मज़दूर आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
1700 और 1800 के दशकों में मशीनें और कारख़ाने फैले (औद्योगिक क्रांति)। बहुत लोग गाँव छोड़कर शहरों में मज़दूरी (काम के बदले पैसा) के लिए आए। इनसे एक नया मज़दूर वर्ग बना।
- दिन में 12 से 16 घंटे, हफ़्ते में छह दिन।
- कम वेतन, जुर्माने, बीमार या घायल होने पर वेतन नहीं।
- मिलों और खदानों में बच्चे।
- भीड़ भरे, गंदे घर।
अकेले मज़दूर को आसानी से बदला जा सकता था। मिलकर वे उत्पादन रोक सकते थे। यही सरल विचार मज़दूर आंदोलन का दिल है।
ट्रेड यूनियन, हड़ताल और सामूहिक सौदेबाज़ी
ट्रेड यूनियन (मज़दूर संघ) मज़दूरों का संगठन है जो सभी सदस्यों की ओर से बोलता है। शुरू में यूनियनों पर अक्सर रोक थी और सदस्यों को जेल हो सकती थी। धीरे-धीरे वे क़ानूनी बनीं।
उनके मुख्य साधन:
- याचिका और प्रदर्शन: खुलकर माँग रखना, अक्सर जुलूस के साथ।
- हड़ताल: मिलकर काम रोकना, ताकि बातचीत शुरू होने तक मालिक को कुछ न मिले। आम हड़ताल एक साथ कई उद्योग रोकती है।
- सामूहिक सौदेबाज़ी: यूनियन नेता और मालिक बात करके सबके लिए वेतन, घंटे और शर्तों पर समझौता करते हैं।
- आपसी मदद: यूनियन कोष बीमार या बेरोज़गार सदस्यों की मदद करता था।
अलग-अलग देशों के मज़दूर भी जुड़े, जैसे इंटरनेशनल वर्किंगमेन्स एसोसिएशन (1864) में। 1886 में 8 घंटे के दिन के अभियान के बाद 1 मई अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस बना।
विचार और दल: समाजवाद, सुधार और 1905
मज़दूरों में बहस थी कि समाज कैसे बदलें:
- सुधारवादी / सामाजिक लोकतंत्रवादी: वोट जीतो, संसद में सदस्य भेजो, क़दम-दर-क़दम क़ानून बनाओ।
- क्रांतिकारी समाजवादी: कारख़ानों का निजी स्वामित्व हटाकर साझा स्वामित्व, ज़रूरत हो तो क्रांति से।
- अराजकतावादी और सिंडिकलिस्ट: राज्य पर नहीं, यूनियन और आम हड़ताल पर भरोसा।
किसान आंदोलन ज़मीन और कम लगान चाहते थे, और राष्ट्रीय आंदोलन अपनी भाषा, स्कूल और स्वशासन। ये अक्सर मज़दूरों की माँगों से मिल जाते थे।
रूसी साम्राज्य की 1905–1907 की क्रांति यही मेल दिखाती है। जनवरी 1905 में मज़दूरों के शांत जुलूस पर गोली चलने के बाद बड़ी हड़तालें फैलीं। मज़दूरों ने चुनी हुई परिषदें बनाईं, किसानों ने ज़मीनें लीं, और राष्ट्रीय समूहों ने अपनी भाषा में स्कूल माँगे। शासक को संसद और कुछ यूनियनों की अनुमति देनी पड़ी, हालाँकि बाद में कई लाभ वापस ले लिए गए।
आंदोलन ने क्या पाया, और राज्य की भूमिका
| वर्ष | उपलब्धि |
|---|---|
| 1833 | ब्रिटेन का कारख़ाना क़ानून बच्चों के काम के घंटे सीमित करता है और निरीक्षक रखता है। |
| 1880 का दशक | जर्मनी बीमारी, दुर्घटना और बुढ़ापे के लिए सरकारी बीमा शुरू करता है। |
| 1886 | 8 घंटे के दिन के लिए बड़ी हड़तालें; मई दिवस की शुरुआत। |
| 1919 | अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) बना; उसका पहला समझौता 8 घंटे का दिन तय करता है। |
| 1926 | भारत का ट्रेड यूनियन अधिनियम यूनियनों को क़ानूनी पंजीकरण देता है। |
