यूनानी कला के चार काल
इतिहासकार यूनानी कला को चार कालों में बाँटते हैं (सभी वर्ष ई.पू., लगभग):
- ज्यामितीय (900–700): बर्तनों पर ज़िगज़ैग, वृत्त और तीली जैसे लोग-घोड़े, सधी पट्टियों में।
- आर्कैइक (700–480): बड़ी पत्थर की मूर्तियाँ आईं: कूरोस (युवक) और कोरे (युवती)। वे अकड़ी खड़ी हैं, चेहरे पर स्थिर मुस्कान (आर्कैइक मुस्कान)।
- शास्त्रीय (480–323): शांत, संतुलित, आदर्श शरीर। एथेंस में पार्थेनन बना। प्रसिद्ध मूर्तिकार: मायरन, फ़िडियस, पॉलीक्लीटोस, प्रैक्सिटेलीज़।
- हेलेनिस्टिक (323–31): सिकंदर के बाद कला दूर-दूर फैली। इसमें गति, मुड़ते शरीर, तेज़ भावनाएँ और असली लोग: बच्चे, बूढ़े, दुखी लोग।
रंगे हुए बर्तन
यूनानी बर्तन असली कामों के लिए बनाते थे: एम्फ़ोरा में शराब या तेल रखते, क्रेटर में शराब-पानी मिलाते, काइलिक्स पीने का प्याला, हाइड्रिया पानी ढोने का घड़ा।
काली-आकृति (लगभग 700 ई.पू. से): आकृतियाँ ऐसे घोल से रंगी जाती थीं जो भट्ठी में काला हो जाता; बारीकियाँ खुरचकर मिट्टी तक।
लाल-आकृति (लगभग 530 ई.पू. से, एथेंस): उल्टा तरीका। पृष्ठभूमि काली और आकृतियाँ मिट्टी के रंग की। बारीकियाँ ब्रश से, इसलिए मांसपेशियाँ, चेहरे और कपड़े ज़्यादा स्वाभाविक दिखते हैं।
दृश्य मिथक (हेराक्लीज़, ट्रॉय का युद्ध), देवता, खिलाड़ी, विवाह और रोज़ का काम दिखाते हैं। यूनानी जीवन जानने के ये सबसे अच्छे स्रोतों में हैं।
मूर्तिकला: अकड़ से जीवन तक
आर्कैइक मूर्तियाँ सामने देखती, एक पैर थोड़ा आगे, हाथ बगल में, मिस्र की मूर्तियों जैसी खड़ी हैं।
लगभग 480 ई.पू. में मूर्तिकारों ने कॉन्त्रापोस्तो शुरू किया: भार एक पैर पर, इसलिए कूल्हे एक ओर और कंधे दूसरी ओर झुकते हैं। शरीर सहज और चलने को तैयार लगता है।
कई महान मूर्तियाँ काँसे में ढली थीं; ज़्यादातर बाद में पिघला दी गईं, इसलिए हम उन्हें रोमन संगमरमर प्रतियों से जानते हैं। संगमरमर की मूर्तियाँ कभी चटक रंगों से रंगी थीं; रंग अब लगभग मिट गया है।
शास्त्रीय कला शांत, आदर्श सौंदर्य चाहती है। हेलेनिस्टिक कला भावना और नाटकीयता दिखाती है: मुड़ती मुद्राएँ, कपड़ों की गहरी सिलवटें, दर्द या ख़ुशी वाले चेहरे।
वास्तुकला, अनुपात और विरासत
यूनानी मंदिर देवता की मूर्ति का घर था। बीच के कक्ष के चारों ओर स्तंभ, ऊपर नीची त्रिकोणीय छत और मूर्तियों से भरा पेडिमेंट।
- डोरिक: मज़बूत, आधार नहीं, गद्दी जैसा सादा शीर्ष। उदाहरण: एथेंस का पार्थेनन (447–432 ई.पू.)।
- आयोनिक: पतला, आधार सहित, शीर्ष पर दो कुंडलियाँ (वॉल्यूट)।
- कोरिंथियन: सबसे ऊँचा, शीर्ष पर अकैन्थस पत्तियाँ; रोमनों को बहुत पसंद।
अनुपात: पॉलीक्लीटोस ने कैनन लिखा, कि हर अंग नाप से पूरे शरीर से मेल खाए। पार्थेनन के निर्माताओं ने फ़र्श हल्का घुमावदार और स्तंभ थोड़े झुके बनाए ताकि इमारत आँख को बिल्कुल सीधी दिखे।
विरासत: रोमनों ने यूनानी कला की नक़ल की; पुनर्जागरण ने उसे फिर जगाया; दुनिया भर की नवशास्त्रीय इमारतों में इसके स्तंभ हैं। गांधार की बौद्ध मूर्तियों में यूनानी शैली स्थानीय परंपरा से मिली।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कॉन्त्रापोस्तो = भार एक पैर पर, कूल्हे और कंधे उल्टी दिशाओं में झुके
- काली-आकृति = मिट्टी की पृष्ठभूमि पर काली आकृतियाँ; लाल-आकृति = काली पृष्ठभूमि पर मिट्टी रंग की आकृतियाँ
- डोरिक (सादा) → आयोनिक (कुंडलियाँ) → कोरिंथियन (पत्तियाँ)
- पॉलीक्लीटोस का कैनन = आदर्श शरीर अनुपात का नियम
- कूरोस / कोरे = आर्कैइक युवक / युवती की मूर्ति
- पेडिमेंट = मंदिर की छत के सिरे का त्रिकोण
हल किए गए उदाहरण
1. एक फूलदान पर काली पृष्ठभूमि में नारंगी आकृतियाँ हैं, ब्रश से बनी बारीक मांसपेशियाँ। कौन-सी तकनीक और लगभग कब?
लाल-आकृति, यानी लगभग 530 ई.पू. के बाद, संभवतः एथेंस से।
2. संगमरमर का युवक सीधा खड़ा है, दोनों पैर सपाट, हाथ बगल में, छोटी स्थिर मुस्कान। कौन-सा काल?
आर्कैइक (लगभग 700–480 ई.पू.)। यह कूरोस है।
3. स्तंभ का आधार है और शीर्ष पर दो सर्पिल कुंडलियाँ हैं। शैली बताइए।
आयोनिक।
आम गलतियाँ
- सोचना कि यूनानी मूर्तियाँ हमेशा सफ़ेद थीं। वे रंगी थीं; रंग मिट गया।
- काली-आकृति और लाल-आकृति मिलाना। पूछिए: लोग किस रंग के हैं?
- हर सजे शीर्ष वाले स्तंभ को आयोनिक कहना। कुंडलियाँ = आयोनिक, पत्तियाँ = कोरिंथियन।
- रोमन संगमरमर प्रतियों को यूनानी मूल मान लेना, जबकि मूल अक्सर काँसे के थे।