जनसंख्या और समाज
1897 की जनगणना पूरे साम्राज्य की पहली जनगणना थी। उसमें लगभग 12.6 करोड़ लोग गिने गए। साम्राज्य बहुत बड़ा था और उसमें कई जातियाँ रहती थीं। रूसी लोग आधे से कम थे; यूक्रेनी, पोल, तातार, यहूदी, जॉर्जियाई, फ़िन और कई अन्य भी थे।
हर 10 में से लगभग 8 लोग गाँव के किसान थे। केवल लगभग 8 में से 1 व्यक्ति शहर में रहता था। लगभग 5 में से 1 पढ़ सकता था।
लोग वर्गों (एस्टेट) में बँटे थे: कुलीन, पादरी, व्यापारी, शहरी और किसान। हर वर्ग के अपने अधिकार और कर्तव्य थे। कुलीनों के पास बहुत-सी ज़मीन और ज़्यादातर ऊँचे पद थे।
अर्थव्यवस्था: तेज़ विकास, पुराने गाँव
1890 के दशक में रूस में औद्योगिक उछाल आया। उद्योग लगभग 8 प्रतिशत सालाना बढ़ा। दक्षिण (दोनबास) में कोयले की नई खानें खुलीं, बाकू से तेल आया, और यूराल और दक्षिण में धातु के कारख़ाने बढ़े। रेल लाइनें लगभग 30 हज़ार किमी (1890) से बढ़कर 50 हज़ार किमी से ज़्यादा (1900) हो गईं। यूरोपीय भाग को सुदूर पूर्व से जोड़ने के लिए 1891 में विशाल ट्रांस-साइबेरियन रेलवे शुरू हुई।
पर खेती पुराने ढंग की रही। लकड़ी के हल, ज़मीन की छोटी पट्टियाँ और ख़राब फ़सल आम थीं। बुरी फ़सल से भुखमरी आ सकती थी, जैसे 1891-92 में। इसलिए रूस कुछ जगह मज़बूत और कुछ जगह कमज़ोर था।
सेरगेई विट्टे और उनकी नीति
सेरगेई विट्टे 1892 से 1903 तक वित्त मंत्री थे। उनका मानना था कि रूस को पश्चिमी यूरोप के बराबर जल्दी पहुँचना है और यह केवल मज़बूत उद्योग से होगा। उनके चार औज़ार:
- रेलवे, ज़्यादातर सरकार द्वारा बनी।
- सोने पर टिका रूबल (1897): रूबल को सोने से बदला जा सकता था, इसलिए विदेशी निवेशकों को भरोसा हुआ।
- विदेशी कर्ज़ और निवेश: फ़्रांस, बेल्जियम, ब्रिटेन और जर्मनी के पैसे से कई कारख़ाने बने।
- ऊँचा सीमा-शुल्क: विदेशी माल महँगा हुआ, इसलिए नए रूसी कारख़ानों का माल ज़्यादा बिका।
राज्य ने शराब पर एकाधिकार (1894) से भी बहुत कमाया। क़ीमत: कर ज़्यादातर किसानों पर पड़े और रूस पर बड़ा कर्ज़ चढ़ा। विट्टे 1903 में पद से हट गए।
किसान और मज़दूर
1861 से किसान आज़ाद थे, पर उन्हें अपनी ज़मीन के लिए दशकों तक मोचन-भुगतान देना पड़ा। कई गाँवों में समुदाय (कम्यून) ज़मीन बाँटता था और टुकड़े छोटे थे। परिवार बढ़े, तो हर व्यक्ति के हिस्से में ज़मीन कम आई। ज़मीन के भूखे किसान कुलीनों की बड़ी जागीरों की ओर देखने लगे।
नए कारख़ाना मज़दूर भीड़ भरे बैरकों में रहते और 12 घंटे या ज़्यादा काम करते थे। 1897 के क़ानून ने काम का दिन 11.5 घंटे तक सीमित किया, पर हड़तालें अब भी मना थीं। मज़दूर गुप्त समूहों में जुड़ने लगे।
निकोलस द्वितीय और निरंकुशता
