सुन यात-सेन और क्रांतिकारी समूह
सुन यात-सेन (1866-1925) डॉक्टर थे जिन्होंने विदेश में पढ़ाई की और मानने लगे कि चीन को गणराज्य चाहिए। 1894 में उन्होंने हवाई में शिंग चोंग हुई (चीन पुनरुत्थान समिति) बनाई। 1904 में दो और समूह बने: हूनान में ह्वांग शिंग की ह्वाशिंगहुई, और शंघाई क्षेत्र में क्वांगफ़ुहुई, जिसमें साई य्वानपेई भी थे।
हर समूह अकेला काम करता था और ज़्यादातर छोटे थे। जापान में पढ़ने वाले चीनी छात्र नए सदस्यों का अच्छा स्रोत थे, और तोक्यो मिलने के लिए सुरक्षित जगह थी।
तुंगमेंगहुई की स्थापना (1905)
अगस्त 1905 में तोक्यो में तीनों समूह और कई छात्र मिलकर तुंगमेंगहुई (चीनी क्रांतिकारी गठबंधन) बने। सुन यात-सेन प्रमुख चुने गए और ह्वांग शिंग प्रमुख सैन्य नेता बने। सदस्य कई प्रांतों से थे, और अगले वर्षों में उनकी संख्या सैकड़ों से हज़ारों हुई।
पार्टी ने अख़बार मिनबाओ (जनता की पत्रिका) छापा, जिसमें तीन सिद्धांत समझाए जाते थे और राजतंत्र बचाने वाले सुधारकों से बहस होती थी। उसने विदेश में बसे चीनियों से धन भी जुटाया और दक्षिण में विद्रोहों की योजना बनाई।
शपथ में चार लक्ष्य थे: मांचू (छिंग) शासकों को हटाना, चीन को फिर खड़ा करना, गणराज्य स्थापित करना और ज़मीन के अधिकार बराबर करना।
जनता के तीन सिद्धांत
सुन ने लक्ष्य को तीन विचारों से समझाया:
- राष्ट्रवाद (मिनज़ू): आज़ाद और मज़बूत राष्ट्र, जो बाहरी ताकतों के दबाव में न हो और ऐसे वंश के अधीन न हो जिसे विदेशी माना गया।
- लोकतंत्र (मिनछ्वेन): सत्ता जनता की हो: गणराज्य, संविधान और चुनी हुई सरकार।
- जन-आजीविका (मिनशंग): आम लोगों को अच्छी आजीविका मिले, जैसे ज़मीन के बढ़ते मूल्य का न्यायपूर्ण बँटवारा।
बाद में सुन ने इन सिद्धांतों को फिर से लिखा, पर विद्यार्थी पहले 1905-1911 वाला रूप पढ़ते हैं। तीन सिद्धांत गुओमिंदांग का मार्गदर्शक विचार बने।
विद्रोह और परिणाम
लगभग 1906 से 1911 के बीच तुंगमेंगहुई ने क़रीब दस सशस्त्र विद्रोह किए, ज़्यादातर दक्षिण चीन में। लगभग सभी विफल रहे। अप्रैल 1911 में क्वांगचौ के पास ह्वांगह्वागांग का विद्रोह प्रसिद्ध है, जिसमें कई युवा क्रांतिकारी मारे गए। इन विफलताओं की क़ीमत भारी थी, पर इनसे उद्देश्य को व्यापक पहचान और सम्मान मिला।
अक्तूबर 1911 में छिंग का असली पतन वूचांग में सैनिकों के विद्रोह से शुरू हुआ, जिनमें कई क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित थे। यह अगले पाठ, 1911 की क्रांति, में देखिए।
करके देखिए
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मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्थापना: अगस्त 1905, तोक्यो। नेता: सुन यात-सेन। अख़बार: मिनबाओ।
- चार लक्ष्य: मांचू शासन हटाना, चीन को फिर खड़ा करना, गणराज्य बनाना, ज़मीन के अधिकार बराबर करना।
- तीन सिद्धांत: राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, जन-आजीविका।
- पहले के समूह: शिंग चोंग हुई (1894), ह्वाशिंगहुई (1904), क्वांगफ़ुहुई (1904)।
हल किए गए उदाहरण
1. तुंगमेंगहुई पहले के समूहों से मज़बूत क्यों थी?
उसने तीन समूहों और कई छात्रों को एक पार्टी में जोड़ा, जिसमें एक नेता, एक अख़बार और एक योजना थी। इसलिए धन, सदस्य और विचार एक जगह जमा हुए।
2. तीन सिद्धांत बताइए और हर एक पर एक पंक्ति लिखिए।
राष्ट्रवाद: आज़ाद, मज़बूत राष्ट्र। लोकतंत्र: गणराज्य में सत्ता जनता के पास। जन-आजीविका: आम लोगों को अच्छी आजीविका।
3. विफल विद्रोह भी क्यों महत्त्वपूर्ण है?
हर विद्रोह ने क्रांति का विचार फैलाया और ध्यान तथा धन दिलाया। कई सैनिक और छात्र प्रेरित हुए, जिससे 1911 का वूचांग विद्रोह सफल हो सका।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सुन यात-सेन ने तुंगमेंगहुई चीन में बनाई। यह तोक्यो में बनी।
- तुंगमेंगहुई (1905) को शिंग चोंग हुई (1894) से मिला देना।
- यह कहना कि 1911 में तुंगमेंगहुई ने अकेले जीत हासिल की। वूचांग का विद्रोह सैनिकों और स्थानीय समूहों ने किया।
- तीसरे सिद्धांत में "साम्यवाद" लिखना। वह जन-आजीविका है।