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चार मई आंदोलन (1919)

नव संस्कृति आंदोलन (1915 से) ने लोकतंत्र, विज्ञान और रोज़ की भाषा में लेखन की माँग की। जब पेरिस शांति वार्ता में शानतुंग में जर्मनी के अधिकार जापान को दिए गए, तो 4 मई 1919 को पेइचिंग में 3,000 से ज़्यादा छात्र सड़कों पर उतरे। व्यापारियों और मज़दूरों की हड़तालें हुईं, तीन अधिकारी हटे और चीन ने संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए। आंदोलन ने आधुनिक चीनी राजनीति का नया दौर खोला।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1919 से पहले एक नई संस्कृति पनप रही है। पत्रिका न्यू यूथ के लेखक लोकतंत्र और विज्ञान की माँग करते हैं और चाहते हैं कि लोग कठिन शास्त्रीय भाषा की जगह रोज़ की भाषा में लिखें।
  2. 1919 की पेरिस शांति वार्ता में शानतुंग में जर्मनी के पुराने अधिकार चीन को लौटाने की जगह जापान को दिए जाते हैं। युद्ध में चीन जीतने वाले पक्ष में था, इसलिए इस ख़बर से गहरा ग़ुस्सा फैलता है।
  3. 4 मई 1919 को पेइचिंग के कॉलेजों के 3,000 से ज़्यादा छात्र मार्च करते हैं। हर लाल बिंदु एक छात्र है। वे देश के अधिकार बचाने और जिन्हें वे गद्दार कहते हैं उन अधिकारियों को सज़ा देने के नारे लगाते हैं।
  4. गिरफ़्तारियों से आंदोलन बड़ा होता है। 5 जून से शंघाई में दुकानें बंद होती हैं और मज़दूर हड़ताल करते हैं। छात्रों से व्यापारियों और फिर मज़दूरों तक घेरों को बाहर बढ़ते देखिए।
  5. विरोध सफल होता है। तीन अधिकारी बर्खास्त होते हैं और चीन का प्रतिनिधिमंडल पेरिस में शांति संधि पर हस्ताक्षर करने से मना कर देता है। तीन घनों को गिरते देखिए।
  6. खुला खेल। बटन दबाकर देखिए कि चार मई से क्या निकला: नए विचार, राजनीति में मज़दूर और नए दल।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

लेखक भाषा क्यों बदलना चाहते थे?

कठिन शास्त्रीय भाषा कुछ ही लोग जानते थे। रोज़ की भाषा से सब पढ़ सकते हैं, इसलिए विचार फैलते हैं। चरण 0 में पीला पट्ट नई भाषा है।

शानतुंग इतना महत्त्वपूर्ण क्यों था?

वहाँ ऐतिहासिक पवित्र पर्वत और बंदरगाह थे, और चीन अपने क्षेत्र की वापसी की आशा करता था। चरण 1 में अधिकार ग़लत हाथों में जाते दिखते हैं।

छात्रों ने थ्येनआनमन पर विरोध क्यों किया?

यह राजधानी की बड़ी सार्वजनिक जगह थी जहाँ अधिकारी और विदेशी प्रेस उन्हें देख सकते थे। चरण 2 में भीड़ जुटती दिखती है।

दुकानदार और मज़दूर क्यों जुड़े?

वे गिरफ़्तारियों और विदेशी फ़ैसले से नाराज़ थे और दिखाना चाहते थे कि पूरा देश छात्रों के साथ है। चरण 3 में घेरे बाहर बढ़ते हैं।

क्या चार मई ने कम्युनिस्ट पार्टी शुरू की?

सीधे नहीं, पर उसने नए विचार फैलाए और विचारकों को जोड़ा, जिससे 1921 में पार्टी बनी। चरण 5 में तीसरा बटन दबाइए।

पृष्ठभूमि: नव संस्कृति आंदोलन

1911 की क्रांति के बाद गणराज्य कमज़ोर था, और कई विचारकों का मानना था कि चीन की गहरी समस्या विचारों और आदतों में है। 1915 में छन तुशिउ ने पत्रिका न्यू यूथ (शिन छिंगनियन) शुरू की। हू शी, लू शुन और ली ताचाओ जैसे लेखक जुड़े। यही नव संस्कृति आंदोलन है।

साई य्वानपेई के नेतृत्व में पेइचिंग विश्वविद्यालय इन विचारों का केंद्र बना। छात्रों की एक पीढ़ी कार्रवाई के लिए तैयार थी।

