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बीसवीं सदी की दहलीज़ पर रूस: जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, विट्टे और निकोलस द्वितीय

सन 1900 के आसपास रूसी साम्राज्य में लगभग 12.6 करोड़ लोग थे, ज़्यादातर ग़रीब किसान, और कई अलग-अलग जातियाँ। वित्त मंत्री सेरगेई विट्टे (1892-1903) ने रेलवे, सोने के रूबल, विदेशी कर्ज़ और सीमा-शुल्क से उद्योग को तेज़ी से बढ़ाया। गाँव तंग और ग़रीब रहे, मज़दूरों का जीवन कठिन था, और ज़ार निकोलस द्वितीय के पास पूरी सत्ता रही। नए दल बने और इस दबाव से 1905 की क्रांति आई।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कौन रहता था? 1897 में लगभग 12.6 करोड़ लोग। हर 10 में से लगभग 8 किसान थे। केवल लगभग 5 में से 1 पढ़ सकता था।
  2. उछाल। 1890 के दशक में कारख़ाने, खानें और रेलवे बहुत तेज़ी से बढ़े। लोहे का उत्पादन लगभग 3 गुना हो गया।
  3. विट्टे की योजना में चार औज़ार थे: सरकारी रेलवे, सोने का रूबल, विदेशी कर्ज़ और ऊँचा सीमा-शुल्क। सब ज़्यादा कारख़ानों की ओर ले जाते हैं।
  4. गाँव पर दबाव पड़ा। ज़मीन उतनी ही रही, पर परिवार बढ़े। कर और भुगतान ऊँचे रहे।
  5. ज़ार अकेले शासन करते थे, संसद नहीं थी। नीचे से नए समूह दबाव डाल रहे थे: उदारवादी, समाजवादी-क्रांतिकारी और सामाजिक लोकतांत्रिक।
  6. आपकी बारी। साल को 1892 से 1903 तक सरकाइए। उद्योग और असंतोष को साथ बढ़ते देखिए और हर घटना पढ़िए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या रूस की ज़्यादातर आबादी सच में किसान थी?

हाँ। आकृतियाँ गिनिए: 10 में 8 भूरे किसान हैं और केवल 1 शहर में रहता है।

औद्योगिक विकास कितना तेज़ था?

बहुत तेज़: 1890 के दशक में लोहे का उत्पादन लगभग तीन गुना हुआ और रेल 30 000 से 50 000 किमी से ज़्यादा हुई। ब्लॉक और पटरियाँ देखिए।

विट्टे को विदेशी पैसा क्यों चाहिए था?

रूस के पास सारी रेलें और कारख़ाने बनाने की बचत नहीं थी। सोने के रूबल से विदेशियों का भरोसा बना। तीर 2 और 3 देखिए।

उद्योग बढ़ा तो किसान ग़रीब क्यों रहे?

खेती उतनी तेज़ नहीं बढ़ी। ज़मीन उतनी ही रही और परिवार बढ़े, और नए कारख़ानों का ख़र्च करों से निकला। खेत को भरते देखिए।

क्या ज़ार किसी के साथ सत्ता बाँटते थे?

नहीं। संसद नहीं थी। मंत्री केवल ज़ार के प्रति उत्तरदायी थे। पिरामिड देखिए: उसमें कोई चुना हुआ नहीं है।

क्या उद्योग और असंतोष जुड़े हुए हैं?

