बदलाव से पहले का जीवन
लगभग 1700 में यूरोप के ज़्यादातर लोग गाँवों में रहते और खेती करते थे। काम हाथ से और पशुओं से होता था। कई जगह खेत गाँव की साझा खुली पट्टियाँ थे। तीन-खेत प्रणाली में हर साल एक खेत आराम करता (परती रहता) ताकि मिट्टी ठीक हो सके। यानी ज़मीन का तिहाई हिस्सा कुछ नहीं देता था।
खेत से परिवार के लिए पर्याप्त अन्न और थोड़ा-सा ज़्यादा बनता था। बारिश न हो तो अन्न के दाम चढ़ जाते और लोग भूखे रहते। कपड़ा घर में या छोटी कार्यशालाओं में काता-बुना जाता था। इसे हम "पुराना तरीका" कहते हैं। 1700 के दशक ने इसे धीरे-धीरे पर गहराई से बदला।
कृषि क्रांति
किसानों और ज़मींदारों ने खेती के बेहतर तरीके खोजे। चार बदलाव ज़रूरी थे:
- फ़सल चक्र। गेहूँ, शलजम, जौ और तिपतिया घास बारी-बारी से उगाने से किसी खेत को आराम नहीं करना पड़ा। तिपतिया घास मिट्टी में नाइट्रोजन लौटाती है; शलजम जाड़े में पशुओं को खिलाते हैं, इसलिए ज़्यादा पशु बचते हैं और ज़्यादा खाद देते हैं।
- घेराबंदी। साझा और खुले खेतों पर बाड़ लगी और वे निजी फ़ार्म बन गए। मालिक नए तरीके आज़मा सकते थे, पर बहुत से ग़रीब ग्रामीणों ने साझा ज़मीन का अधिकार खोया और उन्हें दूसरा काम ढूँढना पड़ा।
- नए औज़ार और नस्लें। बीज-ड्रिल से बीज साफ़ कतारों में बोए गए; बेहतर हल और सावधानी से नस्ल सुधार से भेड़-गाय मज़बूत हुईं।
- नतीजा। हर खेत ज़्यादा अन्न देने लगा। अन्न सस्ता और भरोसेमंद हुआ।
लोग शहर क्यों गए
जब हर खेत ज़्यादा देता है तो कम किसान सबको खिला सकते हैं। ज़्यादा अन्न से शिशु और वयस्क ज़्यादा बचे, इसलिए जनसंख्या बढ़ी। जिन्होंने साझा ज़मीन खोई या जिनकी खेत में ज़रूरत नहीं रही, वे काम की तलाश में शहरों और खदानों की ओर गए। इस तरह कृषि क्रांति ने दो चीज़ें बनाईं: अतिरिक्त अन्न और अतिरिक्त कामगार। अगले बदलाव के लिए दोनों चाहिए थे।
औद्योगिक क्रांति: मशीनें और कारख़ाने
ब्रिटेन को बहुत सूती कपड़ा चाहिए था, कुछ हद तक इसलिए कि भारत का बारीक सूती कपड़ा बहुत लोकप्रिय था। आविष्कारकों ने तेज़ कातने और बुनने की मशीनें बनाईं। स्पिनिंग जेनी से एक कामगार एक साथ कई धागे कात सकता था। वाटर फ़्रेम और बाद में भाप इंजन ने ऐसी शक्ति दी जो थकती नहीं। इन्हें बनाने और चलाने के लिए कोयला और लोहा खोदा गया।
मशीनें एक छत के नीचे कारख़ानों में लगीं। कामगार मशीनों के पास आए और तय घंटे काम करने लगे। कपड़ा बहुत सस्ता हुआ। कोयले और नदियों के पास के शहर बहुत तेज़ी से बढ़े। समय के साथ रेलों और भाप-जहाज़ों ने माल और लोगों को ढोया, और बदलाव दूसरे देशों में फैला।
पूँजीवाद: पूँजी, मुनाफ़ा और होड़
पूँजी पैसा और वे चीज़ें (मशीनें, इमारतें, कच्चा माल) हैं जिनसे और पैसा बनाया जाता है। पूँजी लगाने वाला मालिक मुनाफ़े की आशा करता है: बिक्री की आमदनी में से मज़दूरी, माल और मशीनों का ख़र्च घटाकर जो बचे। मुनाफ़ा फिर लगाया जाता है, इसलिए कारोबार बढ़ता है।
