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मार्क्सवाद का जन्म: घोषणापत्र, प्रथम इंटरनेशनल और पेरिस कम्यून

मार्क्सवाद समाज के बारे में विचारों का एक समूह है, जिसे सबसे पहले कार्ल मार्क्स और फ़्रेडरिक एंगेल्स ने विस्तार से लिखा। उनका कहना था कि कारख़ानों वाले समाज में दो बड़े वर्ग होते हैं जिनके हित उलटे हैं: मालिक और मज़दूर। 1848 में उन्होंने कम्युनिस्ट घोषणापत्र छापा, जिसमें कहा गया कि इतिहास वर्गों के संघर्ष से आगे बढ़ता है और सब देशों के मज़दूरों से एक होने की अपील की गई। 1864 में कई शहरों के मज़दूर संगठनों ने लंदन में प्रथम इंटरनेशनल बनाया ताकि वे सीमाओं के पार मिलकर काम कर सकें। 1871 में पेरिस के मज़दूरों और नागरिकों ने 72 दिन अपना शहर ख़ुद चलाया (पेरिस कम्यून), फिर सरकारी सेना ने उसे कुचल दिया। ये तीनों घटनाएँ दिखाती हैं कि काम, दौलत और सत्ता के बारे में एक नया विचार कारख़ानों के ज़माने से निकलकर दुनिया भर के आंदोलन में कैसे बदला।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कारख़ानों से दो बड़े समूह बने। कुछ मालिकों के पास कारख़ाने और पैसा है। बहुत से मज़दूरों के पास बेचने को सिर्फ़ अपना श्रम है।
  2. 1848 में मार्क्स और एंगेल्स ने कम्युनिस्ट घोषणापत्र लिखा। उसमें कहा गया कि इतिहास वर्गों की लड़ाई है। अंत में लिखा: सब देशों के मज़दूरो, एक हो जाओ!
  3. 1864 में कई शहरों के मज़दूर संगठन लंदन में मिले और प्रथम इंटरनेशनल बनाया। रेखाएँ एक-एक करके केंद्र से जुड़ती हैं।
  4. 1871 में एक हारे हुए युद्ध के बाद पेरिस के मज़दूरों ने 72 दिन अपना शहर चलाया। यह पेरिस कम्यून था। पहले नीतियाँ आती हैं, फिर अंत।
  5. कम्यून कुचल दिया गया, पर वह एक मिसाल और बहस बन गया। मार्क्स ने उस पर लिखा। कई देशों में समाजवादी दल बढ़े।
  6. आपकी बारी: दिन का स्लाइडर खिसकाइए और पढ़िए कि कम्यून ने दिन-ब-दिन क्या किया।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

मालिक इतने कम और मज़दूर इतने ज़्यादा क्यों थे?

मशीनें और कारख़ाने बहुत महँगे थे। उन्हें वही ख़रीद सकते थे जिनके पास पहले से पैसा था। ज़्यादातर लोगों के पास बचत नहीं थी, उन्हें मज़दूरी करनी पड़ी, इसलिए मज़दूर बड़ा समूह बन गए।

क्या 1848 में घोषणापत्र से क्रांति शुरू हुई?

नहीं। 1848 की क्रांतियाँ कई कारणों से हुईं, और तब तक कम लोगों ने पुस्तिका पढ़ी थी। वह बाद में अहम बनी।

क्या प्रथम इंटरनेशनल कोई देश या सरकार था?

नहीं। वह मज़दूर संगठनों का एक संघ था। उसके पास सेना या क़ानून नहीं थे, सिर्फ़ सभाएँ और चिट्ठियाँ थीं।

1871 में पेरिस ने विद्रोह क्यों किया?

लंबे घेरे के बाद शहर भूखा था, लोगों को लगा कि सरकार ने उन्हें छोड़ दिया है, और राष्ट्रीय सरकार ने उनकी तोपें लेने की कोशिश की। उन्होंने मना कर दिया और अपनी परिषद बना ली।

क्या कम्यून इतना चला कि कुछ बदल पाता?

