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सिकंदर प्रथम के सुधार (1801-1812)

सिकंदर प्रथम 1801 में रूस का ज़ार बना। वह राज्य को आधुनिक बनाना चाहता था, पर अपना अधिकार छोड़ना नहीं चाहता था। दोस्तों की "अनौपचारिक समिति" (1801-03) ने सुधार सोचे। 1802 में पुराने बोर्डों की जगह आठ मंत्रालय बने। 1803 के क़ानून से मालिक फ़िरौती लेकर किसानों को आज़ाद कर सकते थे, पर बहुत कम ने किया। 1809 में स्पेरांस्की ने तीन शक्तियों और चुनी हुई दूमा की योजना बनाई। सिर्फ़ राज्य परिषद (1810) बनी, और 1812 में स्पेरांस्की हटा दिए गए।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1801 में सिकंदर प्रथम ज़ार बना। रूस की सारी शक्ति ज़ार के हाथ में थी, एक ऊँचे टावर की तरह। वह जवान था और यूरोप के नए विचार पढ़ चुका था।
  2. उसे पुराने अफ़सरों पर भरोसा नहीं था। इसलिए उसने चार दोस्तों को मेज़ पर बुलाया। इसे अनौपचारिक समिति कहते हैं। वे चुपचाप मिलकर सुधारों की बात करते थे।
  3. 1802 में पुराने बोर्ड बंद हुए। आठ मंत्रालय आए। हर मंत्री का एक काम था और वह ज़ार को जवाब देता था। काम साफ़ और तेज़ हुआ।
  4. 1809 में मिखाइल स्पेरांस्की ने बड़ी योजना बनाई। एक छत के नीचे तीन शक्तियाँ: चुनी हुई दूमा से क़ानून, सरकार और अदालतें। ऊपर राज्य परिषद।
  5. सिर्फ़ राज्य परिषद (1810) बनी। वह ज़ार को सिर्फ़ सलाह दे सकती थी। दूमा और आज़ाद अदालतें काग़ज़ पर रहीं। 1812 में ज़ार ने स्पेरांस्की को हटा दिया।
  6. अब तुम खेलो: कोई सुधार चुनो और नीले स्तंभ (उम्मीद) और हरे स्तंभ (जो सच में हुआ) का फ़र्क देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

पूरी शक्ति वाले ज़ार को सुधार क्यों चाहिए थे?

उसने देखा कि पुराने बोर्ड और रिश्वत से राज्य धीमा है। सुधार से राज्य यूरोप की तरह मज़बूत हो सकता था।

जो समूह सरकारी नहीं था, वह मायने क्यों रखता है?

ज़ार वहाँ विचार आज़मा सकता था, सरदारों को बताने से पहले। वह परीक्षण-कमरा था।

बोर्ड से एक मंत्री बेहतर क्यों है?

साफ़ दिखता है कि ज़िम्मेदार कौन है, और फ़ैसले जल्दी होते हैं। बोर्ड में दोष सब पर और किसी पर नहीं होता।

स्पेरांस्की असल में क्या चाहता था?

तीन अलग शक्तियाँ, संपत्ति वालों की चुनी दूमा, और क़ानून से बँधा ज़ार। ज़ार की उपाधि नहीं जाती।

सिर्फ़ राज्य परिषद ही क्यों बनी?

वह सिर्फ़ सलाह देती थी, इसलिए ज़ार को सीमित नहीं करती थी। बाक़ी करतीं।

क्या सिकंदर प्रथम ने दासों को आज़ाद किया?

नहीं। उसने मालिकों को फ़िरौती लेकर आज़ाद करने की इजाज़त दी, और कम ने किया। छोटा हरा स्तंभ देखो।

सिकंदर प्रथम और बदलाव की चाह

सिकंदर प्रथम ने 1801 से 1825 तक रूस पर राज किया। उसके पिता पावेल प्रथम की हत्या कुछ सरदारों ने की थी, और सिकंदर 23 साल की उम्र में गद्दी पर बैठा। उसे एक स्विस शिक्षक ने पढ़ाया था, जो क़ानून और आज़ादी के विचारों को मानता था।

