यूनानी पहचान और फ़ारसी युद्ध
यूनान एक देश नहीं था। वह सैकड़ों स्वतंत्र नगर-राज्यों का समूह था, जैसे एथेंस और स्पार्टा। उनकी भाषा, देवता, उत्सव (जैसे ओलंपिक खेल) और बहुत सी कहानियाँ साझा थीं। वे आपस में अक्सर लड़ते भी थे।
490 ई.पू. में फ़ारसी सेना मैराथन में उतरी और एथेंस ने उसे हराया। 480 ई.पू. में कहीं बड़ा फ़ारसी हमला आया। यूनानी नगरों के एक समूह ने थर्मोपाइली और सलामिस में उसका सामना किया। 479 ई.पू. में प्लेटिया में थलसेना हारी। इन युद्धों से बहुत से यूनानियों में साझी स्मृति बनी: "हम एक विशाल साम्राज्य के सामने मिलकर खड़े हुए।" बाद के कई यूनानी लेखक इसी स्मृति पर लौटते रहे।
इतिहासकार बताते हैं कि सभी यूनानी इस पक्ष में नहीं थे और कुछ ने तो फ़ारस की ओर से भी लड़ाई की। साझी "यूनानी" पहचान स्मृति में मज़बूत थी, पर असल जीवन उलझा हुआ था।
"बर्बर" क्या है?
यूनानी शब्द बारबारोस शुरू में उन लोगों के लिए ध्वनि-शब्द था जिनकी बोली यूनानी नहीं थी ("बार-बार")। उसका पहला अर्थ "ग़ैर-यूनानी भाषी" था और वह हमेशा अपमानजनक नहीं था। फ़ारसी युद्धों के बाद वह फ़ारसियों के लिए और फिर दूसरे लोगों के लिए ज़्यादा इस्तेमाल होने लगा। उसके साथ अक्सर ये धारणाएँ जुड़ती थीं: राजा के अधीन (स्वतंत्र नहीं), नरम और विलासी, भावना से चलने वाला, क्रूर। यूनानी खुद को स्वतंत्र नागरिक मानते थे जो विवेक और क़ानून से चलते हैं।
इसीलिए विषय का नाम है "बर्बर का आविष्कार": यह अंतर बनाया और दोहराया गया, कहीं पड़ा हुआ नहीं मिला।
हेरोडोटस और एस्किलस में फ़ारसी
हेरोडोटस (लगभग 484 से 425 ई.पू.) ने हिस्ट्रीज़ यूनानियों और "बर्बरों" के बड़े कामों और उनके युद्ध के कारणों को दर्ज करने के लिए लिखी। वह कई जातियों की रीतियाँ जिज्ञासा से बताता है। फ़ारसी राजाओं को वह शक्तिशाली, कभी बुद्धिमान और कभी घमंडी और क्रूर दिखाता है। वह यूनानियों को आपस में बहस करते भी दिखाता है। इसलिए उसका बर्बर का चित्र मिला-जुला है।
एस्किलस का पर्शियन्स (472 ई.पू.) सबसे पुराना यूनानी नाटक है जो हमारे पास है। यह किसी पुरानी पौराणिक कथा पर नहीं, हाल की घटना पर है। कथा फ़ारसी दरबार में चलती है। रानी, एक प्रेत और बूढ़ों का समूह राजा ज़र्क्सीज़ की हार का शोक मनाते हैं। नाटक कहता है कि ज़र्क्सीज़ का घमंड (हब्रिस) और सेना की विशालता विनाश लाई। फ़ारसी विलासिता और ज़ोर के विलाप के साथ दिखते हैं, पर सहानुभूति के साथ भी। देखने वाले एथेंसवासी ख़ुद उस युद्ध में लड़े थे और अपने दुश्मनों को दुखी होते देख रहे थे।
यूरिपिडीज़ की मेडिया में बर्बर
मेडिया (431 ई.पू.) में मेडिया यूनानी दुनिया के किनारे कोलखिस से आती है। उसने जेसन को सुनहरा ऊन जीतने में मदद की, उसके लिए अपना घर छोड़ा, और अब जेसन उसे छोड़कर एक यूनानी राजकुमारी से विवाह कर रहा है। वह अकेली है, एक विदेशी, जिसकी रक्षा करने वाला कोई नगर नहीं। वह चतुर और बहुत क्रुद्ध है। वह भयानक बदला लेती है, अपने बच्चों को भी मार देती है।