इस कहानी में हाँ। जैसे-जैसे कारख़ाने और शहर बढ़े, मज़दूरों की संख्या और उनका ग़ुस्सा भी बढ़ा। साल सरकाकर दोनों पट्टियों को बढ़ते देखिए।

जनसंख्या और समाज

1897 की जनगणना पूरे साम्राज्य की पहली जनगणना थी। उसमें लगभग 12.6 करोड़ लोग गिने गए। साम्राज्य बहुत बड़ा था और उसमें कई जातियाँ रहती थीं। रूसी लोग आधे से कम थे; यूक्रेनी, पोल, तातार, यहूदी, जॉर्जियाई, फ़िन और कई अन्य भी थे।

हर 10 में से लगभग 8 लोग गाँव के किसान थे। केवल लगभग 8 में से 1 व्यक्ति शहर में रहता था। लगभग 5 में से 1 पढ़ सकता था।

लोग वर्गों (एस्टेट) में बँटे थे: कुलीन, पादरी, व्यापारी, शहरी और किसान। हर वर्ग के अपने अधिकार और कर्तव्य थे। कुलीनों के पास बहुत-सी ज़मीन और ज़्यादातर ऊँचे पद थे।

अर्थव्यवस्था: तेज़ विकास, पुराने गाँव

1890 के दशक में रूस में औद्योगिक उछाल आया। उद्योग लगभग 8 प्रतिशत सालाना बढ़ा। दक्षिण (दोनबास) में कोयले की नई खानें खुलीं, बाकू से तेल आया, और यूराल और दक्षिण में धातु के कारख़ाने बढ़े। रेल लाइनें लगभग 30 हज़ार किमी (1890) से बढ़कर 50 हज़ार किमी से ज़्यादा (1900) हो गईं। यूरोपीय भाग को सुदूर पूर्व से जोड़ने के लिए 1891 में विशाल ट्रांस-साइबेरियन रेलवे शुरू हुई।

पर खेती पुराने ढंग की रही। लकड़ी के हल, ज़मीन की छोटी पट्टियाँ और ख़राब फ़सल आम थीं। बुरी फ़सल से भुखमरी आ सकती थी, जैसे 1891-92 में। इसलिए रूस कुछ जगह मज़बूत और कुछ जगह कमज़ोर था।

सेरगेई विट्टे और उनकी नीति

सेरगेई विट्टे 1892 से 1903 तक वित्त मंत्री थे। उनका मानना था कि रूस को पश्चिमी यूरोप के बराबर जल्दी पहुँचना है और यह केवल मज़बूत उद्योग से होगा। उनके चार औज़ार:

  1. रेलवे, ज़्यादातर सरकार द्वारा बनी।
  2. सोने पर टिका रूबल (1897): रूबल को सोने से बदला जा सकता था, इसलिए विदेशी निवेशकों को भरोसा हुआ।
  3. विदेशी कर्ज़ और निवेश: फ़्रांस, बेल्जियम, ब्रिटेन और जर्मनी के पैसे से कई कारख़ाने बने।
  4. ऊँचा सीमा-शुल्क: विदेशी माल महँगा हुआ, इसलिए नए रूसी कारख़ानों का माल ज़्यादा बिका।

राज्य ने शराब पर एकाधिकार (1894) से भी बहुत कमाया। क़ीमत: कर ज़्यादातर किसानों पर पड़े और रूस पर बड़ा कर्ज़ चढ़ा। विट्टे 1903 में पद से हट गए।

किसान और मज़दूर

1861 से किसान आज़ाद थे, पर उन्हें अपनी ज़मीन के लिए दशकों तक मोचन-भुगतान देना पड़ा। कई गाँवों में समुदाय (कम्यून) ज़मीन बाँटता था और टुकड़े छोटे थे। परिवार बढ़े, तो हर व्यक्ति के हिस्से में ज़मीन कम आई। ज़मीन के भूखे किसान कुलीनों की बड़ी जागीरों की ओर देखने लगे।

नए कारख़ाना मज़दूर भीड़ भरे बैरकों में रहते और 12 घंटे या ज़्यादा काम करते थे। 1897 के क़ानून ने काम का दिन 11.5 घंटे तक सीमित किया, पर हड़तालें अब भी मना थीं। मज़दूर गुप्त समूहों में जुड़ने लगे।

