उदार इटली का संकट और फ़ासीवाद का उदय, 1915–1922
उदार इटली यानी एकीकरण के बाद की संसदीय व्यवस्था। बहुत से लोग उस पर भरोसा नहीं करते थे और कैथोलिक चर्च भी उससे नाराज़ था।
- युद्ध (1915–18): लगभग 6 लाख इतालवी सैनिक मरे; कैपोरेत्तो (1917) की हार से सेना शर्मिंदा हुई। युद्ध का ख़र्च क़र्ज़ और छापे गए नोटों से चला।
- 'अधूरी जीत': शांति वार्ता में इटली को फ़्यूमे और डालमेशिया का बड़ा हिस्सा नहीं मिला। कवि दान्नुंज़ियो ने 1919 में फ़्यूमे पर क़ब्ज़ा करके सरकार की कमज़ोरी दिखा दी।
- आर्थिक संकट: महँगाई, बेरोज़गारी और क़र्ज़। दो लाल साल (1919–20) में मज़दूरों ने कारख़ानों और किसानों ने ज़मीनों पर क़ब्ज़ा किया।
- राजनीतिक टूटन: नए बड़े दलों (समाजवादी और कैथोलिक पॉपुलर पार्टी) के कारण स्थिर बहुमत नहीं बन पाया; सरकारें जल्दी गिरीं।
- फ़ासीवाद का उदय: मुसोलिनी ने 1919 में आंदोलन शुरू किया। 1920 से दस्तों (स्क्वाद्रिस्ती) ने समाजवादियों पर हमले किए और ज़मींदारों व मिल मालिकों ने उन्हें पैसा दिया। 1921 में फ़ासीवादियों को 35 सीटें मिलीं और दल बना।
सत्ता में मुसोलिनी: फ़ासीवादी राज्य का निर्माण, 1922–1926
अक्टूबर 1922 में फ़ासीवादियों ने रोम कूच की धमकी दी। राजा विक्टर इमैनुएल III ने मार्शल लॉ से इनकार किया और मुसोलिनी को सरकार बनाने बुलाया। वह क़ानूनी तरीक़े से, गठबंधन के मुखिया के रूप में सत्ता में आया।
- एसर्बो क़ानून (1923): सबसे ज़्यादा वोट (कम से कम 25%) पाने वाले दल को दो-तिहाई सीटें।
- 1924 का चुनाव: हिंसा और नए क़ानून से फ़ासीवादी सूची को बड़ा बहुमत मिला।
- मात्तेओत्ती संकट (1924): हिंसा के ख़िलाफ़ बोलने वाले समाजवादी नेता जियाकोमो मात्तेओत्ती की फ़ासीवादियों ने हत्या कर दी। विपक्षी सांसद संसद से बाहर चले गए (एवेंटाइन अलगाव), पर राजा ने कुछ नहीं किया।
- 1925–26 के क़ानून: मुसोलिनी सिर्फ़ राजा के प्रति जवाबदेह बना, प्रेस पर सेंसर, दूसरे दलों और आज़ाद मज़दूर संघों पर रोक, और चुने हुए मेयरों की जगह नियुक्त अफ़सर। इटली एक-दलीय राज्य बन गया।
फ़ासीवादी समाज और अर्थव्यवस्था, 1926–1940
- प्रचार और इल दूचे की पूजा: 'मुसोलिनी हमेशा सही है' जैसे नारे; फ़िल्मों, रेडियो और तस्वीरों में उसे मज़बूत और अथक दिखाया गया।
- पुलिस राज्य: गुप्त पुलिस (OVRA), विशेष अदालतें और आलोचकों को दूर द्वीपों पर भेजना (कोन्फ़ीनो)। दमन असली था, पर स्तालिन के सोवियत संघ या नाज़ी जर्मनी से कम जानलेवा।
- अर्थव्यवस्था: कॉरपोरेट राज्य में मालिक और मज़दूर राज्य के नियंत्रण में; हड़ताल पर रोक। अनाज की लड़ाई से गेहूँ बढ़ा; लीरा की लड़ाई से मुद्रा मज़बूत रही पर निर्यात को नुक़सान हुआ। 1929 के बाद राज्य ने बैंक और कंपनियाँ बचाईं (IRI)। बाद में आत्मनिर्भरता (autarky) की कोशिश।
- समाज: युवा संगठन (बलिल्ला), दोपोलावोरो मनोरंजन क्लब, 'जन्म की लड़ाई' और महिलाओं के लिए पारंपरिक भूमिका। लैटरन समझौतों (1929) से पोप से सुलह हुई और वेटिकन सिटी बनी। 1938 में यहूदियों के ख़िलाफ़ नस्ली क़ानून बने।
फ़ासीवादी विदेश नीति, 1926–1940
मुसोलिनी इटली को महाशक्ति बनाना चाहता था और भूमध्य सागर को 'हमारा सागर'।
- राजनेता की छवि (1920 का दशक–1935): कोर्फ़ू घटना (1923); लोकार्नो संधियों (1925) पर दस्तख़त; 1934 में हिटलर को ऑस्ट्रिया लेने से रोकने के लिए सेना भेजी। स्ट्रेसा मोर्चा (1935) ब्रिटेन और फ्रांस के साथ जर्मनी के हथियारीकरण के ख़िलाफ़।
- साम्राज्य: 1935–36 में इटली ने अबीसीनिया (इथियोपिया) पर आधुनिक हथियारों, ज़हरीली गैस समेत, से हमला किया। राष्ट्र संघ के प्रतिबंध कमज़ोर थे, पर उन्होंने मुसोलिनी को हिटलर की ओर धकेला।
