1812 से पहले रूस की विदेश नीति
सिकंदर प्रथम ने पहले फ़्रांस से शांति रखने की कोशिश की। पर 1805 में वह ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया के साथ नेपोलियन के ख़िलाफ़ युद्ध में शामिल हुआ (तीसरा गठबंधन)। नेपोलियन ने ऑस्टरलिट्ज़ (दिसंबर 1805) में बड़ी जीत पाई। अगले युद्ध (1806-07) में आइलाउ और फ़्रीडलैंड की लड़ाइयाँ रूस की जीत के बिना ख़त्म हुईं।
जुलाई 1807 में दोनों सम्राट नेमन नदी पर एक बेड़े (राफ़्ट) पर मिले और तिलसित की संधि की। रूस ने महाद्वीपीय नाकेबंदी में शामिल होने का वादा किया, यानी ब्रिटेन से व्यापार बंद। इससे रूसी ज़मींदारों को नुक़सान हुआ जो ब्रिटेन को अनाज और लकड़ी बेचते थे। बहुत से सरदार इस संधि से नाख़ुश थे।
रूस ने दूसरे युद्धों में भी ज़मीन पाई: स्वीडन से फ़िनलैंड (1808-09; वह ज़ार के अधीन ग्रैंड डची बना), ऑटोमन साम्राज्य से बेस्साराबिया (बुखारेस्ट संधि, मई 1812) और फ़ारस से काकेशस की कुछ ज़मीन (गुलिस्तान संधि, 1813)।
1812 में युद्ध क्यों शुरू हुआ
1810 तक दोनों साम्राज्य दूर होने लगे। नाकेबंदी से नुक़सान के कारण रूस फिर ब्रिटेन से व्यापार करने लगा। नेपोलियन ग़ुस्से में था और उसे पोलैंड में अपने इलाक़ों के पास रूस की ताक़त की चिंता भी थी। जून 1812 में (हमारे कैलेंडर से 24 जून) उसने नेमन पार की, पहली लहर में लगभग 4,50,000 सैनिक और बाद में और, कई देशों से। पश्चिमी रूसी सेनाओं में लगभग 2,00,000 थे, दो सेनापतियों में बँटे: बार्कले दे तोली और बाग्रेशन।
तारीख़ों पर ध्यान: रूस में तब जूलियन कैलेंडर चलता था, जो हमारे से 12 दिन पीछे है। इस पाठ में नई तिथि (हमारे कैलेंडर की) दी गई है।
रूसी योजना: पीछे हटो, रसद जलाओ, इंतज़ार करो
रूसी सेनापतियों ने तुरंत लड़ाई नहीं की। वे देश के भीतर पीछे हटते गए, खाना साथ ले गए और जो नहीं ले जा सके, जला दिया। इसे कभी-कभी झुलसी धरती की नीति कहते हैं। नेपोलियन के सैनिक लंबे गर्म दिनों में चले, खाना कम था, कई बीमार पड़े या भाग गए। स्मोलेंस्क में (अगस्त) भारी लड़ाई हुई और शहर छिन गया। बहुत से रूसी नाराज़ थे कि सेना पीछे ही हट रही है, इसलिए ज़ार ने अनुभवी मिखाइल क्यूतुज़ोव को प्रधान सेनापति बनाया।
बोरोदिनो (7 सितंबर 1812)
मॉस्को से लगभग 110 किमी पश्चिम में बोरोदिनो गाँव के पास क्यूतुज़ोव ने डटकर लड़ने का फ़ैसला किया। लगभग 1,20,000 रूसी और लगभग 1,30,000 फ़्रांसीसी और साथी सैनिक भिड़े। एक दिन की भारी लड़ाई के बाद दोनों पक्षों ने हज़ारों-हज़ार लोग खोए (अनुमान दोनों के लगभग 30,000 से 45,000)।
नेपोलियन मैदान पर टिका रहा पर रूसी सेना को तोड़ नहीं सका। क्यूतुज़ोव व्यवस्था से पीछे हटा और सेना बचाई। इसीलिए दोनों पक्षों ने बोरोदिनो को अपनी सफलता कहा। नेपोलियन के लिए यह बहुत महँगा था, क्योंकि वह घर से दूर था और नुक़सान की भरपाई नहीं कर सकता था।
मॉस्को और तरुतिनो
क्यूतुज़ोव ने सेना बचाने के लिए मॉस्को छोड़ दिया। नेपोलियन लगभग 14 सितंबर को ख़ाली शहर में आया। जल्दी ही बड़ी आगें लगीं और ज़्यादातर शहर जल गया। नेपोलियन इंतज़ार करता रहा कि ज़ार शांति माँगे, पर सिकंदर ने मना कर दिया।
उधर क्यूतुज़ोव सेना को दक्षिण-पश्चिम में तरुतिनो के शिविर ले गया। वहाँ सेना को खाना मिला और नए सैनिक जुड़े। सेना की मदद छापामारों (partisans) ने भी की: किसान और सैनिकों के छोटे दल जो फ़्रांसीसियों की रसद-टुकड़ियों पर हमला करते थे।
वापसी और ग्रैंड आर्मी का अंत
