Spain 2º Bachillerato History of Spain
अध्याय: 3
1. Societies in time
The historian's work and historiography · Geostrategic role of the Iberian Peninsula · Nation-building in Spain · The Hispanic Monarchy and colonial legacy · Religion, Church and State in Spain · Liberal regimes and constitutionalism · Political ideologies in modern Spain · Transition to capitalism in Spain · Social change and new sociability · Work and living conditions · Rural and urban worlds · Struggle for equality and social justice · The Second Republic and its reforms · Coup of 1936, Civil War and Franco regime · Women in Spanish history
- ऐतिहासिक चिंतन: इतिहासकार कैसे काम करते हैं – इतिहास साक्ष्य के सहारे अतीत का अध्ययन है। घटनाओं को समय-रेखा पर क्रम से रखिए और उनके संदर्भ में पढ़िए। प्राथमिक स्रोत (उसी समय बने) और द्वितीयक स्रोत (बाद में बने) दोनों का उपयोग कीजिए। हर स्रोत को परखिए: किसने, कब, क्यों बनाया और क्या छूट गया। घटनाओं के कई कारण होते हैं: धीमे दीर्घकालिक कारण और एक तात्कालिक कारण। परिवर्तन और निरंतरता दोनों देखिए, महत्व तय कीजिए और साक्ष्य के साथ तर्क दीजिए।
- खोजों के युग में स्पेन, 1469–1598 – 1469 में कास्तील की इसाबेला का आरागॉन के फ़र्डिनेंड से विवाह हुआ, जिससे ताजों का मेल बना। कैथोलिक सम्राटों ने राजसत्ता फिर मज़बूत की, धर्म को एकता का औज़ार बनाया (इन्क्विज़िशन, ग्रेनाडा का पतन, यहूदियों का निष्कासन, मुसलमानों का ज़बरन धर्मांतरण) और कोलंबस की मदद की। उनके पोते चार्ल्स प्रथम (सम्राट चार्ल्स पंचम) को विशाल साम्राज्य विरासत में मिला; उसने महँगे युद्ध लड़े और विजेताओं ने एज़्टेक व इंका साम्राज्य जीते। फ़िलिप द्वितीय ने पहले विश्वव्यापी साम्राज्य पर राज किया, लेपांटो जीता और पुर्तगाल पाया, पर डच विद्रोह, आर्मडा की असफलता, मोरिस्को विद्रोह और बार-बार दिवालियापन झेला। अमेरिकी चाँदी ताक़त के साथ महँगाई और कर्ज़ भी लाई और गहरी औपनिवेशिक विरासत छोड़ी।
- संवैधानिक इतिहास: नियमों ने शासकों को कैसे बाँधा – संविधान सर्वोच्च क़ानून है जो बताता है कि शक्ति किसके पास है, वह कैसे सीमित है और लोगों के क्या अधिकार हैं। शासकों पर सीमाएँ धीरे-धीरे बढ़ीं: मैग्ना कार्टा (1215), पोलिश–लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेम जैसी सामंती संसदें और चुने हुए राजा (1569–1573 से), और इंग्लैंड का अधिकार विधेयक (1689)। प्रबोधन के विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक अनुबंध, राष्ट्र की संप्रभुता और शक्तियों के पृथक्करण के विचार जोड़े। फिर पहले लिखित राष्ट्रीय संविधान आए: अमेरिका (1787), पोलैंड–लिथुआनिया का 3 मई संविधान और फ़्रांस (1791), और स्पेन का काडिज़ संविधान (1812)। 19वीं सदी के उदार शासन संपत्ति-आधारित मताधिकार वाले संवैधानिक राजतंत्र थे; 20वीं सदी में वोट सभी पुरुषों और फिर सभी वयस्कों तक फैला। भारत (1950) और 1989 के बाद मध्य-पूर्वी यूरोप के आधुनिक संविधान गारंटीशुदा अधिकार और संवैधानिक अदालतें जोड़ते हैं।
