सिकंदर तृतीय 1881 में सत्ता में क्यों आया
सिकंदर द्वितीय ने 1861 में किसानों (दासों) को आज़ाद किया और दूसरे सुधार किए। पर कुछ युवा विद्रोही इससे कहीं ज़्यादा चाहते थे। "जनता की इच्छा" (नारोदनाया वोल्या) नाम के गुट ने 1 मार्च 1881 को सेंट पीटर्सबर्ग में बम से उसे मार डाला।
उसका बेटा सिकंदर तृतीय (शासन 1881-1894) मज़बूत शरीर का और सादा आदमी था। उसे लगा कि सुधारों ने देश को बेचैन कर दिया है। इसलिए उसका बड़ा विचार था रूढ़िवादी स्थिरीकरण: पुरानी व्यवस्था बनाए रखो, राज्य को मज़बूत करो, और बदलाव रोको जिससे गड़बड़ी हो सकती है।
निरंकुश शासन और नियंत्रण (1881-1882)
अप्रैल 1881 के घोषणापत्र ने, जो कॉन्स्टेंटिन पोबेदोनोस्त्सेव की मदद से लिखा गया, कहा कि ज़ार की सत्ता पूरी और बिना बँटवारे की रहेगी। इसके साथ सिकंदर द्वितीय के आख़िरी दिनों में सोची गई राष्ट्रीय चुनी हुई सभा की बात ख़त्म हो गई।
- पुलिस क़ानून (अगस्त 1881): "असुरक्षित" घोषित इलाक़ों में अधिकारी तलाशी, गिरफ़्तारी और जल्दी फ़ैसला कर सकते थे। यह अस्थायी था, पर 1917 तक चला।
- अख़बार नियम (1882): अख़बार को चेतावनी देकर बंद किया जा सकता था।
- ओखराना: गुप्त पुलिस की शाखा जो विद्रोहियों पर नज़र रखती थी।
प्रति-सुधार (काउंटर-रिफ़ॉर्म्स)
"प्रति-सुधार" का मतलब वे क़ानून जो पहले के सुधार घटाते थे। मुख्य ये थे:
- विश्वविद्यालय (1884): प्रोफ़ेसरों की स्वायत्तता गई; प्रमुख सरकार चुनती थी।
- भूमि-प्रमुख (1889): स्थानीय रईस किसान गाँवों की निगरानी करता और छोटे मामलों में फ़ैसला देता था। उसने गाँव के चुने न्यायाधीशों के कई काम ले लिए।
- ज़ेम्स्त्वो क़ानून (1890): इन स्थानीय परिषदों में रईसों की सीटें बढ़ीं, किसानों की घटीं।
- शहर क़ानून (1892): वोट के लिए ज़्यादा संपत्ति ज़रूरी हो गई, इसलिए कम लोग वोट दे सके।
- स्कूल परिपत्र (1887): ग़रीब परिवारों के बच्चों ("रसोइयों के बच्चे") के लिए जिम्नेज़ियम में जगह मुश्किल हुई।
पैटर्न: रईसों और सरकारी अधिकारियों को ज़्यादा ताक़त, चुनी हुई संस्थाओं और आम लोगों को कम।
किसानों-मज़दूरों की मदद और विदेश नीति
ज़ार सिर्फ़ कड़ा नहीं था। किसान अपनी आज़ादी के लिए पैसे चुकाते थे (मोचन किश्तें); 1881 में ये घटाई गईं और 1880 के दशक में पुराना सिर पर कर ख़त्म हुआ। 1882 में किसान भूमि बैंक ने ज़मीन ख़रीदने के लिए क़र्ज़ देना शुरू किया।
कारख़ानों में पहले श्रम-क़ानून बने: 12 साल से छोटे बच्चे काम नहीं कर सकते थे (1882), औरतों और किशोरों से रात का काम बंद हुआ (1885), और कारख़ाना-निरीक्षक नियम जाँचते थे।
विदेश में सिकंदर तृतीय ने शांति रखी। उसने कोई बड़ा युद्ध नहीं लड़ा और "शांति-दूत" कहलाया। उसके शासन के अंत में रूस और फ़्रांस की दोस्ती के समझौते हुए (1891-1894)।