यूनानी पात्र उसे बर्बर कहते हैं, फिर भी नाटक में जेसन ही है जिसने अपनी शपथ तोड़ी। दर्शक डर और सहानुभूति दोनों महसूस करते हैं। इस तरह यूरिपिडीज़ बाहरी व्यक्ति की धारणा से यूनानी विचारों, यानी क़ानून, न्याय और विदेशी स्त्रियों के साथ बर्ताव पर प्रश्न उठाता है।
दृश्य स्रोत
मृद्भांडों के चित्र और मूर्तियाँ भी फ़ारसियों और दूसरे बाहरी लोगों को दिखाती हैं। फ़ारसी धारीदार पतलून, नरम नुकीली टोपी और आस्तीन वाले कोट में बनाए जाते हैं, ताकि देखने वाला तुरंत पहचान ले कि कौन "दूसरा" है। यूनानी और विदेशी अक्सर लड़ते दिखाए जाते हैं। पार्थेनन जैसे मंदिरों पर यूनानियों की अमेज़न या सेंटॉर से लड़ाई भी यूनानी बनाम बर्बर का प्रतीक हो सकती है।
चित्र को प्रमाण मानते समय पूछिए: किसने बनाया, किसने ख़रीदा या देखा, और वे क्या कहना चाहते थे?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य तिथियाँ: मैराथन 490 ई.पू., थर्मोपाइली और सलामिस 480 ई.पू., प्लेटिया 479 ई.पू., पर्शियन्स (नाटक) 472 ई.पू., मेडिया 431 ई.पू.
- बारबारोस: पहले "ग़ैर-यूनानी भाषी" (बार-बार), बाद में "दूसरा", अक्सर "स्वतंत्र नहीं / विवेकहीन"
- स्रोत जाँच: कौन बोले, किससे, क्यों?
- यूनानी नगर-राज्य = पोलिस (बहुवचन: पोलेइस)
हल किए गए उदाहरण
1. एस्किलस का पर्शियन्स यूनानी त्रासदी के लिए असामान्य क्यों था?
ज़्यादातर त्रासदियाँ पुरानी कथाओं पर थीं। पर्शियन्स बहुत हाल के असली युद्ध पर था और उसमें दुश्मन का पक्ष और उनका दुख दिखाया गया।
2. हेरोडोटस का फ़ारसियों का चित्र "यूनानी अच्छे, बर्बर बुरे" वाली सरल सोच से कैसे अलग है?
वह फ़ारसी रीतियाँ रुचि से बताता है, बुद्धिमान और घमंडी दोनों तरह के फ़ारसी नेता दिखाता है, और यूनानियों को झगड़ते दिखाता है। इसलिए चित्र मिला-जुला है।
3. पतलून और नरम टोपी वाले आदमी से लड़ते यूनानी वाला बर्तन हमें क्या बताता है?
यह बताता है कि कुछ यूनानी कलाकार पहनावे से फ़ारसी को "दूसरा" और विरोधी दिखाते थे। यह कलाकार और ख़रीदार की सोच बताता है, ठीक-ठीक क्या हुआ यह नहीं।
4. मेडिया को दो अर्थों में "बाहरी" क्यों कहा जा सकता है?
वह कोलखिस की है (विदेशी) और वह कोरिंथ में अकेली स्त्री है जिसकी रक्षा के लिए कोई नगर या परिवार नहीं।
आम गलतियाँ
- "यूनानी" को एक संयुक्त देश मान लेना। कई नगर-राज्य थे, अक्सर प्रतिद्वंद्वी।
- मान लेना कि हेरोडोटस या एस्किलस बताते हैं कि फ़ारसी असल में क्या सोचते थे। ये यूनानी आवाज़ें हैं।
- कहना कि बारबारोस का अर्थ हमेशा "जंगली" था। पहले उसका अर्थ केवल "ग़ैर-यूनानी भाषी" था।
- मेडिया को केवल खलनायिका कहना। नाटक उसके लिए सहानुभूति भी जगाता है।