दलदल पर नई राजधानी
मई 1703 में पीटर ने बाल्टिक सागर के पास नेवा नदी के एक द्वीप पर पीटर और पॉल क़िला बनाना शुरू किया। ज़मीन गीली, समतल और अक्सर बाढ़ वाली थी। फिर यहाँ क्यों बनाया? रूस बाल्टिक तट के लिए स्वीडन से लड़ रहा था, और पीटर को ऐसा बंदरगाह चाहिए था जो पश्चिमी यूरोप तक समुद्री रास्ता खोले।
रूस के कई हिस्सों से हज़ारों मज़दूर ज़बरदस्ती लाए गए। उन्होंने कड़ाके की ठंड में खुदाई की, पानी निकाला और पत्थर ढोया; बहुत-से मर गए। पीटर ने आदेश दिया कि नए शहर में पत्थर के घर बनें और कई दूसरे शहरों में पत्थर की इमारतें मना कर दीं, ताकि राजमिस्त्री यहीं आएँ। इटली और दूसरे देशों के वास्तुकारों ने सीधी सड़कों और नहरों वाली पहली योजनाएँ बनाईं।
लगभग 1712 में सरकार और दरबार यहाँ आ गए और सेंट पीटर्सबर्ग राजधानी बन गया। लोग इसे रूस की यूरोप की खिड़की कहते थे: इसी से जहाज़, माल और विचार आते थे।
नए स्कूल, किताबें और विज्ञान
पीटर को नाविक, इंजीनियर और अफ़सर चाहिए थे, इसलिए उन्होंने स्कूल खोले। गणित और नौसंचालन विद्यालय (1701) में गणित, नक़्शे पढ़ना और जहाज़ चलाना सिखाया जाता था। युवा सामंतों को पढ़ने विदेश भी भेजा गया।
1702 में वेदोमोस्ती आया, रूस का पहला छपा हुआ अख़बार, जिसमें युद्ध और व्यापार की ख़बरें होती थीं। 1714 में नई राजधानी में कुन्स्तकामेरा, यानी प्रकृति के अजूबों और दुर्लभ चीज़ों का संग्रहालय, बना। 1724 में पीटर ने विज्ञान अकादमी का आदेश दिया; वह उनकी मृत्यु के तुरंत बाद 1725 में खुली। विदेशी विद्वान वहाँ काम करने आए।
इन क़दमों से रूस को पहले सरकारी स्कूल और शोध की जगहें मिलीं। फिर भी ज़्यादातर आम किसान किसी स्कूल नहीं जा पाए।
नया कैलेंडर और सरल अक्षर
1700 से पहले रूसी लोग 1 सितंबर से साल शुरू करते थे और वर्ष "सृष्टि की रचना" से गिनते थे। इसलिए 1700 का साल 7208 कहलाता था। पीटर ने आदेश दिया कि 1 जनवरी 1700 से नया साल जनवरी में शुरू होगा और वर्ष ईसा के जन्म से गिने जाएँगे, जैसा यूरोप के बड़े हिस्से में होता था। इससे दूसरे देशों से व्यापार और पत्राचार आसान हुआ। (रूस अब भी पुराना जूलियन कैलेंडर ही चलाता था।)
1708 से 1710 के बीच पीटर ने अक्षरों को नया रूप देकर नागरिक लिपि बनवाई: पुराने चर्च वाले अक्षरों से गोल और सरल। इसमें विज्ञान, व्यापार और क़ानून की किताबें छपीं, ताकि ज़्यादा लोग पढ़ सकें।
सामंतों का रोज़ का जीवन बदलता है
पीटर ने सामंतों के रंग-ढंग और रहन-सहन को बदलवाया। लंबी दाढ़ी पर कर लगा (1698 से)। लंबे चोग़ों की जगह छोटे कोट और पश्चिमी कपड़े आए। 1717 की शिष्टाचार की किताब नौजवानों का सम्मानित दर्पण ने सिखाया कि कैसे झुकना, खाना और बात करना है।
1718 में उन्होंने असेंबलियाँ शुरू कीं: सामंतों के घरों में शाम की सभाएँ, जिनमें बातचीत, खेल, नाच और चाय होती थी। जो स्त्रियाँ पहले ऐसे मौक़ों पर पुरुषों से अलग रहती थीं, वे अब शामिल हुईं। सामंतों को राजधानी में पत्थर के घर बनाने, विदेशी भाषा सीखने और राज्य की सेवा करने की ज़रूरत थी।
ये नियम मुख्यतः सामंतों और शहरवासियों पर लागू हुए। गाँवों में किसान लगभग पहले जैसे ही रहे, इसलिए रूस में जीवन के दो ढंग बन गए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- यूरोप की खिड़की: सेंट पीटर्सबर्ग, वह बंदरगाह-शहर जिसने रूस को पश्चिम के लिए खोला।
- राजधानी (1712): जहाँ सरकार बैठती थी। इससे पहले मास्को था।
- वेदोमोस्ती (1702): रूस का पहला छपा अख़बार।
- कुन्स्तकामेरा (1714): प्रकृति के अजूबों और दुर्लभ चीज़ों का संग्रहालय।
- विज्ञान अकादमी (आदेश 1724, शुरुआत 1725): शोध का सरकारी केंद्र।
- कैलेंडर सुधार (1700): साल 1 जनवरी से, ईसा के जन्म से गिना जाता है।
- असेंबली (1718): शाम की सभाएँ जहाँ स्त्री-पुरुष साथ मिलते थे।
हल किए गए उदाहरण
1. पीटर ने सेंट पीटर्सबर्ग नेवा पर क्यों बनाया? दो कारण दो।
इससे रूस को व्यापार और जहाज़ी बेड़े के लिए बाल्टिक सागर पर बंदरगाह मिला, और यह युद्ध के शत्रु स्वीडन के पास था। यह पुराने मास्को के रिवाज़ों से दूर नई शुरुआत भी थी।
2. 1700 के कैलेंडर बदलाव से रूस को क्या फ़ायदा हुआ?
साल अब 1 जनवरी से शुरू होता और ईसा के जन्म से गिना जाता था, जैसे ज़्यादातर यूरोप में। व्यापारी और राजदूत दूसरे देशों की तारीख़ों से आसानी से मिलान कर पाते।
3. असेंबलियों को बड़ा बदलाव क्यों माना गया?
पहले सामंत स्त्रियाँ सभाओं में पुरुषों से अलग रहती थीं। असेंबली में स्त्री-पुरुष पश्चिमी ढंग से साथ मिले, बोले और नाचे, जिससे तौर-तरीक़े बदले।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि सेंट पीटर्सबर्ग सूखे मैदान पर बना। वह दलदल था और बनाने में बहुत जानें गईं।
- यह मानना कि विज्ञान अकादमी पीटर के जीवनकाल में खुली। आदेश 1724 में आया; वह 1725 में उनकी मृत्यु के बाद खुली।
- कैलेंडर बदलाव में गड़बड़ी: साल की शुरुआत 1 जनवरी हुई, पर रूस जूलियन कैलेंडर पर ही रहा, आधुनिक पर नहीं।
- यह सोचना कि सारे रूसियों का जीवन बदला। नया पहनावा और तौर-तरीक़े सामंतों और शहरवासियों के लिए थे; ज़्यादातर किसान पहले जैसे रहे।