युआन शिखाई सत्ता में
युआन शिखाई (1859-1916) पूर्व छिंग जनरल और अधिकारी था जिसने आधुनिक पेइयांग सेना तैयार की थी। फरवरी 1912 में उसने सम्राट के पदत्याग में भूमिका निभाई, और मार्च 1912 में सुन यात-सेन ने उसे राष्ट्रपति पद सौंपा। उसकी ताकत सेना से आती थी।
नई संसद में गुओमिंदांग (राष्ट्रवादी पार्टी) का दबदबा था, जिसे सुन और सोंग च्याओरेन ने बनाया था। मार्च 1913 में सोंग च्याओरेन को गोली मार दी गई; कई लोगों ने युआन के क़रीबी घेरे पर शक किया। दक्षिणी नेताओं की छोटी बग़ावत, "दूसरी क्रांति", कुचल दी गई। नवंबर 1913 में युआन ने गुओमिंदांग पर रोक लगाई, और जनवरी 1914 में संसद भंग की। 1914 के "संवैधानिक समझौते" ने उसे भारी अधिकार दिए।
विफल राजतंत्र (1915-1916)
जनवरी 1915 में जापान ने, जब यूरोप युद्ध में उलझा था, चीन को इक्कीस माँगें सौंपीं। युआन ने मई 1915 में घटी हुई सूची मान ली। कई चीनी इस झुकने से नाराज़ हुए।
जल्दी ही युआन के समर्थक राजतंत्र के लिए दबाव डालने लगे। दिसंबर 1915 में उसने गद्दी स्वीकार की और नए युग-नाम हंगशियान की घोषणा की, जो 1 जनवरी 1916 से शुरू होना था। प्रतिक्रिया तीखी थी: सैन्य नेता साई ए और अन्य ने यून्नान में विद्रोह किया, और दक्षिण-पश्चिम के प्रांतों ने "राष्ट्र रक्षा युद्ध" में स्वतंत्रता घोषित की। युआन के अपने जनरल भी पीछे हट गए। 22 मार्च 1916 को लगभग 80 दिन बाद उसने गद्दी छोड़ी, और 6 जून 1916 को उसकी मृत्यु हो गई।
एक और कोशिश जुलाई 1917 में हुई, जब जनरल चांग श्युन ने बालक पूयी को लगभग 12 दिन के लिए फिर गद्दी पर बिठाया। यह तुरंत ख़त्म हो गई। इन विफलताओं के बाद चीन में राजतंत्र को फिर कभी असली मौक़ा नहीं मिला।
सरदारों में बँटवारा (1916-1928)
युआन की मृत्यु पर पूरी सेना की कमान किसी के पास नहीं रही। पेइयांग सेना गुटों में बँट गई। मुख्य गुट थे चिली गुट (नेता साओ खुन और वू पेइफ़ू), आनह्वेई गुट (दुआन छीजुई) और उत्तर-पूर्व में फ़ंगतिएन गुट (चांग चुओलिन)। शानशी के येन शीशान जैसे अन्य क्षेत्रीय नेताओं के पास छोटे इलाक़े थे। ये जनरल सरदार (वारलॉर्ड) कहलाते हैं।
- पेइचिंग में सरकार बनी रही, पर वह उसी गुट के नियंत्रण में रहती जो राजधानी पर क़ब्ज़ा रखता।
- सरदारों ने युद्ध लड़े, जैसे चिली-आनह्वेई युद्ध (1920) और चिली-फ़ंगतिएन युद्ध (1922 और 1924)।
- सैनिकों का ख़र्च चलाने के लिए उन्होंने भारी कर लगाए, और आम लोग लड़ाई और लूट से परेशान रहे।
- कुछ सरदारों को विदेशी शक्तियों का समर्थन था, जिससे देश बँटा रहा।
सरदारों के युग का अंत गुओमिंदांग के उत्तरी अभियान (1926-1928) से शुरू हुआ, जो आगे के पाठों में आएगा।
करके देखिए
काग़ज़ पर एक पेड़ बनाइए। तने पर लिखिए "पेइयांग सेना, 1916"। तीन बड़ी शाखाएँ बनाकर उन पर चिली, आनह्वेई और फ़ंगतिएन लिखिए, फिर स्थानीय सरदारों के लिए छोटी टहनियाँ। 3D के चरण 4 से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य तारीख़ें: मार्च 1912 युआन राष्ट्रपति; मार्च 1913 सोंग च्याओरेन की हत्या; नवंबर 1913 गुओमिंदांग पर रोक; जनवरी 1914 संसद बंद; जनवरी 1915 इक्कीस माँगें; दिसंबर 1915-मार्च 1916 राजतंत्र; जून 1916 युआन की मृत्यु; जुलाई 1917 चांग श्युन; 1916-1928 सरदारों का युग।
- मुख्य शब्द: पेइयांग सेना (युआन की सेना), गुट (जनरलों का समूह), सरदार (बल से इलाक़ा चलाने वाला जनरल)।
- हंगशियान = सम्राट के रूप में युआन का चुना युग-नाम।
हल किए गए उदाहरण
1. युआन शिखाई ने सत्ता जुटाने के दो क़दम बताइए।
उसने गुओमिंदांग पर रोक लगाई (नवंबर 1913) और संसद भंग की (जनवरी 1914)। उसने अपनी वफ़ादार पेइयांग सेना पर भी भरोसा किया।
2. युआन का राजतंत्र क्यों विफल हुआ?
लोगों ने इसे गणराज्य से विश्वासघात माना। यून्नान से शुरू होकर प्रांतों ने विद्रोह किया, और उसके अपने जनरलों ने भी साथ नहीं दिया। लगभग 80 दिन बाद उसने गद्दी छोड़ी।
3. तीन मुख्य सरदार गुटों के नाम बताइए।
चिली गुट, आनह्वेई गुट और फ़ंगतिएन गुट।
आम गलतियाँ
- युआन शिखाई को चुना हुआ सम्राट कहना। उसने बिना जनसमर्थन के गद्दी ली और वह विफल हुई।
- युआन की कोशिश (1915-1916) और चांग श्युन की (1917, 12 दिन) को मिला देना।
- यह सोचना कि 1916 में गणराज्य ख़त्म हो गया। सरकार थी पर असली ताकत सरदारों के पास थी।
- यह लिखना कि सरदार एक संयुक्त सेना थे। वे आपस में लड़ते थे।