इस व्यवस्था को, जिसमें निजी मालिक मुनाफ़े के लिए निवेश करते हैं और माल कई विक्रेताओं वाले बाज़ारों में बिकता है, पूँजीवाद कहते हैं। होड़ मालिकों को ख़र्च घटाने और आविष्कार करने को प्रेरित करती है। स्कॉटलैंड के विचारक एडम स्मिथ ने 1776 में मुक्त बाज़ारों का विचार समझाया। पूँजीवाद ने तेज़ वृद्धि और सस्ता माल दिया, पर शुरुआती कारख़ानों में लंबे घंटे, कम मज़दूरी और बाल मज़दूरी भी रही। बाद में मज़दूरों ने संघ बनाए और सरकारों ने उनकी रक्षा के क़ानून बनाए।
करके देखो: एक सूती कमीज़ का सफ़र
जो कमीज़ तुमने पहनी है उसका लेबल पढ़ो। कपड़ा कहाँ बना? कागज़ पर कड़ी बनाओ: कपास का खेत → कताई → बुनाई → कारख़ाना → दुकान → तुम। हर कड़ी के लिए लिखो कि 1650 में वह हाथ से होती थी या मशीन से, और आज? फिर जवाब दो: किस कड़ी में सबसे ज़्यादा बदलाव आया, और उससे किन लोगों का काम गया या मिला?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कृषि क्रांति = फ़सल चक्र + घेराबंदी + नए औज़ार और बीज → प्रति खेत ज़्यादा उपज
- ज़्यादा उपज → कम किसान चाहिए → ज़्यादा लोग दूसरे काम के लिए खाली
- औद्योगिक क्रांति = मशीनें + नई शक्ति (पानी, भाप) + कारख़ाने
- पूँजीवाद: पूँजी (पैसा और मशीनें) मुनाफ़े के लिए लगती है; मुनाफ़ा फिर लगता है
- मुनाफ़ा = बिक्री की आमदनी − ख़र्च (मज़दूरी, माल, मशीनें)
हल किए गए उदाहरण
1. पुराने तरीके से एक खेत 40 बोरी गेहूँ देता था। फ़सल चक्र और बेहतर औज़ारों से वह 80 देता है। उपज कितने प्रतिशत बढ़ी?
वृद्धि = 80 − 40 = 40 बोरी। प्रतिशत = 40 ÷ 40 × 100 = 100%। उपज दुगनी हो गई।
2. तीन-खेत प्रणाली में तीन में से एक खेत आराम करता है। हर साल ज़मीन का कितना भाग फ़सल देता है, और जब कोई खेत आराम न करे तब कितना?
तीन-खेत: 3 में से 2 खेत फ़सल देते हैं = 2/3 (लगभग 67%)। चार फ़सलों के चक्र में: सभी खेत फ़सल देते हैं = 100%।
3. 100 लोगों के गाँव में हर किसान 1.6 लोगों को खिलाता है। कितने किसान चाहिए? बेहतर खेती के बाद हर किसान 3.2 को खिलाता है। कितने किसान दूसरे काम के लिए खाली हुए?
पहले: 100 ÷ 1.6 = 62.5, यानी 63 किसान। बाद में: 100 ÷ 3.2 = 31.25, यानी 32 किसान। खाली: 63 − 32 = 31 लोग दूसरी जगह काम कर सकते हैं।
4. एक हाथ का कतैया दिन में 1 इकाई धागा बनाता है; जेनी का कामगार 8। एक मिल में 50 जेनी कामगार हैं। उतना धागा बनाने के लिए कितने हाथ के कतैया चाहिए?
मिल का उत्पादन = 50 × 8 = 400 इकाई। हाथ के कतैया = 400 ÷ 1 = 400। यानी 50 मशीन-कामगार 400 हाथ के कतैयों की जगह लेते हैं।
5. एक मालिक 1000 सिक्के लगाता है। साल का ख़र्च: मज़दूरी 500, माल 300, मशीन की घिसाई 100। बिक्री: 1200 सिक्के। मुनाफ़ा और पूँजी के प्रतिशत के रूप में मुनाफ़ा निकालो।
ख़र्च = 500 + 300 + 100 = 900। मुनाफ़ा = 1200 − 900 = 300 सिक्के। पूँजी का प्रतिशत = 300 ÷ 1000 × 100 = 30%।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि औद्योगिक क्रांति एक ही साल में हो गई। यह कई दशकों का धीमा बदलाव था।
- यह सोचना कि मशीनें पहले आईं। बेहतर खेती पहले आई और उसने कारख़ानों के लिए अन्न और लोग खाली किए।
- पूँजी और मुनाफ़े को मिला देना। पूँजी लगाया गया पैसा और मशीनें हैं; मुनाफ़ा ख़र्च के बाद बचा हिस्सा है।
- यह मानना कि जीवन सबके लिए तुरंत सुधर गया। शुरू में कारख़ाने का काम कठिन था, घंटे लंबे थे और बहुत बच्चे काम करते थे।