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रूढ़िवादी मोड़ और डिसेम्ब्रिस्ट

1815 के बाद सिकंदर प्रथम सुधार से सख़्त व्यवस्था की ओर मुड़ गया। अरकचेयेव सैनिक बस्तियाँ चलाता था, स्कूलों और किताबों पर नज़र थी और गुप्त संस्थाओं पर 1822 में रोक लगी। यूरोप देख चुके जवान अफ़सरों ने गुप्त संस्थाएँ बनाईं। उत्तरी समाज (मुरावयोव, रेलेयेव, त्रुबेत्स्कोय) संवैधानिक राजतंत्र चाहता था; दक्षिणी समाज (पेस्तेल) गणराज्य। सिकंदर की मृत्यु पर उन्होंने 14 (26) दिसंबर 1825 को सेनेट चौक में विद्रोह किया। विद्रोह एक दिन में कुचला गया; पाँच नेताओं को फाँसी हुई और बहुतों को साइबेरिया भेजा गया।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1812 तक ज़ार सुधार की तरफ़ झुका था। नेपोलियन के बाद उसे यूरोप में क्रांति का डर लगा और वह व्यवस्था और सख़्त नियंत्रण की ओर मुड़ गया।
  2. सैनिक बस्तियों में फ़ौजी जीवन और खेती साथ थे। सिपाही सीधी क़तारों के घरों में कड़े नियमों में रहते थे। अरकचेयेव इन्हें चलाता था। बहुत लोग इनसे नफ़रत करते थे।
  3. स्कूलों और विश्वविद्यालयों पर नज़र रखी गई और किताबों की सेंसरशिप हुई। 1822 में गुप्त संस्थाओं पर रोक लगी। आज़ाद सोच पर ताला लग गया, जैसे किताबों पर ताला।
  4. जवान अफ़सरों ने 1813-14 में यूरोप देखा था। उन्होंने गुप्त संस्थाएँ बनाईं। उत्तरी समाज (नीला) और दक्षिणी समाज (नारंगी) दोनों संविधान और दासता का अंत चाहते थे।
  5. सिकंदर 1825 के अंत में चल बसा। 14 (26) दिसंबर को उत्तरी समाज लगभग 3,000 सैनिकों को सेनेट चौक ले गया। सामने 9,000 से ज़्यादा सरकारी सैनिक थे। विद्रोह एक दिन में विफल हो गया।
  6. अब तुम खेलो: कोई विषय चुनो और उत्तरी और दक्षिणी समाज की योजनाओं की तुलना करो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सुधार पसंद करने वाला ज़ार सख़्त क्यों हो गया?

यूरोप देखकर उसे डर हुआ कि क्रांति रूस में आ सकती है। 1820 के दशक की बग़ावतों ने डर बढ़ाया।

सैनिक बस्तियों से नफ़रत क्यों थी?

सैनिक-किसानों के पास आज़ादी नहीं थी: हर दिन तय था और सज़ाएँ कड़ी थीं।

राज्य स्कूलों और किताबों पर नज़र क्यों रखता था?

उसे लगा नए विचार बग़ावत करा सकते हैं, इसलिए उसने शिक्षक और किताबें जाँचीं।

किसानों ने नहीं, अफ़सरों ने बग़ावत क्यों सोची?

अफ़सर पढ़े-लिखे थे और 1813-14 में यूरोप देख चुके थे। किसानों के पास पढ़ने या मिलने का तरीक़ा नहीं था।

विद्रोह एक दिन में क्यों विफल हो गया?

विद्रोही कम थे, चौक में उनका नेता नहीं था, और वे आगे नहीं बढ़े। सरकार के पास ज़्यादा सैनिक और तोपें थीं।

क्या उत्तर और दक्षिण एक ही चीज़ें चाहते थे?

दोनों संविधान और दासता का अंत चाहते थे। वे इस पर अलग थे कि ज़ार रहे या नहीं और किसानों को कितनी ज़मीन मिले।

व्यवस्था की ओर मोड़ क्यों?

