लोग और खेती
साम्राज्य की जनसंख्या लगभग 1.9 करोड़ (1762) से बढ़कर लगभग 3.6 करोड़ (1796) हो गई। इस बढ़त का कुछ भाग नए इलाक़े थे, कुछ अधिक जन्म। हर दस में से नौ से ज़्यादा लोग गाँवों में रहकर खेती करते थे। खेती दक्षिण की उपजाऊ काली मिट्टी वाली भूमि और नए मैदानी इलाक़ों में बढ़ी, जहाँ मिट्टी ज़्यादा अनाज देती थी।
भूदास प्रथा: काम के दिन और पैसा
ज़्यादातर किसान भूदास थे: वे किसी ज़मींदार के होते थे। वे दो तरह से देते थे। बारशचिना (श्रम-सेवा) का मतलब था हफ़्ते में कई दिन ज़मींदार के खेतों में काम करना, अक्सर लगभग तीन-चार दिन और कभी ज़्यादा। ओब्रोक का मतलब था काम की जगह पैसे या सामान देना, जो वहाँ आम था जहाँ मिट्टी कमज़ोर थी और भूदास दस्तकारी या व्यापार से कमाते थे।
क़ानून ने ज़मींदारों को और शक्ति दी। 1760 में वे भूदासों को साइबेरिया भेज सकते थे और 1767 में भूदासों को अपने मालिकों की शिकायत करने से मना कर दिया गया। भूदासों को बेचा जा सकता था और दूर की जागीरों में भेजा जा सकता था।
अनाज, उद्योग और उराल
तुर्क साम्राज्य से युद्धों के बाद रूस को काला सागर का तट मिला और वहाँ के बंदरगाहों से अनाज दूसरे देशों को जाने लगा। उराल लोहा बनाने का केंद्र बन गया: कई मैन्युफ़ैक्टरी (हाथ के औज़ारों और बहुत से मज़दूरों वाले शुरुआती कारख़ाने), जिनमें से कुछ में भूदास ख़रीदे या नियुक्त किए गए थे, लोहा बनाते और उसका बड़ा भाग विदेश बेचते थे। 1775 के आदेश ने लोगों को बिना अनुमति कार्यशाला और कारख़ाने खुलकर खोलने दिए, और कारख़ानों की संख्या बढ़ती रही। कपड़े और दूसरे कारख़ाने भी फैले।
व्यापार और पैसा
क्षेत्रों की सीमाओं पर ली जाने वाली भीतरी चुंगी 1753 में ख़त्म हुई, इसलिए सामान ज़्यादा आसानी से चल सका। बड़े मेलों में कई जगहों के व्यापारी जुटते थे। 1766 के शुल्क ने देश के निर्माताओं की रक्षा की। राज्य को युद्धों के लिए पैसा चाहिए था और सिक्के काफ़ी नहीं थे, इसलिए 1769 में उसने असिग्नाट, यानी पहली काग़ज़ी मुद्रा, जारी की। बाद में बहुत ज़्यादा छप गई और दाम बढ़ गए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1762: लगभग 1.9 करोड़ लोग; 1796: लगभग 3.6 करोड़
- 1760: ज़मींदार भूदासों को साइबेरिया भेज सकते हैं; 1767: भूदास शिकायत नहीं कर सकते
- बारशचिना = काम के दिन; ओब्रोक = पैसा या सामान
- 1753: भीतरी चुंगी ख़त्म; 1769: पहली काग़ज़ी मुद्रा (असिग्नाट); 1775: कारख़ाने खोलने की आज़ादी
हल किए गए उदाहरण
1. एक भूदास हफ़्ते में 4 दिन ज़मींदार के लिए काम करता है। अपने खेत के लिए कितने दिन बचे?
7 - 4 = 3 दिन।
2. बारशचिना और ओब्रोक में क्या अंतर है?
बारशचिना ज़मींदार की ज़मीन पर उसके लिए काम है। ओब्रोक काम की जगह पैसे या सामान का भुगतान है।
3. रूस ने 1769 में काग़ज़ी मुद्रा क्यों छापी?
राज्य को ख़ासकर युद्ध के लिए ज़्यादा पैसा चाहिए था और सिर्फ़ सिक्के काफ़ी नहीं थे।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कारख़ाने आज की मशीनों वाले कारख़ानों जैसे थे। मैन्युफ़ैक्टरी में ज़्यादातर हाथ के औज़ार और बहुत से मज़दूर होते थे।
- कहना कि भूदास कहीं भी जाने के लिए आज़ाद थे। वे ज़मींदारों के थे और न जा सकते थे, न शिकायत कर सकते थे।
- बारशचिना और ओब्रोक मिला देना। याद रखिए: बारशचिना में शरीर से काम, ओब्रोक में पैसा।
- यह भूल जाना कि काग़ज़ी मुद्रा राज्य का युद्ध-ख़र्च का साधन थी, अमीर देश की निशानी नहीं।