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पुगाचेव का किसान युद्ध, 1773 से 1775

1773 से 1775 के बीच रूस ने 1700 के दशक का सबसे बड़ा विद्रोह देखा। यह याइक कज़ाकों में शुरू हुआ और इसका नेता डॉन कज़ाक येमेल्यान पुगाचेव था, जिसने झूठ कहा कि वह ज़ार पीटर तृतीय है। उसने ज़मीन और आज़ादी का वादा किया। बश्कीर, तातार और वोल्गा क्षेत्र के अन्य लोग, उराल के कारख़ाना मज़दूर और भूदास जुड़ गए। विद्रोहियों ने ओरेनबर्ग को घेरा, वोल्गा के किनारे फैले और जुलाई 1774 में कज़ान जला दिया। प्रशिक्षित और तोपों वाली नियमित सेना ने उन्हें हरा दिया। पुगाचेव को उसके अपने अफ़सरों ने सौंप दिया और जनवरी 1775 में उसे मृत्युदंड मिला। इसके बाद राज्य ने पकड़ कसी और नदी याइक का नाम उराल रखा गया।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. भूदास, कारख़ाना मज़दूर और कज़ाक, हर एक पर भारी बोझ था। लाल ब्लॉकों के तीन ढेर मिलकर एक बड़ा ग़ुस्सा बनते हैं।
  2. सितंबर 1773 में डॉन कज़ाक येमेल्यान पुगाचेव ने कहा कि वह ज़ार पीटर तृतीय है। यह झूठ था, पर उसने ज़मीन और आज़ादी का वादा किया और भीड़ जमा हो गई।
  3. पहले याइक कज़ाक आए। फिर बश्कीर, तातार और अन्य लोग, फिर उराल के कारख़ाना मज़दूर और किसान। चार समूह, एक आंदोलन।
  4. विद्रोहियों ने लगभग छह महीने ओरेनबर्ग को घेरा पर उसे ले न सके। विद्रोह वोल्गा के किनारे फैला और जुलाई 1774 में कज़ान जला।
  5. ज़ार की सेना प्रशिक्षित थी और उसके पास तोपें थीं। अगस्त 1774 में विद्रोही हारे। पुगाचेव को सौंप दिया गया और जनवरी 1775 में मृत्युदंड मिला।
  6. अब आपकी बारी। 1773 से 1775 की समय-रेखा पर स्लाइडर चलाइए और बताइए कि विद्रोह क्यों हारा।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

इतने लोग एक ही समय क्यों नाराज़ थे?

भूदास, कारख़ाना मज़दूर और कज़ाक, हर एक का अलग बोझ था, पर सब पर राज्य और ज़मींदारों का दबाव था। चरण 1 में तीन ढेर देखिए।

झूठा ज़ार इतने अनुयायी कैसे पा गया?

लोग ऐसा शासक चाहते थे जो ज़मीन और आज़ादी दे। ज़ार के नाम से वादा सच्चा लगा। चरण 2 देखिए।

क्या यह केवल किसानों का आंदोलन था?

नहीं। चार समूह जुड़े: कज़ाक, वोल्गा क्षेत्र के अन्य लोग, कारख़ाना मज़दूर और किसान। चरण 3 देखिए।

ओरेनबर्ग की घेराबंदी सफल क्यों नहीं हुई?

क़िला मज़बूत था और विद्रोहियों के पास कम तोपें और कम प्रशिक्षण था। चरण 4 में क़िले के चारों ओर घेरा देखिए।

इतने सारे होकर भी विद्रोही क्यों हारे?

सिर्फ़ संख्या काफ़ी नहीं होती। नियमित सेना प्रशिक्षित थी और तोपें थीं, और विद्रोही नेता को धोखा मिला। चरण 5 देखिए।

विद्रोह के बाद क्या बदला?

भूदास प्रथा बनी रही, पर 1775 में स्थानीय शासन सुधरा और याइक उराल बनी। चरण 5 और 6 देखिए।

विद्रोह क्यों शुरू हुआ? कारण

1700 के उत्तरार्ध में रूस के आम लोगों का जीवन कठिन था। भूदास (वे किसान जो ज़मींदार के होते थे) हफ़्ते में कई दिन ज़मींदार के लिए काम करते या उसे पैसे देते थे। ज़मींदार उन्हें सज़ा दे सकते थे, यहाँ तक कि दूर भेज सकते थे, और भूदास उनकी शिकायत नहीं कर सकते थे। उराल में बहुत लोग लोहे और तांबे के कारख़ानों में काम करते थे, अक्सर ज़बरदस्ती और बहुत कम मज़दूरी पर।

याइक कज़ाक, जो याइक नदी (आज की उराल) पर रहते थे, आज़ाद सैनिक बस्तियों के लोग थे। राज्य उनका स्वशासन घटा रहा था और उन पर अफ़सर बैठा रहा था। इस इलाक़े के दूसरे लोग, जैसे बश्कीर, डरते थे कि उनकी ज़मीन शहरों, क़िलों और कारख़ानों के लिए ली जा रही है।

इस तरह कई समूह थे, हर एक का अपना ग़ुस्सा, और सब चाहते एक ही चीज़ थे: राज्य और ज़मींदारों का कम दबाव।

पुगाचेव और उसकी पुकार (1773)