- युद्ध की ओर: स्पेनी गृहयुद्ध (1936–39) में सैनिक भेजे, रोम–बर्लिन धुरी (1936), ऑस्ट्रिया पर जर्मन क़ब्ज़ा मान लिया (1938), अल्बानिया पर हमला (1939) और 'स्टील का समझौता' (1939)।
युद्ध में फ़ासीवादी इटली और उसका अंत, 1940–1945
इटली लंबे युद्ध के लिए तैयार नहीं था, पर जून 1940 में, जब फ्रांस गिर रहा था, मुसोलिनी जल्दी फ़ायदे की उम्मीद में कूद पड़ा। यूनान और उत्तरी अफ़्रीका में इतालवी सेना हारी और उसे जर्मन मदद चाहिए थी; रूस में बहुत से सैनिक मारे गए। खाने की कमी हुई और शहरों पर बम गिरे।
जुलाई 1943 में मित्र देश सिसिली में उतरे। फ़ासीवादी महापरिषद ने मुसोलिनी के ख़िलाफ़ वोट दिया, राजा ने उसे हटाकर गिरफ़्तार किया और इटली ने मित्र देशों से संधि की। जर्मन सैनिकों ने मुसोलिनी को छुड़ाया और उत्तर में सालो गणराज्य बनाया। फ़ासीवादियों और पार्टिज़न (प्रतिरोध लड़ाकों) के बीच गृहयुद्ध हुआ। अप्रैल 1945 में पार्टिज़न ने मुसोलिनी को पकड़कर मार दिया और फ़ासीवाद ख़त्म हुआ।
करके देखो: तानाशाही की सीढ़ियाँ पहचानो
इन्हें कार्डों पर लिखो और क्रम में रखो: 'एसर्बो क़ानून', 'रोम कूच', 'मात्तेओत्ती की हत्या', 'दलों पर रोक', 'दस्तों के समाजवादियों पर हमले'। फिर हर कार्ड पर लिखो कि उससे मुसोलिनी की ताक़त कैसे बढ़ी। 3D के चरण 2 और 3 से जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फ़ासीवाद = उग्र राष्ट्रवाद + एक-दलीय राज्य + नेता पूजा + लोकतंत्र और साम्यवाद का विरोध
- फ़ासेस = कुल्हाड़ी के साथ छड़ों का गट्ठर, ताक़त का रोमन चिह्न
- अधूरी जीत = 1919 में ज़मीन के मामले में धोखे की भावना
- स्क्वाद्रिस्ती = हथियारबंद फ़ासीवादी दस्ते (काली कमीज़)
- एसर्बो क़ानून = 25% वोट → दो-तिहाई सीटें
- कॉरपोरेट राज्य = मालिक और मज़दूर राज्य के नियंत्रण में संगठित
- आत्मनिर्भरता (autarky) = आर्थिक रूप से अपने पर निर्भर
- इल दूचे = 'नेता' (मुसोलिनी)
हल किए गए उदाहरण
1. 1922 में मुसोलिनी के प्रधानमंत्री बनने के दो कारण समझाओ।
1) उदार सरकारें कमज़ोर और बँटी हुई थीं, और 'लाल सालों' के बाद बहुत से लोग समाजवादी क्रांति से डरते थे; फ़ासीवादी दस्ते 'व्यवस्था' की ताक़त लगते थे। 2) राजा ने रोम कूच के ख़िलाफ़ सेना से इनकार किया और मुसोलिनी को सरकार बनाने बुलाया, यानी ऊपर के लोगों ने उसे क़ानूनी रास्ते से आने दिया।
2. मात्तेओत्ती संकट ने मुसोलिनी को तानाशाह बनने में कैसे मदद की?
हत्या से पहले वह डगमगाया, पर विरोधी कुछ करने के बजाय संसद से बाहर चले गए (एवेंटाइन अलगाव), और राजा ने उसे पद पर बनाए रखा। जनवरी 1925 में मुसोलिनी ने ज़िम्मेदारी ली और फिर दलों पर रोक व प्रेस पर नियंत्रण के क़ानून बनाए। संकट ने दिखाया कि उसे कोई रोकने वाला नहीं।
3. फ़ासीवादी आर्थिक नीतियाँ कितनी सफल थीं?
कुछ लक्ष्य पूरे हुए: गेहूँ का उत्पादन बढ़ा और मंदी में IRI ने बैंक बचाए। पर मज़बूत लीरा से निर्यात घटा, कॉरपोरेट राज्य ज़्यादातर मालिकों के काम आया, असली मज़दूरी घटी और आत्मनिर्भरता इटली को युद्ध के लिए तैयार नहीं कर पाई। कुल मिलाकर नतीजे सीमित रहे।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि मुसोलिनी ने हिंसक तख़्तापलट से सत्ता ली। रोम कूच एक धमकी था; राजा ने उसे क़ानूनी रूप से नियुक्त किया।
- यह मानना कि इटली 1922 में ही तानाशाही बन गया। इसमें 1925–26 तक का समय लगा।
- फ़ासीवादी इटली और नाज़ी जर्मनी को एक जैसा मानना। इटली में आतंक कम था, और राजा व चर्च की कुछ स्वतंत्रता बची रही।
- यह मानना कि लैटरन समझौतों का मतलब पोप ने हर फ़ासीवादी नीति का समर्थन किया। इनसे चर्च–राज्य संबंध सुलझे; तनाव बना रहा।