नतीजे और कर के देखो
सिकंदर तृतीय की मृत्यु 1894 में हुई और उसका बेटा निकोलस द्वितीय गद्दी पर आया। उसके राज में कुछ शांत साल और कारख़ानों की तेज़ बढ़त हुई, पर लोगों को राज्य चलाने में हिस्सा देने के लिए कुछ नहीं किया गया। असंतुष्ट गुट चुपचाप बढ़ते रहे। यह 1905 और 1917 की क्रांतियों तक जाने वाला एक रास्ता है।
- 3D में: आख़िरी चरण में हर कदम चुनो। जो स्तंभ ऊँचा हो उसके लिए "नियंत्रण" या "मदद" लिखो।
- छाँटो खेल: नौ कदम पर्चियों पर लिखो। तीन ढेर बनाओ: नियंत्रण, रईसों को ताक़त, लोगों की मदद।
- पहले सोचो, फिर जाँचो: अगर तुम 1890 में गाँव के किसान होते, तो सबसे पहले कौन-सा कदम तुम्हें दिखता?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सिकंदर तृतीय: ज़ार 1881-1894; सिकंदर द्वितीय का बेटा
- रूढ़िवादी स्थिरीकरण: पुरानी व्यवस्था, मज़बूत राज्य, कम बदलाव
- निरंकुश शासन: एक ज़ार का राज, कोई चुनी क़ानून-सभा नहीं
- प्रति-सुधार: 1860 के सुधार घटाने वाले क़ानून (1884, 1889, 1890, 1892)
- भूमि-प्रमुख (1889): किसान गाँवों की निगरानी करने वाला रईस
- किसान भूमि बैंक 1882; पहले कारख़ाना-क़ानून 1882 और 1885
हल किए गए उदाहरण
1. सिकंदर तृतीय ने 1881 के बाद कड़ा नियंत्रण क्यों चुना?
चरण 1: 1881 में विद्रोहियों ने उसके पिता को मार डाला। चरण 2: उसे लगा कि 1860 के सुधारों से लोग बेचैन हुए। चरण 3: इसलिए उसने सारी सत्ता रखी और पुलिस व व्यवस्था मज़बूत की। इसे रूढ़िवादी स्थिरीकरण कहते हैं।
2. भूमि-प्रमुख क्या था और वह प्रति-सुधार क्यों था?
चरण 1: भूमि-प्रमुख किसान गाँवों पर बैठाया गया स्थानीय रईस था (1889)। चरण 2: वह गाँव पर नज़र रखता और छोटे मामले निपटाता था। चरण 3: पहले गाँव वाले अपने न्यायाधीश चुनते थे। चरण 4: यानी सत्ता चुने हुए लोगों से रईस के पास गई, जिससे पुराने सुधार घट गए।
3. दिखाओ कि सिकंदर तृतीय सिर्फ़ कड़ा नहीं था। दो मदद बताओ।
चरण 1: किसान भूमि बैंक (1882): ज़मीन ख़रीदने को क़र्ज़। चरण 2: कम मोचन किश्तें। चरण 3: कारख़ाना नियम: 12 से कम उम्र में काम नहीं, औरतों-किशोरों से रात का काम नहीं। यानी उसने नियंत्रण के साथ कुछ देखभाल भी रखी।
4. सिकंदर तृतीय ने 1881 से 1894 तक राज किया। यह कितने साल हुए?
1894 - 1881 = 13 साल।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सिकंदर तृतीय ने सारे सुधार रोक दिए। उसने भूमि बैंक और कारख़ाना-क़ानून भी बनाए।
- सिकंदर द्वितीय (दासों को आज़ाद किया, 1881 में मारा गया) और सिकंदर तृतीय (उसका बेटा, कड़ा शासक) को आपस में मिला देना।
- "प्रति-सुधार" को नए सुधार समझना। इसका मतलब पहले के सुधार घटाने वाले क़ानून है।
- यह भूल जाना कि उसने रूस को बड़े युद्धों से दूर रखा।