निकोलस द्वितीय और निरंकुशता

निकोलस द्वितीय 1894 में ज़ार बने और 1896 में उनका राज्याभिषेक हुआ। वे निरंकुश शासक थे: असीमित सत्ता वाले। कोई संसद नहीं थी, जनता के चुने हुए क़ानून बनाने वाले नहीं थे। जब कुछ लोगों ने संविधान की आशा की, तो उन्होंने ऐसी आशाओं को बेतुके सपने कहा। वे पिता की तरह सत्ता बनाए रखना अपना पवित्र कर्तव्य मानते थे।

नए राजनीतिक समूह गुप्त रूप से या विदेश में बने:

समृद्ध होती अर्थव्यवस्था, असंतुष्ट गाँव और सत्ता न बाँटने वाला ज़ार: इन तीनों ने मिलकर 1905 की क्रांति की ज़मीन तैयार की।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 12.6 करोड़ में से अगर 10 में 8 किसान थे, तो लगभग कितने किसान थे?

12.6 करोड़ का 8/10 = लगभग 10 करोड़ किसान।

2. समझाइए कि सोने के रूबल ने उद्योग की कैसे मदद की।

विदेशी निवेशक जानते थे कि वे रूबल को सोने में बदल सकते हैं, इसलिए उन्होंने रूस पर भरोसा किया और कारख़ानों व रेलों में पैसा लगाया। ज़्यादा पैसा यानी ज़्यादा उद्योग।

3. बढ़ते परिवार गाँवों में परेशानी क्यों बने?

ज़मीन उतनी ही रही, इसलिए हर व्यक्ति के लिए जोतने को कम ज़मीन बची। करों और मोचन-भुगतान को जोड़ दें तो कई किसान ग़रीब रहे और और ज़मीन चाहने लगे।

4. हम क्यों कह सकते हैं कि 1900 के आसपास रूस मज़बूत भी था और कमज़ोर भी?

मज़बूत: तेज़ उद्योग, कई नई रेलें, बड़ी खानें। कमज़ोर: पुरानी खेती, ग़रीब किसान, कठिन कारख़ाना-काम, और सरकार में लोगों की कोई भागीदारी नहीं।

5. विट्टे की नीति से किसे फ़ायदा हुआ और किसने क़ीमत चुकाई?

राज्य, कारख़ानेदारों और विदेशी निवेशकों को फ़ायदा हुआ। किसानों ने इसे चलाने वाले ज़्यादातर कर चुकाए और मज़दूरों ने कठिन कारख़ाना-जीवन सहा।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 1897 की जनगणना में रूसी साम्राज्य में लगभग कितने लोग गिने गए?
2. इनमें से कौन विट्टे का औज़ार नहीं था?
3. 1894 से रूस पर असीमित सत्ता के साथ किसने शासन किया?
4. लगभग कितने लोग किसान थे?
5. कौन-सा समूह मुख्य रूप से किसानों की बात करता था?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेरगेई विट्टे कौन थे?

विट्टे 1892 से 1903 तक रूस के वित्त मंत्री थे। उन्होंने रेलें बनवाईं, सोने का रूबल चलाया और उद्योग तेज़ करने के लिए विदेशी पैसा बुलाया। 1905-06 में उन्होंने थोड़े समय सरकार का नेतृत्व भी किया।

रूस को निरंकुश राज्य क्यों कहा जाता था?

क्योंकि सारी सत्ता ज़ार के पास थी। संसद नहीं थी और मंत्री केवल उन्हीं के प्रति उत्तरदायी थे। 1905 की क्रांति के बाद ही इसमें थोड़ा बदलाव आया।

ट्रांस-साइबेरियन रेलवे क्या थी?

एक बहुत लंबी रेल, जो 1891 में शुरू हुई और यूरोपीय रूस को सुदूर पूर्व से जोड़ती थी। इससे व्यापार, बसावट और सैनिकों की आवाजाही में मदद मिली।

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