एथेंस के समाज में नाटक और रंगमंच
एथेंस में नाटक हर रात नहीं होते थे। वे शराब, उर्वरता और रंगमंच के देवता डायोनिसस के धार्मिक उत्सवों का हिस्सा थे। सबसे बड़ा था हर वसंत में होने वाला सिटी डायोनिसिया; सर्दियों का लेनाइया छोटा था।
- प्रतियोगिता: तीन त्रासदी-लेखक तीन-तीन त्रासदियाँ और एक छोटा, मसखरा सैटर नाटक दिखाते थे। कॉमेडी लेखक भी मुक़ाबला करते थे। पर्ची से चुने गए निर्णायक विजेता तय करते थे।
- ख़र्च: एक अमीर नागरिक, कोरेगोस, सार्वजनिक कर्तव्य के रूप में कोरस का ख़र्च उठाता था।
- दर्शक: हज़ारों नागरिक; बाद में ग़रीब नागरिकों को टिकट के लिए मदद मिलने लगी। नाटक शहर को उसके अपने मूल्य, बहसें और डर दिखाते थे।
- नागरिक समारोह: नाटकों से पहले शहर सहयोगियों से मिला कर दिखाता और शहीद सैनिकों के बेटों का सम्मान करता था। रंगमंच लोकतंत्र और नागरिक गर्व का हिस्सा था।
सारे कलाकार पुरुष थे। स्त्री पात्र पुरुष ही स्त्री मुखौटे और पोशाक पहनकर निभाते थे।
थिएटर की जगह
- थिएट्रॉन ("देखने की जगह"): पहाड़ी में कटी सीटों की घुमावदार कतारें। बाद के थिएटरों में लगभग 14,000-17,000 लोग बैठते थे।
- ऑर्केस्ट्रा ("नाचने की जगह"): समतल गोला जहाँ कोरस गाता-नाचता था, अक्सर बीच में वेदी (थाइमेली)।
- स्कीनी: ऑर्केस्ट्रा के पीछे लकड़ी की (बाद में पत्थर की) इमारत। अभिनेता अंदर मुखौटे बदलते थे, और इसका दरवाज़ा महल या मंदिर बन जाता था। इसी से "सीन" शब्द बना।
- पैरोडोई: बगल के रास्ते जिनसे कोरस अंदर आता था।
- एक्किक्लेमा: पहियों वाला मंच जो दरवाज़े से बाहर लाकर अंदर हुई घटना दिखाता था, अक्सर कोई शव (हिंसा आमतौर पर मंच के बाहर रखी जाती थी)।
- मेखाने: देवताओं को उठाने वाली क्रेन। अचानक आकर कहानी सुलझाने वाला देवता डेउस एक्स माकिना ("मशीन से आया देवता") कहलाता है।
सबूत: पत्थर के अवशेष (एथेंस का डायोनिसस थिएटर, एपिडॉरस का बहुत अच्छी हालत वाला थिएटर जो अपनी ध्वनि-व्यवस्था के लिए मशहूर है), अभिनेताओं, मुखौटों और कोरस वाले चित्रित मटके (फूलदान), और ख़ुद नाटकों के पाठ।
मुखौटे, अभिनेता और कोरस
मुखौटे पूरा सिर ढकते थे। वे उम्र, लिंग और पात्र का प्रकार दिखाते, पीछे की कतारों को पहचानने में मदद करते, और एक अभिनेता को कई भूमिकाएँ निभाने देते थे।
अभिनेता: परंपरा कहती है कि थेस्पिस पहली बार कोरस से बाहर आकर अकेला अभिनेता बना (इसीलिए अभिनेता को "थेस्पियन" कहते हैं)। एस्किलस ने दूसरा अभिनेता जोड़ा, सोफ़ोक्लीज़ ने तीसरा। तीन अभिनेता सारे बोलने वाले पात्र बाँटते थे।
कोरस: एक समूह (त्रासदी में 12-15, कॉमेडी में 24) जो गाता-नाचता था। यह घटनाओं पर टिप्पणी करता, पृष्ठभूमि बताता, समाज की राय रखता और दृश्यों को जोड़ता था।
