सामाजिक सीढ़ी: ज़ार, बोयार और सेवा-कुलीन
समाज एक सीढ़ी था। सबसे ऊपर ज़ार था। उसके नीचे बोयार थे, पुराने कुलीन परिवार जिनकी बड़ी जागीरें थीं और जो ज़ार की परिषद (बोयार ड्यूमा) में बैठते थे। फिर सेवा-कुलीन (दवोर्यान) आते थे। उनका काम ज़ार के लिए लड़ना था, और सेवा के दौरान ज़ार हर किसी को पोमेस्ती नाम की ज़मीन देता था। सेवा बंद करने पर ज़मीन वापस जा सकती थी। सदी के दौरान ज़ार बोयारों से ज़्यादा सेवा-कुलीनों पर भरोसा करने लगे।
पादरी और भिक्षु अलग और सम्मानित समूह थे, और मठों के पास बहुत ज़मीन थी।
किसान, नगरवासी और कज़ाक
किसान ज़मीन जोतते और मालिक को लगान व श्रम देते थे। 1497 की क़ानून-संहिता (सुदेब्निक) के अनुसार किसान सिर्फ़ सेंट जॉर्ज दिवस (26 नवंबर, पुराना पतझड़ का दिन जब फ़सल कट जाती थी) के आसपास लगभग दो हफ़्ते के लिए जा सकता था और उसे शुल्क देना पड़ता था। 1500 के दशक के अंत में सरकार ने कभी-कभी यह भी रोक दिया, जिन्हें निषिद्ध वर्ष कहा जाता है। यह दास-प्रथा (किसान ज़मीन से बँधे) की ओर बड़ा क़दम था।
नगरवासी (पोसाद) व्यापारी और कारीगर थे जो कर देते थे। कज़ाक दक्षिणी और पूर्वी किनारों के आज़ाद लोग थे। कई गाँव छोड़कर आए थे। वे सीमा की रखवाली करते और राज्य उन्हें सवार के रूप में रखता था। अमीरों के घरों में अधीन लोग, जिन्हें खोलोप कहते थे, भी होते थे।
कई समुदायों का राज्य
1552 में ज़ार की सेना ने कज़ान और 1556 में आस्त्राखान ले लिया। अब पूरा वोल्गा नदी-मार्ग राज्य के भीतर था। तातार, चुवाश, मारी, मोर्दवा, उदमुर्त और अन्य जुड़ गए। बश्किर कुलों ने 1550 के दशक में ज़ार का शासन माना। 1580 के दशक से कज़ाक दल और ज़ार के लोग साइबेरिया में गए और तोबोल्स्क (1587) जैसे क़िले बनाए।
लोग यासाक नाम का कर (अक्सर खाल) देते, सेना में सेवा करते, और ज़्यादातर मामलों में अपना धर्म, भाषा और स्थानीय तौर-तरीक़े रखते। रूसी बसने वालों के आने पर कुछ लोग अपनी ज़मीनों से हटाए गए, और कुछ ने विरोध किया। इस तरह राज्य बहुराष्ट्रीय बन गया, जहाँ कई समुदाय एक शासक के नीचे साथ रहते थे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सीढ़ी: ज़ार > बोयार > सेवा-कुलीन > नगरवासी > किसान
- पोमेस्ती = सेवा के बदले दी गई ज़मीन (हमेशा की मिल्कियत नहीं)
- किसान के जाने का अधिकार: केवल सेंट जॉर्ज दिवस के आसपास; निषिद्ध वर्षों में बंद
- 1552 कज़ान, 1556 आस्त्राखान, 1580 के दशक साइबेरिया: नए समुदाय जुड़े
- यासाक = ग़ैर-रूसी समुदायों का कर (अक्सर खाल)
हल किए गए उदाहरण
1. पोमेस्ती क्या थी और ज़ार इसे क्यों देता था?
पोमेस्ती वह ज़मीन थी जो कुलीन को सेना में सेवा करने तक दी जाती थी। ज़ार के पास युद्ध ज़्यादा थे और सिक्के कम, इसलिए ज़मीन से सैनिकों का ख़र्च चलता था।
2. किसानों को ज़मीन से बाँधना सेवा-कुलीनों के लिए फ़ायदेमंद क्यों था?
सेवा पर गए कुलीन को अपना अनाज उगाने के लिए मज़दूर चाहिए थे। अगर किसान आसानी से जा सकते, तो बिना किसानों की पोमेस्ती बेकार होती। इसलिए कुलीन चाहते थे कि किसान रुकें, और राज्य ने जाना कठिन बना दिया।
3. 1552 और 1556 के बाद राज्य कैसे बदला?
उसमें कज़ान और आस्त्राखान शामिल हुए, तो तातार, चुवाश, मारी और अन्य अब उसके भीतर रहने लगे। मोटे तौर पर रूसी राज्य से वह कई समुदायों का राज्य बन गया।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि 1500 में किसान पूरी तरह दास थे। उनकी आज़ादी धीरे-धीरे घटी; शुरू में वे सेंट जॉर्ज दिवस के आसपास जा सकते थे।
- बोयार और सेवा-कुलीन को मिला देना। बोयार पुराने बड़े परिवार थे; सेवा-कुलीन ज़मीन केवल सेवा के बदले रखते थे।
- यह कहना कि सब लोग रूसी बन गए। ज़्यादातर ने अपना धर्म, भाषा और रीतियाँ रखीं।
- कज़ाक को केवल ज़ार की सेना कहना। वे पहले आज़ाद बसने वाले थे, बाद में उन्हें सेवा में रखा गया।