Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II History of dance (extended level)
अध्याय: 5
1. Dance and dance spectacle through history
Dance in prehistory and antiquity · Middle Ages and Renaissance · Dances, companies and festivals
- नृत्य का इतिहास: समय के साथ नृत्य कैसे बदला – इंसान हमेशा से नाचता आया है। प्राचीन समय में नृत्य रस्मों और समुदाय का हिस्सा था, अक्सर घेरे में। मध्य युग और पुनर्जागरण में दरबारों में जोड़े पंक्तियों में धीमे नृत्य करते थे, जो अच्छे आचरण की निशानी थे। बारोक दौर में लुई चौदहवें ने नृत्य अकादमी बनाई और बैले टर्न-आउट वाले पैरों के साथ मंच पर पहुँचा। 1800 के दशक में रोमांटिक और क्लासिकल बैले आया: पॉइंट जूते, टूटू और ‘जिज़ेल’, ‘स्वान लेक’ जैसी कहानियाँ। 1900 के दशक में आधुनिक नर्तकों ने नियम तोड़े — नंगे पैर, सहज चाल — और आज समकालीन, स्ट्रीट और फ़्यूज़न शैलियाँ पूरी दुनिया के विचार मिलाती हैं। लोक-नृत्य को उसकी संस्कृति के भीतर समझने की पढ़ाई को एथ्नोकोरियोलॉजी कहते हैं।
2. Great figures of dance culture
Foreign choreographers and dancers · Theorists, teachers and Polish artists
- नृत्य का इतिहास: समय के साथ नृत्य कैसे बदला – इंसान हमेशा से नाचता आया है। प्राचीन समय में नृत्य रस्मों और समुदाय का हिस्सा था, अक्सर घेरे में। मध्य युग और पुनर्जागरण में दरबारों में जोड़े पंक्तियों में धीमे नृत्य करते थे, जो अच्छे आचरण की निशानी थे। बारोक दौर में लुई चौदहवें ने नृत्य अकादमी बनाई और बैले टर्न-आउट वाले पैरों के साथ मंच पर पहुँचा। 1800 के दशक में रोमांटिक और क्लासिकल बैले आया: पॉइंट जूते, टूटू और ‘जिज़ेल’, ‘स्वान लेक’ जैसी कहानियाँ। 1900 के दशक में आधुनिक नर्तकों ने नियम तोड़े — नंगे पैर, सहज चाल — और आज समकालीन, स्ट्रीट और फ़्यूज़न शैलियाँ पूरी दुनिया के विचार मिलाती हैं। लोक-नृत्य को उसकी संस्कृति के भीतर समझने की पढ़ाई को एथ्नोकोरियोलॉजी कहते हैं।
3. Dance terms, theatre and the profession
Theory and practice of dance
- नृत्य: तत्व, नृत्य-रचना और शैलियाँ – नृत्य शरीर की वह गति है जो स्थान और समय में, ऊर्जा के साथ, भावना जताने, कहानी सुनाने या उत्सव मनाने के लिए होती है। हर नृत्य को चार तत्वों से समझ सकते हैं: शरीर (क्या हिलता है), स्थान (कहाँ: स्तर, दिशा, रास्ते), समय (कब: ताल, लय, ठहराव) और ऊर्जा (कैसे: तीखी या कोमल, ज़ोरदार या हल्की)। नृत्य-रचना (कोरियोग्राफ़ी) मोटिफ़, दोहराव, कैनन, एकस्वरता, विरोधाभास और बनावट जैसे तरीक़ों से गतियाँ सजाने की कला है। अच्छे कलाकार तकनीक, सुरक्षा और भाव सीखते हैं, और अच्छे दर्शक देखी चीज़ का वर्णन, विश्लेषण, अर्थ और मूल्यांकन करते हैं। शास्त्रीय, लोक, बैले, हिप-हॉप – हर शैली अपनी संस्कृति और इतिहास से निकलती है।
4. Describing and analysing dance works
Analysis of dance works · Social and historical context of dance
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
- नृत्य का इतिहास: समय के साथ नृत्य कैसे बदला – इंसान हमेशा से नाचता आया है। प्राचीन समय में नृत्य रस्मों और समुदाय का हिस्सा था, अक्सर घेरे में। मध्य युग और पुनर्जागरण में दरबारों में जोड़े पंक्तियों में धीमे नृत्य करते थे, जो अच्छे आचरण की निशानी थे। बारोक दौर में लुई चौदहवें ने नृत्य अकादमी बनाई और बैले टर्न-आउट वाले पैरों के साथ मंच पर पहुँचा। 1800 के दशक में रोमांटिक और क्लासिकल बैले आया: पॉइंट जूते, टूटू और ‘जिज़ेल’, ‘स्वान लेक’ जैसी कहानियाँ। 1900 के दशक में आधुनिक नर्तकों ने नियम तोड़े — नंगे पैर, सहज चाल — और आज समकालीन, स्ट्रीट और फ़्यूज़न शैलियाँ पूरी दुनिया के विचार मिलाती हैं। लोक-नृत्य को उसकी संस्कृति के भीतर समझने की पढ़ाई को एथ्नोकोरियोलॉजी कहते हैं।
5. Forming opinions about dance
Comparing and judging · Dance and society; synthesis
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
- नृत्य का इतिहास: समय के साथ नृत्य कैसे बदला – इंसान हमेशा से नाचता आया है। प्राचीन समय में नृत्य रस्मों और समुदाय का हिस्सा था, अक्सर घेरे में। मध्य युग और पुनर्जागरण में दरबारों में जोड़े पंक्तियों में धीमे नृत्य करते थे, जो अच्छे आचरण की निशानी थे। बारोक दौर में लुई चौदहवें ने नृत्य अकादमी बनाई और बैले टर्न-आउट वाले पैरों के साथ मंच पर पहुँचा। 1800 के दशक में रोमांटिक और क्लासिकल बैले आया: पॉइंट जूते, टूटू और ‘जिज़ेल’, ‘स्वान लेक’ जैसी कहानियाँ। 1900 के दशक में आधुनिक नर्तकों ने नियम तोड़े — नंगे पैर, सहज चाल — और आज समकालीन, स्ट्रीट और फ़्यूज़न शैलियाँ पूरी दुनिया के विचार मिलाती हैं। लोक-नृत्य को उसकी संस्कृति के भीतर समझने की पढ़ाई को एथ्नोकोरियोलॉजी कहते हैं।