त्रासदी का ढाँचा: प्रोलॉग (शुरुआत) → पैरोडोस (कोरस का प्रवेश) → एपिसोड (अभिनेताओं के दृश्य), जिनके बीच स्टासिमा (कोरस गीत) → एक्सोडोस (अंत)।
त्रासदी का स्वरूप
त्रासदी गंभीर घटनाओं, दुख, देवताओं और इंसानी फ़ैसलों की बात करती है। तीन महान त्रासदी-लेखक थे एस्किलस, सोफ़ोक्लीज़ और यूरिपिडीज़।
बाद में दार्शनिक अरस्तू ने मुख्य विचार बताए:
- हमार्शिया: वह भूल या कमी जो पतन की ओर ले जाती है।
- ह्यूब्रिस: अति-घमंड, ख़ासकर देवताओं के सामने।
- पेरिपेटिया: भाग्य का अचानक पलटना।
- एनाग्नोरिसिस: पहचान का क्षण, जब नायक सच जान लेता है।
- कैथार्सिस (विरेचन): करुणा और भय से दर्शकों के मन का शुद्ध होना।
ईडिपस द किंग (सोफ़ोक्लीज़): थीब्स में महामारी फैली है। अपनी बुद्धि पर घमंड करने वाला राजा ईडिपस पुराने राजा के हत्यारे को ढूँढने की क़सम खाता है। धीरे-धीरे उसे पता चलता है कि अनजाने में उसी ने अपने पिता को मारा और अपनी माँ से विवाह किया। वह ख़ुद को अंधा कर लेता है। यह नियति, ज्ञान और इंसानी चतुराई की सीमाओं का नाटक है, और इसकी कथा-बुनावट को अक्सर एकदम सटीक माना जाता है।
बैकी (यूरिपिडीज़): डायोनिसस थीब्स लौटता है, जहाँ उसका चचेरा भाई राजा पेंथियस उसे मानने से इनकार करता है। देवता स्त्रियों को उन्मत्त पूजा में ले जाता है और पेंथियस को उनकी जासूसी के लिए फुसलाता है; पेंथियस को उसकी अपनी माँ के नेतृत्व में स्त्रियाँ मार डालती हैं। यह धर्म, नियंत्रण बनाम आज़ादी, और देवता को नकारने के ख़तरे की पड़ताल करता है। यह रंगमंच के बारे में भी है, क्योंकि डायोनिसस ही रंगमंच का देवता है।
कॉमेडी का स्वरूप
पुरानी कॉमेडी, जो एरिस्टोफ़ेनीज़ से सबसे ज़्यादा जानी जाती है, कल्पना-भरी कहानियाँ, भद्दे चुटकुले, गीत और असली नेताओं, विचारकों और कवियों पर तीखा व्यंग्य मिलाती थी। एक ख़ास हिस्सा, पैराबेसिस, में कोरस आगे आकर सीधे दर्शकों से शहर के बारे में बात करता था।
फ़्रॉग्स (मेंढक) (एरिस्टोफ़ेनीज़): एथेंस में अच्छे त्रासदी-कवि नहीं बचे, तो डायोनिसस एक को वापस लाने पाताल-लोक जाता है। रास्ते में वह टर्राते मेंढकों के कोरस वाली झील पार करता है। पाताल में वह एस्किलस (पुरानी, भव्य शैली) और यूरिपिडीज़ (नई, चतुर शैली) के बीच मुक़ाबले का निर्णायक बनता है। नाटक कविता पर मज़ाक़ करता है, पर युद्ध में फँसे शहर को गंभीर सलाह भी देता है।
बाद में नई कॉमेडी (मेनांडर) रोज़ के पारिवारिक जीवन और प्रेम-कथाओं की ओर मुड़ी, जिसने रोमन कॉमेडी और बहुत बाद में सिटकॉम को प्रभावित किया।
विरासत
