फ़रवरी क्रांति (मार्च 1917)
1917 की शुरुआत में पेत्रोग्राद ठंडा, भूखा और युद्ध से तंग था। 23 फ़रवरी (पुरानी तिथि, हमारे कैलेंडर से 8 मार्च), अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, कपड़ा मिलों की महिलाओं ने रोटी के लिए जुलूस निकाला। अगले दिनों आम हड़ताल हो गई। ज़ार ने सेना को व्यवस्था बहाल करने को कहा, पर सैनिक भीड़ से जा मिले। 2 मार्च (पुरानी तिथि) को ज़ार निकोलस द्वितीय ने गद्दी छोड़ दी। रूस में अब ज़ार नहीं था।
कैलेंडर पर ध्यान: रूस जूलियन कैलेंडर चलाता था, जो ग्रेगोरियन से 13 दिन पीछे है। इसीलिए "फ़रवरी" क्रांति दूसरे देशों के कैलेंडर में मार्च में और "अक्टूबर" क्रांति नवंबर में पड़ती है।
दोहरी सत्ता और बीच के महीने
ड्यूमा के नेताओं ने अस्थायी सरकार बनाई (पहले राजकुमार ल्वोव, जुलाई से अलेक्ज़ांडर केरेन्स्की के नेतृत्व में)। उसने संविधान सभा के चुनाव का वादा किया पर युद्ध जारी रखा। साथ ही मज़दूरों और सैनिकों ने सोवियत नाम की परिषदें चुनीं। पेत्रोग्राद सोवियत का सेना पर, अपने आदेश संख्या 1 के कारण, बड़ा असर था। इसे दोहरी सत्ता कहते हैं।
- अप्रैल: लेनिन विदेश से लौटे और अप्रैल थीसिस रखी: सरकार को समर्थन नहीं, युद्ध का अंत, किसानों को भूमि, "सारी सत्ता सोवियतों को"।
- जुलाई: सड़कों के प्रदर्शन (जुलाई दिवस) दबा दिए गए और दोष बोल्शेविकों पर आया।
- अगस्त के अंत में: जनरल कोर्निलोव ने पेत्रोग्राद की ओर सेना बढ़ाई। बोल्शेविकों समेत कई समूहों ने उसे रोकने में मदद की। सरकार कमज़ोर दिखी और बोल्शेविक समर्थन बढ़ा।
अक्टूबर क्रांति (नवंबर 1917)
बोल्शेविकों को पेत्रोग्राद और मास्को की सोवियतों में बहुमत मिल गया। सैन्य क्रांतिकारी समिति के ज़रिए उन्होंने 25 अक्टूबर (पुरानी तिथि, 7 नवंबर) को पुल, तार-घर और रेलवे स्टेशन लिए, फिर शीत महल पर क़ब्ज़ा किया जहाँ मंत्री बैठे थे। सोवियतों की दूसरी कांग्रेस ने सोवियतों को सरकार घोषित किया। पेत्रोग्राद में लड़ाई छोटी रही, पर जल्द ही गृहयुद्ध छिड़ गया (अगला पाठ)।
पहले आदेश
- शांति आदेश: सब देशों से कहा कि बिना ज़मीन लिए और बिना हर्जाना माँगे युद्ध तुरंत बंद करें। बाद में रूस ने अलग से शांति की, मार्च 1918 की ब्रेस्ट-लितोव्स्क संधि।
- भूमि आदेश: ज़मींदारों की निजी भूमि-मिल्कियत ख़त्म की; गाँव की समितियों को भूमि किसानों में बाँटनी थी।
- नई सरकार (सोव्नारकोम): लेनिन की अध्यक्षता में जन-कमिसारों की परिषद देश चलाने लगी।
- इसके बाद: आठ घंटे का कार्य-दिवस, कारख़ानों पर मज़दूर नियंत्रण, बैंकों का राष्ट्रीयकरण और धर्म और राज्य का अलगाव (जनवरी 1918)।
संविधान सभा
