बॉक्सर आंदोलन: यह क्यों शुरू हुआ
बॉक्सर आंदोलन उत्तर चीन में, पहले शानतुंग प्रांत में, बढ़ा। इसके सदस्य खुद को यिहेतुआन ("धर्मी और सौहार्दपूर्ण मुक्के") कहते थे। विदेशी उन्हें बॉक्सर कहते थे क्योंकि वे मार्शल आर्ट करते थे, और कई मानते थे कि इन अभ्यासों से गोलियाँ उन्हें नहीं लगेंगी।
- भूख: बाढ़ और फिर सूखे से कई किसानों के पास खाना नहीं बचा।
- विदेशी मौजूदगी: अफ़ीम युद्धों के बाद विदेशी व्यापारी, मिशनरी और रेल बनाने वाले उत्तर में फैले। कुछ लोगों को लगा कि रेल से गाड़ीवालों और नाविकों का काम छिन गया।
- टकराव: ईसाई बने लोगों और पड़ोसियों के झगड़े अदालत तक जाते थे, और गाँववालों को लगता था कि मिशन अपने लोगों का पक्ष लेते हैं।
- कमज़ोर राज्य: चीन युद्ध हार चुका था (1894-95 में जापान से भी) और कर्ज़ में था, इसलिए कई लोग अपमानित महसूस करते थे।
शुरू में बॉक्सरों ने विदेशियों, चीनी ईसाइयों और रेल-तार जैसे प्रतीकों पर हमले किए। 1900 में महारानी दोवागर सिशी के नेतृत्व में छिंग सरकार ने उनका साथ देने का फ़ैसला किया।
घेराबंदी और आठ-राष्ट्र आक्रमण
जून 1900 में बॉक्सर टोलियाँ पेइचिंग में घुसीं। 55 दिन तक उन्होंने और कुछ छिंग सैनिकों ने दूतावास क्षेत्र को घेरे रखा, जहाँ विदेशी राजनयिक, उनके परिवार और कई चीनी ईसाई शरण लिए थे। लगभग 21 जून को छिंग दरबार ने विदेशी शक्तियों पर युद्ध घोषित किया।
आठ देशों ने आठ-राष्ट्र गठबंधन बनाया: ब्रिटेन, अमेरिका, रूस, जापान, फ़्रांस, जर्मनी, इटली और ऑस्ट्रिया-हंगरी। उनकी सेनाओं ने थ्येनचिन लिया, फिर पेइचिंग पर चढ़ाई की और 14 अगस्त 1900 को वहाँ दाख़िल हुईं। महारानी और सम्राट शीआन भाग गए। विदेशी सैनिकों ने शहर के कुछ हिस्सों में लूट की, और लड़ाई तथा बदले में कई आम चीनी नागरिकों को कष्ट झेलना पड़ा।
बॉक्सर प्रोटोकॉल (1901)
महीनों की बातचीत के बाद 7 सितंबर 1901 को बॉक्सर प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए। मुख्य शर्तें:
- हर्जाना: चीन को 39 साल में 45 करोड़ चाँदी के ताएल देने थे (ब्याज के साथ 90 करोड़ से ज़्यादा)।
- विदेशी रक्षक: शक्तियाँ पेइचिंग में और तट तक की रेल-लाइन पर सैनिक रख सकती थीं।
- किले: तट के पास दाकू के किले गिरा दिए गए।
- दूतावास क्षेत्र: वह विदेशी नियंत्रण वाला क्षेत्र बन गया।
- सज़ा और रोक: कुछ अधिकारियों को सज़ा मिली और विदेश-विरोधी संगठनों पर रोक लगी।
इन भुगतानों से ख़ज़ाना ख़ाली हुआ और कर बढ़े, और चीन बाहरी शक्तियों के भारी दबाव में और गहरा फँस गया। कई चीनियों ने माना कि छिंग सरकार देश को बचा नहीं सकती, जिससे सुधार और क्रांति की ओर लोग बढ़े।
करके देखिए
3D में चरण 4 खोलिए और सिक्के गिनिए: हर सिक्का 39 साल के भुगतान का एक साल है। पहले अनुमान लगाइए: अगर 45 करोड़ ताएल बराबर हिस्सों में दिए जाएँ तो हर साल लगभग कितने करोड़? भाग देकर अभ्यास का प्रश्न 6 जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: यिहेतुआन = बॉक्सर; लिगेशन (दूतावास) = किसी देश का राजनयिक कार्यालय; हर्जाना = हारे पक्ष को दिया जाने वाला धन; प्रोटोकॉल = हस्ताक्षरित समझौता।
- तारीख़ें: 1899-1900 बॉक्सर फैले; जून 1900 घेराबंदी और युद्ध की घोषणा; 14 अगस्त 1900 पेइचिंग पर क़ब्ज़ा; 7 सितंबर 1901 प्रोटोकॉल।
- संख्याएँ: 8 शक्तियाँ; 55 दिन की घेराबंदी; 45 करोड़ ताएल; 39 साल।
हल किए गए उदाहरण
1. बॉक्सर आंदोलन के तीन कारण बताइए।
(1) उत्तर में बाढ़ और सूखे से भूख। (2) अफ़ीम युद्धों के बाद विदेशी मिशनों, रेल और व्यापार पर ग़ुस्सा। (3) हारे हुए युद्धों के बाद कर्ज़ में डूबी कमज़ोर सरकार, जिससे लोग अपमानित महसूस करते थे।
2. 1900 में आठ देशों ने मिलकर कार्रवाई क्यों की?
पेइचिंग में उनके दूतावास घिरे थे और नागरिक ख़तरे में थे। सभी को चीन में अपने व्यापार और अधिकार भी बचाने थे, इसलिए उन्होंने सेनाएँ जोड़कर एक अभियान चलाया।
3. प्रोटोकॉल का चीन पर क्या असर पड़ा?
चीन को 39 साल में 45 करोड़ ताएल देने पड़े, जिससे कर बढ़े। विदेशी सैनिक पेइचिंग और तट के पास रहे और किले गिरे, इसलिए चीन की रक्षा और स्वतंत्रता कमज़ोर हुई।
आम गलतियाँ
- बॉक्सरों को छिंग की सेना समझना। वे किसानों का आंदोलन थे; दरबार ने बाद में साथ दिया।
- घेराबंदी (जून से अगस्त 1900) और प्रोटोकॉल (सितंबर 1901) को मिला देना।
- नौ या दस देश कहना। देश आठ थे।
- सोचना कि चीन ने कुछ जीता। चीन को भारी समझौते पर हस्ताक्षर करने पड़े।