यूनानी रंगमंच ने हमें थिएटर भवन का आकार, मंच के शब्द, त्रासदी और कॉमेडी के रूप, और यह विचार दिया कि एक नाटक पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर सकता है। रोम ने इसकी नक़ल की, पुनर्जागरण के लेखकों ने इसे फिर खोजा, और आज भी मंचन और उत्सव ये नाटक खेलते हैं और कोरस व मुखौटे अपनाते हैं।
करके देखो: एक गतिविधि
3D में: अभिनेता 1 करो, फिर 3। सिर्फ़ तीन अभिनेता आठ पात्रों वाला नाटक कैसे खेलें? (संकेत: मुखौटे।) क्रेन चलाओ और बताओ कि कोई देवता कौन-सी समस्या सुलझा सकता है।
घर पर: काग़ज़ की प्लेट से दो मुखौटे बनाओ, एक दुखी, एक हँसता। दोस्तों के साथ 2 मिनट का दृश्य करो जिसमें तीन लोगों का कोरस एक साथ बोलकर अभिनेता के काम पर टिप्पणी करे। फिर अर्धवृत्त में बैठकर जाँचो: क्या किनारे बैठे लोग बीच से की गई फुसफुसाहट सुन पाते हैं?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- थिएट्रॉन = सीटें; ऑर्केस्ट्रा = नृत्य-गोला; स्कीनी = मंच-भवन
- अधिकतम 3 अभिनेता (थेस्पिस 1 → एस्किलस 2 → सोफ़ोक्लीज़ 3) + कोरस
- त्रासदी का ढाँचा: प्रोलॉग → पैरोडोस → एपिसोड + स्टासिमा → एक्सोडोस
- अरस्तू: हमार्शिया, ह्यूब्रिस, पेरिपेटिया, एनाग्नोरिसिस, कैथार्सिस
- पुरानी कॉमेडी: व्यंग्य + पैराबेसिस (एरिस्टोफ़ेनीज़)
हल किए गए उदाहरण
1. यूनानी अभिनेता मुखौटे क्यों पहनते थे?
ताकि बड़ी भीड़ हर पात्र पहचान सके, एक अभिनेता कई भूमिकाएँ निभा सके, और पुरुष स्त्री पात्र निभा सकें।
2. ईडिपस द किंग में एनाग्नोरिसिस क्या है?
वह क्षण जब ईडिपस समझता है कि जिस हत्यारे को वह ढूँढ रहा है वह ख़ुद है और पुराना राजा उसका पिता था।
3. डेउस एक्स माकिना क्या है? नाम कहाँ से आया?
कहानी का अचानक बाहर से आया हल। यह मेखाने क्रेन से आया जो देवता को मंच पर उतारती थी।
4. सिटी डायोनिसिया में कोरस का ख़र्च कौन उठाता था?
कोरेगोस नाम का एक अमीर नागरिक, सार्वजनिक सेवा के रूप में।
5. फ़्रॉग्स मज़ाक़ और गंभीर बातों को कैसे मिलाता है?
यह डायोनिसस, मेंढकों और कवियों की शैलियों पर हँसाता है, पर मुक़ाबला असल में इस बारे में है कि कौन-सा कवि शहर को बचाने की सबसे अच्छी सलाह दे सकता है।
6. यूनानी नाटकों के मंचन के दो तरह के सबूत बताओ।
पत्थर के थिएटर अवशेष (एथेंस, एपिडॉरस) और अभिनेताओं, मुखौटों और कोरस वाले चित्रित मटके; साथ में नाटकों के पाठ में छिपे मंच-निर्देश।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि आज के थिएटर की तरह रोज़ नाटक होते थे। वे मुख्य रूप से धार्मिक उत्सवों में होते थे।
- यह सोचना कि स्त्रियाँ अभिनय करती थीं। सारे अभिनेता और कोरस सदस्य पुरुष थे।
- ऑर्केस्ट्रा और स्कीनी को मिलाना: ऑर्केस्ट्रा नृत्य-गोला है; स्कीनी पीछे की इमारत।
- कहना कि यूनानी त्रासदी में मंच पर ख़ूब हिंसा दिखती थी। मौतें आमतौर पर मंच के बाहर होती थीं और बताई या दिखाई जाती थीं।