नहीं। बहत्तर दिन बहुत कम हैं। पर उसके फ़ैसले, जैसे चर्च और राज्य को अलग करना, सालों तक चर्चा में रहे।

इसका भारत से क्या संबंध है?

भारत के ट्रेड यूनियनवादियों और समाजवादियों ने ये विचार पढ़े। भारत में पहली मई दिवस सभा 1923 में मद्रास में हुई।

मज़दूरी और काम के बारे में नए विचार क्यों आए

1800 के दशक में यूरोप में कारख़ाने और रेलें फैल गईं। बहुत से लोग खेत छोड़कर मज़दूरी (काम के बदले पैसा) करने लगे। कारख़ाने के मालिक (पूँजीपति वर्ग, यानी संपत्ति वाला वर्ग) अमीर हो गए। मज़दूर (सर्वहारा वर्ग, यानी जिनके पास बेचने को सिर्फ़ अपना श्रम है) अक्सर भीड़ भरे शहरों में लंबे घंटे और कम वेतन पर जीते थे।

विचारकों ने पूछा: क्या यह न्याय है, और क्या यह बदल सकता है? कुछ लोग छोटे सुधार चाहते थे। दूसरे, जिन्हें समाजवादी कहा गया, चाहते थे कि मुख्य कारख़ाने और ज़मीन सबके साझे हों। कार्ल मार्क्स और फ़्रेडरिक एंगेल्स ने समाजवाद को एक विस्तृत योजना और इतिहास का सिद्धांत दिया। उनके विचारों को मार्क्सवाद कहते हैं।

कम्युनिस्ट घोषणापत्र (1848)

मार्क्स (एक जर्मन विचारक जो देश से बाहर रहते थे) और एंगेल्स (एक कारख़ानेदार के बेटे जिन्होंने मैनचेस्टर में मज़दूरों का जीवन देखा) ने 1848 में एक छोटी पुस्तिका लिखी। वह एक छोटे समूह, कम्युनिस्ट लीग, के लिए थी। वह फ़रवरी 1848 में छपी, यूरोप में क्रांतियों से ठीक पहले।

शुरू में इसे कम लोगों ने पढ़ा। मज़दूर आंदोलन बढ़ने पर यह बाद में मशहूर हुई।

प्रथम इंटरनेशनल (1864–1876)

28 सितंबर 1864 को ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, इटली और दूसरे देशों के ट्रेड यूनियनवादी और समाजवादी लंदन में मिले। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर संघ बनाया, जिसे अब प्रथम इंटरनेशनल कहते हैं। इसका संस्थापक भाषण मार्क्स ने लिखा।

संगठन के रूप में यह असफल रहा, पर इसने दिखाया कि मज़दूर सीमाओं के पार सोच सकते हैं।

पेरिस कम्यून (1871)

पृष्ठभूमि। 1870 में फ़्रांस प्रशिया से युद्ध हार गया। पेरिस घिर गया और वहाँ खाने की कमी हो गई। राष्ट्रीय सरकार वर्साय चली गई। 18 मार्च 1871 को सैनिकों ने उन तोपों को लेने की कोशिश की जिन्हें पेरिस के स्वयंसेवकों (नेशनल गार्ड) ने पैसे जोड़कर ख़रीदा था। लोगों ने मना कर दिया और शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया।

कम्यून। पेरिसवासियों द्वारा चुनी गई एक परिषद, यानी कम्यून, ने 72 दिन शहर चलाया। उसके फ़ैसलों में थे:

अंत। 21 से 28 मई, "ख़ूनी सप्ताह", में सरकारी सेना पेरिस में घुसी और कम्यून हार गया। हज़ारों लोग मारे गए या मौत की सज़ा पाए, और बहुतों को जेल या देश-निकाला मिला।

