उदय और मुख्य घटनाएँ
ताइपिंग आंदोलन चीन में छिंग सरकार के विरुद्ध हुआ बहुत बड़ा विद्रोह था। यह 1850 से 1864 तक चला।
यह क्यों शुरू हुआ?
दक्षिण में कई किसानों के पास ज़मीन और अनाज कम था। कर भारी थे और बाढ़ व ख़राब फ़सलों ने जीवन और कठिन कर दिया। अफ़ीम युद्ध (1839-42) के बाद सरकार को विदेशी शक्तियों को बड़ी रकम देनी पड़ी और लोगों का सरकार से भरोसा उठ गया। कई स्थानीय अधिकारी भ्रष्ट थे।
हॉन्ग श्योछ्वान कौन थे?
हॉन्ग श्योछ्वान सरकारी परीक्षाओं में कई बार असफल हुए। बीमारी के बाद उन्हें दर्शन हुए और उन्होंने ईसाई पर्चे पढ़े। उन्होंने मान लिया कि वे ईसा के छोटे भाई हैं और बराबरी वाला राज्य बनाने भेजे गए हैं। उनके संदेश से ग़रीब लोगों को उम्मीद मिली।
आंदोलन कैसे बढ़ा?
- उन्होंने गुआंग्शी प्रांत में ईश्वर-उपासक नाम का समूह बनाया। किसान, खनिक और मज़दूर जुड़े।
- 1851 में जिनतियान में वे छिंग के विरुद्ध उठे और महान शांति के स्वर्गीय राज्य (ताइपिंग तियानगुओ) की घोषणा की।
- उनकी सेना यांग्त्ज़े नदी घाटी में बढ़ी और हज़ारों से लाखों तक पहुँच गई।
- 1853 में उन्होंने नानजिंग ले लिया और उसे राजधानी बनाया। करीब ग्यारह साल वे उसके आस-पास के बड़े इलाक़े पर शासन करते रहे।
ताइपिंग के कार्यक्रम
ताइपिंग केवल लड़े नहीं। उन्होंने नया समाज बनाने की भी कोशिश की। ये उनकी मुख्य योजनाएँ थीं।
- ज़मीन: "स्वर्गीय राजवंश की भूमि-व्यवस्था" नाम की योजना में ज़मीन परिवार के आकार के हिसाब से बाँटनी थी। व्यवहार में इसे कभी पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
- स्त्री और पुरुष: स्त्रियाँ खेती कर सकती थीं, सेना में सेवा दे सकती थीं और ताइपिंग परीक्षा दे सकती थीं। पैर बाँधने की प्रथा पर रोक थी।
- बुरी आदतें: अफ़ीम, शराब, जुआ और इंसानों की बिक्री पर रोक थी।
- साझा ख़ज़ाना: अतिरिक्त अनाज और धन साझा ख़ज़ाने में जाना था। व्यवहार में नेता आम लोगों से कहीं बेहतर जीवन जीते थे।
- नई आस्था और नियम: उन्होंने ईसाई विचारों को अपनी मान्यताओं से मिलाया और पुरानी कन्फ़्यूशियाई शिक्षा की जगह कड़े नियम रखे। कई विद्वानों और ज़मींदारों को यह पसंद नहीं आया।
स्त्रियों की बराबरी और अफ़ीम पर रोक जैसी कुछ योजनाएँ अपने समय से बहुत आगे थीं। पर योजना तभी मज़बूत होती है जब उसे लागू किया जाए।
ताइपिंग की विफलता
कई बातों ने मिलकर आंदोलन का अंत किया।
- नेताओं की आपसी लड़ाई (1856): नानजिंग में शीर्ष नेता एक-दूसरे के विरुद्ध हो गए और हज़ारों मारे गए। भरोसा टूट गया और सबसे अच्छे सेनापति चले गए।
- काग़ज़ी योजनाएँ: ज़मीन की योजना और साझा ख़ज़ाना ठीक से नहीं चले, इसलिए किसानों को हमेशा कोई बदलाव महसूस नहीं हुआ।
- विद्वान और ज़मींदार दूर रहे: अजीब नई आस्था और पुरानी रीतियों पर हमले से वे डर गए। ताइपिंग के पास प्रशिक्षित अधिकारी कम थे।
- मज़बूत विरोधी: छिंग सरकार ख़ुद कमज़ोर थी, पर क्षेत्रीय नेताओं जैसे ज़ेंग गुओफ़ान (श्यांग सेना) और ली होंगज़ांग (हुआई सेना) ने नई सेनाएँ बनाईं। विदेशी-प्रशिक्षित दस्तों, जैसे "एवर विक्टोरियस आर्मी", ने भी मदद की, क्योंकि विदेशी शक्तियाँ छिंग को बनाए रखना चाहती थीं।
1864 में छिंग ने नानजिंग ले लिया। हॉन्ग श्योछ्वान की मृत्यु कुछ सप्ताह पहले हो चुकी थी। कुछ इलाक़ों में लड़ाई और कुछ साल चली।