- राजनीतिक विचारधारा: राजनीति के बड़े सवालों के अलग-अलग जवाब – राजनीतिक विचारधारा लोगों, समाज और राज्य के बारे में जुड़े हुए विचारों का सेट है, साथ में समाज को बनाए रखने या बदलने की योजना। हम राजनीतिक विचार राजनीतिक समाजीकरण से सीखते हैं (परिवार, स्कूल, दोस्त, मीडिया, घटनाएँ)। “वाम” और “दक्षिण” शब्द 1789 की फ़्रांसीसी सभा में बैठने की जगह से आए। मुख्य विचारधाराएँ हैं उदारवाद (व्यक्ति की आज़ादी और अधिकार), रूढ़िवाद (परंपरा, व्यवस्था, धीमा बदलाव) और समाजवाद (समानता, साझा धन)। इनके अलावा नारीवाद, पर्यावरणवाद, अराजकतावाद, बहुसंस्कृतिवाद और राष्ट्रवाद। दो धुरियों वाला मॉडल (अर्थव्यवस्था और आज़ादी-सत्ता) एक रेखा से बेहतर तस्वीर देता है। विचारधाराएँ दलों के घोषणापत्र और नीतियाँ तय करती हैं, और जनमत सर्वेक्षण से इन्हें नापा जाता है।
- औद्योगीकरण का युग – फ़ैक्टरी से पहले सौदागर गाँव के परिवारों को कच्चा माल देते थे और वे घर पर कातते-बुनते थे (आदि-औद्योगीकरण)। 1760 के दशक से ब्रिटेन में कॉटन मिलें, स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनें और जेम्स वॉट का बेहतर भाप इंजन आए। बदलाव धीमा था: हाथ का श्रम सस्ता और आम रहा। भारत के बुनकर पहले दुनिया भर को कपड़ा देते थे; ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों के ज़रिए उन पर क़ब्ज़ा किया और बाद में मैनचेस्टर का कपड़ा भारत में भर गया। 1854 से बंबई और दूसरी जगहों पर भारतीय मिलें बनीं और छोटे कारख़ाने भी बढ़े। सामान बेचने के लिए लेबल, कैलेंडर और विज्ञापन आए, और स्वदेशी विज्ञापनों ने देशप्रेम जगाया।
- गाँव और नगर में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक व्यवस्था – सामाजिक परिवर्तन यानी समाज के ढाँचे में बड़ा और टिकाऊ बदलाव। यह धीमा (उद्विकासीय) या अचानक (क्रांतिकारी) हो सकता है, और ढाँचे, विचार या मूल्य बदल सकता है। इसके कारण हैं पर्यावरण, तकनीक और अर्थव्यवस्था, राजनीति और संस्कृति। सामाजिक व्यवस्था दूसरा पहलू है: समाज साझा मूल्यों, प्रभुत्व, सत्ता और कानून से स्थिर रहता है। व्यवस्था को प्रतिरोध, अपराध और हिंसा चुनौती देते हैं। गाँव, कस्बा और नगर आकार, घनत्व और काम में अलग हैं, और सब अपने ढंग से बदलते हैं।
- सामाजिक इतिहास: आम लोग कैसे जीते थे – सामाजिक इतिहास सिर्फ़ राजाओं, युद्धों और संधियों का नहीं, आम लोगों के जीवन का अध्ययन है। यह पूछता है कि लोग कैसे काम करते, रहते, खाते, कपड़े पहनते, शादी करते, पूजा करते, बीमार पड़ते और मनोरंजन करते थे, और समाज किन समूहों में बँटा था। आधुनिक समय से पहले ज़्यादातर समाज पिरामिड जैसे थे: ऊपर थोड़े शासक और सामंत, फिर पुरोहित और धनी परिवार, बीच में नगरवासी, व्यापारी और कारीगर, और नीचे किसानों की बहुत बड़ी परत, साथ में कुछ बंधुआ लोग जैसे भूदास या ग़ुलाम। गाँव अपना समुदाय खुद चलाते थे; शहर बाज़ार, गिल्ड