निकोलस द्वितीय 1894 में ज़ार बने और 1896 में उनका राज्याभिषेक हुआ। वे निरंकुश शासक थे: असीमित सत्ता वाले। कोई संसद नहीं थी, जनता के चुने हुए क़ानून बनाने वाले नहीं थे। जब कुछ लोगों ने संविधान की आशा की, तो उन्होंने ऐसी आशाओं को बेतुके सपने कहा। वे पिता की तरह सत्ता बनाए रखना अपना पवित्र कर्तव्य मानते थे।
नए राजनीतिक समूह गुप्त रूप से या विदेश में बने:
- उदारवादी संविधान और चुनी हुई सरकार चाहते थे।
- समाजवादी-क्रांतिकारी (SR), 1901-02 में बने, किसानों की बात करते थे।
- सामाजिक लोकतांत्रिक (RSDLP), 1898 में बने, मज़दूरों की बात करते थे। 1903 में वे बोल्शेविक (लेनिन) और मेन्शेविक में बँट गए।
समृद्ध होती अर्थव्यवस्था, असंतुष्ट गाँव और सत्ता न बाँटने वाला ज़ार: इन तीनों ने मिलकर 1905 की क्रांति की ज़मीन तैयार की।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जनगणना 1897: लगभग 12.6 करोड़ लोग; 10 में लगभग 8 किसान; लगभग 5 में 1 साक्षर
- विट्टे (वित्त मंत्री 1892-1903) = रेल, सोने का रूबल (1897), कर्ज़, शुल्क
- 1890 के दशक में उद्योग लगभग 8% सालाना बढ़ा; रेल लगभग 30 000 किमी → 50 000+ किमी
- निकोलस द्वितीय: 1894 से ज़ार, निरंकुश, 1905-06 तक कोई संसद नहीं
- दल: उदारवादी, SR (किसान), RSDLP (1898) → बोल्शेविक और मेन्शेविक (1903)
हल किए गए उदाहरण
1. 12.6 करोड़ में से अगर 10 में 8 किसान थे, तो लगभग कितने किसान थे?
12.6 करोड़ का 8/10 = लगभग 10 करोड़ किसान।
2. समझाइए कि सोने के रूबल ने उद्योग की कैसे मदद की।
विदेशी निवेशक जानते थे कि वे रूबल को सोने में बदल सकते हैं, इसलिए उन्होंने रूस पर भरोसा किया और कारख़ानों व रेलों में पैसा लगाया। ज़्यादा पैसा यानी ज़्यादा उद्योग।
3. बढ़ते परिवार गाँवों में परेशानी क्यों बने?
ज़मीन उतनी ही रही, इसलिए हर व्यक्ति के लिए जोतने को कम ज़मीन बची। करों और मोचन-भुगतान को जोड़ दें तो कई किसान ग़रीब रहे और और ज़मीन चाहने लगे।
4. हम क्यों कह सकते हैं कि 1900 के आसपास रूस मज़बूत भी था और कमज़ोर भी?
मज़बूत: तेज़ उद्योग, कई नई रेलें, बड़ी खानें। कमज़ोर: पुरानी खेती, ग़रीब किसान, कठिन कारख़ाना-काम, और सरकार में लोगों की कोई भागीदारी नहीं।
5. विट्टे की नीति से किसे फ़ायदा हुआ और किसने क़ीमत चुकाई?
राज्य, कारख़ानेदारों और विदेशी निवेशकों को फ़ायदा हुआ। किसानों ने इसे चलाने वाले ज़्यादातर कर चुकाए और मज़दूरों ने कठिन कारख़ाना-जीवन सहा।
आम गलतियाँ
- 1900 में रूस को आधुनिक औद्योगिक देश मान लेना। उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा था, पर 10 में से लगभग 8 लोग अब भी किसान थे।
- विट्टे को ज़ार कहना। वे मंत्री थे (वित्त, 1892-1903) जो ज़ार की सेवा करते थे।
- निकोलस द्वितीय को उनके पिता अलेक्ज़ेंडर तृतीय से मिला देना। निकोलस 1894 में ज़ार बने।
- साम्राज्य के सभी लोगों को रूसी मानना। रूसी आधे से कम थे; साम्राज्य में कई जातियाँ रहती थीं।