1812-15 के बाद सिकंदर प्रथम की शोहरत चरम पर थी, पर वह बदल चुका था। उसने देखा कि फ़्रांस की क्रांतियाँ युद्ध में ख़त्म हुईं। वह धार्मिक हो गया और नए विचारों पर शक करने लगा। 1820 के दशक की शुरुआत में स्पेन, इटली और यूनान की बग़ावतों और उसकी अपनी सेम्योनोव्स्की रेजिमेंट की बग़ावत (1820) ने उसका डर बढ़ा दिया। अब उसका लक्ष्य था चीज़ों को जैसा है वैसा रखना। ऐसी नीति को रूढ़िवादी (conservative) कहते हैं। हालाँकि पोलैंड को उसके शासन में 1815 से संविधान मिला रहा।

अरकचेयेव और सैनिक बस्तियाँ

काउंट अलेक्सेई अरकचेयेव ज़ार का सख़्त सहायक था। वह सैनिक बस्तियाँ चलाता था, जो लगभग 1810 में शुरू हुईं और 1816 के बाद बढ़ीं। सैनिक और उनके परिवार नमूने के गाँवों में रहते, खेती करते और अफ़सरों के अधीन अभ्यास करते थे। मक़सद सेना को सस्ता रखना था। पर जीवन कठिन था: काम, कपड़ों, यहाँ तक कि दाढ़ी की कटाई के भी एक जैसे नियम। कुछ जगह बग़ावतें हुईं (सबसे बड़ी चूगूएव में 1819 में) और उन्हें सख़्ती से दबाया गया। "अरकचेयेवशचिना" शब्द सख़्त और संकीर्ण शासन का पर्याय बन गया।

स्कूल, किताबें और गुप्त संस्थाएँ

लगभग 1817 से शिक्षा को धर्म के साथ मिलाकर एक संयुक्त आध्यात्मिक और शिक्षा मंत्रालय बनाया गया। मैग्नित्स्की (कज़ान) और रूनिच (सेंट पीटर्सबर्ग) जैसे अफ़सरों ने विश्वविद्यालयों से "ख़तरनाक" विचार पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसरों को हटाया, और सेंसरशिप सख़्त हो गई। 1822 में ज़ार ने गुप्त संस्थाओं और मेसनिक लॉजों पर रोक लगाई, और अफ़सरों से लिखवाया गया कि वे सदस्य नहीं हैं।

डिसेम्ब्रिस्ट कौन थे और क्या चाहते थे?

डिसेम्ब्रिस्ट ज़्यादातर जवान सरदार और सेना के अफ़सर थे, जैसे पेस्तेल, रेलेयेव, मुरावयोव भाई और त्रुबेत्स्कोय। उन्होंने 1813-14 में यूरोप का आज़ाद जीवन देखा था और अपने देश की दासता पर शर्म महसूस की। उन्होंने गुप्त समूह बनाए: मुक्ति संघ (1816), कल्याण संघ (1818), और 1821-22 से दो मुख्य समूह।

14 (26) दिसंबर 1825: सेनेट चौक

सिकंदर प्रथम नवंबर 1825 में तगनरोग में चल बसा, उसकी कोई संतान नहीं थी। उसके भाई कॉन्स्टेंटिन ने पहले ही अपना अधिकार छोड़ दिया था, पर यह सबको पता नहीं था, और बहुतों को पहले कॉन्स्टेंटिन की शपथ दिलाई गई। फिर छोटे भाई निकोलस ने 14 दिसंबर (पुरानी तिथि) को शपथ ली। उत्तरी समाज ने इस उलझन का फ़ायदा उठाया। लगभग 3,000 सैनिक सेंट पीटर्सबर्ग के सेनेट चौक पहुँचे और "कॉन्स्टेंटिन और संविधान" के नारे लगाए। उनके चुने नेता राजकुमार त्रुबेत्स्कोय नहीं आए। 9,000 से ज़्यादा सरकारी सैनिकों ने चौक को घेर लिया। काख़ोव्स्की की गोली से गवर्नर मिलोराडोविच मारा गया। शाम को तोपें चलीं और विद्रोह ख़त्म हुआ। जनवरी 1826 में दक्षिण में चेर्निगोव रेजिमेंट का छोटा विद्रोह भी कुचला गया।

