ओप्रिच्निना क्यों शुरू हुई
इवान चतुर्थ को 1547 में पहला ज़ार का ताज मिला। 1560 के दशक में उनके सामने लिवोनिया (बाल्टिक सागर के पास) का लंबा युद्ध, मैदान में हार और प्रमुख बोयारों से झगड़े थे। कुछ बोयार दूसरे राज्यों में चले गए। ज़ार को हर जगह ग़द्दारी दिखने लगी। दिसंबर 1564 में वे परिवार और ख़ज़ाने के साथ मॉस्को छोड़ गए और लिखा कि वे बोयारों और चर्च-नेताओं से नाराज़ हैं। मॉस्को के लोगों ने लौटने की विनती की। फ़रवरी 1565 में वे एक शर्त पर लौटे: वे ग़द्दारों को जैसे चाहें सज़ा दे सकेंगे, और उनके अधीन राज्य का अलग हिस्सा होगा।
यह कैसे चली: ओप्रिच्निना और ज़ेम्शचिना
राज्य बाँट दिया गया। ओप्रिच्निना ज़ार का अपना क्षेत्र था: चुने हुए शहर और ज़मीनें, अपने दरबार, सेना और अधिकारियों के साथ। बाक़ी ज़ेम्शचिना ("ज़मीन") थी, जिसे पुरानी बोयार ड्यूमा चलाती थी। ज़ार अलेक्सान्द्रोवा स्लोबोदा चले गए।
ओप्रिच्निकी ज़ार के चुने हुए लोग थे, जो केवल उन्हीं के प्रति शपथबद्ध थे, कई निचले कुलीन परिवारों से। वे काले कपड़े पहनते थे। उन्होंने बोयारों की जागीरें लीं और पुराने मालिकों को दूर की ज़मीनों पर भेज दिया। बहुत लोगों को, बोयारों और आम परिवारों को, अक्सर बिना मुक़दमे सज़ा दी गई या मार दिया गया। कुछ कहानियाँ कहती हैं कि ओप्रिच्निकी कुत्ते का सिर और झाड़ू लेकर चलते थे, ग़द्दारों का शिकार करने और उन्हें साफ़ कर देने के चिह्न के रूप में; इतिहासकार इसे चली आई कहानी मानते हैं, पक्का तथ्य नहीं।
परिणाम और ओप्रिच्निना का अंत
ज़ार के लिए लाभ: पुराने बोयार परिवार कमज़ोर हुए और उनकी अपनी सत्ता बढ़ी। देश के लिए क़ीमत: डर, किसानों का भागना, ख़ाली खेत और व्यापार को चोट। 1570 में ओप्रिच्निकी ने नोवगोरोद, एक पुराने अमीर शहर, पर चढ़ाई की और उसे भारी नुक़सान हुआ। 1571 में क्रीमिया के ख़ान देवलेत गिरे मॉस्को पहुँचे और बाहरी शहर जला दिया; ओप्रिच्निना की सेना तैयार नहीं थी। 1572 में संयुक्त सेना ने मोलोदी की लड़ाई जीती। जल्द बाद ज़ार ने ओप्रिच्निना ख़त्म कर दी। अगले वर्षों में रूस लिवोनिया युद्ध में जूझता रहा, और खेती को हुए नुक़सान ने बाद की मुसीबतें बढ़ाईं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ओप्रिच्निना = ज़ार का अपना क्षेत्र + रक्षक (ओप्रिच्निकी)
- ज़ेम्शचिना = बाक़ी ज़मीन, पुरानी बोयार ड्यूमा के अधीन
- 1565 आरंभ, 1570 नोवगोरोद, 1571 मॉस्को पर क्रीमिया का हमला, 1572 मोलोदी और अंत
- लक्ष्य: बोयारों को कमज़ोर करना, वफ़ादारी पाना। क़ीमत: डर, ख़ाली खेत, कमज़ोर व्यापार
हल किए गए उदाहरण
1. 1565 के बाद राज्य के दो भाग कौन-से थे?
ओप्रिच्निना, ज़ार का अपना क्षेत्र रक्षकों के साथ, और ज़ेम्शचिना, पुरानी बोयार ड्यूमा के अधीन बाक़ी ज़मीन।
2. ओप्रिच्निना कितने वर्ष चली?
1565 से 1572 तक: 1572 - 1565 = 7 वर्ष।
3. हम कैसे कह सकते हैं कि ओप्रिच्निना ने देश को कमज़ोर किया, भले ज़ार की सत्ता बढ़ी?
जागीरें छीनी गईं, कई लोग भागे या पीड़ित हुए, खेत ख़ाली हुए और व्यापार गिरा। ज़ार बोयारों के सामने मज़बूत हुए, पर देश के पास कम अनाज, कम पैसा और कम भरोसा था, और वह 1571 का क्रीमिया हमला नहीं रोक सका।
आम गलतियाँ
- ओप्रिच्निना को युद्ध कहना। यह शासन का तरीक़ा था: राज्य बाँटना और विशेष रक्षक बनाना।
- दो भागों को मिलाना। ओप्रिच्निना = ज़ार का अपना; ज़ेम्शचिना = बाक़ी।
- यह मानना कि केवल बोयारों ने कष्ट सहा। आम लोग, शहर और गाँव भी पीड़ित हुए।
- अंत को 1584 बताना। ओप्रिच्निना 1572 में ख़त्म हुई; 1584 में इवान चतुर्थ की मृत्यु हुई।