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प्रथम विश्व युद्ध में रूस: मोर्चा और घरेलू मोर्चा

रूस अगस्त 1914 में यूरोप की सबसे बड़ी सेना के साथ युद्ध में उतरा, पर उसका उद्योग कमज़ोर और रेल कम थीं। 1914 में टैनेनबर्ग और 1915 के महान पीछे हटने में उसे भारी नुकसान हुआ, फिर 1916 के ब्रूसिलोव आक्रमण में बढ़त मिली। लाखों लोग मरे, अनाज-ईंधन की कमी हुई और दाम बढ़े। 1917 की शुरुआत तक लोगों का ज़ार निकोलस द्वितीय पर भरोसा ख़त्म हो गया, जिससे क्रांति हुई।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. अगस्त 1914। रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन के साथ जर्मनी और ऑस्ट्रिया-हंगरी के ख़िलाफ़ उतरा। ब्लॉक गिनिए: रूस की सेना सबसे बड़ी है, शुरू में लगभग पचास लाख।
  2. मोर्चा खिसकता है। 1914 में टैनेनबर्ग में रूस हारा। 1915 में वह पीछे हटा और बहुत भूमि खोई। 1916 में ब्रूसिलोव आक्रमण ने दुश्मन को पीछे धकेला।
  3. पर गोले और राइफ़लें कम पड़ गईं। लाल ढेर छोटा है और धूसर ढेर ऊँचा। लंबे युद्ध के लिए रूसी कारख़ाने बहुत छोटे थे।
  4. अब घर देखिए। पुरुष दूर हैं, खेतों में मज़दूर कम हैं और रेलें पहले सैनिकों को ढोती हैं। रोटी घटती है, दाम बढ़ते हैं और लोग ठंड में कतार लगाते हैं।
  5. तीरों के साथ चलिए: हार और मौतें, फिर कमी, फिर ग़ुस्सा, फिर ज़ार पर भरोसा ख़त्म। 1917 में यह क्रांति में बदल गया।
  6. अब आपकी बारी। वर्ष स्लाइडर को 1914 से 1917 तक खिसकाइए और रोटी की पट्टी को गिरते, दाम की पट्टी को बढ़ते देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

रूस की सेना सबसे बड़ी थी, फिर वह जीता क्यों नहीं?

पट्टियाँ देखिए: सेना बड़ी थी, पर सामान, रेल और कारख़ाने कमज़ोर थे। गोलों के बिना बड़ी सेना भी नहीं जीत सकती।

क्या टैनेनबर्ग ही रूस की अकेली हार थी?

नहीं। वह 1914 की पहली बड़ी हार थी। 1915 में महान पीछे हटना आया, यानी कई हारें। 1916 में रूस ने ब्रूसिलोव आक्रमण में अच्छा किया। तीरों को देखिए।

इतने बड़े देश में गोले कम क्यों पड़ गए?

क्योंकि बड़ा होना औद्योगिक होना नहीं है। रूस के कारख़ाने कम थे, इसलिए 1915 में दुश्मन का ढेर रूसी ढेर से ऊँचा था।

खेती वाले देश के शहरों से रोटी ग़ायब क्यों हो गई?

खेत के मज़दूर मोर्चे पर थे और रेलें सैनिक ढो रही थीं। अनाज शहर नहीं पहुँच पाया। रोटी की पट्टी को गिरते देखिए।

युद्ध का क्रांति से क्या संबंध है?

तीरों की कड़ी देखिए: हार, कमी, ग़ुस्सा, ज़ार पर भरोसा ख़त्म। यही कड़ी 1917 में टूटी।

रूस युद्ध में क्यों उतरा

1914 में रूस एक साम्राज्य था, जिसके शासक ज़ार निकोलस द्वितीय के पास अंतिम फ़ैसले की ताक़त थी। रूस का फ़्रांस और ब्रिटेन से गठबंधन था। जब ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया पर हमला किया, जिसका रूस समर्थक था, तो रूस ने सेना जुटाई और अगस्त 1914 में जर्मनी ने उस पर युद्ध घोषित कर दिया। राजधानी सेंट पीटर्सबर्ग का नाम बदलकर पेत्रोग्राद रखा गया (कम जर्मन-सा लगने वाला नाम)।

रूस के पास यूरोप की सबसे बड़ी सेना थी (शुरू में लगभग 50 लाख और पूरे युद्ध में लगभग डेढ़ करोड़ भर्ती)। पर कारख़ाने कम और रेलें पतली थीं, इसलिए सेना बड़ी थी लेकिन सामान की कमी थी।