उसने देखा कि पुराना राज्य धीमा है। कई अफ़सर रिश्वत लेते थे। ज़्यादातर लोग किसान थे, जो दास (serf) थे, यानी ज़मीन और मालिक से बँधे हुए। वह कुछ सुधारना चाहता था, पर अकेला शासक भी बना रहना चाहता था। यही उसके शुरुआती सालों की पहेली है: ऊपर से बदलाव, पर शक्ति बाँटे बिना।

अनौपचारिक समिति (1801-1803)

अनौपचारिक समिति ज़ार के जवान दोस्तों का छोटा निजी समूह थी: पावेल स्त्रोगानोव, विक्तोर कोचूबे, निकोलाई नोवोसिल्त्सेव और पोलैंड के सरदार आदम चार्तोरिस्की। "अनौपचारिक" का मतलब है कि क़ानून में इसकी कोई जगह नहीं थी। यह न कोई मंत्रालय थी, न परिषद।

वे दासता, संविधान और बेहतर शासन की बात करते थे। उनके ज़्यादातर बड़े विचार बातों तक रहे, क्योंकि बहुत से सरदार इनके ख़िलाफ़ थे। पर इसी समूह ने आगे के व्यावहारिक बदलाव शुरू किए।

1802: बोर्डों की जगह मंत्रालय

पीटर महान के समय सरकार का काम बोर्डों (कॉलेजियम) से चलता था। वहाँ समूह मिलकर फ़ैसला करता था, और ग़लती पर साफ़ पता नहीं चलता था कि ज़िम्मेदार कौन है। 1802 में सिकंदर ने आठ मंत्रालय बनाए: जैसे युद्ध, नौसेना, विदेश, न्याय, वित्त और गृह। हर मंत्रालय में एक मंत्री था। साझा बातों के लिए मंत्रियों की समिति मिलती थी।

इसे एक-व्यक्ति की ज़िम्मेदारी कहते हैं: एक आदमी एक क्षेत्र का जवाबदेह है। आज भी ज़्यादातर सरकारें ऐसे ही चलती हैं।

किसान, स्कूल और विश्वविद्यालय

आज़ाद किसान क़ानून (1803)। कोई मालिक चाहे तो अपने दासों को ज़मीन के साथ आज़ाद कर सकता था, अगर वे तय की गई रक़म दें। यह धीमा क़दम था, किसी पर ज़बरदस्ती नहीं थी। पूरे शासन में सौ में से दो किसान भी आज़ाद नहीं हुए। बाल्टिक इलाक़ों में दासता ख़त्म की गई (1816-1819), पर बिना ज़मीन के।

शिक्षा (1802-1804)। शिक्षा मंत्रालय बना। रूस को छह शिक्षा-ज़िलों में बाँटा गया। स्कूलों की चार सीढ़ियाँ थीं: गाँव का स्कूल, ज़िला स्कूल, प्रांत का जिम्नेज़ियम और विश्वविद्यालय। खार्कोव और कज़ान में नए विश्वविद्यालय खुले, और मॉस्को, विल्ना और दोर्पात वाले मज़बूत हुए। 1804 के नरम सेंसरशिप क़ानून से लेखक कुछ ज़्यादा आज़ादी से छाप सकते थे।

स्पेरांस्की की योजना (1809) और राज्य परिषद (1810)

मिखाइल स्पेरांस्की गाँव के पादरी का बेटा था। अपनी बुद्धि से वह ज़ार का मुख्य सलाहकार बना। 1809 में उसने राज्य की योजना लिखी: तीन शक्तियाँ (क़ानून बनाना, शासन चलाना, अदालतें) अलग-अलग, और संपत्ति वालों की चुनी हुई राज्य दूमा। मतदान गाँव से देश तक चार सीढ़ियों में होता। ज़ार ऊपर रहता, पर क़ानून से बँधा।

इस योजना से बहुत से सरदार डर गए। 1810 में सिर्फ़ राज्य परिषद बनी। यह बड़े लोगों की सभा थी जो नए क़ानूनों पर सलाह देती थी। स्पेरांस्की ने 1809 में यह नियम भी बनवाया कि ऊँचे पद के अफ़सर परीक्षा पास करें या डिग्री रखें। इससे दरबारी सरदार नाराज़ हुए। नेपोलियन से युद्ध से पहले सरदार कहते थे कि वह फ़्रांस के बहुत क़रीब है। मार्च 1812 में ज़ार ने उसे निज़नी नोवगोरोद और फिर पेरम भेज दिया। 1816 के बाद वह सेवा में लौटा, पर सुधारक के रूप में नहीं।