और अलग-अलग समूहों के मेल की जगह थे। औद्योगीकरण ने लोगों को खेतों से कारख़ानों में पहुँचाया, मज़दूर वर्ग और बढ़ता मध्य वर्ग बनाया, और यूनियन, नए क़ानून और बाद में कल्याणकारी राज्य लाया। नई रोशनी, यातायात, अख़बार, स्कूल और दवाओं से रोज़ का जीवन बदला। सामाजिक इतिहासकार "छिपे" लोगों (महिलाएँ, ग़रीब, अल्पसंख्यक, प्रवासी) को भी खोजते हैं, और यह भी देखते हैं कि भावनाएँ और रीति-रिवाज कैसे बदले।
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
- मज़दूर आंदोलन: मज़दूरों ने अपने अधिकार कैसे पाए – मज़दूर आंदोलन मेहनतकश लोगों का लंबा प्रयास है: उचित वेतन, कम घंटे, सुरक्षित कार्यस्थल और समाज में आवाज़ पाने का। यह 1800 के दशक में कारख़ाने फैलने के साथ शुरू हुआ। अकेले मज़दूर के पास कोई ताक़त नहीं थी, इसलिए मज़दूरों ने ट्रेड यूनियन बनाईं, हड़ताल की, मिलकर सौदेबाज़ी की और राजनीतिक दल बनाए। उनके दबाव से, सुधारकों और सरकारों के साथ, बाल श्रम, काम के घंटे, सुरक्षा, पेंशन और यूनियन में शामिल होने के अधिकार पर क़ानून बने।
- इतिहास में महिलाओं के अधिकार – ज़्यादातर इतिहास में क़ानूनों और रीति-रिवाज़ों ने महिलाओं को राजनीति, उच्च शिक्षा और पैसे पर नियंत्रण से दूर रखा। 1700 के अंत से महिलाओं ने बराबर अधिकार माँगने शुरू किए। पहली लहर (लगभग 1848–1930) ने संपत्ति, शिक्षा और वोट दिलाया। दूसरी लहर (1960–70) ने समान वेतन के क़ानून और काम, पैसे व परिवार में आज़ादी दिलाई। तीसरी और चौथी लहर (1990 से) हिंसा से सुरक्षा, साझी देखभाल और हर महिला से बराबर व्यवहार पर ध्यान देती है। कई देशों में क़ानून बराबर हैं, पर वेतन, देखभाल के काम और सुरक्षा में अंतर बाक़ी है।
2. Challenges of today's world
Democratic memory · The national question in Spain · Economic growth and sustainability in Spain · The Transition and the 1978 Constitution · Spain in the European Union · Spain and the world
- इतिहास और स्मृति: हम अतीत को कैसे याद रखते हैं – स्मृति यानी लोग और समूह अतीत को कैसे याद करते हैं; इतिहास यानी सबूतों के आधार पर अतीत का सावधान अध्ययन। किसी घटना के बाद गवाह कुछ पीढ़ियों तक जीवित स्मृति रखते हैं। दस्तावेज़, फ़ोटो, वस्तुएँ और बातचीत जैसे स्रोत ज़्यादा समय तक बचे रहते हैं। समाज याद को स्मारक, संग्रहालय, सड़कों के नाम और स्मृति दिवस में बदलता है। अलग समूह एक ही घटना को अलग तरह से याद कर सकते हैं, इसलिए इतिहासकार स्रोतों की तुलना करके याद को जाँचते हैं और मिथक सुधारते हैं। पुराने अन्याय को याद रखना न्याय और मेल-मिलाप में मदद करता है।
- यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय – 1789 से पहले यूरोप कई छोटे राज्यों में बँटा था और लोग राजा के वफ़ादार थे। फ़्रांसीसी क्रांति ने कहा कि सत्ता जनता की है और जनता मिलकर एक राष्ट्र है। नेपोलियन ने बराबरी वाले कानून फैलाए। 1815 में राजा लौटे, पर उदारवादी, लेखक और भूखे आम लोग 1830 और 1848 में उठ खड़े हुए। कई छोटे राज्य जोड़कर इटली (1861) और जर्मनी (1871) बने। राष्ट्र को मारियान और जर्मेनिया जैसी स्त्री-आकृतियों से दिखाया गया। 1914 तक राष्ट्रवाद साम्राज्यवाद से जुड़ गया और बाल्कन का तनाव पहले विश्व युद्ध तक ले गया।
