बड़े लक्ष्य
1500 के दशक में रूस के शासक तीन चीज़ें चाहते थे: सुरक्षित सीमाएँ, व्यापार के रास्ते और सामंतों के लिए ज़मीन। दो दिशाएँ खुलीं: पूर्व और दक्षिण-पूर्व में वोल्गा के साथ, और पश्चिम में बाल्टिक सागर की ओर।
वोल्गा क्यों ज़रूरी थी
वोल्गा यूरोप की सबसे लंबी नदी है। यह मॉस्को के पास से निकलकर कैस्पियन सागर तक जाती है। नावें अनाज, खाल, नमक और मछली लाती-ले जाती थीं। बीच के हिस्से पर कज़ान ख़ानत थी और उसके घुड़सवार अक्सर रूसी गाँवों पर हमले करते थे। रूसियों को उसकी अच्छी खेती की ज़मीन भी चाहिए थी।
कज़ान, 1552
पहले की असफल कोशिशों के बाद 1552 में इवान IV बड़ी सेना लेकर कज़ान पहुँचा। उसके इंजीनियरों ने दीवारों के नीचे सुरंगें खोदीं और उनमें बारूद भरा। धमाके से दीवार टूटी और रूसी सैनिकों ने शहर ले लिया। कज़ान रूस का हिस्सा बन गया।
आस्त्राख़ान, 1556
आस्त्राख़ान ख़ानत वहाँ थी जहाँ वोल्गा कैस्पियन सागर से मिलती है। 1556 में रूसियों ने उसे लगभग बिना लड़ाई के ले लिया। अब मॉस्को से कैस्पियन तक पूरी वोल्गा रूसी रास्ते पर थी। ईरान और मध्य एशिया से व्यापार बढ़ा और रूसी बसने वाले नई ज़मीनों पर गए। यहीं से साइबेरिया की राह भी बनी (येरमक की यात्रा, 1581)।
लिवोनियाई युद्ध, 1558–1583
रूस के पास बाल्टिक सागर पर कोई अच्छा बंदरगाह नहीं था। बंदरगाह से पश्चिमी यूरोप से सीधा व्यापार हो सकता था। 1558 में इवान IV ने लिवोनिया पर हमला किया, जहाँ लिवोनियाई आदेश (जर्मन शूरवीरों का संघ) का शासन था। शुरू में रूस अच्छा रहा और आदेश 1561 तक बिखर गया।
पर लिवोनिया की ज़मीन पड़ोसियों ने ले ली: पोलैंड-लिथुआनिया (1569 के बाद एक राज्य), स्वीडन और डेनमार्क। अब रूस के सामने ताक़तवर विरोधी थे। साथ ही 1571 में क्रीमिया ख़ानत ने मॉस्को पर हमला किया, और युद्ध में बहुत धन और जन लगा।
अंत कैसे हुआ
1582 में रूस ने पोलैंड-लिथुआनिया से और 1583 में स्वीडन से संधि की। रूस ने लिवोनिया की जीतें लौटा दीं और फिर भी उसके पास बाल्टिक का बंदरगाह नहीं था। यह लक्ष्य बाद में पीटर महान के समय पूरा हुआ। युद्ध से देश थका और धन की कमी में आ गया।
ट्राई-इट (करके देखो)
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मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1552 कज़ान; 1556 आस्त्राख़ान → वोल्गा खुली
- 1558–1583 लिवोनियाई युद्ध = 25 साल
- युद्ध का लक्ष्य: बाल्टिक बंदरगाह (नहीं मिला)
हल किए गए उदाहरण
1. कज़ान (1552) और आस्त्राख़ान (1556) की जीत के बीच कितने साल?
1556 − 1552 = 4 साल।
2. लिवोनियाई युद्ध (1558–1583) कितने साल चला?
1583 − 1558 = 25 साल।
3. लिवोनियाई आदेश 1561 में ख़त्म हुआ। युद्ध शुरू होने के कितने साल बाद?
1561 − 1558 = 3 साल।
आम गलतियाँ
- सालों को मिलाना: कज़ान 1552, आस्त्राख़ान 1556।
- रूस लिवोनियाई युद्ध जीता, ऐसा सोचना। उसे बाल्टिक बंदरगाह नहीं मिला।
- लिवोनियाई आदेश को पोलैंड जैसा देश समझना। वह जर्मन शूरवीरों का संघ था।
- लक्ष्य भूलना: सिर्फ़ ज़मीन नहीं, बाल्टिक व्यापार चाहिए था।