| 1948 | मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा: हर व्यक्ति यूनियन बना और उसमें शामिल हो सकता है। |
समय के साथ राज्य की भूमिका बढ़ी: कल्याणकारी राज्य पेंशन, बेरोज़गारी भत्ता, स्वास्थ्य सेवा, न्यूनतम वेतन और सुरक्षा निरीक्षण देता है। सरकारों ने यह यूनियनों के दबाव, मज़दूरों के वोट, अशांति के डर और सुधारकों के तर्कों के कारण किया।
संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ: आज के मुद्दे हैं बिना अनुबंध का असंगठित काम, गिग मज़दूर, महिलाओं को बराबर वेतन और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में सुरक्षित परिस्थितियाँ।
करके देखिए: गट्ठर की जाँच
एक पतली लकड़ी या सूखी सेवई का एक तार तोड़िए। अब दस एक साथ पकड़कर तोड़िए। फिर 3D में स्लाइडर से पता कीजिए कि कम से कम कितने मज़दूर जुड़ें तो मालिक कहे 'चलो बात करें'। दोनों प्रयोगों को जोड़ता एक वाक्य लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ट्रेड यूनियन: मज़दूरों का संगठन जो सभी सदस्यों के लिए सौदेबाज़ी करता है
- हड़ताल: माँगें मनवाने के लिए मज़दूरों का मिलकर काम रोकना
- सामूहिक सौदेबाज़ी: यूनियन और मालिकों की बातचीत जो लिखित समझौते पर ख़त्म हो
- मज़दूर वर्ग: वे लोग जो मज़दूरी के लिए अपना श्रम बेचकर जीते हैं
- कल्याणकारी राज्य: जो लोगों को पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और भत्ते देता है
- ILO (1919): अंतरराष्ट्रीय श्रम मानक बनाने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी
- समाजवाद: यह विचार कि बड़े उद्योग पूरे समुदाय के स्वामित्व में और उसके लिए चलें
हल किए गए उदाहरण
1. 1850 में अकेला मज़दूर बेहतर वेतन क्यों नहीं पा सकता था?
काम ढूँढने वाले बहुत थे, इसलिए मालिक शिकायत करने वाले एक व्यक्ति को तुरंत बदल सकता था। जब ज़्यादातर मज़दूर मिलकर काम रोकते, तभी मालिक को नुक़सान होता।
2. समय-क्रम में लगाइए: ILO बना, ब्रिटेन का बाल श्रम क़ानून, भारत का ट्रेड यूनियन अधिनियम, मई दिवस हड़तालें।
1833 बाल श्रम क़ानून → 1886 मई दिवस हड़तालें → 1919 ILO → 1926 ट्रेड यूनियन अधिनियम।
3. हड़ताल और सामूहिक सौदेबाज़ी में क्या अंतर है?
हड़ताल मालिक पर दबाव के लिए काम रोकना है। सामूहिक सौदेबाज़ी उसके बाद (या उसकी जगह) की बातचीत है, जो समझौते पर ख़त्म होती है।
4. 1905–1907 की एक सामाजिक और एक राष्ट्रीय माँग बताइए।
सामाजिक: 8 घंटे का दिन या किसानों के लिए ज़मीन। राष्ट्रीय: अपनी भाषा में पढ़ाने वाले स्कूल।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि यूनियनें हमेशा क़ानूनी थीं। शुरू में उन पर अक्सर रोक थी और नेता जेल जाते थे।
- हर मज़दूर समूह को क्रांतिकारी समझना। कई ने वोट और क़ानून से शांत सुधार चुना।
- यह मानना कि राज्य ने अधिकार अपने आप दिए। ज़्यादातर क़ानून मज़दूरों और सुधारकों के लंबे दबाव के बाद आए।
- हड़ताल (मज़दूर काम रोकें) को तालाबंदी (मालिक मज़दूरों को बाहर करे) से मिलाना।