सुधार क्यों रुके? नतीजे

फिर भी बदलाव मायने रखते थे: मंत्रालय सौ साल से ज़्यादा चले, राज्य परिषद 1917 तक रही, और स्कूलों से एक पढ़ा-लिखा वर्ग बना। इसके कुछ जवान आगे चलकर डिसेम्ब्रिस्ट बने।

ख़ुद करके देखो: सुधारों का रिपोर्ट-कार्ड

  1. 3D में: आख़िरी चरण में हर सुधार चुनो और नीले व हरे स्तंभ के फ़र्क के लिए एक शब्द लिखो: "कोई नहीं", "छोटा", "बड़ा", "बहुत बड़ा"।
  2. अभिनय: घर पर एक ज़ार बने, एक सरदार, एक दास। क्या दासों को आज़ाद करना चाहिए? दो मिनट बहस करो। सबसे ज़्यादा नुक़सान किसका?
  3. चित्र बनाओ: 1801, 1802, 1803, 1809, 1810, 1812 की समय-रेखा, हर साल के लिए एक चित्र।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. अनौपचारिक समिति को "अनौपचारिक" क्यों कहते थे?

चरण 1: इसे क़ानून से नहीं बनाया गया था। चरण 2: यह ज़ार के दोस्तों का निजी समूह थी। चरण 3: इसलिए यह बड़े विचारों पर बात कर सकती थी, पर फ़ैसले नहीं ले सकती थी। फ़ैसला सिर्फ़ ज़ार करता था।

2. पुराने बोर्डों और 1802 के मंत्रालयों में क्या फ़र्क था?

चरण 1: बोर्ड में समूह मिलकर तय करता था, इसलिए ज़िम्मेदार साफ़ नहीं था। चरण 2: मंत्रालय में एक मंत्री ज़िम्मेदार होता है। चरण 3: इसलिए ज़ार जानता था कि गड़बड़ होने पर किससे पूछना है, और आदेश जल्दी चलते थे।

3. समझाओ कि स्पेरांस्की की योजना सिर्फ़ आंशिक रूप से क्यों लागू हुई।

चरण 1: योजना में चुनी हुई दूमा और अलग अदालतें थीं। चरण 2: इनसे ज़ार और सरदारों की शक्ति सीमित होती। चरण 3: ज़्यादातर सरदारों और ज़ार को यह पसंद नहीं था। चरण 4: इसलिए 1810 में सिर्फ़ राज्य परिषद बनी, जो सलाह देती थी। 1812 में स्पेरांस्की हटा दिए गए।

4. 1803 के क़ानून से सौ में दो से भी कम किसान आज़ाद हुए। अगर निजी ज़मीन पर एक करोड़ दास थे, तो ज़्यादा से ज़्यादा कितने आज़ाद हुए?

सौ में 2 यानी 2%। एक करोड़ का 2% = 2,00,000। यानी लगभग दो लाख से कम लोग, जो बहुत थोड़े हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सिकंदर प्रथम ज़ार बना:
2. 1802 में कितने मंत्रालय बने?
3. तीन शक्तियों वाले राज्य की 1809 की योजना किसने लिखी?
4. स्पेरांस्की की योजना का कौन सा हिस्सा सच में बना?
5. 1803 के आज़ाद किसान क़ानून ने क्या इजाज़त दी?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिकंदर प्रथम के सुधार क्या थे?

आठ मंत्रालय (1802), नई स्कूल-व्यवस्था और विश्वविद्यालय, आज़ाद किसान क़ानून (1803), और 1809 की स्पेरांस्की-योजना के बाद राज्य परिषद (1810)।

अनौपचारिक समिति में कौन थे?

ज़ार के चार जवान दोस्त: स्त्रोगानोव, कोचूबे, नोवोसिल्त्सेव और चार्तोरिस्की।

क्या यह विषय कक्षा 8 में आता है?

यह रूस के इतिहास की कक्षा 8 (सिकंदर प्रथम का समय) में आता है और 1800 के दशक के रूस वाले विश्व-इतिहास के पाठ्यक्रमों में भी काम आता है।

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