आधुनिक उद्योग और सेनाएँ
आत्म-सशक्तीकरण आंदोलन (इसे यांगवू या पश्चिमीकरण आंदोलन भी कहते हैं) लगभग 1861 से 1895 तक चला।
यह क्यों शुरू हुआ?
- अफ़ीम युद्धों ने दिखाया कि पश्चिमी जहाज़ और बंदूक़ें अधिक ताक़तवर हैं।
- ताइपिंग युद्ध में अधिकारियों ने देखा कि विदेशी ढंग की बंदूक़ें जीत में मददगार हैं।
- संधि-बंदरगाहों में भाप के जहाज़, तार और मशीनें रोज़ काम में आती दिखीं।
राजकुमार गोंग, ज़ेंग गुओफ़ान, ली होंगज़ांग, ज़ुओ ज़ोंगतांग और बाद में चांग ज़ीदोंग जैसे नेताओं ने कहा: चीनी विद्या को आधार रखो और पश्चिमी विद्या को व्यावहारिक उपयोग के लिए अपनाओ।
क्या बनाया गया?
- शस्त्रागार: जियांगनान शस्त्रागार (शंघाई, 1865) ने बंदूक़ें और जहाज़ बनाए और विज्ञान की किताबों का अनुवाद किया।
- जहाज़-घाट: फ़ूज़ौ जहाज़-घाट (1866) ने भाप के युद्धपोत बनाए और नाविक तैयार किए।
- स्कूल: तोंगवेन गुआन (1862) में भाषाएँ और विज्ञान पढ़ाए गए। 1872 से छात्र अमेरिका पढ़ने भी भेजे गए।
- कंपनियाँ: चाइना मर्चेंट्स स्टीम नेविगेशन कंपनी (1872), कैपिंग कोयला खदानें (1878) और पहली तार लाइन (1881)। आगे कपड़ा मिलें और लोहे के कारख़ाने भी आए।
- नौसेना: उत्तर में बेयांग बेड़ा, जो 1888 में औपचारिक रूप से शुरू हुआ, उस समय एशिया का सबसे बड़ा बेड़ा था।
सीमांत संकट
जब चीन नई चीज़ें बना रहा था, तब उसकी सीमाओं पर मुसीबतें आईं। हर एक को उसकी जगह और साल से याद रखो।
- इली संकट (1871-81): जब शिनजियांग में विद्रोह चल रहा था तब रूस ने सुदूर पश्चिम के इली क्षेत्र पर क़ब्ज़ा किया। जनरल ज़ुओ ज़ोंगतांग की सेना ने ज़्यादातर शिनजियांग वापस ले लिया। 1881 की संधि से अधिकांश इली लौट आया। शिनजियांग 1884 में प्रांत बना।
- ताइवान (1874): नाविकों की हत्या के बाद जापान ने ताइवान में सेना भेजी। चीन ने मामला निपटाने के लिए धन दिया, पर उसने द्वीप को मज़बूत करना शुरू किया और 1885 में ताइवान को प्रांत बनाया।
- र्यूक्यू द्वीप (1879): जापान ने र्यूक्यू द्वीप ले लिए, जो लंबे समय से चीन से जुड़े थे।
- चीन-फ़्रांस युद्ध (1884-85): वियतनाम को लेकर। फ़ूज़ौ बेड़े को भारी चोट पहुँची। चीन ने वियतनाम पर अपना प्रभाव खो दिया।
- कोरिया और चीन-जापान युद्ध (1894-95): कोरिया में प्रभाव के लिए चीन और जापान लड़े। बेयांग बेड़ा हार गया। शिमोनोसेकी की संधि (1895) से चीन ने ताइवान जापान को दिया और बहुत बड़ी रकम चुकाई।
इन संकटों ने नए उद्योग और सेना की परीक्षा ली। पश्चिम में वह काम आया। समुद्र में, जापान के सामने, नहीं।
मूल्यांकन: आंदोलन को कैसे परखें?
