युद्ध से पहले की विदेश नीति
निकोलस प्रथम चाहते थे कि रूस यूरोप में पुरानी व्यवस्था का मज़बूत रखवाला बने। वे काला सागर और जलडमरूमध्यों (कुस्तुनतुनिया यानी आज के इस्तांबुल के पास के तंग समुद्री रास्ते) से सुरक्षित व्यापार भी चाहते थे।
- फ़ारस (1826-28): रूस जीता। तुर्कमानचाय की संधि (1828) से काकेशस में नई ज़मीन और धन मिला।
- ऑटोमन साम्राज्य (1828-29): रूस फिर जीता। एड्रियानोपल की संधि (1829) से डेन्यूब के मुहाने का इलाक़ा और जलडमरूमध्य में रूसी जहाज़ों के अधिकार मिले।
- 1833: तुर्की से संधि ने रूस का असर बढ़ाया। दूसरी शक्तियों ने विरोध किया, और 1841 के समझौते से शांति के समय विदेशी युद्धपोतों के लिए जलडमरूमध्य बंद हो गए।
- हंगरी (1849): रूसी सेना ने ऑस्ट्रिया को बग़ावत दबाने में मदद की। इसके बाद रूस "यूरोप का जेंडर्म" कहलाया।
काकेशस में शमील जैसे स्थानीय नेताओं के विरुद्ध लंबा पहाड़ी युद्ध भी चला, जो क्रीमिया युद्ध के बाद ख़त्म हुआ।
पूर्वी प्रश्न
"पूर्वी प्रश्न" का मतलब है: जब ऑटोमन साम्राज्य कमज़ोर हो, तब क्या हो? निकोलस उसे "यूरोप का बीमार आदमी" कहते थे। रूस ऑटोमन इलाक़ों के ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों पर असर और जहाज़ों की खुली आवाजाही चाहता था। ब्रिटेन और फ़्रांस डरते थे कि जलडमरूमध्यों के पास मज़बूत रूस उनके व्यापार-मार्ग को ख़तरा देगा। हर पक्ष दूसरों पर नज़र रखता था। एक छोटा झगड़ा बड़े युद्ध में बदल सकता था।
क्रीमिया युद्ध के कारण
- पवित्र स्थल: फ़्रांस और रूस में झगड़ा था कि यरुशलम (तब ऑटोमन शासन में) के ईसाई पवित्र स्थलों की रखवाली कौन करे।
- रूसी माँगें: 1853 में रूस ने सुल्तान से अपने इलाक़ों के ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों की रक्षा का अधिकार माँगा। सुल्तान ने मना कर दिया।
- डेन्यूब: रूस ने डेन्यूब की रियासतों (आज के रोमानिया के हिस्से) में सेना भेजी। अक्तूबर 1853 में तुर्की ने युद्ध की घोषणा की।
इनके पीछे असली मक़सद थे: जलडमरूमध्यों के पास असर और व्यापार-मार्ग।
सिनोप और सेवास्तोपोल की घेराबंदी
सिनोप (30 नवंबर 1853): एडमिरल नखीमोव के नेतृत्व में रूसी जहाज़ों ने सिनोप की खाड़ी में तुर्की का बेड़ा कुछ घंटों में नष्ट कर दिया। यह बड़ी समुद्री जीत थी, पर इससे ब्रिटेन और फ़्रांस घबरा गए।
मित्र देशों का आना (मार्च 1854): ब्रिटेन और फ़्रांस ने रूस के विरुद्ध युद्ध छेड़ा। बाद में सार्डिनिया भी साथ आया। सितंबर 1854 में मित्र सेनाएँ क्रीमिया में उतरीं।
सेवास्तोपोल (सितंबर 1854 से सितंबर 1855): सेवास्तोपोल काला सागर में रूस का मुख्य नौसैनिक अड्डा था। एडमिरल कोर्निलोव और नखीमोव (दोनों लड़ाई में मारे गए) और इंजीनियर टोटलेबेन ने इसकी रक्षा की। नाविक ज़मीन पर लड़े और बंदरगाह रोकने के लिए जहाज़ डुबाए गए। शहर 349 दिन टिका। नर्सों, जैसे रूसी पक्ष में दरिया सेवास्तोपोलस्काया और मित्र पक्ष में फ़्लोरेंस नाइटिंगेल, ने घायलों की सेवा की। अंत में मित्र सेनाओं ने शहर का दक्षिणी भाग ले लिया।
18 फ़रवरी 1855 को निकोलस प्रथम का निधन हुआ। उनके बेटे अलेक्ज़ेंडर द्वितीय ने युद्ध ख़त्म किया।
पेरिस की संधि (1856) और नतीजे
- काला सागर तटस्थ हुआ: रूस या तुर्की के लिए वहाँ युद्धपोत या नौसैनिक अड्डे नहीं।
- रूस ने डेन्यूब के मुहाने का इलाक़ा (दक्षिणी बेस्सारबिया) छोड़ा।
- बड़ी शक्तियों ने ऑटोमन राज्य का सम्मान करने का वादा किया।
रूस की साख कमज़ोर हुई। (1870-71 में, जब यूरोप दूसरे युद्ध में उलझा था, रूस ने काला सागर के नियम रद्द कर दिए।)
रूस क्यों हारा?
