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17वीं सदी के रूस में समाज और सत्ता

1600 के दशक में रूसी समाज परतों में बँटा था: ज़ार, बोयार और पादरी, सेवा-कुलीन, नगरवासी और किसान। 1649 के क़ानून-संग्रह (सोबोर्नोये उलोज़ेनिये) ने, जो ज़ार अलेक्सेई मिखाइलोविच के समय ज़ेम्स्की सोबोर ने पास किया, किसानों को हमेशा के लिए ज़मीन से और नगरवासियों को उनकी बस्ती से बाँध दिया। ज़ेम्स्की सोबोर (देश की परिषदें) कम बैठे और आख़िरी 1684 में बैठा, जबकि ज़ार और उसके दफ़्तर अकेले शासन करने लगे: निरंकुशता मज़बूत हुई।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. समाज ब्लॉकों के ढेर जैसा था। ऊपर ज़ार है। नीचे बहुत सारे किसान सबका बोझ उठाते हैं।
  2. 1649 का क़ानून: किसान हमेशा के लिए मालिक की ज़मीन से बँध गए। भागे हुए को कभी भी पकड़ा जा सकता था।
  3. उसी क़ानून ने नगरवासियों को उनकी बस्ती से बाँध दिया। वे कर देते थे और कहीं जा नहीं सकते थे।
  4. ज़ेम्स्की सोबोर देश की परिषद थी। कुलीन, पादरी और नगरवासी ज़ार से मिलते थे। कुर्सियाँ गिनो।
  5. सालों में परिषद छोटी होती गई और ज़ार ऊँचा। शक्ति ज़ार के पास चली गई। इसे निरंकुशता कहते हैं।
  6. खुद करो: कोई साल चुनो और देखो परिषद कैसे घटती है और ज़ार कैसे बढ़ता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या 1649 का क़ानून सिर्फ़ किसानों पर असर डालता था?

नहीं। उसने नगरवासियों को भी उनकी बस्ती से बाँधा। चरण 2 में हरे ब्लॉक पर ताला लगता देखो।

सबसे नीचे कौन थे, और वे सबसे चौड़ा ब्लॉक क्यों हैं?

किसान। वे सबसे बड़ा समूह थे और करों का बोझ उठाते थे। चरण 0 में चौड़ा भूरा ब्लॉक देखो।

ज़ेम्स्की सोबोर में कौन बैठते थे?

बोयार, चर्च के नेता और चुने हुए कुलीन व नगरवासी। किसान औपचारिक रूप से नहीं भेजे जाते थे। चरण 3 की रंगीन कुर्सियाँ अलग-अलग समूह दिखाती हैं।

अगर क़ानून सोबोर ने पास किया, तो ज़ार की शक्ति बढ़ी कैसे?

सोबोर ने क़ानून पास किया, पर उसके बाद सोबोर कम बैठे। चरण 4 में कुर्सियाँ घटती और ज़ार बढ़ता दिखता है।

क्या दासता 1649 में शुरू हुई?

दासता कई दशकों में बढ़ी। 1649 में वह क़ानून से वंशानुगत और असीमित बनी। चरण 1 में उसे पक्का करने वाला ताला दिखता है।

समाज की परतें

लोग वर्गों में बँटे थे: ऐसे समूह जिनके अपने कर्तव्य और अधिकार थे।

1649 का क़ानून-संग्रह (सोबोर्नोये उलोज़ेनिये)

1648 में मॉस्को के नमक-दंगे ने दिखाया कि लोग करों और अन्यायी अधिकारियों से नाराज़ थे। ज़ार अलेक्सेई मिखाइलोविच ने ज़ेम्स्की सोबोर से नए पूरे क़ानूनों का संग्रह तैयार करवाया। 1649 में यह पास होकर छपा: सोबोर्नोये उलोज़ेनिये। यह 1830 के दशक तक रूस का मुख्य क़ानून रहा।