"क्या आंदोलन सफल था?" का अच्छा उत्तर दोनों पक्ष देखता है।
लाभ
- इसने चीन में आधुनिक उद्योग, जहाज़रानी, खनन और तार की शुरुआत की।
- इसने आधुनिक विषय जानने वाले लोगों का पहला समूह तैयार किया।
- इसने सेना को शिनजियांग वापस लेने में मदद की।
सीमाएँ
- कम धन: परियोजनाएँ सीमित धन पर चलीं और अक्सर ठीक से नहीं चलाई गईं।
- एक योजना नहीं: हर अधिकारी ने अपनी परियोजना बनाई। पूरे देश की कोई योजना नहीं थी।
- पुरानी व्यवस्था: सरकार, परीक्षा और विचार नहीं बदले। पुरानी व्यवस्था से लाभ पाने वाले कई अधिकारी बदलाव के विरोधी थे।
- नतीजा: 1895 में चीन जापान से हार गया, जिसने 1868 के बाद अपनी पूरी व्यवस्था बदल दी थी।
यानी आंदोलन एक पहला क़दम था, पर बहुत छोटा और सीमित। इसने कुछ लोगों को गहरे बदलाव की ओर धकेला, जैसे 1898 का सौ दिन का सुधार।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नारा: चीनी विद्या आधार, पश्चिमी विद्या उपयोग के लिए
- बना: शस्त्रागार (1865), जहाज़-घाट (1866), स्कूल (1862), भाप-जहाज़ (1872), खदानें (1878), तार (1881), नौसेना (1888)
- सीमांत संकट: इली 1871-81, ताइवान 1874, र्यूक्यू 1879, वियतनाम 1884-85, कोरिया 1894-95
- सीमाएँ: कम धन + एक योजना नहीं + पुरानी व्यवस्था वैसी ही
- अंत का निशान: जापान से हार (1894-95), शिमोनोसेकी की संधि (1895)
हल किए गए उदाहरण
1. आसान। आत्म-सशक्तीकरण आंदोलन का नारा क्या था और उसका मतलब क्या था?
नारा था "चीनी विद्या आधार, पश्चिमी विद्या उपयोग के लिए"। मतलब: चीन के पुराने मूल्य और शासन का तरीक़ा रखो, पर पश्चिम से बंदूक़ें, जहाज़ और मशीनें उधार लो।
2. मध्यम। आंदोलन की बनाई तीन चीज़ें बताओ और हर एक किसलिए थी।
जियांगनान शस्त्रागार (1865) ने बंदूक़ें और जहाज़ बनाए और विज्ञान की किताबें अनूदित कीं। फ़ूज़ौ जहाज़-घाट (1866) ने भाप के युद्धपोत बनाए। चाइना मर्चेंट्स स्टीम नेविगेशन कंपनी (1872) ने माल ढोया और विदेशी कंपनियों से व्यापार वापस लिया। अन्य: तोंगवेन गुआन स्कूल (1862), कैपिंग खदानें (1878), तार (1881), बेयांग बेड़ा (1888)।
3. कठिन। आंदोलन 1894-95 में जापान से चीन की हार क्यों नहीं रोक सका?
चरण 1: धन सीमित था और परियोजनाएँ अक्सर ठीक से नहीं चलीं। चरण 2: हर अधिकारी ने अपनी परियोजना बनाई, इसलिए सेना और नौसेना एक योजना के तहत नहीं थीं। चरण 3: सरकार, परीक्षा और विचारों की पुरानी व्यवस्था नहीं बदली, इसलिए औज़ारों को बढ़ने का आधार कम मिला। चरण 4: जापान ने 1868 के बाद पूरी व्यवस्था बदली थी और वह ज़्यादा ताक़तवर था। बेयांग बेड़ा हारा और 1895 की संधि से ताइवान जापान को मिला।
आम गलतियाँ
- आत्म-सशक्तीकरण आंदोलन (1861-95, अधिकारियों के आधुनिक औज़ार) को सौ दिन के सुधार (1898, गहरे बदलाव की छोटी कोशिश) से मिला देना।
- यह कहना कि आंदोलन ने कुछ नहीं बनाया। उसने पहले आधुनिक शस्त्रागार, जहाज़-घाट, भाप-जहाज़, खदानें, तार और नौसेना बनाए।
- विफलता का सिर्फ़ एक कारण देना। अच्छा उत्तर कम धन, एक योजना का न होना और पुरानी व्यवस्था के न बदलने को जोड़ता है।
- सीमांत संकट भूल जाना। उन्होंने नई सेना की परीक्षा ली: पश्चिम (इली, शिनजियांग) में सफलता मिली, पर वियतनाम (1884-85) और कोरिया (1894-95) में हार।