- आर्थिक इतिहास: समय के साथ लोग रोज़ी-रोटी कैसे कमाते रहे – आर्थिक इतिहास पढ़ता है कि लोग समय के साथ कैसे उत्पादन, व्यापार और धन का बँटवारा करते रहे। ज़्यादातर इतिहास में अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी थी और शासक फ़सल, श्रम या सिक्कों में कर लेते थे। व्यापार, मुद्रा और बैंकों ने आय धीरे-धीरे बढ़ाई। औद्योगिक क्रांति ने प्रति व्यक्ति उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया। 20वीं सदी में देशों ने बाज़ार, योजनाबद्ध और मिश्रित मॉडल आज़माए। विकास के साथ संकट भी आए: प्रथम विश्व युद्ध के बाद अति-मुद्रास्फीति, 1929 की महामंदी, 1997 का एशियाई वित्तीय संकट और 2008 का वैश्विक संकट। आज चुनौती है न्यायपूर्ण और टिकाऊ विकास।
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।
3. Civic engagement
Democratic awareness · Identity and belonging · Eco-social behaviour and the SDGs · Ethical digital citizenship · European values · Solidarity and cooperation · National and international security culture · Preserving historical heritage
- नागरिक भागीदारी: स्कूल और समुदाय में हिस्सा लेना – नागरिक भागीदारी का मतलब है नागरिकों का, युवाओं समेत, अपने समुदाय और देश के जीवन में हिस्सा लेना: जानकारी लेना, अपनी राय देना, मतदान करना, स्वयंसेवा करना, संगठनों से जुड़ना, याचिका पर हस्ताक्षर करना और परियोजनाओं का नेतृत्व करना। लोकतंत्र में शक्ति जनता से आती है, इसलिए भागीदारी उसे ज़िंदा रखती है। स्कूल इसका अभ्यास करने की पहली जगह है: छात्र परिषद (छात्र स्वशासन) सभी छात्रों द्वारा चुनी जाती है, बैठक करती है, प्रस्तावों पर चर्चा और मतदान करती है, और शिक्षकों व स्थानीय समुदाय से बात करती है। अच्छी भागीदारी सबके अधिकारों का सम्मान करती है, अलग लोगों को शामिल करती है (विविधता, समावेश, भेदभाव नहीं) और एकजुटता व सहयोग से काम करती है। सामाजिक परियोजना के साफ़ कदम हैं: असली समस्या चुनो, योजना बनाओ, काम करो और नतीजे दिखाओ। अधिकारों के लिए हुए पुराने संघर्षों को याद रखना (लोकतांत्रिक स्मृति) बताता है कि ये आज़ादियाँ क्यों क़ीमती हैं।
- सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ – भारत में अनेक भाषाएँ, धर्म, क्षेत्र और जनजातियाँ हैं। विविधता का अर्थ है अंतर, ऊँच-नीच नहीं। समुदाय लोगों को अपनापन देते हैं, पर जब वे टकराते हैं तो राष्ट्र-राज्य को तय करना होता है कि उनसे कैसे बरते। भारत ने भाषाई राज्यों, संघवाद, अल्पसंख्यक अधिकारों और अपनी तरह की धर्मनिरपेक्षता से विविधता को स्वीकारा। इस पाठ में सामुदायिक पहचान, क्षेत्रवाद, धर्म, सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक समाज आसान भाषा में समझेंगे।