मोर्चा: टैनेनबर्ग, महान पीछे हटना, ब्रूसिलोव आक्रमण

घरेलू मोर्चा: अनाज, दाम और ग़ुस्सा

घरेलू मोर्चा यानी वे लोग जो घर पर रहकर युद्ध में मदद करते हैं। रूस में उस पर भारी बोझ पड़ा:

नगर-परिषदों और व्यापारियों के स्वयंसेवी संगठनों ने सामान और अस्पतालों में मदद की और ड्यूमा (संसद) ने ऐसी सरकार माँगी जिस पर जनता भरोसा कर सके। ज़ार नहीं झुके। ज़ारीना के क़रीबी संत रासपुतिन के प्रभाव की अफ़वाहों से दरबार की साख और गिरी।

युद्ध से 1917 तक कैसे पहुँचे

1916-17 की सर्दी तक पेत्रोग्राद में रोटी की कतारें लंबी हो गईं और ठंड कड़ी थी। मज़दूरों ने हड़ताल की और सैनिक, जो वर्दी में किसान ही थे, लड़ते-लड़ते थक चुके थे। युद्ध रूस की सभी समस्याओं का कारण नहीं था, पर उसने उन्हें अनदेखा करना असंभव बना दिया। अगला पाठ 1917 की क्रांति बताता है कि फ़रवरी और अक्टूबर में क्या हुआ।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. सबसे बड़ी सेना होने पर भी रूस 1914-15 में इतना क्यों हारा?

क्योंकि केवल संख्या काफ़ी नहीं होती। रूस के कारख़ाने कम थे, इसलिए सैनिकों के पास गोले और राइफ़लें कम थीं। रेलें पतली थीं, इसलिए सामान और अतिरिक्त सैनिक धीरे पहुँचे। सेनापतियों में तालमेल भी जर्मन कमान से कम था।

2. खेती वाले देश रूस में पेत्रोग्राद में रोटी क्यों कम पड़ी?

बहुत से खेतिहर मज़दूर और घोड़े सेना में चले गए, इसलिए अनाज कम उगा। जो उगा वह अक्सर शहर नहीं पहुँचा क्योंकि रेलें पहले सैनिक और तोपें ढोती थीं। नोट छपने से दाम भी बढ़े।

3. ज़ार के ख़ुद सेना की कमान लेने से वे कमज़ोर क्यों हुए?

सितंबर 1915 से वे सेनापति थे, इसलिए मोर्चे की हर हार और कमी का दोष सीधे उन पर आया। उसी समय घर की सरकार कमज़ोर मंत्रियों के हाथ में रह गई।

4. दो बातें बताइए जो दिखाती हैं कि रूस के लिए यह "संपूर्ण युद्ध" था।

खेत, कारख़ाने और रेलें सब युद्ध में लग गए, और आम लोगों को परिवार के सदस्य खोने के साथ अनाज की कमी और ऊँचे दाम भी झेलने पड़े।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. रूस प्रथम विश्व युद्ध में किस वर्ष उतरा?
2. अगस्त 1914 में रूस की बड़ी हार कहाँ हुई?
3. 1916 का जो हमला ऑस्ट्रिया-हंगरी की पंक्तियाँ तोड़ गया, उसका नाम था:
4. रूस के घरेलू मोर्चे की एक समस्या कौन-सी थी?
5. सितंबर 1915 में रूसी सेना की कमान किसने सँभाली?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस ने प्रथम विश्व युद्ध क्यों छोड़ा?

1917 की क्रांतियों के बाद नई बोल्शेविक सरकार शांति चाहती थी। उसने मार्च 1918 में जर्मनी से ब्रेस्ट-लितोव्स्क की संधि की और बड़े इलाके छोड़ दिए।

घरेलू मोर्चा क्या है?

यह समाज का वह हिस्सा है जो लड़ाई से दूर रहकर युद्ध में मदद करता है: किसान, कारख़ाने के मज़दूर, परिवार और घर की सरकार।

क्या यह विषय कक्षा 10 में है?

हाँ। यह रूस के कक्षा 10 के इतिहास पाठ्यक्रम की "रूस का इतिहास 1914–1922" इकाई का हिस्सा है, और प्रथम विश्व युद्ध पढ़ने वाले हर विद्यार्थी के काम का है।

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