19 अक्टूबर को नेपोलियन ने मॉस्को छोड़ा। रूसियों ने दक्षिण का रास्ता रोक दिया, इसलिए फ़्रांसीसी उसी उजड़े रास्ते से लौटे जिससे आए थे। सर्दी जल्दी आ गई, गहरी बर्फ़ के साथ। सैनिक और घोड़े ठंड और भूख से मरे। कज़ाक और छापामार पीछे छूटे सैनिकों पर हमला करते थे। नवंबर के अंत में फ़्रांसीसियों ने हमले के बीच बेरेज़िना नदी पार की और हज़ारों और खोए। दिसंबर में नेपोलियन सेना छोड़कर पेरिस चला गया। सेना का बहुत छोटा हिस्सा ही लौटा। रूस में आए 6,00,000 से ज़्यादा लोगों में से ज़्यादातर मरे, पकड़े गए या भाग गए।
1813-1814 के विदेशी अभियान और पवित्र गठबंधन
रूसी सेना सीमा पर नहीं रुकी। क्यूतुज़ोव अप्रैल 1813 में चल बसा, पर रूस प्रशिया के साथ, फिर ऑस्ट्रिया, स्वीडन और ब्रिटेन के साथ जुड़ा। अक्टूबर 1813 में साथियों ने नेपोलियन को लाइपज़िग में हराया, जिसे "राष्ट्रों की लड़ाई" कहते हैं, उस पूरे दौर की सबसे बड़ी लड़ाई। मार्च 1814 में रूसी और साथी सैनिक पेरिस में घुसे, और अप्रैल में नेपोलियन ने गद्दी छोड़ी। उसकी छोटी वापसी ("सौ दिन") और वाटरलू (जून 1815) की हार के बाद बड़ी ताक़तें वियना कांग्रेस में मिलीं। फिर सिकंदर प्रथम ने ऑस्ट्रिया और प्रशिया के साथ पवित्र गठबंधन (1815) रखा, तीन शासकों का वादा कि वे पुराने राजसिंहासनों और धर्म की रक्षा करेंगे। अब रूस यूरोप की सबसे ताक़तवर ज़मीनी शक्ति था।
ख़ुद करके देखो: घटती सेना
- 3D में: आख़िरी चरण में नेमन से बेरेज़िना तक स्लाइडर चलाओ। लाल संख्याएँ लिखो: 100, ... , 8। किस पड़ाव पर सेना सबसे ज़्यादा घटी?
- दौड़ का खेल: दो दोस्त दौड़ें। एक के पास भारी बैग हो और वह खा न सके। दूसरा घर की ओर धीरे-धीरे पीछे चल सके। 10 मिनट बाद कौन ज़्यादा मज़बूत है?
- चित्र बनाओ: एक लंबी सड़क पर 5 पड़ाव (नेमन, स्मोलेंस्क, बोरोदिनो, मॉस्को, बेरेज़िना) और घटते डिब्बे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तिलसित संधि: जुलाई 1807, रूस और नेपोलियन में शांति; रूस महाद्वीपीय नाकेबंदी में शामिल
- लाभ: फ़िनलैंड (1809), बेस्साराबिया (1812)
- नेपोलियन ने नेमन पार की: 24 जून 1812 (नई तिथि)
- बोरोदिनो: 7 सितंबर 1812 (नई तिथि); सेनापति क्यूतुज़ोव
- मॉस्को: फ़्रांसीसी लगभग 14 सितंबर को आए; फिर आग
- लाइपज़िग: अक्टूबर 1813; पेरिस: मार्च 1814; पवित्र गठबंधन: 1815
हल किए गए उदाहरण
1. जून 1812 में रूस ने सीमा पर बड़ी लड़ाई क्यों नहीं लड़ी?
चरण 1: नेपोलियन की सेना बहुत बड़ी थी। चरण 2: शुरू की बड़ी लड़ाई रूसी सेनाओं को तबाह कर सकती थी। चरण 3: इसलिए रूसी पीछे हटे, फ़्रांसीसियों को रसद से दूर चलवाया और अपनी सेना बचाई।
2. बोरोदिनो में कौन जीता? समझाओ।
चरण 1: अंत में मैदान फ़्रांसीसियों के पास रहा। चरण 2: पर रूसी सेना टूटी नहीं और क्यूतुज़ोव व्यवस्था से पीछे हटा। चरण 3: दोनों ने हज़ारों खोए। चरण 4: इसलिए इतिहासकार कहते हैं कि साफ़ विजेता नहीं था, पर नेपोलियन को ज़्यादा चोट लगी क्योंकि वह अपने आदमी बदल नहीं सकता था।
3. 4,00,000 सैनिकों का दल घटकर 25,000 रह गया। कितना भाग खोया?
चरण 1: खोए = 4,00,000 - 25,000 = 3,75,000। चरण 2: भिन्न = 3,75,000 / 4,00,000 = 15/16। यानी हर 16 में से लगभग 15 आदमी खोए (तबाही के पैमाने का एक उदाहरण)।
4. लौटते समय नेपोलियन की सेना बिखर क्यों गई? दो कारण दो।
कारण 1: ठंड, बर्फ़, खाने और घोड़ों की कमी। कारण 2: कज़ाकों और छापामारों के हमले और रास्ते की हारें जैसे बेरेज़िना। सेना मॉस्को से निकलते समय ही कमज़ोर थी।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि रूसी हर लड़ाई जीते। वे ऑस्टरलिट्ज़ और फ़्रीडलैंड हारे और मॉस्को छोड़ा।
- यह लिखना कि अकेली ठंड ने सेना को ख़त्म किया। भूख, बीमारी और हमले गर्मी से ही शुरू थे, बर्फ़ से पहले।
- तारीख़ें मिलाना: रूस में जूलियन कैलेंडर था; बोरोदिनो 26 अगस्त (पुरानी तिथि) = 7 सितंबर (नई तिथि)।
- यह सोचना कि युद्ध रूस की सीमा पर ख़त्म हो गया। वह लाइपज़िग और पेरिस तक चला।