महत्व और प्रभाव
आंदोलन असफल रहा, पर उसने चीन को बदल दिया।
- जान की भारी हानि: यह इतिहास के सबसे घातक युद्धों में से एक था। अकाल और बीमारी समेत अनुमान आमतौर पर करोड़ों में बताए जाते हैं। संख्याएँ पक्की नहीं हैं।
- कमज़ोर छिंग केंद्र: दरबार केवल इसलिए बचा क्योंकि क्षेत्रीय सेनाओं ने उसे बचाया। इसके बाद असली सैन्य शक्ति क्षेत्रीय नेताओं के पास रही, जिन्होंने आगे सुधारों और राजनीति में बड़ी भूमिका निभाई।
- आगे के आंदोलनों के लिए मिसाल: समानता, ग़रीबों को ज़मीन और स्त्रियों के बराबर अधिकार के उसके विचार बाद के सुधारकों और क्रांतिकारियों को याद रहे।
- दूसरी घटनाओं से जुड़ाव: इस युद्ध ने अधिकारियों को आत्म-सशक्तीकरण आंदोलन की ओर धकेला, जो आधुनिक बंदूक़ों और जहाज़ों से शुरू हुआ।
सबक याद रखो: बड़े विचार को साफ़ योजना, एकजुट नेतृत्व और कुशल लोगों का साथ चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कारण: भूख + भारी कर + हार की क़ीमत + नई उम्मीद (हॉन्ग श्योछ्वान)
- उदय: ईश्वर-उपासक (गुआंग्शी) -> जिनतियान विद्रोह (1851) -> नानजिंग (1853)
- योजनाएँ: साझा ज़मीन, स्त्री-पुरुष बराबर, अफ़ीम-जुआ पर रोक, साझा ख़ज़ाना
- विफलता: नेताओं की लड़ाई (1856) + काग़ज़ी योजनाएँ + विद्वान दूर + छिंग की क्षेत्रीय सेनाएँ
- मुख्य साल: 1850, 1851, 1853, 1856, 1864
हल किए गए उदाहरण
1. आसान। ताइपिंग आंदोलन के तीन कारण बताओ।
3D में टंकी देखो। पहला, भूख और भारी कर: कई किसानों के पास ज़मीन और अनाज कम था। दूसरा, अफ़ीम युद्ध की हार की क़ीमत और शर्म, जिससे छिंग पर भरोसा घटा। तीसरा, हॉन्ग श्योछ्वान की दी हुई नई उम्मीद, कि सब लोग बराबर हैं। तीनों मिलकर लोगों को उठ खड़े होने के लिए तैयार कर गए।
2. मध्यम। ताइपिंग की मुख्य योजनाएँ लिखो और बताओ कौन-सी अपने समय से आगे थी।
योजनाएँ: साझा ज़मीन, स्त्री-पुरुष बराबर, अफ़ीम-जुआ-पैर बाँधने पर रोक, साझा ख़ज़ाना और नई आस्था। स्त्रियों की बराबरी (वे खेती, सेवा और परीक्षा दे सकती थीं) और पैर बाँधने पर रोक अपने समय से बहुत आगे थीं। कई अन्य योजनाएँ पूरी तरह लागू नहीं हुईं।
3. कठिन। समझाओ कि आंदोलन क्यों असफल हुआ और उसने क्या छोड़ा।
चरण 1: 1856 में नेता आपस में लड़े, भरोसा टूटा और सेनापति मारे गए। चरण 2: ज़मीन बाँटने जैसी योजनाएँ काग़ज़ पर रहीं। चरण 3: विद्वान और ज़मींदार नई आस्था से डरकर साथ नहीं आए। चरण 4: ज़ेंग गुओफ़ान और ली होंगज़ांग की क्षेत्रीय सेनाओं ने, विदेशी-प्रशिक्षित मदद से, 1864 में नानजिंग लिया। पीछे रह गया: जान की भारी हानि, क्षेत्रीय नेताओं पर निर्भर छिंग दरबार और समानता के विचारों की यादें।
आम गलतियाँ
- ताइपिंग आंदोलन (1850-64, दक्षिण में बड़ा गृहयुद्ध) को बॉक्सर विद्रोह (1899-1901, उत्तर में) से मिला देना।
- यह कहना कि ताइपिंग केवल डाकू थे। उनके पास योजना, राजधानी और लगभग ग्यारह साल तक सरकार थी।
- यह कहना कि उनकी सारी योजनाएँ लागू हुईं। ज़मीन की योजना और साझा ख़ज़ाना ज़्यादातर काग़ज़ पर रहे।
- विफलता का सिर्फ़ एक कारण देना। अच्छा उत्तर नेताओं की लड़ाई, काग़ज़ी योजनाएँ, विद्वानों की कमी और छिंग की मज़बूत क्षेत्रीय सेनाओं को जोड़ता है।