गृहयुद्ध के कारण
कोई एक कारण नहीं था। अक्टूबर 1917 के बाद बहुत से समूहों को नुक़सान हुआ और बहुतों को नए शासन से डर था:
- बोल्शेविकों ने संविधान सभा बंद कर दी, इसलिए बहुत से समाजवादी और उदारवादी मानने लगे कि उन्होंने चुनाव का वादा तोड़ा।
- ब्रेस्ट-लितोव्स्क की संधि (मार्च 1918) ने जर्मनी को बड़े इलाके दे दिए। बहुत से रूसी नाराज़ हुए, शांति चाहने वाले भी।
- भूमि आदेश ने ज़मींदारों से ज़मीन ली, बैंक और कारख़ाने सरकार के हो गए, और अफ़सरों, अधिकारियों और व्यापारियों ने पद और संपत्ति खोई। बहुत से उसे वापस पाना चाहते थे।
- अलग-अलग समूहों के लक्ष्य अलग थे: कुछ ज़ार की वापसी चाहते थे, कुछ चुनी हुई सरकार, कुछ केवल अपने इलाके की आज़ादी।
युद्ध के चरण
- 1918 (पहला चरण): मोर्चे बने। मई में रेल से पूर्व जा रहे चेकोस्लोवाक सैनिकों ने विद्रोह किया और वोल्गा क्षेत्र और साइबेरिया में बोल्शेविक-विरोधी सरकारों की मदद की। ब्रिटेन, फ़्रांस, अमेरिका और जापान ने उत्तर और सुदूर पूर्व में सेनाएँ उतारीं।
- 1919 (शिखर): एडमिरल कोल्चाक ने साइबेरिया से, जनरल देनिकिन ने दक्षिण से (अक्टूबर में ओर्योल के पास तक), जनरल यूदेनिच ने पेत्रोग्राद की ओर हमला किया। लेओन त्रोत्स्की ने भर्ती और पुराने ज़ारशाही अफ़सरों की मदद से जो लाल सेना बनाई थी, उसने एक-एक करके सबको रोका।
- 1920: कोल्चाक पकड़े गए और फ़रवरी में मारे गए। देनिकिन की सेना बिखर गई। पोलैंड-सोवियत युद्ध हुआ (रीगा की संधि, मार्च 1921)। जनरल रांगेल नवंबर 1920 तक क्रीमिया में टिके, फिर श्वेत चले गए।
- 1921–22 (अंत): आख़िरी लड़ाई सुदूर पूर्व में (अक्टूबर 1922 तक)। किसान विद्रोह (ताम्बोव) और क्रोनश्ताद्त में नाविकों का विद्रोह (मार्च 1921) युद्ध साम्यवाद से नाराज़गी दिखाते हैं। दिसंबर 1922 में सोवियत संघ बना।
युद्ध साम्यवाद
युद्ध साम्यवाद (1918–1921) आपातकालीन नीतियों का समूह था, जिससे बोल्शेविकों ने सेना और शहरों को खिलाया और युद्ध जीता।
- अनाज की अनिवार्य वसूली (प्रोदराज़्वियोर्स्तका): टुकड़ियाँ किसानों का अतिरिक्त अनाज, अक्सर उससे भी ज़्यादा, ले जाती थीं और लगभग कुछ नहीं देती थीं।
- राष्ट्रीयकरण: पहले बड़े उद्योग, फिर लगभग सभी कारख़ाने राज्य के नियंत्रण में आ गए।
- निजी व्यापार पर रोक और राशन (कार्ड) से भोजन, साथ में काला बाज़ार।
- श्रम की अनिवार्यता: काम ज़रूरी किया गया; मज़दूरी ज़्यादातर सामान में दी जाती थी।
- चेका (गुप्त पुलिस) ने विरोधियों पर आतंक का इस्तेमाल किया। श्वेतों ने भी अपने दुश्मनों पर आतंक चलाया।
इस नीति से लाल टिके रहे, पर किसानों ने बुवाई का रक़बा घटा दिया क्योंकि राज्य फ़सल ले लेता था। 1921 तक अकाल पड़ गया।
लाल क्यों जीते और परिणाम
