नाट्य-पाठ क्या है?
नाट्य-पाठ (dramatic text) वह पाठ है जो दर्शकों के सामने अभिनेताओं द्वारा प्रस्तुत करने के लिए लिखा जाता है। कहानी की तरह इसमें लगभग कोई कथावाचक नहीं होता। दर्शक सब कुछ लोगों के बोलने और करने से जानते हैं।
पटकथा मंचन से पहले अधूरी है। पाठक को आवाज़ें, चाल और जगह कल्पना करनी पड़ती है। निर्देशक और डिज़ाइनर बाकी जोड़ते हैं: मंच-सज्जा, प्रकाश, ध्वनि।
संवाद और मंच-निर्देश
संवाद वह है जो पात्र ज़ोर से बोलते हैं। हर पंक्ति के आगे बोलने वाले का नाम होता है। स्वगत-कथन / एकालाप (monologue) एक पात्र का लंबा भाषण है। स्वगत (aside) वह पंक्ति है जो दर्शकों से कही जाती है और दूसरे पात्र नहीं सुनते।
मंच-निर्देश लेखक के नोट हैं। वे बोले नहीं जाते। वे बताते हैं कि कौन कहाँ आता है, पंक्ति कैसे कही जाए, मंच कैसा दिखे और क्या हो। आमतौर पर वे कोष्ठक या तिरछे अक्षरों में होते हैं। "(वह दरवाज़े की ओर जाती है)" जैसा निर्देश अभिनेता को चलने को कहता है।
अंतर्निहित अर्थ (subtext) भी देखो: जो पात्र का मतलब है पर वह कहता नहीं। जो "मैं ठीक हूँ" छोटी, ठंडी आवाज़ में कहे, वह शायद आहत है।
रचना: अंक, दृश्य और कथा का आकार
नाटक अंकों (बड़े भाग) और दृश्यों (छोटी इकाइयाँ, आमतौर पर एक जगह और समय) में बँटा होता है। कथा का एक आकार होता है:
- आरंभ: कौन, कहाँ, सामान्य क्या है।
- संकट बढ़ता है: समस्या शुरू होती है, तनाव चढ़ता है।
- चरम: मोड़ का क्षण, सबसे ऊँचा तनाव।
- ढलान: चरम के परिणाम।
- अंत: बात कहाँ छूटती है।
नाट्य-रचना (dramaturgy) इस आकार को बनाने की कला है: क्या दिखाना, किस क्रम में, और दर्शकों को इंतज़ार और उत्सुकता कैसे देनी। मंच-परियोजना में ड्रामाटर्ग तय करता है कि कौन-से दृश्य रहें, क्या काटें और कथा कैसे बहे।
विधा और रूप
विधा (genre) नाटक का प्रकार है। त्रासदी में मुख्य पात्र गिरता है, अक्सर किसी दोष या कठिन चुनाव के कारण, और अंत दुखद होता है। सुखांत / हास्य-नाटक में समस्याएँ सुलझती हैं, अक्सर हँसी के साथ, और अंत ख़ुशी का होता है। मिश्रित विधाएँ, इतिहास-नाटक और संगीत-नाटक भी होते हैं।
रूप (form) यह है कि पाठ कैसे संगठित है: अंकों और दृश्यों में, पद्य या गद्य में, वृंद-गान या सूत्रधार के साथ, या एक लंबे एकालाप के रूप में। रूप और विधा मिलकर शैली बनाते हैं।
भाषा और पात्र
लेखक भाषा से पात्र बनाता है। वाक्य की लंबाई, लय, शब्द-चयन और जो अनकहा रह गया, उसे देखो। छोटी, तीखी पंक्तियाँ क्रोध या जल्दबाज़ी बताती हैं। लंबी, सहज पंक्तियाँ शांति या आत्मविश्वास। टूटी पंक्तियाँ और ठहराव संदेह।
लेखक साहित्यिक साधन (अलंकार) भी इस्तेमाल करते हैं: रूपक ("जीवन एक मंच है"), पुनरावृत्ति (किसी विचार पर ज़ोर देने के लिए), विडंबना (कुछ कहकर उल्टा मतलब रखना) और बिंब (वे शब्द जो चित्र बनाएँ)। पात्र की शैली इन्हीं चुनावों का जोड़ है: औपचारिक या अनौपचारिक, काव्यात्मक या सीधी, तेज़ या धीमी।
करके देखो
- 6 पंक्तियों का दृश्य लिखो: दो लोग, एक जाना चाहता है, एक रोकना चाहता है।
- बोले शब्दों को संवाद रूप में लिखो (नाम: शब्द)। कोष्ठक में दो मंच-निर्देश जोड़ो।
- वही दृश्य पहले पात्र को पहले क्रोधित, फिर शांत बनाकर फिर लिखो। देखो पंक्तियों की लंबाई कैसे बदली।
- किसी दोस्त के साथ ज़ोर से पढ़ो और अपने कमरे के "मंच" पर देखो क्या चलता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नाट्य-पाठ = प्रस्तुति के लिए लिखी पटकथा
- संवाद = बोले शब्द; मंच-निर्देश = किए जाने वाले काम (बोले नहीं जाते)
- आकार: आरंभ → संकट बढ़ता है → चरम → ढलान → अंत
- नाटक अंकों में, अंक दृश्यों में बँटते हैं
- त्रासदी: दुखद अंत। सुखांत: ख़ुशी का अंत
- पात्र = वह क्या कहता है + कैसे कहता है + क्या अनकहा छोड़ता है
हल किए गए उदाहरण
1. इसमें संवाद कौन-सा है और मंच-निर्देश कौन-सा? "रीना: मैं नहीं जाऊँगी! (वह दरवाज़े की ओर जाती है।)"
"मैं नहीं जाऊँगी!" संवाद है (बोला गया)। "(वह दरवाज़े की ओर जाती है।)" मंच-निर्देश है (क्रिया; बोला नहीं जाता)।
2. एक नाटक में 3 अंक हैं और हर अंक में 4 दृश्य। पूरे नाटक में कितने दृश्य हैं?
3 × 4 = 12 दृश्य।
3. एक पात्र कहता है "मैं... अच्छा... शायद... पता नहीं।" भाषा क्या बताती है?
टूटी पंक्तियाँ और ठहराव संदेह या घबराहट बताते हैं। पात्र को शब्द नहीं मिल रहे।
4. नाटक का अंत नायक के खोकर अकेले रह जाने पर होता है। यह किस विधा का होगा?
त्रासदी का। त्रासदी में कथा की रेखा नीचे, हानि पर ख़त्म होती है।
आम गलतियाँ
- मंच-निर्देश को संवाद की तरह ज़ोर से पढ़ देना। वे निर्देश हैं, बोले जाने वाले शब्द नहीं।
- सोचना कि पटकथा सिर्फ़ कहानी है। उसमें कथावाचन नहीं होता और वह अभिनेताओं व डिज़ाइनरों पर निर्भर है।
- अंक और दृश्य को मिला देना: अंक बड़ा होता है और उसमें दृश्य होते हैं।
- सोचना कि त्रासदी का मतलब "कोई भी दुखी कहानी" है। इसका मतलब है मुख्य पात्र गिरता है और अंत दुखद है।