ज़ेम्स्की सोबोर: देश की परिषदें

ज़ेम्स्की सोबोर ज़ार द्वारा बुलाई गई सभा थी। इसमें बोयार दूमा, चर्च के नेता और सेवा-कुलीनों व नगरवासियों के चुने हुए लोग होते। आज की संसद जैसा मतदान नहीं था, पर इसकी सलाह मानी जाती थी।

इसके बाद ज़ार और उसके दफ़्तर (जिन्हें प्रिकाज़ी कहते थे) अकेले फ़ैसले लेते।

निरंकुशता का मज़बूत होना और जनता का ग़ुस्सा

निरंकुशता का मतलब है कि ज़ार की शक्ति किसी परिषद या अपने से ऊपर के क़ानून से सीमित नहीं। 1600 के दशक में ज़ार बढ़ते हुए प्रिकाज़ी (दफ़्तरों) और सेवा-कुलीनों पर ज़्यादा, और बोयार दूमा व सोबोर पर कम टिकने लगा। 1666 में पैट्रिआर्क निकॉन को हटाने से चर्च भी ज़ार के अधीन आया।

लोग हमेशा यह मानते नहीं थे: नमक-दंगा (1648), ताँबा-दंगा (1662) और कज़ाक नेता स्तेपान रज़िन का बड़ा विद्रोह (1670–71) सब करों, दासता और अन्यायी शासन के विरुद्ध ग़ुस्से के सबूत हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. पहले रोमानोव को चुनने वाले सोबोर और क़ानून-संग्रह पास करने वाले सोबोर के बीच कितने साल बीते?

1649 − 1613 = 36 साल।

2. एक किसान 1640 में भागा और 1655 में मिला। 1649 के क़ानून के हिसाब से क्या उसे वापस ले जाया जा सकता था?

हाँ। 1649 के क़ानून ने “तय वर्षों” की सीमा ख़त्म कर दी, इसलिए भगोड़े को कभी भी लौटाया जा सकता था।

3. 1649 के क़ानून ने किन समूहों को किस जगह से बाँधा?

किसान अपने मालिक की ज़मीन से बँधे, और नगरवासी अपनी नगर-बस्ती (पोसाद) से।

4. समझाओ कि इतिहासकार क्यों कहते हैं कि 1600 के दशक में निरंकुशता मज़बूत हुई।

सोबोर कम होते गए, आख़िरी 1684 में। ज़ार अपने दफ़्तरों (प्रिकाज़ी) और सेवा-कुलीनों से शासन करने लगा, और 1666 में चर्च के नेता निकॉन को भी हटा दिया गया। इसलिए ज़ार को सीमित करने वाले समूह कम हुए।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सोबोर्नोये उलोज़ेनिये कब पास हुआ?
2. 1649 के क़ानून ने भगोड़े किसानों के साथ क्या किया?
3. ज़ेम्स्की सोबोर में कौन बैठते थे?
4. आख़िरी ज़ेम्स्की सोबोर कब बैठा?
5. निरंकुशता का अर्थ है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1649 का सोबोर्नोये उलोज़ेनिये क्या था?

यह रूस का नया क़ानून-संग्रह था, जिसे ज़ार अलेक्सेई मिखाइलोविच के समय ज़ेम्स्की सोबोर ने पास किया। इसने दासता को वंशानुगत बनाया और नगरवासियों को उनके नगर से बाँधा। यह लगभग दो सदी चला।

ज़ेम्स्की सोबोर क्या था?

ज़ार द्वारा बुलाई गई देश की परिषद। चर्च के नेता, बोयार दूमा और चुने हुए कुलीन व नगरवासी बड़े मामलों पर सलाह देते, जैसे 1613 में ज़ार चुनना।

17वीं सदी को मज़बूत निरंकुशता से क्यों जोड़ा जाता है?

सोबोर कम बुलाए गए और 1684 में बंद हुए, और ज़ार अपने दफ़्तरों और सेवा-कुलीनों पर टिका। 1666 में चर्च के नेता को भी हटाया जा सका।

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