सबने वादा किया था कि नए नियम लिखने के लिए चुनी हुई सभा होगी। नवंबर 1917 के चुनाव रूस के इतिहास के पहले व्यापक चुनाव थे। किसानों के समर्थन वाले समाजवादी क्रांतिकारियों को लगभग 40% सीटें मिलीं, बोल्शेविकों को लगभग 24% और बाक़ी दूसरों को। सभा जनवरी 1918 में एक दिन बैठी। उसने सोवियतों के आदेश मानने से इनकार किया और बोल्शेविक सरकार ने अगले दिन उसे बंद कर दिया। उसके बाद रूस बोल्शेविकों के हाथ में सोवियतों के ज़रिए चला, जिससे बहुत से विरोधियों ने हथियार उठाए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फ़रवरी 1917: हड़ताल + सैनिकों का साथ → ज़ार का त्याग → अस्थायी सरकार + पेत्रोग्राद सोवियत (दोहरी सत्ता)
- अप्रैल 1917: लेनिन की अप्रैल थीसिस (सरकार को समर्थन नहीं, युद्ध का अंत, किसानों को भूमि, सारी सत्ता सोवियतों को)
- अक्टूबर 1917 (पुरानी तिथि 25 अक्टूबर = 7 नवंबर): बोल्शेविकों की सत्ता; शांति और भूमि के आदेश; सोव्नारकोम
- संविधान सभा: नवंबर 1917 में चुनी गई (SR ~40%, बोल्शेविक ~24%), जनवरी 1918 में एक दिन बैठी, बंद
- पुराना कैलेंडर = नया कैलेंडर − 13 दिन
हल किए गए उदाहरण
1. इसे "दोहरी सत्ता" क्यों कहते हैं?
ज़ार के गिरने के बाद एक साथ दो सत्ता-केंद्र थे: अस्थायी सरकार, जिसके पास आधिकारिक अधिकार था, और पेत्रोग्राद सोवियत, जिसे मज़दूरों और सैनिकों का समर्थन था। कोई भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं था।
2. अक्टूबर क्रांति 25 अक्टूबर (पुरानी तिथि) को हुई। हमारे कैलेंडर में तारीख़ क्या थी?
पुरानी तिथि 13 दिन पीछे है। 25 अक्टूबर + 13 दिन = 38 अक्टूबर = 7 नवंबर।
3. लेनिन के नारों "शांति, भूमि, रोटी" को समर्थन क्यों मिला?
सैनिक युद्ध से थके थे, किसान ज़मींदारों की ज़मीन चाहते थे और मज़दूरों को रोटी चाहिए थी। हर नारे ने दो-तीन शब्दों में एक समूह की सबसे बड़ी इच्छा का जवाब दिया।
4. संविधान सभा चुनी हुई थी, फिर बोल्शेविकों ने उसे बंद क्यों किया?
सभा में दूसरी पार्टियों का बहुमत था और उसने सोवियतों के आदेश मानने से इनकार किया। बोल्शेविकों ने कहा कि असली सत्ता सोवियतों के पास है, इसलिए उसे बंद कर दिया। आलोचकों ने कहा कि इससे लोकतांत्रिक चुनाव ख़त्म हो गया।
आम गलतियाँ
- यह लिखना कि अक्टूबर क्रांति हमारे कैलेंडर से अक्टूबर में हुई। वह 7 नवंबर थी (पुरानी तिथि से 25 अक्टूबर)।
- दोनों क्रांतियों को मिला देना। फ़रवरी: ज़ार गिरा, अस्थायी सरकार। अक्टूबर: बोल्शेविकों ने सत्ता ली।
- यह कहना कि संविधान सभा का चुनाव बोल्शेविकों ने जीता। समाजवादी क्रांतिकारियों को ज़्यादा सीटें मिलीं।
- यह सोचना कि फ़रवरी क्रांति लेनिन ने कराई। वे अप्रैल में लौटे; फ़रवरी अपने-आप उठा जन-उभार था।