यह क्यों अहम है। मार्क्स ने इस पर फ़्रांस में गृहयुद्ध लिखा। समर्थकों ने इसे मज़दूरों की सरकार की शुरुआती कोशिश माना। आलोचकों ने इसमें अव्यवस्था और हिंसा देखी। दोनों पक्ष दशकों तक बहस करते रहे।

करके देखिए: समय-रेखा बनाइए

एक रेखा खींचिए और उस पर तीन निशान लगाइए: 1848, 1864, 1871। हर निशान के नीचे एक शब्द लिखिए: विचार, टोली, परीक्षा। फिर 3D में दिन का स्लाइडर चलाइए: कोई भी दिन चुनकर ज़ोर से बोलिए कि उस दिन कम्यून ने क्या किया। अंत में पूछिए, "कौन-सी घटना सबसे अहम थी और क्यों?" इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है; आपको कारण देना होगा।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. कम्युनिस्ट घोषणापत्र किसने और कब लिखा?

कार्ल मार्क्स और फ़्रेडरिक एंगेल्स ने। यह फ़रवरी 1848 में छपा।

2. एक दोस्त कहता है: 'प्रथम इंटरनेशनल असफल रहा, इसलिए उसका कोई महत्व नहीं।' आप क्या जवाब देंगे?

संगठन के रूप में वह 1876 में बंद हो गया, तो असफल रहा। पर उसने पहली बार अलग-अलग देशों के मज़दूरों को साथ लाया, 8 घंटे के दिन और यूनियनों के विचार फैलाए, और बाद के संगठनों ने उसका विचार अपनाया। इसलिए वह टिका नहीं, फिर भी अहम था।

3. कम्यून 18 मार्च 1871 को शुरू हुआ और 28 मई को ख़त्म। दिखाइए कि वह 72 दिन चला।

18 मार्च से 31 मार्च तक शुरुआत के 13 दिन बाद, अप्रैल के 30 दिन, मई में 28 तारीख़ तक 28 दिन। 13 + 30 + 28 = 71 दिन शुरुआत के बाद, यानी पहले दिन को गिनकर 72 दिन।

4. तीन घटनाओं को क्रम में रखिए: पेरिस कम्यून, घोषणापत्र, प्रथम इंटरनेशनल। एक विचार बताइए जो इन्हें जोड़ता है।

घोषणापत्र (1848), प्रथम इंटरनेशनल (1864), पेरिस कम्यून (1871)। जोड़: तीनों इस विश्वास से निकले कि मज़दूरों को अपना जीवन बदलने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, पहले विचार के रूप में, फिर संगठन के रूप में, फिर एक शहर पर शासन के रूप में।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कम्युनिस्ट घोषणापत्र कब छपा?
2. प्रथम इंटरनेशनल कहाँ बना?
3. घोषणापत्र में 'सर्वहारा वर्ग' का मतलब है:
4. पेरिस कम्यून लगभग कितने दिन चला?
5. प्रथम इंटरनेशनल में फूट का एक मुख्य कारण था:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरल शब्दों में मार्क्सवाद क्या है?

मार्क्सवाद कार्ल मार्क्स और फ़्रेडरिक एंगेल्स के विचार हैं। इसके अनुसार समाज उलटे हितों वाले वर्गों में बँटा है, इतिहास उनके संघर्ष से चलता है, और मज़दूरों को एक दिन मुख्य कारख़ानों का साझा मालिक बनना चाहिए।

प्रथम इंटरनेशनल क्या था?

यह अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर संघ था जो 1864 में लंदन में अलग-अलग देशों के मज़दूर संगठनों को जोड़ने के लिए बना। यह 1876 में बंद हो गया।

पेरिस कम्यून क्या था?

यह वह परिषद थी जिसने 18 मार्च से 28 मई 1871 तक पेरिस चलाया। ख़ूनी सप्ताह में सरकारी सेना ने इसे कुचल दिया।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

चीन九年级(初三)Sem.1 U7 Industrial Revolution and Marxism

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