चार मई का घटनाक्रम

चीन 1917 में पहले विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्रों की ओर से शामिल हुआ और यूरोप में मज़दूर भेजे। लोगों को आशा थी कि शांति वार्ता में शानतुंग के जर्मन अधिकार लौटा दिए जाएँगे। पर 1919 के पेरिस शांति सम्मेलन में शक्तियों ने उन्हें जापान को देने पर सहमति दी, और कुछ चीनी अधिकारी पहले ही जापान से सौदे कर चुके थे।

4 मई 1919 को पेइचिंग के 13 कॉलेजों के 3,000 से ज़्यादा छात्र थ्येनआनमन पर जमा हुए और शहर में मार्च किया। उनके नारे विदेश में चीन के अधिकार बचाने और घर में गद्दारों को सज़ा देने की माँग करते थे। कुछ छात्र अधिकारी साओ रूलिन के घर गए और उसमें आग लगा दी; पुलिस ने दर्जनों छात्रों को गिरफ़्तार किया।

गिरफ़्तारियों से समर्थन की लहर उठी। कई शहरों के छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। 5 जून से शंघाई में मज़दूर हड़ताल पर गए और दुकानदारों ने दुकानें बंद कीं, इसलिए आंदोलन राष्ट्रीय बन गया। सरकार ने छात्रों को छोड़ा, तीन अधिकारियों (साओ रूलिन, चांग चोंगशियांग और लू चोंगयू) को हटाया, और पेरिस में चीन के प्रतिनिधिमंडल ने वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए।

चार मई का महत्त्व

चार मई को आम तौर पर मोड़ माना जाता है:

इतिहासकार बहस करते हैं कि कितना श्रेय नव संस्कृति आंदोलन को है और कितना विरोध प्रदर्शन को, पर सब मानते हैं कि इसने आधुनिक चीन की राजनीति और संस्कृति की दिशा बदली।

करके देखिए

कॉपी में "तीन परतों" का चार्ट बनाइए: विचारों की परत (1915), ग़ुस्से की परत (मई 1919) और कार्रवाई की परत। हर परत में रंग भरिए और एक तारीख़ लिखिए। फिर 3D में तीन बटन दबाकर परिणाम देखिए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. शानतुंग के फ़ैसले से इतना ग़ुस्सा क्यों फैला?

चीन युद्ध में जीतने वाले पक्ष में था और अपने क्षेत्र की वापसी की आशा करता था, पर जर्मनी के अधिकार जापान को मिल गए। लोगों ने इसे चीन की स्वतंत्रता का अपमान माना।

2. चार मई के विरोध के दो परिणाम बताइए।

तीन अधिकारी बर्खास्त हुए और चीनी प्रतिनिधिमंडल ने शांति संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए। साथ ही मज़दूर और व्यापारी राजनीति में आए और नए विचार फैले।

3. नव संस्कृति आंदोलन ने चार मई की तैयारी कैसे की?

उसने लोकतंत्र और राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी जैसे विचार उठाए और छात्रों को चर्चा और कार्रवाई की आदत दी, इसलिए शानतुंग का फ़ैसला आने पर वे तैयार थे।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. नव संस्कृति आंदोलन की केंद्रीय पत्रिका कौन सी थी?
2. 4 मई 1919 के विरोध का कारण क्या था?
3. 5 जून से शंघाई में हड़ताल किसने की?
4. कितने अधिकारी बर्खास्त हुए?
5. आंदोलन के बाद 1921 में कौन सी पार्टी बनी?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चार मई आंदोलन क्या था?

पेरिस शांति वार्ता में शानतुंग के फ़ैसले के विरुद्ध 4 मई 1919 को पेइचिंग में छात्रों का विरोध, जो छात्रों, व्यापारियों और मज़दूरों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गया।

नव संस्कृति आंदोलन क्या है?

लगभग 1915 से छन तुशिउ, हू शी और लू शुन जैसे लेखकों का आंदोलन, जिसने लोकतंत्र, विज्ञान और लेखन में रोज़ की भाषा की माँग की।

चार मई महत्त्वपूर्ण क्यों है?

इसने जन-कार्रवाई दिखाई, मज़दूरों को राजनीति में लाया, नए विचार फैलाए और नए दलों की स्थापना में मदद की, इसलिए यह आधुनिक चीन का मोड़ है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

चीन八年级(初二)Sem.1 U4 Rise of the new-democratic revolution

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