- जहाज़: मित्र देशों के पास भाप-जहाज़ थे; रूस के पास ज़्यादातर पाल वाले।
- बंदूकें: मित्र देशों की राइफ़लें रूसी चिकनी नली वाली बंदूकों से दूर और सटीक मारती थीं।
- सड़क और रेल: दक्षिण में रेल नहीं थी, इसलिए सामान देर से पहुँचता था। मित्र देश समुद्र से आए।
- व्यवस्था: दास-प्रथा से कम प्रशिक्षित भर्ती सैनिक (25 साल की सेवा) मिले, और अर्थव्यवस्था यूरोप से धीमी थी।
सबक़ साफ़ था: रूस को सुधार चाहिए। अगले ज़ार ने महान सुधार शुरू किए (अगला पाठ)।
करके देखो: कारण और असर की कड़ी
- 3D में: आख़िरी चरण में हर कारण चुनो और उसके आगे "जहाज़", "बंदूक", "सामान" या "गिनती" लिखो।
- चित्र बनाओ: पाँच डिब्बों की कड़ी: पूर्वी प्रश्न, सिनोप, मित्र देशों का आना, सेवास्तोपोल, पेरिस 1856। हर डिब्बे से अगले की ओर तीर बनाओ।
- सोचो: रूस सिनोप में जीता पर युद्ध हारा। एक लड़ाई जीतकर भी युद्ध क्यों हारा जा सकता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तुर्कमानचाय की संधि: 1828 (फ़ारस); एड्रियानोपल की संधि: 1829 (तुर्की)
- रूस की मदद से हंगरी की बग़ावत दबी: 1849; "यूरोप का जेंडर्म"
- क्रीमिया युद्ध: 1853-1856; सिनोप 30 नवंबर 1853
- ब्रिटेन-फ़्रांस का आना: मार्च 1854; सेवास्तोपोल की घेराबंदी: सितंबर 1854 से सितंबर 1855
- निकोलस प्रथम का निधन: 18 फ़रवरी 1855
- पेरिस की संधि: मार्च 1856, काला सागर तटस्थ
हल किए गए उदाहरण
1. "पूर्वी प्रश्न" क्या था?
चरण 1: ऑटोमन साम्राज्य कमज़ोर हो रहा था। चरण 2: सवाल यह था कि उसके आसपास, ख़ासकर जलडमरूमध्यों और काला सागर में, किसका असर बढ़ेगा। चरण 3: रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और ऑस्ट्रिया के लक्ष्य अलग थे, इसलिए यह सवाल लंबे समय तक तनाव देता रहा।
2. रूस सिनोप में जीता। फिर बड़ा युद्ध क्यों हुआ?
चरण 1: सिनोप ने तुर्की का बेड़ा नष्ट कर दिया। चरण 2: ब्रिटेन और फ़्रांस को डर लगा कि रूस जलडमरूमध्यों के पास बहुत ताक़तवर हो रहा है। चरण 3: इसलिए 1854 में वे तुर्की के साथ आ गए और रूस को तीन ताक़तवर राज्यों से लड़ना पड़ा।
3. रूस की हार के तीन कारण बताओ।
चरण 1: जहाज़: मित्र देशों के पास भाप-जहाज़ थे। चरण 2: हथियार: मित्र देशों के पास राइफ़ल वाली बंदूकें थीं। चरण 3: सामान: दक्षिण में रेल नहीं थी। साथ ही, दास किसानों से बनी सेना कम प्रशिक्षित और कम सुसज्जित थी।
4. पेरिस की संधि (1856) ने काला सागर के बारे में क्या तय किया?
चरण 1: काला सागर तटस्थ बना। चरण 2: रूस और तुर्की के लिए वहाँ युद्धपोत या नौसैनिक अड्डे नहीं रहे। चरण 3: इससे दक्षिण में रूस की समुद्री ताक़त छिन गई, जब तक उसने 1870-71 में यह नियम नहीं बदल दिया।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि रूस हर लड़ाई हारा। वह सिनोप में जीता और सेवास्तोपोल एक साल बचाए रहा।
- एड्रियानोपल की संधि (1829, तुर्की) और तुर्कमानचाय (1828, फ़ारस) को मिला देना।
- यह कहना कि युद्ध निकोलस प्रथम के समय ख़त्म हुआ। उनका निधन 1855 में हुआ; शांति अलेक्ज़ेंडर द्वितीय ने 1856 में की।
- यह भूल जाना कि इस युद्ध से महान सुधार, यानी दास-प्रथा का अंत, शुरू हुए।