येमेल्यान पुगाचेव डॉन कज़ाक था, जो सेना में रह चुका था और फिर देश में भटकता रहा। सितंबर 1773 में वह याइक कज़ाकों के पास गया और बोला कि वह ज़ार पीटर तृतीय है, यानी कैथरीन द्वितीय का पति, जिसे गद्दी से हटाया गया था और जिसकी 1762 में मृत्यु हो गई थी। यह झूठ था, पर बहुत लोग एक "अच्छे ज़ार" पर विश्वास करना चाहते थे।

उसने "आदेश" जारी किए जिनमें ज़मीन, आज़ादी, कज़ाक अधिकार और भूदास प्रथा के अंत का वादा था। उसने अफ़सरों और परिषद वाला शिविर बनाया। वह आम लोगों की भाषा में बोलता था, इसलिए भीड़ उसके पास आई।

कौन जुड़ा और कैसे फैला

पहले अनुयायी याइक कज़ाक थे। जल्दी ही विद्रोह कई लोगों का आंदोलन बन गया: बश्कीर (सलावत युलाएव जैसे नेताओं के साथ), तातार, कल्मीक, चुवाश, मारी और अन्य, उराल के कारख़ाना मज़दूर और बहुत से भूदास।

अक्तूबर 1773 से विद्रोहियों ने क़िले वाले शहर ओरेनबर्ग को घेरा, लगभग छह महीने तक, पर उसे ले न सके। 1774 के वसंत में सरकारी सेना ने उन्हें हराया, पर पुगाचेव बच निकला, पश्चिम गया और वोल्गा के किनारे बढ़ा। जुलाई 1774 में उसके लोगों ने कज़ान का बड़ा हिस्सा जला दिया। वोल्गा के पास के कई भूदास अपने ज़मींदारों के विरुद्ध उठ खड़े हुए।

हार, अंत और परिणाम

राज्य ने तोपों और अच्छे सेनापतियों के साथ नियमित सेना भेजी। विद्रोही सेना बड़ी थी पर कम प्रशिक्षित और कम हथियारों वाली थी। अगस्त 1774 में निचली वोल्गा के पास पुगाचेव हार गया। उसके अपने कुछ कज़ाक अफ़सरों ने उसे सौंप दिया। जनवरी 1775 में मॉस्को में उसे मृत्युदंड दिया गया।

परिणाम। भूदास प्रथा ख़त्म नहीं हुई; कुलीनों को ख़तरा लगा और राज्य सख़्त हो गया। 1775 में कैथरीन द्वितीय ने स्थानीय शासन में सुधार किया और देश को छोटे प्रांतों में बाँटा, जिनमें ज़्यादा अफ़सर और सैनिक थे। नदी याइक का नाम उराल रखा गया और याइक कज़ाक उराल कज़ाक कहलाए, ताकि विद्रोह की याद मिट जाए। इस युद्ध ने दिखाया कि भूदास प्रथा भारी अशांति पैदा कर सकती है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. पुगाचेव ने ख़ुद को पीटर तृतीय क्यों कहा?

पीटर तृतीय एक ज़ार थे जिन्हें हटाया गया था और जिनकी 1762 में मृत्यु हो गई थी। बहुत लोगों को आशा थी कि कोई "अच्छा ज़ार" आज़ादी देगा, इसलिए उनके नाम से लोगों ने पुगाचेव पर भरोसा किया। यह दावा झूठा था।

2. विद्रोह में जुड़े तीन समूहों के नाम बताइए और कारण भी।

याइक कज़ाक (स्वशासन गया), बश्कीर और अन्य लोग (ज़मीन खोने का डर), उराल के कारख़ाना मज़दूर और भूदास (कठिन काम और कम आज़ादी)।

3. विद्रोह के हारने के दो कारण दीजिए।

विद्रोही प्रशिक्षित नहीं थे और उनके पास कम हथियार थे, जबकि नियमित सेना के पास प्रशिक्षण और तोपें थीं। साथ ही विद्रोहियों के पास पक्की योजना और नेतृत्व नहीं था और उनके अपने अफ़सरों ने पुगाचेव को सौंप दिया।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 1773 से 1775 के विद्रोह का नेता कौन था?
2. विद्रोह किस कज़ाक समूह में शुरू हुआ?
3. विद्रोहियों ने किस क़िले वाले शहर को लगभग छह महीने घेरा?
4. अंत में पुगाचेव का क्या हुआ?
5. बाद में नदी याइक का नया नाम क्या रखा गया?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुगाचेव विद्रोह के मुख्य कारण क्या थे?

भूदासों पर भारी काम, कारख़ानों में कठिन श्रम, कज़ाकों के स्वशासन का घटना और वोल्गा क्षेत्र के लोगों को ज़मीन खोने का डर।

इतने लोग पुगाचेव के पीछे क्यों चले?

उसने ज़मीन और आज़ादी का वादा किया और ज़ार के नाम का इस्तेमाल किया, इसलिए बहुत लोगों को लगा कि वह उनकी मदद करेगा।

विद्रोह के बाद राज्य ने क्या किया?

कैथरीन द्वितीय ने पकड़ कसी: 1775 का प्रांतीय सुधार, ज़्यादा अफ़सर और सैनिक, और याइक का नाम उराल रखा गया।

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