- पर्यावरण और धारणीय विकास – पर्यावरण हमें संसाधन देता है, हमारा कचरा सोखता है, जीवन चलाता है और सुंदरता देता है। जब हम संसाधन प्रकृति के नवीकरण से तेज़ लेते हैं, या कचरा उसकी सोखने की क्षमता से ज़्यादा फेंकते हैं, तो धारण क्षमता पार होती है और पर्यावरण संकट आता है। भारत में भूमि अपक्षय, वायु-जल प्रदूषण, वन और जैव-विविधता की हानि है। जीवाश्म ईंधन जलाने से गर्मी फँसती है और वैश्विक उष्णता होती है; CFC ओज़ोन परत पतली करते हैं। धारणीय विकास आज की ज़रूरतें पूरी करता है बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता घटाए।
- डिजिटल पदचिह्न और नेट शिष्टाचार – डिजिटल पदचिह्न वह डेटा का निशान है जो हम ऑनलाइन छोड़ते हैं। सक्रिय पदचिह्न जान-बूझकर साझा होते हैं (पोस्ट, कमेंट, फ़ॉर्म); निष्क्रिय पदचिह्न हमारी जानकारी के बिना इकट्ठे होते हैं (कुकीज़, ब्राउज़िंग हिस्ट्री, लोकेशन, IP पता)। ये मिटाना कठिन है और बाद में दूसरे देख सकते हैं। हम डिजिटल समाज में रहते हैं जहाँ पढ़ाई, बैंकिंग, ख़रीदारी और सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हैं; इसका ज़िम्मेदार उपयोगकर्ता डिजिटल नागरिक (नेटिज़न) है। नेट शिष्टाचार: नैतिक (कॉपीराइट मानें, भरोसेमंद जानकारी), सम्मानजनक (निजता, विविधता, बुलिंग नहीं) और ज़िम्मेदार (ज़्यादा निजी बातें नहीं, ट्रोल को जवाब नहीं)। संचार शिष्टाचार: सटीक, विनम्र, विश्वसनीय; सोशल मीडिया शिष्टाचार: सोच-समझकर पासवर्ड और प्राइवेसी, अपलोड से पहले सोचें, साझा करने से पहले जाँचें।
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: देश अपने लोगों को कैसे सुरक्षित रखता है – राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ है देश के लोगों, भूमि, स्वतंत्रता, लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था को गंभीर नुक़सान से बचाना। ख़तरे सैन्य (सशस्त्र हमला) या ग़ैर-सैन्य (आतंकवाद, साइबर हमले, आपदाएँ, महामारी) हो सकते हैं। सुरक्षा तंत्र के तीन हिस्से हैं: सशस्त्र सेनाएँ, ग़ैर-सैन्य सेवाएँ, और निर्णय लेने वाले नेता। संकट एक चक्र में संभाले जाते हैं: रोकथाम, तैयारी, कार्रवाई, पुनर्निर्माण। तैयार नागरिक पूरे देश को मज़बूत बनाते हैं।
- सांस्कृतिक विरासत – सांस्कृतिक विरासत वह सब है जो किसी समुदाय को अतीत से मिला, जिसे वह आज महत्व देता है और आगे सौंपना चाहता है: इमारतें और स्मारक, संग्रहालय की चीज़ें, भाषाएँ, संगीत, नृत्य, त्योहार, हुनर, खाना और ज्ञान। मूर्त विरासत छू सकते हैं (अचल जैसे मंदिर और पुल, चल जैसे सिक्के और पांडुलिपियाँ); अमूर्त विरासत जी और निभाई जाती है; प्राकृतिक विरासत में ख़ास भू-दृश्य और जीव हैं। विरासत पहचान देती है, इतिहास सिखाती है, पर्यटन से कमाई लाती है और संस्कृतियों को जोड़ती है। मौसम, प्रदूषण, भीड़, लापरवाह निर्माण, उपेक्षा और संघर्ष इसे ख़तरे में डालते हैं; संरक्षण, कानून, संग्रहालय, विरासत सूचियाँ, शिक्षा और स्थानीय लोग इसे बचाते हैं।