सज़ा और महत्व

लगभग 120 लोगों पर मुक़दमा चला। पाँच नेताओं (पेस्तेल, रेलेयेव, सेर्गेई मुरावयोव-अपोस्तोल, बेस्तुज़ेव-र्यूमिन और काख़ोव्स्की) को जुलाई 1826 में फाँसी हुई। बहुतों को साइबेरिया भेजा गया और कुछ की पत्नियाँ पतियों के साथ गईं। निकोलस प्रथम सख़्त शासक बना।

असफल क्यों हुआ? लोग कम थे, योजना कमज़ोर थी, नेता नहीं आया, और आम लोग और ज़्यादातर सैनिक साथ नहीं थे। क्यों मायने रखता है? यह रूस में संविधान लाने और दासता ख़त्म करने की पहली खुली कोशिश थी। इसने बाद के चिंतकों और आंदोलनकारियों को प्रभावित किया और क्रांतिकारी आंदोलन की शुरुआत की तरह याद की गई।

ख़ुद करके देखो: उत्तर या दक्षिण?

  1. 3D में: आख़िरी चरण में हर विषय दबाओ और दोनों योजनाओं का एक फ़र्क लिखो।
  2. बहस: कक्षा का आधा हिस्सा उत्तर बने और आधा दक्षिण। बहस करो कि रूस को संविधान वाला राजा चाहिए या कोई राजा नहीं।
  3. अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो: चरण 4 खुलने से पहले सोचो किस तरफ़ ज़्यादा सैनिक हैं। फिर संख्याएँ देखो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 1815 के बाद के रूढ़िवादी मोड़ की दो विशेषताएँ बताओ।

विशेषता 1: अरकचेयेव के अधीन सैनिक बस्तियाँ, कड़े नियमों के साथ। विशेषता 2: विश्वविद्यालयों पर कड़ी नज़र और सख़्त सेंसरशिप; 1822 में गुप्त संस्थाओं पर रोक।

2. पेस्तेल और निकिता मुरावयोव के लक्ष्यों में क्या फ़र्क था?

चरण 1: मुरावयोव संवैधानिक राजतंत्र चाहता था: ज़ार रहे पर संविधान से बँधा। चरण 2: पेस्तेल गणराज्य चाहता था: कोई ज़ार नहीं। चरण 3: पेस्तेल आधी ज़मीन सबके लिए बाँटना चाहता था, जबकि मुरावयोव किसानों को सिर्फ़ छोटा खेत देना चाहता था।

3. 3,000 विद्रोहियों के सामने 9,000 सरकारी सैनिक थे। सैनिकों और विद्रोहियों का अनुपात क्या था?

9,000 / 3,000 = 3। यानी हर विद्रोही पर कम से कम 3 सरकारी सैनिक थे। नेता के न आने से नतीजा साफ़ था।

4. डिसेम्ब्रिस्ट विद्रोह के असफल होने के दो कारण बताओ।

कारण 1: लोग कम थे और जनता या ज़्यादातर सेना का साथ नहीं था। कारण 2: कमज़ोर योजना; चुना नेता नहीं आया और विद्रोही चौक में बस खड़े रहे। सरकार के पास कहीं ज़्यादा सैनिक भी थे।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सैनिक बस्तियाँ कौन चलाता था?
2. पावेल पेस्तेल किस समाज का नेता था?
3. सेंट पीटर्सबर्ग का डिसेम्ब्रिस्ट विद्रोह कब हुआ?
4. उत्तरी समाज मुख्य रूप से क्या चाहता था?
5. पेस्तेल की रूस्काया प्राव्दा योजना में क्या था?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिसेम्ब्रिस्ट कौन थे?

रूस के जवान सरदार और अफ़सर जिन्होंने संविधान पाने और दासता ख़त्म करने के लिए 14 (26) दिसंबर 1825 को विद्रोह की कोशिश की।

इन्हें डिसेम्ब्रिस्ट क्यों कहते हैं?

क्योंकि उनका विद्रोह दिसंबर 1825 में हुआ।

सिकंदर प्रथम की रूढ़िवादी नीति क्या थी?

1815 के बाद उसने सख़्त व्यवस्था चुनी: सैनिक बस्तियाँ, सेंसरशिप, स्कूलों पर नज़र और गुप्त संस्थाओं पर रोक।

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