National Year 12 Classical Civilisation
अध्याय: 3
1. H408/11 The World of the Hero: Homer
Homer's Iliad or Odyssey (in translation)
जल्द आ रहा है
2. Culture and the Arts (one option)
H408/21 Greek Theatre · H408/22 Imperial Image · H408/23 Invention of the Barbarian · H408/24 Greek Art
- यूनानी रंगमंच: प्राचीन यूनानियों ने नाटक कैसे बनाया – जैसा रंगमंच हम आज जानते हैं, वह ईसा पूर्व 5वीं सदी में एथेंस में देवता डायोनिसस के उत्सवों में पनपा। नाटक खुले थिएटरों में होते थे: पहाड़ी पर सीटें (थिएट्रॉन), गोल नृत्य-स्थल (ऑर्केस्ट्रा) और मंच-भवन (स्कीनी)। अधिकतम तीन मुखौटा पहने पुरुष अभिनेता और एक कोरस कहानी कहते थे। त्रासदी में महान लोग अपने फ़ैसलों से गिरते थे; कॉमेडी असली लोगों और राजनीति का मज़ाक़ उड़ाती थी। इसके शब्द, ढाँचे और विचार आज भी रंगमंच को आकार देते हैं।
- तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य: रोमन साम्राज्य – रोमन साम्राज्य भूमध्य सागर के चारों ओर की ज़मीन पर फैला था: यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तर अफ़्रीका के हिस्से। सत्ता तीन के बीच बँटी थी: सम्राट, सीनेट और सेना। अर्थव्यवस्था खेती, नगरों, जहाज़ों, सिक्कों और जैतून तेल, शराब व अनाज के व्यापार पर चलती थी। समाज परतों में बँटा था, ऊपर अमीर सीनेटर और नीचे बहुत सारे दास। रोमन व्यापारी मानसूनी हवाओं से भारत के बंदरगाहों तक आते थे। चौथी सदी से बदलाव आया: ईसाई धर्म मुख्य धर्म बना, कुस्तुंतुनिया नई राजधानी बनी और 476 ई. में पश्चिमी हिस्सा टूट गया। इस बदलाव के दौर को 'उत्तर-पुरातन काल' कहते हैं।
- यूनानी पहचान और "बर्बर" की धारणा: फ़ारसी युद्ध और नाटक – फ़ारसी युद्धों (490 से 479 ई.पू.) के बाद बहुत से यूनानी बाहरी लोगों से अपनी तुलना करके अपनी पहचान बताने लगे, जिन्हें वे "बर्बरोई" कहते थे। यह धारणा हेरोडोटस की "हिस्ट्रीज़", एस्किलस के नाटक "पर्शियन्स", यूरिपिडीज़ की "मेडिया" तथा मृद्भांडों और मूर्तियों में दिखती है। ये सब यूनानी आवाज़ें हैं, इसलिए हर स्रोत पर पूछना चाहिए: कौन बोल रहा है, किससे, और क्यों।
- प्राचीन यूनानी कला – प्राचीन यूनानी कला लगभग 900 साल में चार कालों में विकसित हुई: ज्यामितीय, आर्कैइक, शास्त्रीय और हेलेनिस्टिक। रंगे बर्तन काली-आकृति से लाल-आकृति की ओर बढ़े। मूर्तियाँ अकड़े कूरोस से शास्त्रीय काल के सहज कॉन्त्रापोस्तो और हेलेनिस्टिक काल की नाटकीयता तक पहुँचीं। मंदिरों में तीन स्तंभ शैलियाँ (डोरिक, आयोनिक, कोरिंथियन) और सधा हुआ अनुपात था। संतुलन और सौंदर्य के इन आदर्शों ने रोमन, पुनर्जागरण और गांधार कला को भी प्रभावित किया।
3. Skills
Using sources and scholarship
- स्रोत विश्लेषण: इतिहासकार सबूत कैसे परखते हैं – स्रोत अतीत का कोई भी निशान है जिससे हमें सबूत मिलता है: चिट्ठी, सिक्का, इमारत, गीत, फ़ोटो या वीडियो। प्राथमिक स्रोत उसी समय के होते हैं जिसका अध्ययन हो रहा है; द्वितीयक स्रोत बाद के विवरण हैं, जैसे इतिहासकारों की किताबें। स्रोत परखने के लिए उसका उद्गम पूछो (किसने, कब, क्यों, किसके लिए बनाया), उसकी बातों को अपनी जानकारी से मिलाओ, पक्षपात ढूँढो, और तय करो कि वह तुम्हारे प्रश्न के लिए कितना विश्वसनीय और कितना उपयोगी है। इतिहासकार स्रोतों को एक-दूसरे से मिलाते हैं (पुष्टि) और अलग-अलग विद्वानों की व्याख्याएँ पढ़कर तर्कपूर्ण टिप्पणी या निबंध लिखते हैं।