लाल क्यों जीते: उनके पास मास्को, पेत्रोग्राद, ज़्यादातर कारख़ाने और रेलों का केंद्र वाला मध्य क्षेत्र था, इसलिए वे छोटी लाइनों पर तेज़ी से सेना भेज सकते थे। उनके पास एक कमान और एक पार्टी थी। श्वेत किनारों पर बिखरे और आपस में बँटे थे, और बहुत से किसान डरते थे कि श्वेतों की जीत से ज़मींदार लौटेंगे। विदेशी मदद थोड़ी और आधे-अधूरे मन से थी।
परिणाम:
- लगभग 70 लाख से 1 करोड़ मौतें (अनुमान अलग हैं), लड़ाई, आतंक, भूख और बीमारी से। 1921–22 के अकाल ने वोल्गा क्षेत्र में और लाखों जानें लीं।
- उद्योग 1913 के स्तर के छोटे हिस्से तक गिरा और खेती बहुत घटी। लोग गाँवों की ओर भागे और शहर सिकुड़े।
- लगभग 15–20 लाख लोग देश छोड़कर गए।
- बोल्शेविक पार्टी को मज़बूत केंद्रीकृत राज्य और 1922 में नया देश, सोवियत संघ, मिला। 1921 में युद्ध साम्यवाद छोड़कर नई आर्थिक नीति आई (अगला पाठ)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पक्ष: लाल (बोल्शेविक), श्वेत (बोल्शेविक-विरोधी अफ़सर, ज़मींदार आदि), हरे (किसान दल), विदेशी सेनाएँ
- चरण: 1918 मोर्चे बने → 1919 कोल्चाक, देनिकिन, यूदेनिच → 1920 रांगेल और पोलैंड युद्ध → 1921–22 अंत और विद्रोह
- युद्ध साम्यवाद = अनाज की अनिवार्य वसूली + राष्ट्रीयकृत उद्योग + निजी व्यापार पर रोक + राशन + श्रम की अनिवार्यता
- परिणाम: लगभग 70 लाख–1 करोड़ मौतें; उद्योग और खेती बर्बाद; क्रोनश्ताद्त विद्रोह (1921) → नई आर्थिक नीति; सोवियत संघ (1922)
हल किए गए उदाहरण
1. गृहयुद्ध के तीन कारण बताइए।
संविधान सभा का बंद होना, ज़मीन छोड़ने वाली ब्रेस्ट-लितोव्स्क शांति, और क्रांति के बाद ज़मींदारों, अफ़सरों और दूसरों की ज़मीन, संपत्ति और सत्ता का छिनना। (साथ में: ज़बरदस्ती अनाज लेना।)
2. विदेशी देशों की मदद के बावजूद श्वेत क्यों हारे?
वे किनारों पर बिखरे थे और उनकी कोई साझा योजना या नेता नहीं था। बहुत से किसान ज़मींदारों की वापसी से डरते थे। विदेशी मदद छोटी थी और उसे विदेशी दख़ल माना गया। लाल के पास केंद्र, रेलें और एक कमान थी।
3. युद्ध साम्यवाद से खाद्य संकट क्यों हुआ?
राज्य किसानों का अतिरिक्त अनाज ले लेता था और लगभग कुछ नहीं देता था। इसलिए किसानों ने कम बोया ताकि जो उगे वह बचा रहे। 1921 के सूखे ने इसमें अकाल जोड़ दिया।
4. मार्च 1921 के क्रोनश्ताद्त विद्रोह ने नीति कैसे बदली?
नौसैनिक अड्डे के नाविकों ने, जो कभी बोल्शेविकों के बड़े समर्थक थे, अनिवार्य वसूली ख़त्म करने और ज़्यादा आज़ादी की माँग की। सरकार ने विद्रोह कुचला, पर नीति भी बदली: उसी महीने नई आर्थिक नीति की घोषणा हुई।
आम गलतियाँ
- "श्वेत" को विदेशी सेनाओं के लिए लिखना। श्वेत रूस के बोल्शेविक-विरोधी बल थे; विदेशी सेनाएँ अलग और कम थीं।
- यह सोचना कि गृहयुद्ध केवल लाल बनाम श्वेत था। हरे (किसान), राष्ट्रवादी आंदोलन और विदेशी सेनाएँ भी शामिल थीं।
- युद्ध साम्यवाद (1918–21, ज़बरदस्ती की नीतियाँ) और नई आर्थिक नीति (1921 से, आंशिक मुक्त बाज़ार) को मिला देना।
- यह कहना कि रूस के विश्व युद्ध से हटते ही 1918 में युद्ध ख़त्म हो गया। गृहयुद्ध 1920–22 तक चला।