छिंग व्यवस्था क्यों टूटी
1911 तक छिंग दरबार का भरोसा टूट चुका था। चीन युद्ध हार चुका था, बॉक्सर प्रोटोकॉल के बाद भारी भुगतान कर रहा था और विदेशी शक्तियों के विशेष अधिकार देख रहा था। दरबार ने सुधारों का वादा किया, जिनमें एक सभा की योजना भी थी, पर कई लोगों को वे बहुत धीमे लगे और सत्ता मांचू कुलीनों के हाथ में ही रही।
मई 1911 में सरकार ने घोषणा की कि वह स्थानीय रेल लाइनें अपने हाथ में लेगी और उन्हें बनाने के लिए विदेशी बैंकों से कर्ज़ लेगी। सिचुआन जैसे प्रांतों के निवेशक, जिन्होंने अपना पैसा लगाया था, नाराज़ हुए। "रेल सुरक्षा" आंदोलन बढ़ा और सिचुआन में सेना भेजी गई। सैनिकों के दूर भेजे जाने से दूसरी छावनियाँ कमज़ोर हुईं।
वूचांग विद्रोह (10 अक्तूबर 1911)
वूचांग (आज के वूहान का हिस्सा) में क्रांतिकारी नई सेना के सैनिकों के बीच काम कर रहे थे। जब एक योजना पकड़ी गई और गिरफ़्तारियाँ शुरू हुईं, तो सैनिकों ने 10 अक्तूबर 1911 की रात विद्रोह कर शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया। उन्होंने सेना अधिकारी ली युआनहोंग को नेतृत्व के लिए मनाया और नई सैन्य सरकार की घोषणा की।
10 अक्तूबर की तारीख़ आज भी "डबल टेन" के रूप में याद की जाती है। विद्रोह की योजना सुन यात-सेन ने नहीं बनाई थी, जो उस समय विदेश में थे, पर तुंगमेंगहुई और अन्य समूहों के लोगों ने मदद की।
प्रांत अलग हुए और गणराज्य की स्थापना
ख़बर तेज़ी से फैली। लगभग दो महीनों में एक दर्जन से ज़्यादा प्रांतों ने छिंग से स्वतंत्रता की घोषणा की। प्रतिनिधि नानचिंग में मिले, और 1 जनवरी 1912 को चीन गणराज्य की घोषणा हुई, जिसके अस्थायी राष्ट्रपति सुन यात-सेन बने। नई सरकार ने मार्च 1912 में अस्थायी संविधान बनाया, जिसमें समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अधिकारों का वादा था।
छिंग दरबार ने पूर्व जनरल युआन शिखाई को वापस बुलाया, जिसके पास उत्तर की सबसे ताकतवर सेना थी, ताकि वह क्रांति से लड़े। युआन ने इस स्थिति का उपयोग अपने लिए सत्ता की सौदेबाज़ी में किया।
शाही शासन का अंत
युआन शिखाई ने दोनों पक्षों से बात की। सुन यात-सेन उसके लिए पद छोड़ने को तैयार हुए, बशर्ते सम्राट गद्दी छोड़े और युआन गणराज्य का समर्थन करे। 12 फरवरी 1912 को छह साल के सम्राट पूयी ने पदत्याग का आदेश जारी किया। चीन की सम्राटों की व्यवस्था, जो 221 ई.पू. में शुरू हुई थी, 2,000 से ज़्यादा साल बाद ख़त्म हो गई। पूयी को कुछ साल महल में रहने दिया गया।
क्रांति बहुत बड़ा बदलाव थी, पर उसने सब कुछ हल नहीं किया: सेना अब भी जनरलों की थी, नई संसद नाज़ुक थी, ज़मीन की समस्याएँ बनी रहीं और विदेशी शक्तियों के विशेष अधिकार भी। अगला पाठ दिखाता है कि युआन शिखाई के अधीन आगे क्या हुआ।
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मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तारीख़ें: मई 1911 रेल अधिग्रहण; 10 अक्तूबर 1911 वूचांग; 1 जनवरी 1912 गणराज्य; 12 फरवरी 1912 पदत्याग।
- मुख्य लोग: सुन यात-सेन (अस्थायी राष्ट्रपति), ली युआनहोंग (वूचांग), युआन शिखाई (सेना प्रमुख), पूयी (अंतिम सम्राट)।
- कड़ी: रेल पर ग़ुस्सा -> वूचांग की चिंगारी -> प्रांत अलग -> गणराज्य -> पदत्याग।
हल किए गए उदाहरण
1. 10 अक्तूबर को "डबल टेन" क्यों कहते हैं?
वूचांग का विद्रोह 1911 के दसवें महीने की दसवीं तारीख़ को शुरू हुआ। यह तारीख़ चीन गणराज्य का राष्ट्रीय दिवस बनी।
2. एक शहर का विद्रोह इतनी तेज़ी से क्यों फैला?
बहुत लोग पहले से दरबार पर भरोसा खो चुके थे। प्रांतीय नेताओं और सैन्य टुकड़ियों ने देखा कि दरबार जवाब नहीं दे सकता, इसलिए उन्होंने डोमिनो की तरह एक के बाद एक स्वतंत्रता घोषित की।
3. 12 फरवरी 1912 को क्या बदला?
बाल सम्राट पूयी ने पदत्याग किया। चीन पर सम्राट का शासन ख़त्म हुआ, यानी वह व्यवस्था ख़त्म हुई जो 221 ई.पू. में शुरू हुई थी।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि वूचांग की लड़ाई सुन यात-सेन ने की। वे विदेश में थे; स्थानीय सैनिकों ने शुरू किया।
- गणराज्य की स्थापना (1 जनवरी 1912) और पदत्याग (12 फरवरी 1912) को मिला देना।
- यह कहना कि क्रांति से सब समस्याएँ हल हो गईं। नया गणराज्य कमज़ोर था।
- "1912 की क्रांति" लिखना। यह 1911 की (शिनहाई) क्रांति है।