाए: जैसे युद्ध, नौसेना, विदेश, न्याय, वित्त और गृह। हर मंत्रालय में एक मंत्री था। साझा बातों के लिए मंत्रियों की समिति मिलती थी।
इसे एक-व्यक्ति की ज़िम्मेदारी कहते हैं: एक आदमी एक क्षेत्र का जवाबदेह है। आज भी ज़्यादातर सरकारें ऐसे ही चलती हैं।
किसान, स्कूल और विश्वविद्यालय
आज़ाद किसान क़ानून (1803)। कोई मालिक चाहे तो अपने दासों को ज़मीन के साथ आज़ाद कर सकता था, अगर वे तय की गई रक़म दें। यह धीमा क़दम था, किसी पर ज़बरदस्ती नहीं थी। पूरे शासन में सौ में से दो किसान भी आज़ाद नहीं हुए। बाल्टिक इलाक़ों में दासता ख़त्म की गई (1816-1819), पर बिना ज़मीन के।
शिक्षा (1802-1804)। शिक्षा मंत्रालय बना। रूस को छह शिक्षा-ज़िलों में बाँटा गया। स्कूलों की चार सीढ़ियाँ थीं: गाँव का स्कूल, ज़िला स्कूल, प्रांत का जिम्नेज़ियम और विश्वविद्यालय। खार्कोव और कज़ान में नए विश्वविद्यालय खुले, और मॉस्को, विल्ना और दोर्पात वाले मज़बूत हुए। 1804 के नरम सेंसरशिप क़ानून से लेखक कुछ ज़्यादा आज़ादी से छाप सकते थे।
स्पेरांस्की की योजना (1809) और राज्य परिषद (1810)
मिखाइल स्पेरांस्की गाँव के पादरी का बेटा था। अपनी बुद्धि से वह ज़ार का मुख्य सलाहकार बना। 1809 में उसने राज्य की योजना लिखी: तीन शक्तियाँ (क़ानून बनाना, शासन चलाना, अदालतें) अलग-अलग, और संपत्ति वालों की चुनी हुई राज्य दूमा। मतदान गाँव से देश तक चार सीढ़ियों में होता। ज़ार ऊपर रहता, पर क़ानून से बँधा।
इस योजना से बहुत से सरदार डर गए। 1810 में सिर्फ़ राज्य परिषद बनी। यह बड़े लोगों की सभा थी जो नए क़ानूनों पर सलाह देती थी। स्पेरांस्की ने 1809 में यह नियम भी बनवाया कि ऊँचे पद के अफ़सर परीक्षा पास करें या डिग्री रखें। इससे दरबारी सरदार नाराज़ हुए। नेपोलियन से युद्ध से पहले सरदार कहते थे कि वह फ़्रांस के बहुत क़रीब है। मार्च 1812 में ज़ार ने उसे निज़नी नोवगोरोद और फिर पेरम भेज दिया। 1816 के बाद वह सेवा में लौटा, पर सुधारक के रूप में नहीं।
सुधार क्यों रुके? नतीजे
- ज़ार अपनी शक्ति नहीं छोड़ना चाहता था।
- ज़्यादातर सरदार दासों के काम पर जीते थे और दासता ख़त्म करने के ख़िलाफ़ थे।
- 1812 के युद्ध ने ध्यान रक्षा की ओर मोड़ दिया।
फिर भी बदलाव मायने रखते थे: मंत्रालय सौ साल से ज़्यादा चले, राज्य परिषद 1917 तक रही, और स्कूलों से एक पढ़ा-लिखा वर्ग बना। इसके कुछ जवान आगे चलकर डिसेम्ब्रिस्ट बने।
ख़ुद करके देखो: सुधारों का रिपोर्ट-कार्ड
- 3D में: आख़िरी चरण में हर सुधार चुनो और नीले व हरे स्तंभ के फ़र्क के लिए एक शब्द लिखो: "कोई नहीं", "छोटा", "बड़ा", "बहुत बड़ा"।
- अभिनय: घर पर एक ज़ार बने, एक सरदार, एक दास। क्या दासों को आज़ाद करना चाहिए? दो मिनट बहस करो। सबसे ज़्यादा नुक़सान किसका?
- चित्र बनाओ: 1801, 1802, 1803, 1809, 1810, 1812 की समय-रेखा, हर साल के लिए एक चित्र।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अनौपचारिक समिति: ज़ार के जवान दोस्तों का निजी समूह, 1801-1803
- मंत्रालय (1802): आठ, हर एक में एक मंत्री जो ज़ार को जवाब देता है
- आज़ाद किसान क़ानून (1803): मालिक फ़िरौती लेकर दासों को आज़ाद कर सकते हैं, बहुत कम ने किया
- स्पेरांस्की की योजना (1809): तीन शक्तियाँ और चुनी हुई दूमा
- राज्य परिषद (1810): योजना का सिर्फ़ यही हिस्सा बना, सिर्फ़ सलाह
- स्पेरांस्की हटाए गए: मार्च 1812
हल किए गए उदाहरण
1. अनौपचारिक समिति को "अनौपचारिक" क्यों कहते थे?
चरण 1: इसे क़ानून से नहीं बनाया गया था। चरण 2: यह ज़ार के दोस्तों का निजी समूह थी। चरण 3: इसलिए यह बड़े विचारों पर बात कर सकती थी, पर फ़ैसले नहीं ले सकती थी। फ़ैसला सिर्फ़ ज़ार करता था।
2. पुराने बोर्डों और 1802 के मंत्रालयों में क्या फ़र्क था?
चरण 1: बोर्ड में समूह मिलकर तय करता था, इसलिए ज़िम्मेदार साफ़ नहीं था। चरण 2: मंत्रालय में एक मंत्री ज़िम्मेदार होता है। चरण 3: इसलिए ज़ार जानता था कि गड़बड़ होने पर किससे पूछना है, और आदेश जल्दी चलते थे।
3. समझाओ कि स्पेरांस्की की योजना सिर्फ़ आंशिक रूप से क्यों लागू हुई।
चरण 1: योजना में चुनी हुई दूमा और अलग अदालतें थीं। चरण 2: इनसे ज़ार और सरदारों की शक्ति सीमित होती। चरण 3: ज़्यादातर सरदारों और ज़ार को यह पसंद नहीं था। चरण 4: इसलिए 1810 में सिर्फ़ राज्य परिषद बनी, जो सलाह देती थी। 1812 में स्पेरांस्की हटा दिए गए।
4. 1803 के क़ानून से सौ में दो से भी कम किसान आज़ाद हुए। अगर निजी ज़मीन पर एक करोड़ दास थे, तो ज़्यादा से ज़्यादा कितने आज़ाद हुए?
सौ में 2 यानी 2%। एक करोड़ का 2% = 2,00,000। यानी लगभग दो लाख से कम लोग, जो बहुत थोड़े हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सिकंदर प्रथम ने दासता ख़त्म कर दी। उसने नहीं की; बहुत थोड़े आज़ाद हुए।
- अनौपचारिक समिति (1801-03, दोस्त) और राज्य परिषद (1810, सरकारी संस्था) को मिला देना।
- यह कहना कि स्पेरांस्की की पूरी योजना बनी। सिर्फ़ राज्य परिषद बनी।
- यह भूलना कि सिकंदर सुधार चाहता था पर शक्ति खोना नहीं चाहता था।